शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-3 (Shimla mein truth dare khel, dono behne chudi relam pel-3)

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पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-2

आशा हैं आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा, कि कैसे ट्रुथ और डेयर खेल की वजह से लोगों के सच बाहर आ रहे थे। आगे की कहानी सुनिए-

मैंने बोतल को एक बार फिर फर्श पर जोर से घुमाया। कांच की बोतल हीटर की लाल रोशनी में चमकती हुई तेजी से गोल-गोल घूमने लगी। कमरे में सब की नजरें उसी पर टिकी थी। धीरे-धीरे उसकी रफ्तार धीमी हुई और जब वह रुकी, तो पूरा माहौल एक झटके में बदल गया।

बोतल का मुख्य मुंह सीधे राहुल की तरफ था, और उसका पिछला हिस्सा सपना के ठीक सामने जाकर रुका था।

यानी इस बार सवाल पूछने की बारी सपना की थी, और कटघरे में राहुल खड़ा था।
जैसे ही यह हुआ, सपना के चेहरे पर एक हल्की सी झिझक आई, क्योंकि वह अच्छे से जानती थी कि मेरठ और कूपे के सफर से लेकर गाँव के गन्ने के खेतों तक, राहुल के साथ उसका रिश्ता किस हद तक आगे बढ़ चुका था।

दूसरी तरफ, काव्या इस बात से पूरी तरह अनजान थी, इसलिए वह बड़े उत्साह से ताली बजा कर बोली, “अरे वाह! अब आएगा असली मजा। सपना दी, राहुल जी से कोई ऐसा तगड़ा सवाल पूछो कि ये सीधे-सीधे जवाब ना दे पाएं!”

राहुल ने सोफे पर बैठते हुए अपनी शर्ट की आस्तीन को थोड़ा और ऊपर चढ़ाया। उसके मजबूत और कसरती हाथ साफ दिख रहे थे। उसने सपना की तरफ देखते हुए एक सधी हुई मुस्कान के साथ कहा, “हाँ सपना, पूछो। वैसे भी मैं तुम्हारी अदालत में हार मानने को तैयार हूँ। ट्रुथ या डेयर में से मैं ‘ट्रुथ’ ही चुनूंगा।”

सपना ने अपनी नज़रें राहुल की आँखों से मिलाई। उस एक पल की नजरों के टकराव में बहुत सी पुरानी यादें और वो खेतों की दोपहर का रोमांच तैर गया। सपना ने अपने हाथ में पकड़े कंबल के कोने को थोड़ा मरोड़ते हुए, बहुत ही सलीके और ठहरे हुए लहजे में पूछा, “राहुल जी, आप दिल्ली और मेरठ जैसे बड़े शहरों में रहे हैं, जहाँ जिंदगी बहुत तेज भागती है। लेकिन जब आप हमारे इस शांत और छोटे से गाँव में आए, और अब यहाँ पहाड़ों की वादियों में हैं… तो क्या आपको कभी ऐसा लगा कि शहरों की उस चमक-दमक के मुकाबले, इस सादगी और गाँव के अपनों के बीच कोई ऐसी चीज़ है जो आपको हमेशा के लिए अपनी तरफ खींच सकती है? क्या इस सफर में आपको वो सुकून मिला जिसकी तलाश में आप आए थे?”

सपना का यह सवाल ऊपर से जितना साधारण था, भीतर से उतना ही गहरा था। वह असल में राहुल से यह जानना चाहती थी कि खेतों के उस खेल के बाद, क्या राहुल के दिल में उसके लिए और हमारे इस साथ के लिए कोई परमानेंट जगह बनी है या नहीं। काव्या बड़े ध्यान से राहुल के चेहरे के बदलते हाव-भाव देख रही थी, और मैं मुस्कुराते हुए देखना चाहता था कि राहुल इस बेहद जज्बाती और गहरे सवाल का क्या जवाब देता है।

राहुल ने सपना के इस गहरे सवाल को सुना, तो उसके चेहरे की शरारत एक पल के लिए गायब हो गई और उसकी जगह एक संजीदगी ने ले ली। उसने चाय का खाली कप टेबल पर रखा, अपनी उंगलियों को आपस में फंसाया और सीधे सपना की आँखों में देखते हुए बेहद ठहरे हुए लहजे में जवाब दिया, “सपना, सच कहूँ तो शहरों की दौड़-भाग में हम अक्सर सिर्फ बाहरी चमक-दमक के पीछे भागते हैं। वहाँ रिश्ते और मुलाकातें बहुत सतही होती हैं।

