पिछला भाग पढ़े:- छत पर पड़ोसी का लंड अपनी रसीली चूत में डलवाया-1
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
अचानक पड़ोसी ने मुझसे पूछा: भाभी आपने किस कलर की पेंटी पहनी है?
मैं बोली: क्यों उतारनी है क्या आपको?
और ये बोलते हुए मैं शर्मा गई।
वो बोला: भाभी मौका तो दों, उतार ही दूंगा।
मैंने कमीज को थोड़ा सा उपर पेट की तरफ उठाया, और सलवार को नाड़े के पास से पकड़ कर पेट से थोड़ा दूर किया। फिर अन्दर की तरफ झांकते हुए देख कर बोली: नीले कलर की।
ये बोलते ही मैंने अपना हाथ उसकी पेंट के ऊपर से उसके खड़े से लंड पर मारा, तो वो चिल्ला उठा।
वो बोला: हाययय भाभी, मार डाला!
मेरा हाथ उसको अपने लंड पर अच्छा लगा तो मैंने जो कपड़े सुखाए थे वह उनके साईड में खड़ा हो गया। ताकि वो किसी को नज़र नहीं आये।
उसने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और अपनी पेंट के ऊपर से ही अपने लंड पर रख कर मसलवाले लगा।
मैं बोली: आहहहह, क्या कर रहे हो यार!
कोई देख लेगा। आस-पास बहुत से लोग होते हैं।
लेकिन वह नहीं माना। मेरी आवाज़ कामुक सिसकारियों से भरी हुई थी, जैसे आह में मेरी वासना की गहराई छिपी हो।
तभी वो बोला: भाभी थोड़ी देर बैठ जाओ ना, बातें करते है।
मैं भी फ्री थी। हमारी छत पर डोली के पास में ही पुराना पलंग पड़ा हुआ है। मैं उस पर गांड टिका कर अपने पैरों को नीचे लटका कर बैठ गई। वो भी मेरे पास में बैठ गया। बातों ही बातों में वो मेरी तारीफ करने लगा। मैंने ठान लिया कि आज़ अगर मौका मिला तो मैं इसका लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
मैं बोली: आप मुझे घूर-घूर कर क्या देख रहे हो?
वो बोला: भाभी आप सलवार और कमीज में बहुत सुंदर और सेक्सी लग रही हो।
मैंने उसको स्माइल दी और बोली: सुंदर तो मैं हूँ ही सही। तभी तो आप मुझसे यूं इस तरह बात कर रहे हो।
ये सुनते ही उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा। हाथ पकड़ते समय उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर से बातें करने लगा।
वो बोला: जब भी मैं आपको देखता हूं, तो यहीं सोचता हूं कि काश ये भाभी मुझे मिल जाये, तो मेरे मजे आ जायें।
मैं बोली: रहने दो! झूठी तारीफ करने की जरुरत नहीं है।
उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ दबाते हुए कहा: सच में आप बहुत खुबसूरत हो।
मैं हंसने लगी और बोली: और क्या-क्या पसंद है?
वो बोला: मुझे दूध पीना पसन्द है।
मैं नखरे करते हुए बोली: मतलब?
वो बोला: मुझे लड़कियों के दूध पीने में मज़ा आता है।
वो बेझिझक मुझसे बोला: भाभी मैं आपके दूध को पीना चाहता हूं। मैं आपके दूध बहुत पहले से पीने को उतावला हो रहा हूँ। बस तुम्हारी एक हां की जरूरत है।
मैं बोली: मगर बदले में मुझे क्या मिलेगा?
