पिछला भाग पढ़े:- सिगरेट पीने से हुई चुदाई-1
हेलो दोस्तों, मैं अंजली गुप्ता अपनी बाप-बेटी सेक्स स्टोरी का अगला हिस्सा लेके हाजिर हूं। उम्मीद है आप सब ने पिछला हिस्सा पढ़ लिया होगा। जिन्होनें अभी तक पिछला हिस्सा नहीं पढ़ा है, वो उसको जरूर पढ़ ले।
पिछले हिस्से में आपने पढ़ा था कि मेरे घर वाले फंक्शन पर गए थे, और मैं घर पर रह कर ऑफिस का काम ख़त्म कर रही थी। नींद आने की वजह से काम करने में दिक्कत आ रही थी, तो मैंने सिगरेट पीनी शुरू कर दी।
तभी अचानक से पापा पीछे से आ गए, और उन्होंने मुझे सिगरेट पीते हुए देख लिया। फिर उन्हें मैंने बाकी सिगरेट देने को कहा, लेकिन मैंने झूठ बोला कि मेरे पास नहीं थी।
तलाश लेते हुए उनके सामने मेरी पैंटी आ गई, जो चूत वाली जगह से गीली हुई पड़ी थी। अब आगे बढ़ते हैं-
मैं घबरा रही थी कि कहीं पापा मेरी गीली पैंटी ना देख लें। उधर पापा का ध्यान मेरी पैंटी की तरफ ही था। पैंटी देखते हुए वो थोड़ा सा मुस्कुराए। मुझे लगा उन्हें देखने के लिए। फिर उन्हें मेरी तरफ देखा, और बोले-
पापा: और सिगरेट भी है तेरे पास?
मैं: नहीं पापा, यहीं थी।
पापा: तू फिर से झूठ बोल रही है?
मैं: सच बोल रही हूं पापा।
पापा: मैं कैसे मानूं। अभी पहले भी तू झूठ बोल कर उसको सच बता रही थी।
मैं: लेकिन इस बार सच्ची में सच बोल रही हूं।
पापा: मैं चेक करूंगा।
मैं सोचने लगी कि अब मैं पापा के सामने पैंटी में थी, और अब वह किस चीज़ को चेक करने की बात कर रहे थे? तभी पापा ने अपना हाथ आगे बढ़ाया, और पैंटी के ऊपर से मेरी गांड पे रख दिये।
अब पापा मेरे चूत्तड़ों पर हाथ फेर कर चेक करने लगे। पापा के मुँह पर शैतानी भाव थे। मुझे लग रहा था कि अब पापा जान-बूझ कर मुझे टच करने के लिए चेकिंग करने का नाटक कर रहे थे। लेकिन मैं उनको रोकती क्या बोल के, जब पहले ही मैं पकड़ी जा चुकी थी।
फिर पापा पीछे से हाथ सामने ले आएं, और चूत के आस-पास वाली जगह पर फेर कर चेक करने लगे। इसमें मैं गरम होती जा रही थी। मेरी सांसे तेज़ हो रही थी, और चूत और पानी छोड़ रही थी।
तभी पापा ने पैंटी को सामने से खींचा, और अपना हाथ अंदर डाल दिया। पापा का हाथ सीधे मेरी चूत पर पड़ा, जिसका मैं कांप गई और बोली-
मैं: पापा आप क्या कर रहे हो? यहां कौन सी जगह है छुपाने की?
