मैं 23 साल का हूं। यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है, जब मैंने पहली बार सेक्स किया था। मैं दिल्ली का रहने वाला हूं और प्राइवेट जॉब करता हूं। मैं जो कहानी बताने जा रहा हूं, वह मेरे दोस्त की माँ के बारे में है, जिनके साथ मैंने पहली बार सेक्स किया था। उनका नाम उषा है और मेरे दोस्त का नाम रवि है। रवि मुझसे दो साल छोटा है और उषा आंटी की उम्र 48 साल है।
रवि के घर में तीन लोग हैं- रवि, उषा आंटी और रवि के पापा। रवि के पापा आर्मी में हैं, इसलिए उनकी पोस्टिंग दूसरे शहर में है। इस वजह से घर पर रवि और उसकी मम्मी ही रहते हैं। चलिए, अब कहानी पर आते हैं
उषा आंटी दिखने में अच्छी थी और उनका स्वभाव भी अच्छा था। वह सुंदर थी, उनका रंग गोरा था, हाइट 5 फीट 4 इंच थी और फिगर 38-32-36 था। उनके शरीर की बनावट, खास कर उनके ब्रेस्ट, मुझे उनकी तरफ आकर्षित करते थे।
उषा आंटी और मेरी मम्मी की भी काफी बनती थी। वह अक्सर जब भी उन्हें समय मिलता, हमारे घर मम्मी के साथ बैठने आया करती थी। उस समय मेरे मन में उनके लिए ऐसा कोई गलत विचार नहीं था।
यह उस समय की बात है, जब मैं कॉलेज में था और रवि 12वीं कक्षा में पढ़ता था। उषा आंटी को मुझ पर काफी भरोसा था, क्योंकि मैं पढ़ाई में अच्छा था। इसलिए वह रवि से कई बार कहती थी, “तू भी उससे कुछ सीखा कर।” एग्जाम नज़दीक आ रहे थे, इसलिए उषा आंटी ने मुझसे कहा, “रोहित, तू मेरे घर आया कर पढ़ाई करने। तू तैयारी करेगा, तो साथ में रवि भी तैयारी करेगा और उसका भी मन पढ़ाई में लगेगा।”
उषा आंटी ने इस बारे में मेरी मम्मी से भी बात की। इसके बाद मैं और रवि रात को देर तक बैठ कर पढ़ाई करने लगे। उषा आंटी ज़्यादातर मैक्सी में ही रहती थी। कहीं बाहर जाना होता, तो साड़ी पहनती थी।
एक रात मे और रवि पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ते-पढ़ते रवि सो गया। रात के करीब एक बजे मैं कमरे से बाहर पानी पीने के लिए उठा। तभी मैंने देखा कि उषा आंटी करवट लेकर सो रही थी। उनकी पीठ हमारे कमरे के दरवाज़े की तरफ़ थी।
मैंने देखा कि उनकी मैक्सी कमर तक खिसक आई थी। और उन्होंने मैक्सी के नीचे पेटीकोट नहीं पहना था इसलिए उनकी गोरी जाँघें और काले रंग की पैंटी दिख रही थी। ये देख कर मैं उनकी तरफ़ आकर्षित हो गया। दोस्तों, उस समय मैं काफी उत्तेजित हो गया था।
तभी रवि आ गया और उसने पूछा, “क्यों जाग रहे हो?”
तो मैंने बताया, “पानी लेने गया था।”
फिर रवि अपना मोबाइल चलाने लगा। रवि मोबाइल चला रहा था और मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था। वह दृश्य मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। मैं अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
मैंने सोने का नाटक किया और रवि के सोने का इंतज़ार करने लगा। कमरे में सन्नाटा था। घड़ी की सुईयां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। समय का पता ही नहीं चला और देखते-देखते सुबह के पाँच बज गए। मैं बिस्तर से उठा और कमरे के बाहर जाने लगा। तब तक उषा आंटी भी उठ गई थी। उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और कहा, “उठ गए, बेटा?”
