दोस्तों मेरा नाम सुनील है, और मैं भोपाल का रहने वाला हूं। मेरी उमर 30 साल है, और मैं एक बिजनेसमैन हूं। आज मैं आपको जो कहानी बता रहा हूं, वो 6 साल पुरानी है। तो चलिए शुरू करते हैं।
जब मेरी ग्रेजुएशन पूरी हुई। उसके कुछ दिन बाद पापा ने मुझसे उनका बिजनेस ज्वाइन करने को कहा। मेरा भी कोई खास प्लान नहीं था आगे का, तो मैंने हां बोल दी।
फिर अगले दिन मैं पापा के साथ उनके ऑफिस चला गया। हमारा लॉजिस्टिक्स का बिजनेस है। पापा के ऑफिस में 10-12 लोग काम करते हैं। ऑफिस जाने के बाद पापा ने मुझे सब से इंट्रोड्यूस कराया। मुझे काफ़ी सम्मान दिया सब ने, जैसा कि बॉस के बेटे को देना चाहिए।
फिर पापा ने मुझे मेरा केबिन दिखाया और बताया कि क्या काम करना था। उसके बाद पापा अपने केबिन में चले गए। मैंने थोड़ी देर कंप्यूटर पर कुछ फ़ाइलें खोली, और कुछ सीखने की कोशिश की। फिर थोड़ी देर बाद मैं बोर होने लगा। मैंने सोचा एक छोटा ब्रेक ले लेता हूं, तो मैंने कंप्यूटर स्लीप मोड में किया, और खड़ा हो गया।
मेरे कमरे के दरवाजे के शीशे से सारा ऑफिस दिख रहा था। मैं वहीं खड़ा हो कर इधर-उधर सब को देखने लगा। पापा के ऑफिस में सिर्फ जेंट्स स्टाफ ही था। तभी मुझे एक ऐसा नज़ारा दिखा, जिसको देख कर मेरी रूह खुश हो गई।
मैंने देखा एक तरफ में एक औरत नीचे बैठ कर पोछा लगा रही थी। उसने साड़ी पहन ली थी, और उसके ब्लाउज में से उसकी पूरी क्लीवेज नज़र आ रही थी। वो ऑफिस की कामवाली थी।
कामवाली का नाम रेशमा था (जो मुझे बाद में पता चला)। उसकी उमर 35-36 साल थी, और रंग ठीक-ठाक गोरा था। फिगर उसका कमाल का था। 36″ के स्तन 32″ की कमर और 40″ की गांड। उसका जिस्म ऐसा था, देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो जायेगा।
उसकी सेक्सी क्लीवेज देख कर तो मेरे मुँह में पानी आ गया। मेरा लंड पैंट में खड़ा होने लगा। मैंने सोचा अब तो इस ऑफिस में मजा आएगा। तभी वो पोछा लगाते हुए घूम गई, जिसकी उसकी गांड मेरे सामने आ गई। उसकी गांड तो और भी कमाल की थी।
मुझसे रहा नहीं गया और मैं अपने केबिन में टॉयलेट में चला गया। वहां जा कर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और मुठ मारने लगा। जल्दी ही मेरा माल निकल गया। मुझे बहुत मजा आया। मैंने रेशमा के बारे में सोच कर ही मुठ मारी थी।
फिर मैं हाथ धो कर बाहर आया। जैसा ही मैंने दरवाजा खोला, तो रेशमा मेरे सामने थी। उसको एक-दम से अपने सामने देख कर मैं हैरान हो गया। वो बोली-
रेशमा: नमस्ते छोटे साहब।
मैं: नमस्ते जी।
रेशमा: मेरा नाम रेशमा है। मैं यहां सफाई करने आई हूं।
मैं: ठीक है, कर लो।
तभी उसको पता नहीं क्या हुआ, कि वो मुस्कुराने लगी, और फिर पोछा लगाने लगी। मैं समझ नहीं पाया कि वो मुस्कुरा क्यों रही थी, तो मैंने पूछा-
मैं: क्या हुआ, आप हंस क्यों हो रहे हो?