लेकिन जब मैं तुम्हारे गाँव आया, और अब जब यहाँ पहाड़ों की इस कड़कती ठंड में तुम सब के साथ बैठा हूँ, तो मुझे समझ आया कि असली सुकून कहाँ है। गाँव की उस सादगी में, खेतों की उस मिट्टी की खुशबू में और तुम लोगों के इस बेबाक साथ में जो अपनापन और गर्माहट है, वह मुझे दिल्ली या मेरठ के किसी बड़े मॉल या क्लब में कभी नहीं मिल सकती।

इस सफर ने मुझे यह अहसास कराया है कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत और यादगार चीजें बहुत करीब होती हैं, बस उन्हें महसूस करने वाला दिल चाहिए। हाँ, मुझे वह सुकून और वह खास अहसास यहाँ मिला है, जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।”

राहुल का यह जवाब इतना सच्चा और गहरा था कि सपना के चेहरे पर एक सलोनी मुस्कान बिखर गई। उसकी आँखों में राहुल के लिए सम्मान और बढ़ गया।
काव्या जो अब तक सिर्फ खेल के मजे ले रही थी, राहुल की इस गहरी और मैच्योर बात को सुनकर पूरी तरह दंग रह गई।

उसने राहुल की तरफ देखा, उसकी नज़रों में राहुल की दमदार पर्सनैलिटी के साथ-साथ उसकी सोच के लिए भी एक अलग ही खिंचाव पैदा होने लगा था। काव्या ने धीरे से कहा, “वाह राहुल जी, आपकी बातें वाकई दिल को छू लेने वाली हैं। सपना दी, आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा।”

मैंने माहौल को भांपते हुए हंस कर कहा, “चलो भाई, राहुल ने तो दिल जीत लिया। अब खेल को आखिरी पड़ाव पर ले चलते हैं।”

मैंने बोतल उठाई और उसे एक आखिरी बार फर्श पर पूरे जोर से घुमा दिया। बोतल घूमती रही, घूमती रही… और इस बार जब वह रुकी, तो उसका मुंह सीधे काव्या की तरफ था और पिछला हिस्सा राहुल के सामने था।

“ओह गॉड! अब मेरी बारी!” काव्या ने अपनी जींस पर हाथ मार कर थोड़े नर्वस लेकिन एक्साइटेड लहजे में कहा। राहुल की आँखों में एक बार फिर वही पुरानी शरारत और हवस की हल्की सी चमक लौट आई, जो उसने सुबह चाय के वक्त काव्या को निहारते हुए दिखाई थी। राहुल ने सीधे काव्या की आँखों में देखते हुए कहा, “तो काव्या जी… अब आप बताइए, ट्रुथ या डेयर?”

काव्या ने सोफे पर अपनी पोजीशन थोड़ी ठीक की और अपनी सुंदर आँखें मटकाते हुए मुस्कुरा कर कहा, “जब सब लोग ‘ट्रुथ’ चुन रहे हैं, तो मैं भी पीछे क्यों रहूँ? मैं भी सच का ही सामना करूंगी। पूछिए राहुल जी, क्या पूछना चाहते हैं?”

राहुल ने अपनी पीठ सोफे से टिकाई और एक शातिर खिलाड़ी की तरह अपनी बातों का जाल बुनना शुरू किया। वह सीधे मुद्दे पर आने के बजाय बात को घुमा-फिरा कर काव्या के पर्सनल लाइफ के करीब ले जाना चाहता था।

राहुल ने अपनी आवाज को थोड़ा धीमा और गहरा करते हुए पूछा “काव्या, तुम चंडीगढ़ जैसे इतने खूबसूरत और मॉडर्न शहर में रहती हो। वहाँ की लाइफस्टाइल, कॉलेज के फेस्ट, नाइट-लाइफ़ सब बहुत कमाल की होती है। और तुम्हारी जैसी अट्रैक्टिव और बिंदास पर्सनैलिटी वाली लड़की के आस-पास तो वैसे भी लड़कों की कतार लगी रहती होगी। तो मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि क्या चंडीगढ़ के उस पूरे माहौल में… कोई ऐसा खास दोस्त या कोई ऐसा शख्स है जिसके साथ तुम अपनी ये खूबसूरत यादें, अपनी बातें शेयर करती हो? या फिर कॉलेज की इस चकाचौंध के बीच तुम्हारा दिल अभी भी पूरी तरह से खाली और आजाद है?”