मैंने कहा, “हाँ, आंटी।”
लेकिन यह पहली बार था जब मैं उषा आंटी को एक अलग नज़र से देख रहा था। उस सुबह उनके प्रति मेरा आकर्षण बढ़ गया था। मन में बार-बार वही विचार आ रहे थे और मैं अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश कर रहा था।
उषा आंटी ने मुझसे कहा, “रोहित, पहले ब्रश कर ले। फिर मैं नहाने चली जाऊंगी। उसके बाद चाय बनाती हूं। तब तक रवि भी उठ जाएगा।”
मैंने जवाब दिया, “जी, आंटी।”
उनकी बात सुन कर मैं ब्रश करने चला गया। सुबह का माहौल बिल्कुल सामान्य था। मैं ब्रश करके आया और मोबाइल चलाने लगा। मेरा ध्यान बार-बार आंटी की तरफ़ जा रहा था। तभी उषा आंटी ने कहा, “मैं नहा कर आती हू।”
फिर आंटी ने अपने कपड़े लेने के लिए मेरे पास वाली अलमारी खोली और एक लाल रंग की साड़ी बेड पर रख दी। बाकी के कपड़े लेकर वह नहाने चली गई।
आंटी के नहाने के लिए जाते ही कमरे में एक अजीब-सी खामोशी उतर आई। उनके प्रति उठे आकर्षण को मैं खुद से भी छिपाना चाहता था, मगर ध्यान बार-बार उसी ओर लौट जाता। मैंने मोबाइल की स्क्रीन जला ली, जैसे उसमें अचानक कोई बेहद ज़रूरी काम मिल गया हो, और नज़रें उसी पर टिकाए रखी।
कुछ देर बाद उषा आंटी लौट आई। उनके कदमों की आहट सुन कर मैंने अनायास मोबाइल नीचे कर दिया, फिर तुरंत ही उसे दोबारा देखने लगा-मानो अपने ही व्यवहार को सामान्य साबित करना चाहता हूं। उसी समय मेरी नज़र रवि पर पड़ी; वह भी उठ चुका था। कमरे की चुप्पी धीरे-धीरे सुबह की परिचित हलचल में घुलने लगी।
रवि ने जम्हाई लेते हुए मेरी ओर देखा और पूछा, “रोहित, तू कब उठा?
मैंने पल भर देर से जवाब दिया, “बस… थोड़ी देर पहले।”रवि फिर नहाने चला गया और मैं आंटी को देख रहा था।
आंटी की बड़ी-बड़ी चूचियां उनके ब्लाउज में समाई नहीं रही थी और उनकी ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी आंटी ने बेड पर पड़ी साड़ी उठाई।
जब आंटी साड़ी उठाने के लिए झुकी तो तब मुझे उनकी चूचियां अंदर तक दिख रही थी। ब्रा पहनने की वजह से चूचिया एक दम टाइट दिख रही थी और आंटी का पेटीकोट उनकी गांड में फसा था जो मेरे लोड़े के पागल कर रहा था।
वो साड़ी पहन रही थी और मैं उनको देख रहा था। क्या लग रहा था उनका पीछे वाला भाग। वो कूल्हे क्या बताऊं, में तो बेकाबू हो रहा था। फिर वो बोली, “मैं चाय बनाके लाती हूं।” और वो किचन में जा रही थी। तब उनकी गांड का मटक रही थी। मैं तो बस देखता ही जा रहा था।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनको करीब से देखने का सोचा। मैं उठा और किचन की तरफ़ गया। मन तो कर रहा था पीछे से दबा दूँ आंटी को, पर ऐसे में आंटी मेरी तरफ़ घूमी और बोली क्या हुआ। मैंने कहा पानी लेने आया हूं। वो बोली, “मुझे आवाज़ लगा दी होती तो मैं दे देती बेटे।” मैंने कहा, “कोई बात नहीं।”
फिर मैंने पानी की बोतल ली और पानी पिया और वापस बेड पर आ गया। फिर रवि तैयार होकर आ गया और हमने चाय पी। उसके बाद मैं अपने घर आ गया और आज मेरा कॉलेज जाने का मूड नहीं था क्योंकि मेरे मन में उषा आंटी को चूत में लंड घुसाने के विचार आ रहे थे! फिर जब मैं दोपहर में सोने की कोशिश कर रहा था, तब उषा आंटी आई मेरे घर। मैं तुरंत उनकी आवाज़ सुन के खड़ा हो गया और मेरा लंड भी सलामी देने लगा।
