शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-2 (Shimla mein truth dare khel, dono behne chudi relam pel-2)

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पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-1

आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा कि कैसे काव्या को देख राहुल की हवा हवाई निकल जाती है। वो इतनी हाॅट लड़की देख कर पागल सा हो गया। आगे की कहानी सुनिए-

चाय का दौर शुरू होने तक कमरे के भीतर की हवा थोड़ी सहज हो चुकी थी। लेकिन राहुल के दिलो-दिमाग में जो हलचल मचनी शुरू हुई थी, वह थमने का नाम नहीं ले रही थी। वेटर जब गरमा-गरम चाय की केतली और कप प्लेट रख कर गया, तो कमरे में इलायची और अदरक की सोंधी खुशबू फैल गई। सपना ने सभी के लिए चाय बनाई और कप आगे बढ़ाए। काव्या ने जैसे ही चाय का पहला घूंट लिया, उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान तैर गई।

राहुल सोफे पर इस तरह बैठा था कि उसकी नजरें सीधे काव्या पर जाकर टिकती थी। वह चाय का कप अपने होठों से लगाता, एक छोटी सी चुस्की लेता और फिर कप के ऊपर से उसकी आँखें काव्या के चेहरे को निहारने लगती।

काव्या के बालों की एक लट बार-बार उड़ कर उसके गालों पर आ रही थी, जिसे वह बहुत ही नजाकत से अपनी उंगलियों से पीछे हटा रही थी। राहुल उसकी इस हरकतों को इतनी शिद्दत से देख रहा था कि कई बार उसने चाय की चुस्की लेने में भी देर कर दी। जब काव्या का ध्यान राहुल की तरफ जाता, तो वह नजरें चुराने के बजाय बहुत ही सलीके से मुस्कुरा देता, जिससे काव्या के भीतर भी एक अजीब सी हलचल होने लगी थी।

बात-चीत का सिलसिला आगे बढ़ा, तो राहुल ने काव्या को रिझाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दिया। “वैसे काव्या, चंडीगढ़ की हवाओं का असर तुम्हारे चेहरे पर साफ दिखता है,” राहुल ने चाय का कप टेबल पर रखते हुए बहुत ही धीमे और गंभीर लहजे में कहा। “वहाँ की लड़कियां खुद को बहुत मेंटेन रखती हैं, लेकिन तुम्हारी सादगी और तुम्हारा स्टाइल बिल्कुल अलग है।”

काव्या ने चाय का कप पकड़ा हुआ था। राहुल की इस बात पर उसने अपनी पलकें झुका ली और मुस्कुराते हुए बोली, “ऐसा कुछ नहीं है राहुल जी, आप बस ज्यादा तारीफ कर रहे हैं। वैसे भी शिमला की इस ठंड में तो मेरा पूरा स्टाइल इस भारी स्वेटर के पीछे छिप गया है।”

“यही तो बात है काव्या,” राहुल ने तुरंत उसकी बात को लपकते हुए कहा। “जो खूबसूरत होते हैं, उन्हें किसी स्टाइल की जरूरत नहीं होती। इस साधारण से गुलाबी स्वेटर में भी तुम इस पूरे कमरे की रौनक बनी हुई हो।” सपना ने यह सुना तो उसने मेरी तरफ देख कर एक छोटी सी शरारती मुस्कान पास की। वह समझ रही थी कि राहुल किस तरह बहुत ही सलीके से काव्या के इर्द-गिर्द अपनी बातों का जाल बुन रहा था।

काव्या ने आज तक कॉलेज में कई लड़कों से तारीफें सुनी थी, लेकिन राहुल की आवाज का वो भारीपन और उसकी आँखों में दिखने वाली कशिश कुछ अलग थी। राहुल जब बात करते हुए बार-बार अपनी कसरत से बनी कलाई को सहलाता या अपनी जींस पर हाथ फेरता, तो काव्या की नजरें भी अनजाने में उसके मजबूत जिस्म पर चली जाती।

“भैया, आपके दोस्त तो बातें बड़ी अच्छी करते हैं,” काव्या ने मेरी तरफ मुड़ कर शिकायत भरे लहजे में लेकिन मुस्कुराते हुए कहा। “एक आप हैं जो कभी मेरी तारीफ नहीं करते।”