राहुल ने सवाल को इतने सलीके और घुमावदार तरीके से पूछा था कि काव्या का चेहरा एक पल के लिए हल्का सा लाल हो गया। वह समझ गई कि राहुल असल में यह जानना चाहता है कि उसका कोई बॉयफ्रेंड है या नहीं।

सपना ने भी एक शरारती नज़र काव्या पर डाली, और मैं बड़े मजे से यह देख रहा था कि काव्या राहुल के इस जाल का क्या जवाब देती है। काव्या ने अपनी उंगली से अपने बालों की लट को कान के पीछे किया, राहुल की आँखों में सीधे झांका और एक बेहद सस्पेंस भरी मुस्कान के साथ अपना जवाब देने के लिए तैयार हुई।

काव्या ने राहुल की आँखों में देखते हुए एक छोटी सी, नटखट मुस्कान दी और अपनी उंगलियों से सोफे के हत्थे पर एक धीमी सी थाप दी। कमरे में हीटर की गरमाहट के बीच सब लोग उसका जवाब सुनने के लिए उत्सुक थे।

उसने थोड़ा ठहर कर, बेहद बेबाकी से जवाब दिया, “राहुल जी, आपने बात को जितना घुमाया है, उसका सीधा जवाब यही है कि कॉलेज में दोस्त तो बहुत से हैं—ग्रुप में घूमना, कैफे जाना और पढ़ाई की बातें करना आम है। लेकिन अगर आप उस ‘खास’ दोस्त या किसी रिलेशनशिप के बारे में पूछ रहे हैं, तो चंडीगढ़ की उस बड़ी चकाचौंध में मुझे अभी तक कोई ऐसा शख्स नहीं मिला जो मेरे दिल को छू सके या जिसके साथ मैं अपनी जिंदगी की गहरी बातें साझा कर सकूं। इसलिए, फिलहाल तो मेरा दिल पूरी तरह से आजाद है और मैं अपनी इस आजादी का पूरा मजा ले रही हूँ।”

काव्या का यह जवाब सुनते ही राहुल के चेहरे पर एक गहरी, छिपी हुई संतुष्टि की चमक आ गई। उसकी आँखों का लालच और गहरा हो गया, क्योंकि उसे साफ समझ आ गया था कि मैदान पूरी तरह साफ है।

सपना ने काव्या को चिढ़ाते हुए कहा, “चलो, कम से कम आज यह राज तो खुला कि चंडीगढ़ के लड़के हमारी इस चुलबुली बहन को अभी तक इंप्रेस नहीं कर पाए।”
“अरे दी, इंप्रेस करना इतना आसान थोड़ी है,” काव्या ने हंसते हुए अपनी जींस को थोड़ा सीधा किया।

घड़ी की सुइयां अब रात के 9 बजा रही थी और बाहर शिमला की बर्फबारी फिर से तेज होने लगी थी। ठंडी हवाएं होटल की कांच की खिड़कियों से टकरा रही थी, जिससे कमरे के अंदर का माहौल और भी सिमटा हुआ और कशिश से भरा लग रहा था।

मैंने उठते हुए कहा, “चलो भाई, खेल बहुत मजेदार रहा। अब डिनर का टाइम हो गया है, मैं नीचे रिसेप्शन पर कॉल करके कमरे में ही खाना मंगवा लेता हूँ। आज कड़कती ठंड में बाहर जाने का कोई मूड नहीं है।”

राहुल ने काव्या की तरफ देखते हुए कहा, “बिल्कुल सही कहा, इस मौसम में अंदर की गरमाहट और ऐसा बेहतरीन साथ ही सबसे बेस्ट है।”

खाना आने तक बातों का सिलसिला थमा नहीं था, लेकिन अब राहुल और काव्या के बीच की झिझक पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। हर बात पर दोनों की नज़रें मिलती और एक अनकहा सा खिंचाव उस बंद कमरे के भीतर धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा था।