फिर उषा आंटी और मोम बात कर रहे तो करीब 2 घंटे तक बाते की। फिर आंटी घर चली गई। फिर रात को खाना खा कर मैं पढ़ाई के लिए गया और मैं और रवि पढ़ाई कर रहे थे। तभी आंटी रूम में आई और कहा, “रूम बंद कर दो। मैं टीवी देख रही हूं, तो आवाज़ आएगी आपको।”
हमने कहा, “ठीक है।”
आंटी के कमरे से बाहर जाते ही रवि ने दरवाज़ा बंद कर दिया और वापस पढ़ाई करने बैठ गया। लेकिन मेरे लिए किताब पर ध्यान लगाना मुश्किल हो रहा था। आंटी के आने से कमरे का माहौल कुछ देर के लिए बदल गया था। उनकी आवाज़ अभी भी मेरे कानों में गूँज रही थी और मैं अपने विचारों को काबू में रखने की कोशिश कर रहा था।
रवि ने मेरी तरफ़ देखा और पूछा, “क्या हुआ? आज तू कुछ खोया-खोया लग रहा है।”
मैंने तुरंत किताब की तरफ़ देखते हुए कहा, “कुछ नहीं, बस थोड़ा थक गया हूं।”
रवि ने मेरी बात मान ली और फिर सवाल हल करने लगा। मैं भी पढ़ाई में ध्यान लगाने की कोशिश करने लगा, लेकिन मन में चल रही उथल-पुथल के कारण बार-बार मेरा ध्यान भटक रहा था।
फिर धीरे-धीरे टाइम जा रहा था और रवि भी सोने की कगार पर था। आखिरकार वो सो गया और मुझे बोला, “मै सो रहा हूं अब, तू भी सो जाना।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
कुछ देर तक मैं वही बैठा रहा। कमरे में सन्नाटा था और रवि की साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। फिर मुझे लगा कि रवि अब गहरी नीद में था। तो मैं उठा और दरवाज़े के पास गया। बाहर से टीवी की आवाज़ आ रही थी। मैंने फ़ोन में टाइम देखा। करीब दो बजे थे।
मैंने सोचा, आंटी अभी तक जाग रही है? ऐसा क्या देख रही हैं टीवी में? मन में कई सवाल उठ रहे थे। मैंने बाहर जाने का सोचा और धीरे से दरवाज़ा खोला। जैसे ही मैंने बाहर देखा, मैं कुछ पल के लिए वही रुक गया। आंटी सोफे पर ही बैठे-बैठे आँखें बंद करके सो रही थी। आज उन्होंने रेड कलर की मैक्सी पहनी थी। टीवी की रोशनी उनके चेहरे पर पड़ रही थी और कमरे में एक अजीब-सी खामोशी थी।
मैं कुछ देर वहीं खड़ा रहा। मेरे मन में कई तरह के विचार आ रहे थे। एक तरफ़ मैं उनके प्रति अपने आकर्षण को लेकर बेचैन था, तो दूसरी तरफ़ मुझे एहसास था कि मैं जिस रास्ते पर सोच रहा था, वह गलत हो सकता था।
मैंने धीमी आवाज़ में पुकारा, “आंटी…”
लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मैंने दोबारा आवाज़ लगाई। फिर भी वह नहीं उठी। अब मुझे समझ आया कि शायद वह सचमुच गहरी नींद में थी।
उस पल मेरे मन में एक अजीब-सी खींचतान चल रही थी। मैं जानता था कि वह मेरी दोस्त की माँ थी और मुझ पर भरोसा करती थी। मैं उनके भरोसे को किसी भी तरह चोट नहीं पहुँचाना चाहता था।
मैं दरवाज़े के पास खड़ा सोचता रहा कि अब मुझे क्या करना चाहिए। बाहर रात का सन्नाटा था, पीछे कमरे में रवि सो रहा था और सामने आंटी सोफे पर थी। उस समय मुझे अपने हर कदम के बारे में सोच-समझ कर फैसला लेना था। लेकिन मेरे अंदर का हैवान बाहर आ गया था और कल रात वाला द्रश्य याद आ गया मुझे। फिर मैंने उनको छूने का विचार किया और मौका भी था।