मैंने हंसते हुए कहा, “अरे, भाई कभी बहन की तारीफ मुंह पर नहीं करते काव्या। पर चलो, अच्छा है कि राहुल मेरी इस कमी को पूरा कर रहा है।”

चाय अब खत्म होने को थी, लेकिन बातों का यह सिलसिला और राहुल की वो लगातार निहारती नजरें काव्या के भीतर की झिझक को धीरे-धीरे पिघला रही थी। कमरे का हीटर अब और तेज हो चुका था, और चाय की हर आखिरी चुस्की के साथ इन दोनों के बीच की नजदीकियां एक बेहद खूबसूरत और धीमे सफर की तरफ बढ़ रही थी।

चाय खत्म होने के बाद, बाहर बर्फबारी थोड़ी कम हुई तो हम सबने तैयार होकर शिमला के मॉल रोड और जाखू टेम्पल घूमने का प्लान बनाया। कड़कती ठंड के बीच वादियों की सैर ने सफर का मजा दोगुना कर दिया था। राहुल और काव्या रास्ते भर पहाड़ों के रास्तों और चंडीगढ़-मेरठ के कॉलेज लाइफ की बातें साझा करते हुए एक-दूसरे के काफी अच्छे दोस्त बन गए।

दोपहर का लंच करने के बाद शाम ढलते ही हम सब वापस होटल लौट आए। पहाड़ों पर शाम होते ही ठंड काफी बढ़ गई थी, इसलिए सब ने कमरे के हीटर के पास ही बैठने का फैसला किया। सपना ने सोफे पर बैठते हुए कहा, “चलो, आज की शाम को थोड़ा और मजेदार बनाते हैं। क्यों ना कोई गेम खेला जाए?” काव्या ने तुरंत हामी भरते हुए कहा, “हाँ, ट्रुथ या डेयर खेलते हैं! वैसे भी पहाड़ों की इस शाम में और कोई काम तो है नहीं।” राहुल ने मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा, “शानदार आइडिया है। इससे हम एक-दूसरे को और बेहतर तरीके से जान पाएंगे।”

खेल शुरू हुआ और कांच की खाली बोतल को फर्श पर घुमाया गया। पहली बार में ही बोतल का मुंह काव्या की तरफ और पिछला हिस्सा राहुल की तरफ आकर रुका।

“तो काव्या जी,” राहुल ने एक शरारती मुस्कान के साथ पूछा, “ट्रुथ या डेयर?”

काव्या ने थोड़ा सोचते हुए कहा, “शुरुआत है, इसलिए मैं ‘ट्रुथ’ (सच) चुनूंगी।”

राहुल ने चाय की चुस्की लेते हुए सीधे काव्या की आँखों में देखा और पूछा, “चंडीगढ़ जैसे बड़े शहर में रहने के बाद भी, तुम्हें अपनी जिंदगी में किस तरह के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं? कोई ऐसा गुण जो तुम्हें किसी में भी तुरंत पसंद आ जाए?”

काव्या ने राहुल के कड़क और प्रभावशाली व्यक्तित्व को देखते हुए मुस्कुराकर जवाब दिया, “मुझे वो लोग पसंद हैं जो अपनी बात के पक्के हों, जिनकी पर्सनैलिटी में एक आत्मविश्वास हो और जो दूसरों का सम्मान करना जानते हों।”

इस जवाब के बाद कमरे का माहौल और भी खुशनुमा और दोस्ताना हो गया। बोतल को दोबारा घुमाया गया, और इस बार बारी मेरी और सपना की थी। शिमला की वह ठंडी शाम अपनों के बीच हंसी-मजाक, पुरानी यादों और नए रिश्तों की गर्माहट के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।

बोतल एक बार फिर फर्श पर तेजी से घूमी और धीरे-धीरे रुकते हुए उसका मुंह सीधे सपना की तरफ जाकर ठहर गया। बोतल का पिछला हिस्सा मेरी तरफ था, जिसका मतलब था कि अब सवाल पूछने की बारी मेरी थी।

कमरे में हीटर की लाल रोशनी चमक रही थी और बाहर पहाड़ों पर हल्की-हल्की बर्फ फिर से गिरने लगी थी। राहुल और काव्या बड़े ध्यान से हमारी तरफ देख रहे थे।

मैंने सपना की आँखों में देखते हुए थोड़ा शरारती लहजे में पूछा, “हाँ तो सपना, ट्रुथ या डेयर? सोच-समझ कर चुनना, क्योंकि भाई होने के नाते मैं तुम्हारे सारे राज जानता हूँ।”

सपना ने थोड़ा हंसते हुए और कंबल को अपने कंधों पर थोड़ा और लपेटते हुए कहा, “भाई, अपनों के बीच क्या छुपाना। मैं भी ‘ट्रुथ’ ही चुनूंगी। पूछो, क्या पूछना है?”