रेशमा: आपका कुछ लगा रह गया (मेरी पैंट की तरफ इशारा करते हुए)।
फिर वो काम करने लगी। मैंने अपनी पैंट की तरफ देखा, तो मेरे घुटने वाली जगह पर स्पर्म लगा हुआ था। मैं थोड़ा शर्मिंदा हो गया और जल्दी से जाके स्पर्म साफ किया।
फिर जब मैं वापस केबिन में आया, तो रेशमा मुस्कुरा रही थी। मैं समझ गया कि वो मेरी वजह से ही मुस्कुरा रही थी। फिर उसने काम ख़त्म किया और बाहर चली गई।
रात को मैं रेशमा के बारे में ही सोचता रहा। मेरा लंड उसके बारे में सोच-सोच कर खड़ा हो रहा था। फिर जब मैंने उसके नाम की मुठ मारी, तब जाके मुझे नींद आई।
अगले दिन फिर से वो मेरे केबिन में सफाई करने आई। आज उसने लेगिंग्स और कुर्ती पहनी थी। उसकी गांड लेगिंग्स में और भी बड़ी लग रही थी। जब हमारी नज़रें मिली तो वो फिर से हसने लगी। मैं भी मुस्कुरा दिया।
मैंने सोचा कि वो इतनी चालू तो थी ही कि मेरा स्पर्म देख कर पहचान गई, और अब बार-बार मुस्कुरा रही थी। फिर मैंने सोचा क्यों ना उसको पूछ के देख लूं, शायद दे ही दे। तो मैंने बिना टाइम गवाये कहा-
मैं: आप हंस क्यों हो रहे हैं?
रेशमा: वैसे ही।
मैं: दोगी?
रेशमा थोड़ी सीरियस हो गई।
वो बोली: जी?
मैं: सुना नहीं मैंने क्या पूछा? दोगी मुझे?
रेशमा: 2000 रुपये लगेंगे।
मैं: मैं 3000 हज़ार दूंगा। लेकिन अभी देनी पड़ेगी।
रेशमा: यहाँ? ऑफिस में?
मैं: हां, बिल्कुल।
रेशमा: कोई आ गया तो?
मैं: कोई नहीं आएगा। और अगर आ भी गया तो मैं हूं ना। तुम चिंता क्यों करती हो?
ये बोल कर मैंने अपना लंड पैंट से बाहर निकाल लिया। फिर मैंने उसको देखा। वो नीचे बैठी घुटनों के बल बैठी और लंड हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी। फिर उसने लंड मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी।
मुझे अब बहुत मजा आने लगा। उसके लंड चूसने की कला कमाल की थी। थोड़ी देर में मैंने उसके सर के पीछे हाथ रखा, और उसका मुँह चोदने लगा। वो भी पूरी मज़े में थी। फिर मैंने उसके मुँह से लंड निकाला और वो खड़ी हो गई। वो बोली-
रेशमा: अब क्या?
मैं उसको बाथरूम में ले गया और वहां दीवार पर उसके हाथ रखवा कर उसको झुका दिया। अब वो डॉगी पोजीशन में खड़ी थी। फिर मैंने उसकी लेगिंग्स और पैंटी दोनों एक साथ नीचे कर दी। अब उसकी नंगी गांड मेरे सामने थी। उसने लेगिंग्स और पैंटी पैरों से निकाल कर साइड कर दी। फिर मैंने उसकी चूत खोली, और अपना लंड उसकी चूत पर सेट कर दिया।
उसके बाद मैंने चूत पर लंड से दबाव बनाया तो लंड धीरे-धीरे अंदर जाने लगा। वो आहें भरने लगी, और मेरा लंड उसकी गरम चूत में पूरा समा गया। मेरी भी सिसकारी निकल गयी। अब मैंने कमर आगे-पीछे करके उसकी चूत चोदनी शुरू की।
बहुत मजा आ रहा था मुझे। मेरी जाँघें उसके चूतड़ों से टकराने की वजह से थप-थप की आवाज आ रही थी। वो भी आह आह कर रही थी। फिर मैंने स्पीड बढ़ा दी चोदने की और लगातार 5 मिनट पूरी स्पीड में धक्के मारे। उसके बाद मैंने लंड बाहर निकाल लिया।
मेरा निकलने वाला था तो मैं लंड हिलाने लगा। रेशमा नीचे बैठ गई और मेरा लंड चूस कर पानी निकाल दिया। स्वर्ग का मजा आया मुझे। उसके बाद वो चली गई। उस दिन के बाद से मैंने उसको काफी बार चोदा, और वो भी ऑफिस में। मुझे बहुत मजा आया। आपको भी कहानी का मजा आया हो तो फीडबैक [email protected] पर दे।