सर से चूत चुदवाई (Sir se chut chudwayi)

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मेरा नाम स्नेहा है। उम्र इक्कीस। बी.कॉम. सेकंड ईयर की स्टूडेंट, पुणे के एक नामी कॉलेज में। घर के पैसे कम थे, इसलिए पढ़ाई पर ही ध्यान — पर शरीर से मैं भरी हुई थी। छाती भरी हुई, कूल्हे गोल, कमर पतली, चूत के बाल भी नरम-नरम। लड़के पीछे पड़ते थे, मुझे पता भी था — पर मन कहीं नहीं लगता था। मन एक ही जगह अटका था। रोहित सर के पास।

सर स्टैटिस्टिक्स पढ़ाते थे। उम्र अट्ठाईस, पर रुतबा ऐसा कि तीस साल के भी कॉलेज में चुप हो जाएँ। लंबे, गोरे, जिम से बने बदन, शर्ट के अंदर दिखते बाज़ू, और चलने में एक ऐसा ठहराव कि लड़कियाँ बातें करती रह जाती। बीवी गाँव में रहती थी, सर अकेले किराए के फ्लैट में। मेरी नज़र कई बार सर की जाँघों पर और शर्ट के नीचे वाले हिस्से पर रुक जाती — और देखते-देखते मुझे लगने लगा कि वहाँ कुछ बड़ा ही है। कितना बड़ा, ये तो बाद में पता चला।

पहली नज़र-

पहले दिन की बात है। सर क्लास में घुसे, बोर्ड पर सवाल लिखा, और जब मुड़े तो उनकी नज़र सीधे मेरे ऊपर आ टिकी। एक सेकंड भर के लिए। फिर हट गई। पर वो एक सेकंड बहुत था। मैंने शर्ट की कॉलर ठीक की, बाल पीछे किए, और आगे की डेस्क पर बैठ गई — ये मेरा प्लान था। सर की नज़र दोबारा आई, इस बार ज़्यादा देर रुकी।

स्टैटिस्टिक्स मुझे मुश्किल लगता था, इसलिए सर ने खुद रविवार की स्पेशल क्लास रखी। “अकेली आ जाना, भीड़ में ध्यान नहीं लगता,” सर बोले। पहले ही दिन मुझे समझ आ गया कि सर मुझे सिर्फ स्टूडेंट की तरह नहीं देखते। पेन देते वक्त उँगलियाँ उँगलियों से छू जाती, पेपर दिखाते वक्त चेहरा पास आता, साँस गर्दन पर पड़ती। एक दिन सर ने मेरी कलाई पकड़ी — बस ये कहने के लिए कि “पेन यूँ पकड़ते हैं” — पर मेरी पूरी रीढ़ में झुरझुरी दौड़ गई।

वो रात, घर पर-

कॉलेज से लौट कर मैं बेड पर लेटी, और सर का चेहरा आँखों में आ गया। हाथ अपने-आप नीचे गया। मैंने कुर्ते के अंदर हाथ डाला, ब्रा ऊपर सरकाई, और निप्पल दबाया — सर की उँगली वैसे ही दबाती तो कैसा लगता? नीचे पेटी खिसकाई, उँगली चूत पर फेरी — गीली थी। मैंने उँगली अंदर डाली और सर का नाम लेकर रात भर आँखें बंद करके सोचती रही कि सर का लंड अंदर घुसे तो कैसा लगेगा। उस रात पहली बार अपने ही हाथ से मेरा हो गया — और चीख सर का नाम थी।

वो रविवार-

और एक रविवार सर बोले, “आज घर ही आ जाओ। कॉलेज का शोर नहीं चाहिए।”
घर गई। सर ने चाय बनाई, किताबें खोली, पर दिमाग में बस सर और सर की साँस।

पढ़ाई खत्म हुई तो सर बोले, “थोड़ा बैठो, बहुत देख लिया, अकेले में बोर होता है।”

फिर सर ने लैपटॉप खोला और बोले, “कोई फिल्म देख लें।” पर फिल्म नहीं थी — वो एक सेक्स वीडियो था। एक लड़की और एक आदमी। आदमी का लंड इतना बड़ा कि पहली बार देखते ही मेरे नीचे कल्ल हो गया। वो लड़की चीख रही थी, आदमी उसे चोद रहा था, लंड अंदर-बाहर जा रहा था और पानी चारों तरफ छपाक रहा था। मेरे अंदर का पानी बहने लगा।

सर ने धीरे से मेरी जाँघ पर हाथ रखा। बिना कुछ बोले। थोड़ा ऊपर सरका — जाँघ पर। मैंने साँस रोक ली। सर का हाथ गर्म और भारी था।

“स्नेहा…” सर ने मेरे कान में धीरे बोला, “तुम्हें समझ आ रहा है?”

मैंने बस हामी भरी। फिर सर ने मेरा चेहरा घुमाया और होंठों पर होंठ रख दिए। पहला चुंबन — नरम, फिर ज़ोर से। सर की जीभ मेरे मुँह में घुसी, एक हाथ छाती पर गया और उँगलियों ने दबाया। मैं स्तब्ध बैठी थी, पर शरीर जाग गया था।

कपड़े एक-एक करके उतरते गए। ब्रा खुलते ही सर ने मुँह से मेरा निप्पल चूसा, दूसरे को उँगलियों से दबाया। मैं कराहने लगी। नीचे का पानी जाँघ पर बहने लगा। सर ने मुझे पूरा नंगा किया, फिर खुद कपड़े उतारे।