ये सुन कर पापा ने मेरी चूत में उंगली डाल दी। चूत गीली थी, तो उंगली आराम से अंदर चली गई, और मेरे मुँह से आह निकल गई। फिर पापा बोले-
पापा: ये देख, ये है तो सही जगह छुपाने के लिए। इसमें उंगली जा सकती है, तो सिगरेट भी छुपाई जा सकती है।
ये बोल कर पापा उंगली अंदर-बाहर करने लगे। मेरे मुँह से आह निकली, और मैं पीछे होने लगी। तभी पापा खड़े हो गए, और अपने दूसरे बाजू को मेरे पीछे रख दिया, जिसके मैं पीछे नहीं हट पाई। फ़िर वो बोले-
पापा: बेटी चेक तो कर लेने दे अच्छे से।
फिर पापा उंगली अंदर-बाहर करते रहें। मैं मदहोश होने लगी, और मेरी आंखें बंद हो गई। मैं समझ गई थी, कि पापा अब मुझे छोड़ने वाले नहीं थे। पापा मेरी चूत के दाने को रगड़ने लग गए। मैं जल्दी ही अपने चरम पर पहुँच गई, और मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। पापा फिर भी चूत रगड़ते रहे, जब तक सारा पानी नहीं निकल गया।
फिर पापा ने अपना हाथ मेरी पैंटी से निकाला, और उसको देखने लगे। उनका हाथ मेरी चूत के पानी से भीगा हुआ था। पापा ने मेरी तरफ देखा, और अपने हाथ को चाट लिया। मेरी आँखें बड़ी हो गयी ये देख कर।
फिर पापा ने मुझे अपने पास किया, और मेरे होठों से अपने होंठ लगा दिये। मैं भी शायद पहले से इसके लिए तैयार थी, तो मैं भी उनका साथ देने लगी। पापा ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और मेरे होंठ चूमते हुए मेरी गांड दबाने लग गये। इससे मैं फिर से उत्तेजित होने लग गई।
कुछ देर होंठ चूसने के बाद वो मेरी गर्दन चाटने लगे, और कान को चबाने लगे। इससे मेरी चूत में आग लगने लगी। मैं भी फिर रिश्ता भूल कर उनकी पैंट के ऊपर से उनका लंड दबाने लगे।
फिर पापा ने मेरी टी-शर्ट और ब्रा निकाल कर मुझे ऊपर से नंगी कर दिया। मेरे रसीले चूचे देख कर उन्होंने अपने दोनों हाथों में मेरे चूचे भरे, और एक-एक करके उनको चूसने लगे। मैं पापा के सर पर प्यार से हाथ फेरने लगी।
फिर पापा ने मुझे अपनी गोदी में उठाया, और बिस्तर पर रख दिया। अपने कपड़े उतारे, और पूरे नंगे हो गए। उनका लंड मोटा, काला, और लम्बा था। उनका लंड देख कर मुझे ख़ुशी भी हुई, और डर भी लगा। ख़ुशी इस बात की है, कि आज काफ़ी समय बाद चुदाई का मज़ा मिलेगा। और डर इस बात का है कि कहीं उनका बड़ा लंड मेरी चूत फाड़ ना दे।
नंगे होके पापा मेरे ऊपर आये, और मेरी नाभि चाटने लगे। फ़िर उन्होंने मेरी पैंटी उतारी, और मेरी चूत को चूसने लगे। वो इतने ज़ोर से चूत चूस रहे थे, जैसी चूत निकाल कर खा जायेंगे। मैं तो आह्ह आह्ह करके पागल हो रही थी।
कुछ देर चूत चूसने के बाद वो मेरी टांगों के बीच आये, और अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया। फिर एक ज़ोर का धक्का मारा, और लंड चूत को आधा अंदर घुस गया। मैं दर्द से चीखने लगी, तो पापा ने अपने मुँह से मेरा मुँह बंद कर दिया। फिर थोड़ा और धक्का देकर अपना पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया।
मैं दर्द से तड़प रही थी, लेकिन पापा पूरा लंड अंदर डाल कर मेरे होंठ चूस रहे थे, और स्तन दबा रहे थे। कुछ देर बाद जब मेरी तड़प कम हुई, तो पापा धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगे।
मुझे बहुत मजा आने लगा, तो मैं भी गांड ऊपर-नीचे करके धक्कों को सपोर्ट करने लगी। फ़िर धीरे-धीरे पापा स्पीड बढ़ाने लगे। मैं आह आह करने लगी, और उनको और ज़ोर से चोदने के लिए बोलने लगी।
फिर पापा ने मेरी टांगें पूरी तरह से ऊपर की तरफ मोड़ दी, और ज़ोर के धक्के लगाने लगे। उनका लंड मेरी चूत की दीवार पर टकरा रहा था। इसे मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।
फिर पापा ने मुझे घोड़ी बनाया, और मेरी गांड पर थप्पड़ मारने लगे। मैं दर्द से कहने लगी। फिर उन्हें लंड चूत में डाला, और पीछे से फुल स्पीड पर चोदने लगे। मैं आह आह कर रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे। कमरे में थप-थप की आवाज आ रही थी। मैं अब तक 2 बार झड़ चुकी थी।
फिर पापा ने अपना लंड चूत से निकाला, और मेरी गांड पर सारा माल निकाल दिया। मैं उसका वक्त थक कर बिस्तर पर गिर गई। पापा जल्दी से खड़े हुए, उन्हें कपड़े पहने, और बोले-
पापा: सिगरेट पीना अच्छी बात नहीं है। आज के बाद मत पीना।
ये कह कर वो चले गए, और मैं वैसे ही सो गई।