शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-1 (Shimla mein truth dare khel, dono behne chudi relam pel-1)

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आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा और आपको ये पता चल गया होगा कि हम लोग शिमला जाने का प्लान कैसे बनाते हैं और मम्मी पापा से बहाने बना कर शिमला के लिए निकल जाते हैं। आगे की कहानी पढ़िए।

अगली सुबह मैं सपना और राहुल तीनों अपना-अपना बैग पैक करके घर से निकल गए। इस बार कोई बंदिश नहीं थी, कोई छिपने का डर नहीं था। दिल्ली पहुँच कर हमने शिमला के लिए एक लग्जरी प्राइवेट कैब बुक की।

रात के करीब 9 बजे हमारी गाड़ी पहाड़ों के घुमावदार रास्तों पर दौड़ रही थी। बाहर पहाड़ों की ठंडी हवा चल रही थी और गाड़ी के अंदर का माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा था।

सपना इस बार गाड़ी की पिछली सीट पर बीच में बैठी थी। उसने एक बेहद शॉर्ट और ढीली वन-पीस ड्रेस पहन रखी थी। गाड़ी के अंधेरे में एक तरफ से मेरा हाथ उसकी जांघों को सहला रहा था, तो दूसरी तरफ से राहुल उसकी ड्रेस के अंदर हाथ डाल कर उसके 32 इंच के बिना ब्रा के चूचों को पागलों की तरह भींच रहा था।

“उहहह… भैया… राहुल… गाड़ी का शीशा बंद करो, बाहर बहुत ठंड है और अंदर तुम दोनों मुझे अभी से पिघला रहे हो,” सपना ने दोनों के कंधों पर अपना सिर टिकाते हुए मद्धम आवाज में कहा।

रात के 1 बजे हमारी गाड़ी शिमला के एक आलीशान होटल के सामने रुकी। पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही थी और तापमान माइनस में जा चुका था। हमने जान-बूझ कर एक ही बड़ा लग्जरी सुइट बुक किया था, जिसमें एक बड़ा किंग-साइज बेड और एक बड़ा सा हीटर लगा हुआ था।

जैसे ही वेटर कमरा दिखा कर बाहर गया, राहुल ने लपक कर कमरे का भारी दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया।

कमरे के अंदर का हीटर लाल होकर गरमाहट फेंक रहा था, लेकिन हमारे बदन की हवस उस हीटर से भी ज्यादा तेज़ थी। सपना ने कमरे के बीच में खड़े होकर अपनी जैकेट उतारी। शॉर्ट ड्रेस के पार से उसके बदन की गोराई और उसके सुडौल चूतड़ पहाड़ों की इस कड़कती ठंड में आग लगाने के लिए काफी थे।

“तो राहुल भाई… गाँव के खेतों में तो तुमने अपनी ताकत दिखाई थी। अब इस शिमला की बर्फीली रात में देखते हैं कि दिल्ली के लौंडे में कितना दम है,” मैंने अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए राहुल को चुनौती दी।

राहुल ने अपनी टी-शर्ट उतार फेंकी, उसका 8 इंच का लंड ठंड के बावजूद पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो चुका था। उसने सपना को कमर से पकड़ा और सीधे बेड पर पटक दिया। शिमला की इस सर्द रात में अब एक ऐसा खूनी और कामुक खेल शुरू होने वाला था, जिसकी गूंज इन वादियों में लंबे समय तक रहने वाली थी।

होटल के उस आलीशान सुइट में अभी हमारे बदन की गरमाहट बढ़ने ही वाली थी कि तभी अचानक मेज पर रखे मेरे फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर ‘पापा’ का नाम चमक रहा था। कड़कती ठंड के बीच फोन की रिंगटोन सुन कर हम तीनों एक पल के लिए ठिठक गए। राहुल ने सपना के होठों से अपना चेहरा हटाया और मैंने हीटर की आवाज के बीच फोन उठाया।

“हाँ पापा, हम लोग शिमला होटल पहुँच गए हैं,” मैंने अपनी सांसों को काबू में करते हुए कहा।

पापा की आवाज़ थोड़ी परेशान और थकी हुई थी, “सुनो बेटा, तुम लोगों के निकलने के कुछ ही घंटों बाद काव्या भी कॉलेज से हॉस्टल लौट आई थी। जब उसे पता चला कि तुम और सपना शिमला गए हो, तो वह भी जाने की जिद करने लगी। वह अकेली ही दिल्ली से शिमला वाली रात की वोल्वो बस पकड़ कर निकल चुकी है। सुबह करीब 6 बजे तक वह शिमला बस स्टैंड पहुँच जाएगी। ठंड बहुत ज्यादा है, तुम सुबह समय से जाकर उसे रिसीव कर लेना।”

यह सुनते ही मेरे होश उड़ गए। मैंने कहा, “जी पापा, आप फिक्र मत करो, मैं सुबह समय से पहुँच जाऊँगा।”

