सुबह का ठंडा हवा मारिया के चेहरे पर लग रही थी, जब वह जिम से अपनी स्कूटी लेकर निकली। 37 साल की उम्र में भी, उसका बदन एक 25 साल की लड़की को भी मात दे सकता था। जिम के बाद उसने एक बहुत ही टाइट ब्लैक क्रॉप टॉप पहना था, जो उसके कर्वी फिगर और भरी हुई छाती को और भी उभार रहा था। ऊपर से उसने एक लाइट ब्लू जैकेट डाली हुई थी और चेहरे को पसीने और धूल से बचाने के लिए दुपट्टे से ढका हुआ था।
जैसे ही वह अपनी स्कूटी स्टार्ट करने वाली थी, एक लंबा-चौड़ा, गोरा-चिट्टा लड़का उसके पास आया। उसने जीन्स और कॉलेज की टी-शर्ट पहनी थी और उसके चेहरे पर एक मासूम सी मुस्कान थी। “आंटी जी, नमस्ते,” उसने शर्माते हुए कहा।
“मुझे अपने कॉलेज के पास जाना है, लेकिन कोई ऑटो नहीं मिल रहा। क्या आप मुझे 10 किलोमीटर तक लिफ्ट दे सकती हैं? मेरा हॉस्टल बहुत नज़दीक है।”
मारिया ने उसकी आँखों को देखा। उसे लगा कि लड़का बेचारा और अच्छा लगता है। “ठीक है, बैठ जाओ,” उसने कहा।
“धन्यवाद, आंटी जी! मैं रोहन हूँ,” लड़के ने कहा और शर्माते हुए स्कूटी के पीछे बैठ गया।
स्कूटी चलने लगी और भारी ट्रैफिक में उन्हें धीरे-धीरे आगे बढ़ना पड़ा। शुरुआत में रोहन थोड़ा डरा हुआ था और दूरी बना कर बैठा था, लेकिन जल्द ही उसने बात-चीत शुरू कर दी।
“आप रोज़ जिम जाती हैं आंटी जी? आपकी बॉडी तो बहुत अच्छी है।” उसने शरारत से कहा।
मारिया हंस दी। “शुक्रिया। हाँ, रोज़ जाना पड़ता है।”
“आप दिखने में तो बहुत यंग लगती हैं। मैंने सोचा भी नहीं था कि आप इतनी बड़ी बच्चों की माँ होंगी।”
बात-चीत ऐसे ही चलती रही। जैसे-जैसे ट्रैफिक बढ़ता गया, रोहन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता जा रहा था। अब उसकी जाँघें मारिया की गांड से टकरा रही थी। मारिया को अजीब सा लग रहा था, लेकिन वह उसे अनदेखा कर रही थी।
फिर एक बार जब स्कूटी को अचानक ब्रेक लगाना पड़ा, तो रोहन का पूरा शरीर मारिया की पीठ से चिपक गया। उसने अपने हाथ आगे करके मारिया के कंधों को पकड़ लिया।
“ओह… सॉरी आंटी जी,” उसने कहा, लेकिन उसके हाथ मारिया के कंधों से हटे नहीं।
“कोई बात नहीं,” मारिया ने कहा और उसने स्कूटी फिर से चला दी।
रोहन ने अपने हाथ धीरे से मारिया के कंधों से उसकी बाहों पर खिसका दिए। मारिया को अहसास हुआ और उसने उसे घूर कर देखा, लेकिन रोहन मुस्कुराया और बोला, “गिर जाने के डर से पकड़ लिया है।”
रोहन ने अपना चेहरा मारिया के गले के पास लाकर फुसफुसाया, “आपकी खुशबू बहुत अच्छी है आंटी जी। जिम के बाद भी इतनी महकती हो।”
उसकी साँसों की गर्माहट से मारिया के शरीर में एक अजीब सी कंपन होने लगी। उसने अपना सिर थोड़ा सा हटाया, “तुम्हारा नाम क्या है?”
“मैं रोहन हूँ, आंटी जी। दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ता हूँ। आपको क्या कहते हैं?”
