देसी औरत की खेत के मकान में चुदाई-1 (Desi aurat ki khet ke makaan mein chudai-1)

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दोस्तों मेरा नाम राजेश है और जो मैं चुदाई की कहानी बताने वाला हूं, इससे किसी को कोई तकलीफ़ ना हो और ना ही किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। ये जो कहानी है, बिल्कुल सच्ची है। इसलिए यहां पर मैं गांव शहर का नाम नहीं लूंगा।

हमारा परिवार जमींदार है, तो मेरे पास बहुत सारी जमीन और पैसा है। मैं अकेला हूं, और 25 साल का हूं। मैंने मेरी पढ़ाई पूरी की हुई है। मुझे नौकरी करनी थी, लेकिन मेरे पिता जी ने कहा कि नौकरी करने की कोई जरूरत नहीं है, तुम बस हमारे खेतों का हिसाब-किताब देखो। तो मैंने भी सोचा कि ठीक है।

हमारे पास बहुत जमीन है जिसमें हम गन्ना, गेहूं, सरसों और तरह-तरह की फ़सल की खेती करते हैं। इन सब काम कों मजदूरों से करवाते हैं। तों अब आते हैं असली कहानी पे-

तो हमारा एक 20-22 एकड़ का खेत जो मेरे घर से 35 किलोमीटर दूर है। जिसमें 20 एकड़ में गन्ने की फ़सल है और वहां पर हमने एक 3 कमरे का पक्का मकान बनवा रखा है। वो खेत पहाड़ से बिल्कुल सटा हुआ है, तो वहां जंगली बैल गन्ने का नुक़सान करते थे।

इसलिए हमें रखवाली के लिए कोई चाहिए था। तो मैंने आस-पास के गांव में बात की लेकिन कोई भी रखवाली के लिए तैयार नहीं था। क्योंकि वह खेत गांव से 2-3 किलोमीटर दूर था। तभी 2 दिनों बाद सुबह सुबह मुझे फोन आया कि, “मैं जावेद हूं, और आपके खेत कि रखवाली करने को तैयार हूं। मुझे आपसे मिलना है।” तो मैंने कहा कि, “ठीक है, तुम वहीं खेत पर आ जाओ।”

फिर मैं उस इंसान से मिलने चला गया। तो मैं जब खेत पहुंचा तों देखा कि एक बुरके में औरत खेत में बने मकान के पास बैठी हुई थी। जैसे ही उसने मेरी गाड़ी को देखा, वो खड़ी हो गई। मैं भी गाड़ी से उतर कर उसके पास गया और उससे पूछा कि, “तुम कौन हो? और यहां क्या कर रही हो? तो उसने कहा कि, “मैं जावेद की घरवाली हूं।”

मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन मुझसे मिलने तो जावेद आने वाला था।” तो उसने कहा कि, “मुझे प्यास लगी है। अगर आप एक गिलास पानी पिला दें तो।” मैं समझ गया और मैंने मेरी जेब से मकान की चाबी निकाली और मकान को खोल दिया।‌ फिर उसे मकान के अंदर बुलाया और चारपाई पर बैठने को कहा। वहीं पर मटके में से पानी दिया।

दोस्तो मैंने जो मकान खेत में बनवाया है, उसमें खाना पकाने के लिए गैस और कुछ बर्तन है। ये मकान खेतों में हैं तो बस यहां पर लाईट नहीं है। तभी उसने पानी पीने के लिए बुरका हटाया, तो मैं देखता ही रह गया। बिल्कुल गोरी विदेशी लड़की की तरह लग रही थी। उसकी उम्र लगभग 35-36 साल लग रही थी।

फिर उसने पानी पिया और सांस लेते हुए कहा कि, “मैं शबनम हूं, जावेद की घरवाली।” तो मैंने कहा कि, “जावेद ने मुझे फोन किया था और कहा था कि वो मुझे मिलने आने वाला है।” तो शबनम ने कहा कि, “हां वो ही आने वाला था, लेकिन वो नशेड़ी है। पता नहीं कहां पड़ा होगा। इसलिए मैंने सोचा कि वो आएगा तो ठीक, नहीं तो मैं आपसे मिल लेती हूं। और वो फ़ोन मैंने ही उसे करने को कहा था। तब से मैं यहां बैठी हूं। तो मुझे प्यास लगी थी।”