मैंने थोड़ा गंभीर होने का नाटक किया और राहुल की तरफ एक नज़र डाल कर वापस सपना से कहा, “अच्छा ये बताओ, तुम अक्सर कहती थी कि तुम्हें पहाड़ों पर घूमना बहुत पसंद है। आज तुम अपनी इस मनपसंद जगह पर खड़ी हो, तो इस सफर में तुम्हें सबसे ज्यादा खास या यादगार क्या लगा? कोई ऐसी बात या अहसास जिसने तुम्हें अंदर से बदल दिया हो?”

सपना ने मेरी बात का गहरा मतलब समझ लिया। वह जानती थी कि यह सवाल सिर्फ पहाड़ों की खूबसूरती के बारे में नहीं था, बल्कि मेरठ से लेकर इस होटल के कमरे तक के उस पूरे सफर और राहुल के साथ के उतार-चढ़ाव के बारे में था।

उसने एक पल के लिए राहुल की तरफ देखा, जिसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, और फिर काव्या की तरफ देखा जो बड़े कौतूहल से उसका जवाब सुन रही थी।

सपना ने अपनी चाय का कप टेबल पर रखा और बहुत ही सलीके से जवाब दिया, “इस सफर की सबसे खास बात यह है भैया कि मुझे यह अहसास हुआ कि कभी-कभी जिंदगी में जो चीजें बहुत अजीब या डरावनी लगती हैं, वक्त के साथ वही चीजें सबसे ज्यादा सुकून देने वाली बन जाती हैं। इस ट्रिप ने मुझे नए लोगों पर भरोसा करना और जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखना सिखाया है।”

सपना का यह जवाब सुन कर राहुल ने धीरे से मेज थपथपाई, “बहुत खूब सपना, बहुत ही गहरा जवाब दिया तुमने।”

काव्या को इस जवाब के पीछे की पूरी कहानी तो नहीं पता थी, लेकिन वह भी सपना के इस बदले हुए और मैच्योर अंदाज को देख कर हैरान थी। खेल का रोमांच अब धीरे-धीरे बढ़ रहा था और बोतल एक बार फिर घूमने के लिए तैयार थी। सपना के गहरे जवाब के बाद कमरे का माहौल थोड़ा गंभीर हो गया था, जिसे हल्का करने के लिए मैंने बोतल को एक बार फिर फर्श पर ज़ोर से घुमा दिया। कांच की बोतल गोल-गोल घूमती हुई धीरे-धीरे धीमी हुई और इस बार उसका मुंह सीधे मेरी तरफ आकर रुक गया।

बोतल का पिछला हिस्सा काव्या के सामने था। यह देखते ही काव्या के चेहरे पर एक शातिर और जीत वाली मुस्कान आ गई। उसने अपनी जींस पर हाथ मारकर कहा, “अरे वाह! आखिरकार बड़े भैया चंगुल में आ ही गए।”

राहुल और सपना भी अब मजे लेने के मूड में आ चुके थे। राहुल ने हंसते हुए कहा, “भाई, अब बच कर रहना, कॉलेज की कसर काव्या यहीं पूरी करेगी।”

काव्या ने सोफे पर थोड़ा आगे झुकते हुए, अपनी ठोड़ी पर हाथ रखा और सीधे मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा, “हाँ तो भैया, वैसे तो आप खुद को बहुत छुपा कर रखते हैं, लेकिन आज आपको सब के सामने चुनना होगा—ट्रुथ या डेयर?”