फोन कटते ही सपना ने घबरा कर अपनी ड्रेस ठीक की, “भैया! काव्या आ रही है? अब क्या होगा? वह तो बहुत तेज है, अगर उसे हमारे और राहुल के बीच की इस बात का जरा सा भी शक हुआ, तो घर पर बवाल हो जाएगा।”

काव्या हमारी छोटी चचेरी बहन थी, जो चंडीगढ़ में कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। वह जितनी खूबसूरत और गदरायी हुई थी, उतनी ही जिद्दी और शातिर भी थी।

राहुल ने अपना बैग सीधा करते हुए कहा, “यार, यह तो एन वक्त पर खेल का मजा खराब हो गया। अब इस कमरे में हम तीन नहीं, चार लोग होंगे।”

मैंने मुस्कुराते हुए राहुल के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “घबराओ मत राहुल भाई। तुम अभी काव्या को जानते नहीं हो। वह भले ही कॉलेज में पढ़ती है, लेकिन उसकी आँखों में जो चंचलता है, वह मुझे अच्छे से पता है। शिमला की इस कड़कती ठंड में अगर वह खुद चलकर इस जाल में आ रही है, तो खेल अब और भी बड़ा और रोमांचक होने वाला है।”

सुबह के 4 बज चुके थे। काव्या के आने की खबर ने हमारे अंदर की वासना को एक नया मोड़ दे दिया था। मैंने और राहुल ने तय किया कि अभी कुछ घंटों के लिए आराम कर लेते हैं, क्योंकि सुबह 6 बजे जब काव्या इस होटल के कमरे में कदम रखेगी, तो शिमला की बर्फबारी के बीच इस बंद कमरे का तापमान एक नए खेल के साथ दोगुना होने वाला था।

काव्या के आने की खबर ने कमरे के सन्नाटे को एक अजीब सी उत्सुकता में बदल दिया था। सपना थोड़ा असहज होकर हीटर के पास बैठ गई, लेकिन राहुल के दिमाग में काव्या को लेकर कई सवाल चल रहे थे। जब सपना वाशरूम की तरफ गई, तो राहुल दबे कदमों से मेरे पास आया।

“भैया, यह काव्या कैसी है? मतलब… वह शहर में पढ़ती है, कहीं वह हमारी इस आज़ादी को देख कर घर पर कुछ बता ना दे?” राहुल ने अपनी आवाज को धीमा करते हुए पूछा।

मैंने राहुल के चेहरे की घबराहट देखी और एक गहरी, शातिर मुस्कान के साथ उसके करीब आया।

मैंने उसके कान के पास झुक कर बिल्कुल फुसफुसाते हुए कहा “घबरा मत राहुल भाई। काव्या भले ही चंडीगढ़ में पढ़ती है और खुद को बहुत शरीफ दिखाती है, लेकिन वह इस खेल से अनजान नहीं है। सपना की तरह काव्या के इस गदराए बदन और उसकी जवानी को भी मैंने बहुत पहले ही अपने इस 8 इंच के लंड से नाप रखा है। वह मेरी रग-रग से वाकिफ है।”

यह सुनते ही राहुल की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसका थूक गले में ही अटक गया। “क्या… क्या मतलब? काव्या भी…?”

“हाँ,” मैंने मुस्कुराते हुए उसकी पीठ थपथपाई। “वह खुद इस ठंड में यहाँ खिंची चली आ रही है क्योंकि उसे भी इस खेल का अंदाजा है। तो दिल छोटा मत कर। सुबह जब वह इस कमरे में कदम रखेगी, तो शिमला की इस बर्फीली रात के बाद हम तीनों नहीं, बल्कि हम चारों मिल कर यहाँ ‘फोरसम’ का वो खेल खेलेंगे जिसे तुम जिंदगी भर नहीं भूल पाओगे। दो-दो गदराए बदन होंगे और हम दोनों भाई मिल कर उनकी रेल बनाएंगे।”

मेरी यह बात सुनते ही राहुल की घबराहट एक पल में गायब हो गई और उसकी आँखों में हवस का एक नया और भयानक लालच तैरने लगा। ठंड के बावजूद उसकी पैंट के अंदर उसका लंड एक बार फिर अंगारे की तरह सुलगने लगा था। अब हम दोनों को सुबह के 6 बजने का बेसब्री से इंतजार था, जब काव्या इस सुइट का दरवाजा खोलेगी और इस बंद कमरे के अंदर वासना का एक नया इतिहास लिखा जाएगा।

सुबह के ठीक छह बजे जब होटल के कमरे के इंटरकॉम की घंटी बजी, तो बाहर पहाड़ों पर कड़कड़ाती ठंड और कोहरे की चादर लिपटी हुई थी। रिसेप्शन से आई कॉल ने बताया कि काव्या नीचे पहुँच चुकी है।

काव्या को इस बात का जरा सा भी इल्म नहीं था कि इस बंद कमरे के भीतर मेरठ और गन्ने के खेतों की क्या दास्तान पीछे छूट चुकी है। उसके लिए यह सिर्फ एक आम फैमिली ट्रिप था, जहाँ वह अपने भाई और बहन के साथ पहाड़ों की बर्फबारी का मजा लेने आई थी।