डिनर की मेज पर गरमा-गरम खाना खत्म होने के बाद, बाहर शिमला की बर्फीली हवाएं और तेज हो चुकी थी। कमरे के भीतर हीटर अपनी पूरी रफ्तार पर था। खाने के बाद जो आलस छाना चाहिए था, उसकी जगह एक अजीब सी उत्तेजना और उत्सुकता ने ले ली थी। बोतल एक बार फिर फर्श के बीचों-बीच रख दी गई।

“चलो भाई, अब खेल का दूसरा राउंड शुरू करते हैं। लेकिन इस बार नियम थोड़े कड़े होंगे। कोई घिसे-पिटे जवाब नहीं चलेंगे, अब सीधे जिंदगी के गहरे राज बाहर आएंगे,” राहुल ने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन खोलते हुए कहा। उसकी चौड़ी छाती और मजबूत बदन हीटर की रोशनी में चमक रहा था।

काव्या ने भी सोफे पर पालथी मार ली, “हाँ भैया, अब तो सच में वो बातें निकलनी चाहिए जो आज तक किसी को नहीं पता।”

खेल दोबारा शुरू हुआ और इस बार बोतल जैसे-जैसे घूमती, हर मोड़ पर कोई ना कोई पुराना किस्सा या ‘कांड’ बाहर आने लगा।
राहुल ने अपने कॉलेज के दिनों की एक ऐसी लड़ाई का जिक्र किया जिसके बाद उसे हॉस्टल से सस्पेंड होने की नौबत आ गई थी। काव्या ने हंसते हुए बताया कि कैसे उसने चंडीगढ़ में अपनी एक सहेली के बॉयफ्रेंड को सबक सिखाने के लिए एक शातिर जाल बुना था।

कमरे का माहौल अब पूरी तरह अनौपचारिक और बेबाक हो चुका था। हंसी-मजाक के बीच सबकी झिझक की दीवारें ढह रही थी। इसी बीच बोतल को मैंने दोबारा घुमाया, और इस बार वह सीधे मेरे और सपना के बीच आकर रुक गई। बोतल का मुंह सपना की तरफ था और पिछला हिस्सा मेरी तरफ।

राहुल के चेहरे पर एक शातिर मुस्कान तैर गई, क्योंकि वह अच्छे से जानता था कि अब वो मोड़ आने वाला है जिसका उसने और मैंने सुबह जिक्र किया था।

काव्या ने उत्सुकता से कहा, “दी! अब आपकी बारी है। भैया से कोई ऐसा सवाल पूछो जो इन्होंने आज तक घर पर किसी से न कहा हो। हमारे खानदान के सबसे सीधे लड़के का कोई छुपा हुआ कांड बताओ।”

सपना ने मेरी आँखों में देखा। हीटर की गर्माहट और खेल के इस बेबाक माहौल में वह भी अपनी मर्यादा की सीमाएं भूलने लगी थी। उसने एक गहरी सांस ली और सीधे मुझसे पूछा,‌ “भैया, ट्रुथ या डेयर? और याद रखना, झूठ बोला तो मैं खुद वो बात बता दूँगी।”

मैंने मुस्कुरा कर कहा, “ट्रुथ।”

सपना ने राहुल की तरफ एक उड़ती हुई नज़र डाली और फिर काव्या की तरफ देखते हुए मुझसे कहा, “अच्छा भैया, तो फिर आज काव्या और राहुल के सामने वो सच बता ही दो… जब हमारी शादी की बातें चल रही थी और घर पर सब लोग हमारे सीधे-पन की कसमें खाते थे, उस वक्त बंद कमरों में और घर के पीछे उन एकांत जगहों पर हमारे बीच असल में क्या रिश्ता था? वो जो एक रात जब मम्मी-पापा बुआ के घर गए थे, उस रात हमारे बीच जो कुछ हुआ था, क्या वो सिर्फ एक इत्तेफाक था या तुम्हारी सोची-समझी साजिश?”

सपना के मुंह से ये बातें सुन कर काव्या चौंक उठी आखिर कौन सी साजिश, जानने के लिए बनें रहें अपने भाई राजू के साथ धन्यवाद !

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