सोफे पर वो सो गई थी, तो मैंने आवाज़ लगाई, पर वो नही उठीं। मैंने २ या ३ बार आवाज़ लगाई, पर उठीं नहीं। फिर मैंने सोचा कि टच करके उठाता हूं और मैंने हाथ पकड़ा उनका।
स्पर्श करते ही जैसे मैं अलग ही मूड में आ गया, क्योंकि आप समझ सकते हैं। फिर जैसे मेरा हाथ बूब्स को टच हुआ और उनको हिलाया। और वो जाग गई और बोली, “कब आँख लग गई, पता ही नहीं चला। अच्छा है, तुमने जगाया, रोहित।”
और उनको छूने के बाद मुझे लगा कि उन्होंने आज ब्रा नहीं पहनी थी। और उनके रसीले बूब्स को आज मैंने छुआ। मेरे हाथ और उनकी निप्पल के बीच सिर्फ मैक्सी थी। वो ना होती तो अलग ही मज़ा आता। मैं कमरे में गया और वो भी सो गई और कब सुबह हुई पता ही नहीं चला। आज जब में उठा तो 8 बज गए थे और में उठा तब आंटी ने कहा आज रविवार है तो मैंने तुझे जगाया नहीं क्योंकि आज तेरी कॉलेज की छुट्टी हे
फिर उन्होंने कहा चाय पीनी हे या घर जाके। मैंने कहा घर जाके फ्रेश होके पियूंगा। घर आया और आंटी को कैसे चोदूं सोच-सोच कर समय जा रहा था।
मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, मैं रवि के घर जा रहा हूं। थोड़ी देर में आ जाऊँगा।”
मम्मी ने पूछा, “अच्छा, खाना खाने तक आ जाएगा ना?”
मैंने कहा, “हाँ मम्मी, टाइम पर आ जाऊँगा।”
फिर में उषा आंटी के घर गया और आंटी कपड़े धो रही थी और में तो जाके सीधे चूचियां देखने लगा। मेरा लंड जैसे सलामी दे रहा था। मन में तो चल रहा था कि कब मौका मिले और दोनों बूब्स के बीच लोड़े को रगड़ूं। तब आटी ने कहा, “तू कब आया बेटा?”
मैंने कहा, “अभी जब आपका ध्यान नहीं था गेट पे।” उन्होंने कहा, “जा घर में बैठ।” मैंने कहा, “रवि कहा है?” उन्होंने कहा, “ट्यूशन गया है। शाम को आयेगा।” मैंने कहा, “तो मैं अब जाता हूं। रवि आए तब आऊंगा पढ़ाई करने।”
मैं वहाँ से निकल रहा था और उषा आंटी ने आवाज़ लगाई। आंटी ने मुझसे कहा, “रोहित बेटा, आज मेरी बहन आने वाली है। सोच रही हूं कि आज खाने में कुछ अच्छा बना लूँ।”
मैंने पूछा, “अच्छा, आंटी! आज क्या बनाने का सोचा है?”
आंटी बोली, “मेरी बहन को पनीर की सब्ज़ी बहुत पसंद है। तू बाज़ार से थोड़ा पनीर ला देगा? ये ले, पैसे।”
मैंने पैसे लेते हुए कहा, “हाँ, आंटी। आप चिंता मत करो, मैं अभी लेकर आता हूं।”
आंटी ने कहा, “ठीक है बेटा। ज़रा अच्छा वाला पनीर लेना।”
मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया, “ठीक है, आंटी। आप तैयारी शुरू करो, मैं थोड़ी देर में आता हूं।”
इसके बाद मैं बाज़ार गया, पनीर खरीदा और वापस आंटी के घर पहुँच गया।
मैंने पनीर उन्हें देते हुए कहा, “लीजिए, आंटी। पनीर ले आया।”
आंटी ने पनीर लेते हुए कहा, “अच्छा किया बेटा। अब आराम से खाना बना लूँगी। शुक्रिया।”
मैंने कहा, “इसमें शुक्रिया कैसा, आंटी! कोई और चीज़ चाहिए हो तो बता देना।”
आंटी बोली, “अभी तो सब है। तू घर जा, बेटा।”
मैंने कहा, “ठीक है, आंटी। फिर मिलता हूं।”
आगे क्या हुआ, वो में आगे के पार्ट 2 में बताऊंगा। दोस्तों आपको मेरी कहानी कैसी लगी आप मुझे बताए।