फिर मैंने देखा — सर का लंड।

हे भगवान, इतना बड़ा। और मोटा। तना हुआ, काँपता हुआ, नसों से भरा, सिरे पर गुलाबी। वीडियो वाला लंड भूल गई — ये असली था, और मेरे सामने। मैंने हाथ में पकड़ा, दोनों हाथों से। पूरा नहीं आया। मैंने मुँह में लिया, तो सिरा गले में टकराया, आँखों में पानी आ गया। सर ने मेरे बाल पकड़े और धीरे-धीरे गहरा लेने लगे। मैं चूसती रही, लार लंड से गर्दन पर बहती रही, और सर कराहते रहे — वो आवाज़ मेरे लिए म्यूज़िक थी।

फिर सर ने मुझे बेड पर लिटाया, जाँघें खोली, और मुँह नीचे ले गए। जीभ से मेरी चूत चाटने लगे। मैंने कमर ऊपर उठा कर सर के मुँह पर दबा दी। कराहना, चूसना, अंदर जीभ — मेरा दिमाग घूम गया।

लगभग आने वाली थी कि सर रुक गए। “अब सूखने नहीं दूँगा,” सर हँसे।

“अब,” सर बोले और लंड का सिरा मेरी चूत के मुँह पर रखा।

पहला झटका। सिरा अंदर गया। मैंने साँस ली। दूसरा झटका — ज़ोर से। और फिर सर एक-दम अंदर घुस गए।

अम्मा! चूत फट गई, ऐसा लगा। लंड बड़ा था, इसलिए पूरा अंदर जाने की जगह ही नहीं थी। मैं चीखी, नाखून सर की पीठ में गाड़ दिए। सर रुके नहीं — धीरे-धीरे झटके देते रहे, अंदर का अंग पकड़ कर खींचते रहे। चूत के होंठ लंड के चारों तरफ फैल गए, कस गए।

“बताओ स्नेहा, कैसा लग रहा है?” सर हँस कर बोले।

“फट गया है सर… फट गया है…” मैं हाँफते हुए बोली।

“फटता है,” सर बोले, “और फाड़ता हूँ।”

और फिर सच में चोदने लगे। ज़ोर से, तेज़ी से, पेट से पेट टकराता। घर में *थप-थप* की आवाज़। मेरी छाती हिल रही थी, सर ने पकड़ कर चूसा। पहली ही पोज़ में मेरा दो बार हो गया। हर झटके पर लंड गर्भाशय से टकराता, और मैं झटके से ऊपर उठ जाती।

फिर सर ने मुझे पेट के बल घुमाया और पीछे से घुसे। कूल्हे ऊँचे करके मैंने दिया, सर ने दोनों हाथों से कमर पकड़ी और पीछे से तोड़ने लगे। इस पोज़ में और गहरा जाता, और ज़ोर से। मैं गद्दे में मुँह छुपा कर चीख रही थी। चूत के होंठ लंड के चारों तरफ कसे हुए, अंदर से पानी बह रहा था, और सर की जाँघें मेरे नितंबों पर टकरा रही थी।

“और, सर… और…” मैं भीख माँग रही थी।

सर ने मुझे बिठाया, अपनी गोद में। मैं ऊपर बैठी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। पूरा लंड अंदर गया तो मेरी साँस ही रुक गई। फिर मैं ऊपर-नीचे सरकने लगी। सर नीचे से ऊपर झटके दे रहे थे। छाती उनके मुँह में, हाथ कमर पर, आँखें एक-दूसरे में।

उस पल मुझे लगा कि यही पूरी दुनिया है।
आखिर में सर ने मुझे फिर लिटाया, मेरी जाँघें कंधों पर रखी, और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। मैं लगभग बेहोश होने लगी। सर ने रफ़्तार बढ़ाई, साँस कड़क हुई, और फिर एक बड़ा झटका मार कर अंदर डाल दिया।

गरम पानी चूत भर बहता रहा। सर मेरे ऊपर गिरे, दोनों हाँफते रहे। मैं लंड अब भी अंदर था वैसे ही पड़ी थी, और हटाने का मन ही नहीं था।

उसके बाद-

उस दिन के बाद रविवार की क्लास कभी नहीं छूटी। और हर बार कुछ नया हुआ। एक बार सर ने मुझे स्टडी टेबल पर झुकाया, किताबें धक्के से गिर पड़ी, और पीछे से चोदा। एक बार बाथरूम में, शॉवर के नीचे, दीवार पर हाथ टिका कर। एक बार सर ने मुझे गोद में उठाया — दीवार से लगा कर, हवा में टाँगें लपेट कर, और चोदते रहे जब तक मेरे पैर सुन्न नहीं हो गए।

एक बार सर ने मुँह में डाल कर मुझे निगलवाया, और मैंने पूरा पी लिया। सर का लंड हर बार वैसा ही बड़ा, हर बार वैसा ही मोटा — और मेरी चूत हर बार वैसे ही फटती, वैसे ही तड़पती, वैसे ही बहती।

अब तो मैंने लंड पकड़ना भी सीख लिया, चूसना भी, और वो पोज़ भी जिसमें सर सबसे ज़्यादा कराहते — मेरी चूत ऊपर की तरफ उठा कर, लंड हाथ में लेकर, और सिरे को पकड़ कर अंदर-बाहर सरकाना।

अब स्टैटिस्टिक्स मुझे मुश्किल नहीं लगता — क्योंकि सर ने सिर्फ फॉर्मूले ही नहीं, मेरी चूत भी सिखाई। और वो सेक्स वीडियो? वो हमारा पहला पाठ था।

कैसी लगी मेरी कहानी? और आगे का पार्ट चाहिये तो मुझे मैसेज करके बताओ। [email protected]

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