वो बोला: आप हां तो करो, मेरे पास बड़े वाला केला है। आप वो ले लेना।
ये बोल कर वो अपने हाथ की उंगलियां मेरे हाथ पर फेरने लगा। मैं भी धीरे-धीरे कामुक होने लगी और उससे चिपक कर बैठ गयी और अपने हाथ वाली बगल को थोड़ा और खोल कर बैठ गयी। उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। और सहलाने लगा।
तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
अब मेरी सांसें तेज होने लगी। वो धीरे-धीरे अपना हाथ रगड़ रहा था, जिससे मेरी प्यासी जवानी में एक बिजली सी दौड़ जाती। अब मैं मदहोश हो रही थी, मगर फिर भी अपने ऊपर काबू रखने का नाटक कर रही थी जिसे वो समझ चुका था। फिर उसने हाथ ऊपर उठाना शुरू किया और उसका हाथ मेरे बाजू से होता हुआ मेरे बालों में घुस गया। मैं चुप-चाप बैठी मदहोश हो रही थी और मेरी साँसें गरम हो रही थी। मेरी चूत उसकी बातों और हल्के-हल्के छूने से पूरी गीली हो चुकी थी। मैन आज चुदने के मूड में थी। अब तक मैं अपनी चूत के दाने को अपनी उंगली से मसलती थी, लेकिन आज में उसके लंड का स्वाद लेना चाहती थी।
फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लंड तक पहुँच गया। मैं उसकी पैंट के ऊपर से ही लंड टटोलने लगी। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने गर्म कड़क लंड पर रखवा दिया। मैंने उसकी पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ लिया।
तभी अचानक से मेरे मुंह से निकला: तेरा हथियार तो बड़ा जबरदस्त लग रहा है मुझे।
अब बिना उसका लंड देखे एक मिनट का भी चैन ना था। उसका एक हाथ मेरी पीठ पर मेरे बालों में चल रहा था और वो मेरी तारीफ किए जा रहा था। फिर दूसरे हाथ से उसने मेरे गाल को पकड़ा और चेहरा अपनी तरफ कर लिया। मैंने भी अपना हाथ अपने गाल पर उसके हाथ पर रख दिया।
फिर उसने अपना एक हाथ मेरी कमीज़ के ऊपर से ही मेरे बूब्स के पास में रखा और सहलाने लगा। मैं भी मस्त होने लगी। वो धीरे-धीरे अपना हाथ मेरे बूब्स तक पहुँचाने लगा। मैं काफ़ी कामुक हो चुकी थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने बड़े-बड़े बूब्स पर रख दिया। अब वो अपना हाथ मेरे बड़े-बड़े बूब्स पर धीरे-धीरे फेरने लगा।
वो मेरे बड़े और टाईट बूब्स को दबाने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरी चूची दबाते हुए उसके लंड में और ज्यादा जोश आने लगा और वो मेरे हाथ में झटके देने लगा। इधर मैं भी उसके लंड को पकड़ कर सहलाने लगी थी। मैं गर्म हो रही थी।
चूचियां मसलने से मैं गरम हो गयी थी।
अब वो मेरी चूचियों को और जोर से मसलने लगे। मैं चुप-चाप उससे अपनी चूचियों को मसलवा रही थी। मेरी चूंचियों को मसलते-मसलते उसका लंड खड़ा होकर मेरे हाथ में झटके मार रहा था। फिर उसने मेरा चेहरा अपनी ओर किया और मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। मैं कुछ नहीं बोली तो वो मेरे होंठों को चूसने लगा। मैं भी साथ देने लगी। हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
मुझे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था। अब तो मैं भी वासना की आग में डूबे जा रही थी। मैं उत्तेजित हुए जा रही थी। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी मादक सिसकारी निकल रही थी। मुझे बहुत मजा आने लगा था। मैं वासना से छटपटा रही थी और तड़प रही थी। मेरी कमीज के गहरे गले से मेरी चूचियां उसको ललचा रही थी।
मेरे पूरे बदन में चींटियां सी रेंगने लगी।
मैं मज़ा लेने लगी। मैं बराबर उसका साथ देने लगी और अपनी जीभ निकालते हुए उसके मुँह में डालने लगी। मैंने अपने हाथों से उसके बालों को सहलाना शुरू कर दिया। वो कभी मेरे नीचे के होंठ तो कभी ऊपर के होठ को चूमने के साथ-साथ मेरी जीभ को भी चूसता जा रहा था।
वो मेरे बोबों को दबाने लगा, मेरे बोबों को मसलते हुए होंठों का रस पीने लगा। मेरा पड़ोसी मेरे कामुक बदन को मथ रहा था। मेरी चूत में चिंगारियां उड़ने लगी थी। अब मेरी चुदाई की कामवासना तेज लहरों के साथ बहने को तैयार थी।
वो मेरी चूचियां दबाता रहा और मैं उसके लंड को पकड़ कर सहलाती रही। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। आज मेरी चिकनी रसीली चूत में लंड उतरने वाला था। मैं उसको जल्दी से जल्दी नंगा करना चाहती थी। इसलिये मैंने उसकी शर्ट उतार दी। उसने बनियान भी नहीं पहनी हुई थी। उसकी चौड़ी छाती और कसरती बदन देख कर मेरी चूत में पानी का रिसाव होने लगा। अब मेरी झांटें सुलगने लगी और मेरी चूत गर्म होती जा रही थी। मेरा सलवार कमीज के अन्दर जिस्म उसके सामने नंगा होने का आमंत्रण दे रहा था।
इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में। [email protected] पर फीडबैक ज़रूर दें।
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