मैंने शबनम से कहा कि, “देखो ये जो खेत है पहाड़ी के करीब है। यहां कोई नहीं रहता तो जंगली बैल गन्ने की फसल की नुकसान करते हैं। उनका झुंड यहीं पहाड़ी पर रहता है, तो उन्हें भगाने के लिए आदमी चाहिए। और अभी तुमने कहा कि जावेद शराबी है।”

तो शबनम ने कहा कि, “भैय्या में उसको अच्छी तरह समझा दूंगी। हम भी किसान ही थे। लेकिन जावेद के ‌नशे कि वज़ह से हमारा खेत बिक गया और घर भी। हम आपका काम करने के लिए तैयार है। बस हमें रहने के लिए जगह और खाने के लिए चाहिए।”

तो मैंने थोड़ी देर सोचा और कहा कि, “ठीक है,‌ लेकिन आप मुझे भैय्या अकेले में नहीं राज कहिए, और किसी के सामने मालिक। क्योंकि अब आप हमारे खेतों में काम करने वाले हो।” तो वो थोड़ा सा खुश हुई तो मैंने कहा कि, “ये मकान में तुम रह सकते हो। यहां पर लाईट नहीं, तो उसका इंतजाम मे कल कर दूंगा।”

तभी शबनम ने कहा कि, “राज मेरी तीन बेटियां है। एक का निकाह छह महीने पहले हों गया है, और दो कुंवारी है। तो हम सभी यही रहेंगे।” तो मैंने कहा कि ठीक है। मैंने कहा कि, “मुझे तुम ही 30-32 साल की लगती हो, और तुम्हारी बेटी कि शादी?”

तो उसने कहा कि, “मेरी उम्र 38 साल है, और मेरी 15 साल के उम्र में ही शादी हो गई थी। बड़ी बेटी 22 साल की है, जिसकी शादी हुई है और उसका नाम बानो है। दूसरी रुकसाना 20 साल की और तीसरी थोड़ी सी सांवली है तो उसका नाम कालों है 18 साल की।”

तो मैंने कहा कि, “ठीक है, कल तुम आ जाना।” तो शबनम ने कहा कि, “हमारा गांव यहां से दूर है। तो हम कल बस से आ जाएंगे।” तो मैंने कहा कि, “तुम्हारे पास फोन है?” तो उसने कहा कि, “हैं, जावेद का है।” तो मैंने कहा, “तुम्हें चलाना आता है?” तो शबनम ने कहा कि, “वो बटन वाला फोन है, और मुझे भी चलाना आता है।”

तो मैंने कहा कि, “मेरा नंबर तो है तुम्हारे पास। तो तुम कल सुबह 5 बजे तुम्हारे गांव के बाहर की सड़क पर आना। मैं मेरी गाड़ी में तुम सब को यहां लेकर आ जाऊंगा। और फिर यहां आकर तुम सफाई कर लेना। मैं तुम्हारे लिए लाईट का इंतजाम कर दूंगा।” तो वो खुश हो गई।

फिर मैंने शबनम से कहा कि, “मुझे काला रंग पसंद नहीं तो बुरका मत पहनना।” तो शबनम ने कहा कि, “जब हम कहीं जाते है, तभी पहनते हैं।” तो मैंने कहा कि ठीक है।

तो मैंने शबनम को कहा, “फिर कल मैं तुम्हारे परिवार को लेने के लिए सुबह 5 बजे आऊंगा।” तो शबनम ने कहा कि, “हमारा कुछ सामान भी रहैगा।” तो मैंने कहा कि, “ठीक है।”

फिर शबनम अपने गांव चली गई। मैं भी मेरे घर आ गया। मैंने पिता जी को कहा कि, “हमें खेत कि रखवाली करने के लिए एक परिवार मिला है, और वो अपने खेत में ही रहेंगे। वो खेत में काम भी करेंगे।” तो पिताजी ने कहा कि, “ठीक है।” तो मैंने कहा कि, “वहां पर लाईट नहीं है। तो हमें लाईट का इंतजाम करना होगा।” तो उन्होंने कहा कि, “ठीक है, कल कर देना।”

फिर मैंने पिता जी से कहा कि, “कल सुबह 4 बजे उन्हें लेने जाना है। तो मैं उन्हें कल खेत में छोड़ कर उनके लिए लाईट का इंतजाम कर दूंगा।” तो पिता जी ने कहा कि, “ठीक है।”

इसके आगे क्या हुआ, आपको नेक्स्ट पार्ट में पता चलेगा।

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