जब मैं काव्या को रिसीव करके सुइट के भीतर लाया, तो उस वक्त राहुल वाशरूम के अंदर फ्रेश हो रहा था। काव्या ने कमरे में कदम रखते ही अपना छोटा सा ट्रैवल बैग एक तरफ रखा और ठंड से कांपते हुए अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ने लगी। उसने गुलाबी रंग का एक स्टाइलिश स्वेटर और डार्क ब्लू फिटेड जींस पहन रखी थी। उसकी सुडौल काया और चंडीगढ़ के आधुनिक रंग-ढंग ने उसकी खूबसूरती को और निखार दिया था।

तभी वाशरूम का दरवाजा खुला और राहुल तौलिये से अपना चेहरा पोंछते हुए बाहर निकला। जैसे ही उसकी नज़र हीटर के पास खड़ी काव्या पर पड़ी, राहुल के कदम वहीं के वहीं जम गए।

राहुल का पूरा ध्यान काव्या के चेहरे और उसकी सुडौल कद-काठी पर टिक गया। काव्या की हॉटनेस और उसका अंदाज देख कर राहुल अंदर ही अंदर हिल गया कि यह लड़की तो सपना से भी कहीं ज्यादा मॉडर्न और आकर्षक है। उसकी नज़रें काव्या के चेहरे से हट ही नहीं रही थी।

जब काव्या ने सामने खड़े राहुल को देखा, तो वह भी एक पल के लिए उसे देखती ही रह गई। राहुल की छः फीट की कद-काठी, चौड़े कंधे और कसरत से तराशा हुआ बदन किसी भी लड़की को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए काफी था। राहुल की पर्सनैलिटी में एक अलग ही रफ-एंड-टफ देसी लुक था, जो काव्या को बेहद पसंद आया।

कमरे में कुछ पलों के लिए एक अजीब सा मौन छा गया, जिसे काव्या ने अपनी खनकती हुई आवाज से तोड़ा। उसने मेरी तरफ मुड़ कर बड़े ही कौतूहल और उत्सुकता से पूछा-

“भैया… ये कौन हैं? आपने तो बताया नहीं था कि शिमला में कोई और भी हमारे साथ रहने वाला है?”

सपना जो बेड पर कंबल ओढ़े बैठी थी, उसने मुस्कुरा कर काव्या की तरफ देखा। मैंने आगे बढ़ कर राहुल के कंधे पर हाथ रखा और काव्या से कहा, “काव्या, ये राहुल है। मेरा कॉलेज का सबसे पक्का दोस्त। ये मेरठ से दिल्ली आया हुआ था, तो मैंने सोचा क्यों ना इसे भी अपने साथ पहाड़ों की सैर पर ले चलें। वैसे भी जितने ज्यादा लोग होंगे, ट्रिप उतना ही मजेदार होगा।”

राहुल ने तुरंत अपने चेहरे पर एक शालीन मुस्कान लाई और हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा, “हेलो काव्या, तुम्हारे भैया ने तुम्हारे बारे में बहुत बातें बताई थी, पर यह नहीं बताया था कि उनकी छोटी बहन इतनी खूबसूरत हैं।”

राहुल की इस तारीफ पर काव्या के गाल ठंड के बावजूद थोड़े से गुलाबी हो गए। उसने शर्माते हुए राहुल से हाथ मिलाया। राहुल की मजबूत उंगलियों की छुअन जब काव्या की ठंडी हथेली से हुई, तो दोनों के बीच एक अनकही सी सिहरन दौड़ गई।

“थैंक यू राहुल। वैसे भैया तारीफ करने में थोड़े कंजूस हैं, मुझे यकीन नहीं हो रहा कि इन्होंने मेरी तारीफ की होगी,” काव्या ने सोफे पर बैठते हुए मजाकिया लहजे में कहा।

सपना ने चाय का ऑर्डर देने के लिए इंटरकॉम उठाया और बोली, “चलो, अब सब लोग आ ही गए हैं, तो पहले गरमा-गरम चाय पीते हैं। बाहर तो हाथ-पैर जम रहे हैं।”

राहुल काव्या के ठीक सामने वाले सोफे पर बैठ गया। वह काव्या के बात करने के अंदाज, उसकी आँखों की चमक और उसकी बैठनी की पोजीशन को बड़े गौर से देख रहा था। काव्या को अभी इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस भाई को वह बेहद सीधा समझती है, उसने राहुल के कान में पहले ही क्या फूंक दिया है। बातों ही बातों में शिमला की उस सुबह की चाय का इंतजार होने लगा, जहाँ बाहर बर्फ गिर रही थी और अंदर एक नए खेल की भूमिका बहुत ही धीरे-धीरे और सलीके से तैयार हो रही थी।

आगे की कहानी के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, धन्यवाद !

अगला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-2

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