“मैं मारिया हूँ,” उसने संकोच से कहा।
“वाह, क्या खूबसूरत नाम है। मारिया… नाम ही काफी है,” रोहन ने उसके कान में कहा और उसकी गर्दन पर एक हल्की सी किस्स कर ली।
मारिया सिहर उठी। उसने उसे धक्का देने की कोशिश की, लेकिन रोहन ने उसकी कमर को और कस कर पकड़ लिया। अब उसका पूरा शरीर मारिया से चिपक गया था। रोहन का लंड उसकी गांड की दरार में घुसने की कोशिश कर रहा था।
“रोहन, प्लीज़… यह सही नहीं है,” मारिया ने कांपती आवाज़ में कहा।
“क्या नहीं है सही, मारिया जी?” रोहन ने शरारत से कहा। “एक तो आप जैसी माल रोड पर घूम रही है, ऊपर से हमें लिफ्ट देती हैं, और हम बदतमीज़ी करेंगे नहीं? यह तो हमारा फ़र्ज़ है आपकी सेवा करना।”
इतना कह कर उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और सीधे मारिया की चूचियों पर रख दिया। उसने जैकेट के ऊपर से ही उन्हें ज़ोर से दबा दिया। मारिया की साँसें रुक गई। वह चिल्लाना चाहती थी, लेकिन भारी ट्रैफिक में उसकी आवाज़ कौन सुनेगा?
“छोड़ो… मुझे छोड़ो,” वह फुसफुसाई।
“छोड़ूंगा जब तुम मेरा साथ दोगी,” रोहन ने कहा और उसने मारिया की जैकेट की ज़िप खींच दी।
अब मारिया का टाइट क्रॉप टॉप साफ दिख रहा था। रोहन ने जैकेट को पूरी तरह से खोल दिया और उसके कंधों से गिरा दिया। अब मारिया का ऊपर का हिस्सा सिर्फ उसके छोटे टॉप पर निर्भर था। रोहन ने अपना हाथ अब सीधे उसकी चूचियों पर रखा और उन्हें कपड़े के ऊपर से ही मसलने लगा।
“उफ़्फ़… क्या मस्त माल है तुम,” वह बुदबुदाया। “तुम्हारे पति तो बहुत भाग्यशाली होंगे।”
उसने अपना एक हाथ मारिया की पीठ पर ले जाकर उसकी ब्रा की हुक खोलने की कोशिश की, लेकिन टॉप टाइट था, इसलिए उसे दिक्कत हो रही थी। गुस्से में उसने मारिया की टॉप के ऊपर से ही उसकी चूची को ज़ोर से दबा दिया। मारिया दर्द से कराह उठी।
“आआआहह… धीरे… दर्द होता है।”
“दर्द तो होगा जानम, मज़ा भी इसी में है,”
रोहन ने कहा और उसने अपना चेहरा उसके गले में घुसा दिया। वह उसकी गर्दन को चूमने और चाटने लगा। उसका दूसरा हाथ अब मारिया की जांघ पर था और वह उसे धीरे-धीरे ऊपर की ओर सहला रहा था।
मारिया का शरीर रोहन के स्पर्श से कांप रहा था, लेकिन उसके मन में डर और एक अजीब सी उत्तेजना का मिश्रण था। रोहन की बातें उसे अपनी ओर आकर्षित कर रही थीं।
“चलो ना मारिया जी,” रोहन ने उसके कान में फुसफुसाया, “अब यहाँ खड़े-खड़े तो नहीं रह सकते। मेरा कमरा बहुत पास ही है। चलो वहाँ आराम से बैठ कर बात करते हैं।”
उसकी मासूम सी बातों में एक दबाव था। मारिया समझ गई कि इससे इनकार करना बेकार है। उसने चुप-चाप अपनी स्कूटी स्टार्ट की और रोहन ने उसे जो एड्रेस बताया, उस तरफ चल दी। रास्ते भर रोहन पीछे से उसका बदन सहलाता रहा। उसने मारिया की जैकेट को उसके कंधों से उतार दिया था, और अब वह खुली हवा में उड़ रही थी। रोहन ने उसे उठा कर सीट के नीचे रख दिया था।
इसके आगे क्या हुआ, आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। यहां तक की कहानी कैसी लगी, जरूर फीडबैक दें।
अगला भाग पढ़े:- कॉलेज के अंजान लड़के के साथ मारिया का सेक्स-2