मैंने माहौल को भांपते हुए मुस्कुरा कर कहा, “जब दोनों बहनों ने ट्रथ चुना है, तो भाई कैसे पीछे हट सकता है। चलो, मैं भी ‘ट्रुथ’ ही चुनता हूँ। पूछो, जो पूछना है।”

काव्या की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। वह चंडीगढ़ में रहने के कारण काफी मॉडर्न और बिंदास हो चुकी थी। उसने चाय की आखिरी चुस्की ली, कप को टेबल पर रखा और बेहद सलीके से लेकिन एक तीखा सवाल दाग दिया: “अच्छा भैया, तो सच-सच बताइए… आप हमेशा घर पर इतने सीधे और जिम्मेदार बन कर रहते हैं, जैसे आपको दुनिया की किसी चकाचौंध से कोई मतलब ही ना हो। लेकिन मुझे अच्छे से पता है कि हर इंसान का एक सीक्रेट साइड होता है, एक ऐसी ख्वाहिश या कोई ऐसा राज जो वह कभी मम्मी-पापा को नहीं बता सकता। तो आज राहुल और सपना के सामने बताइए कि आपकी जिंदगी का वो सबसे बड़ा ‘सीक्रेट’ क्या है, जिसे आप आज भी हम सब से छुपा रहे हैं?”

काव्या का यह सवाल सुनते ही कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। सपना ने घबरा कर मेरी तरफ देखा, क्योंकि उसे लगा कि कहीं काव्या को हमारे और राहुल के बीच की कहानी का कोई सुराग तो नहीं मिल गया। वहीं राहुल के चेहरे पर एक गहरी उत्सुकता थी, वह देखना चाहता था कि मैं इस शातिर सवाल का क्या जवाब देता हूँ।

मैंने एक गहरी सांस ली, हीटर की लाल रोशनी में काव्या के उस खूबसूरत और गदराए चेहरे को देखा और अपनी रहस्यमयी मुस्कान के साथ जवाब देने के लिए तैयार हुआ।

मैंने काव्या की आँखों में सीधे देखते हुए अपनी मुस्कान को थोड़ा और गहरा किया। कमरे में हीटर की सरसराहट के बीच सब लोग सांस रोक कर मेरे जवाब का इंतजार कर रहे थे। मैंने बड़े ही आराम से सोफे के पीछे टेक लगाई और कहा: “देख काव्या, तुमने सीक्रेट की बात की है तो आज मैं सबके सामने सच कह ही देता हूँ। मेरा सबसे बड़ा सीक्रेट यह है कि मैं कभी भी चीजों को सिर्फ उनके ऊपरी तौर पर नहीं देखता। लोग मुझे घर पर सीधा और जिम्मेदार समझते हैं क्योंकि मैं वक्त पर सही फैसले लेना जानता हूँ।

लेकिन मेरा असली सीक्रेट यह है कि मुझे जिंदगी को पूरी तरह खुल कर और अपनी शर्तों पर जीना पसंद है, चाहे दुनिया जो भी सोचे। मुझे पसंद है जब मेरे अपने लोग—जैसे तू, सपना और मेरे दोस्त—बिना किसी बंदिश और झिझक के अपनी जिंदगी का मजा लें। मेरा सीक्रेट यह है कि मैं बंदिशों को तोड़ना जानता हूँ, बस सही वक्त और सही माहौल का इंतजार करता हूँ।”

मेरा यह जवाब सुन कर राहुल ने हवा में ताली बजाई, “क्या बात है भाई! मान गए, जवाब में गहराई भी थी और तुमने अपना पत्ता भी नहीं खोला।” सपना ने राहत की सांस ली और मुस्कुरा दी, क्योंकि मेरा इशारा वह बखूबी समझ रही थी।

काव्या ने अपनी आँखें थोड़ी सिकोड़ी, जैसे वह मेरे इस दार्शनिक और रहस्यमयी जवाब के पीछे छिपे असली मतलब को समझने की कोशिश कर रही हो। उसने हंसते हुए कहा, “हूँ… बड़े चालाक हो भैया, इतनी सफाई से जवाब दिया कि राज भी रह गया और बात भी कह दी। चलो, कोई बात नहीं, अगली बार देखते हैं।”

माहौल का सस्पेंस अब पूरी तरह एक खुशनुमा रोमांच में बदल चुका था। कड़कती ठंड के बीच खेल का यह दौर अब और भी दिलचस्प मोड़ पर पहुँच रहा था। मैंने बोतल को उठाया और उसे एक बार फिर फर्श पर घुमाने के लिए तैयार हुआ, यह देखने के लिए कि इस बार किस्मत किसका पत्ता खोलती है। आगे क्या हुआ जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, धन्यवाद !

अगला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-3

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