मेरा नाम है **अविनाश**, उम्र 26 साल। मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूं। मेरी छोटी बहन **निशा** की उम्र 22 साल है। वह अभी फाइनल ईयर में है। निशा बेहद खूबसूरत है — गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, स्लिम लेकिन आकर्षक फिगर। उसकी छातियाँ 34C की हैं, कमर पतली और गांड गोल-मोटी। घर में सब उसे बहुत प्यार करते हैं।
निशा की शादी 2 महीने बाद तय हो चुकी है। लड़का दिल्ली का है, अच्छा परिवार और अच्छी जॉब। पूरे घर में खुशी का माहौल है, लेकिन मेरे अंदर कुछ टूट रहा था। निशा मेरी सबसे छोटी बहन थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से मैं उसे सिर्फ बहन की नज़र से नहीं देख पा रहा था।
शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थी। निशा लगातार शॉपिंग, फिटिंग और रस्मों में व्यस्त रहती। लेकिन रात को जब सब सो जाते, तो वो मेरे रूम में आकर बैठ जाती।
**पहली रात की करीबी**
एक रात करीब 12 बजे निशा मेरे रूम में आई। मैं बेड पर लेटा लैपटॉप पर काम कर रहा था। उसने हल्की सी पिंक नाइट शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे। बाल खुले थे और चेहरा थका हुआ लग रहा था।
“भैया… नींद नहीं आ रही। थोड़ी देर बैठ सकती हूं?”
मैंने मुस्कुराते हुए जगह बनाई। निशा मेरे बगल में लेट गई। उसका सिर मेरे कंधे पर था। कुछ देर चुप रहने के बाद वो बोली, “भैया… शादी के बाद सब बदल जाएगा ना? तुम… मुझे मिस करोगे?”
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और बोला, “बहुत मिस करूँगा निशा। तू मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी है।”
निशा ने मेरी छाती पर हाथ रख दिया। उसकी उंगलियाँ मेरी शर्ट पर हल्के-हल्के घूम रही थी।
“भैया… मुझे डर लग रहा है। वो लड़का अच्छा है, लेकिन… मैं तुम्हें छोड़ कर कैसे रहूंगी?”
उसकी आवाज में कुछ ऐसी नमी थी कि मेरा दिल पिघल गया। मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया। निशा भी मुझे कस कर गले लग गई। उसके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे।
कुछ देर ऐसे ही लिपटे रहे। फिर निशा ने धीरे से कहा, “भैया… मुझे प्यार करो ना… जैसे बचपन में करते थे।”
मैंने उसके माथे पर किस्स किया। फिर गाल पर। निशा ने आँखें बंद कर ली। मैंने हिम्मत करके उसके होंठों पर हल्का सा किस्स किया। निशा ने कोई विरोध नहीं किया। बल्कि उसने मेरी गर्दन पकड़ ली और किस्स को थोड़ा लंबा कर दिया।
पहला किस्स सिर्फ 10-15 सेकंड का था, लेकिन दोनों की सांसें तेज हो गई थी। निशा शर्मा कर बोली, “भैया… यह गलत है ना? मैं शादी-शुदा होने वाली हूं…”
मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “निशा… सिर्फ कुछ दिन और हम साथ हैं। शादी के बाद सब बदल जाएगा। अगर तू चाहती है तो… हम इन दिनों को यादगार बना सकते हैं।”
निशा कुछ देर चुप रही। फिर मेरी छाती पर सिर रखकर बोली, “भैया… मुझे भी तुमसे बहुत लगाव है। लेकिन… डर लगता है।”
उस रात हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर सो गए। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और उसकी एक टांग मेरी टांग पर।
**दूसरी रात – करीबी बढ़ी**
अगली रात निशा फिर आई। इस बार वह मेरे बेड पर मेरे बहुत करीब लेटी। उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी।
“भैया… तुम्हारा शरीर बहुत अच्छा है। जिम जाते हो ना?”
मैंने हंसते हुए कहा, “हाँ।”
निशा ने धीरे से मेरी छाती को चूमा। फिर गर्दन पर। मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया। अब वो मेरे ऊपर लेटी हुई थी। उसके स्तन मेरी छाती पर दब रहे थे।
हम दोनों फिर किस्स करने लगे। इस बार किस्स ज्यादा गहरा और लंबा था। मेरी जीभ उसकी जीभ से मिली। निशा की सांसें तेज हो गई थी।
मेरा हाथ उसकी पीठ पर था। मैंने धीरे से उसकी नाइट शर्ट ऊपर की और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगा। निशा काँप उठी, लेकिन रोकी नहीं।
“भैया… तुम्हारा हाथ बहुत गर्म है…” उसने फुसफुसा कर कहा।
मैंने उसकी नाइट शर्ट को और ऊपर किया। अब उसकी पीठ पूरी नंगी थी। मैंने उसकी कमर, पीठ और फिर धीरे से उसकी गांड पर हाथ फेरा। निशा ने मेरी छाती पर अपना चेहरा छुपा लिया।
“भैया… शर्म आ रही है…”
“निशा… बस फील कर। ये हमारे आखिरी दिन हैं।”
उस रात हम दोनों किस्स करते रहे, छूते रहे। मैंने उसकी छातियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाया। निशा ने मेरी छाती और पेट को चूमा। लेकिन हमने आगे नहीं बढ़ाया।
निशा जाते समय मेरे गाल पर किस्स करके बोली, “भैया… कल फिर आऊँगी। लेकिन… धीरे-धीरे। मैं डर रही हूं, लेकिन तुमसे दूर भी नहीं रह पा रही।”
मैंने उसे गले लगाया और कहा, “जितना तू चाहे, उतना ही होगा निशा। मैं तेरा भाई हूं… और शायद अब कुछ और भी।”
उस रात के बाद निशा और मेरे बीच की दूरी लगभग खत्म हो गई थी। हम दोनों जानते थे कि शादी सिर्फ 50 दिन दूर है, और ये दिन हमारे पास आखिरी हैं।
**चौथी रात**
निशा रात 11:30 बजे मेरे रूम में आई। इस बार वह सिर्फ एक हल्की सफेद नाइट शर्ट पहने थी, जिसके नीचे कुछ नहीं था। उसके बाल खुले थे और चेहरा थोड़ा शर्मीला लेकिन भूखा था। वह सीधे मेरे बेड पर आकर मेरे ऊपर लेट गई।
“भैया… आज मैं बहुत डरी हुई हूं… लेकिन तुमसे ज्यादा दूर नहीं रह सकती।”
मैंने उसे कस कर गले लगाया। हम दोनों गहरे किस्स करने लगे। किस्स इतना गहरा था कि निशा की सांसें फूल गई। मेरे हाथ उसकी नाइट शर्ट के अंदर घुस गए और मैंने उसकी नंगी पीठ, कमर और फिर उसकी मोटी गांड को सहलाने लगा।
निशा काँप रही थी।
“भैया… तुम्हारा हाथ… बहुत गर्म है…”
मैंने नाइट शर्ट को उसके सिर के ऊपर से उतार दिया। अब निशा मेरे सामने पूरी नंगी थी। उसकी 34C छातियां, गुलाबी निप्पल्स, पतली कमर और साफ चूत — सब चाँदनी में चमक रहे थे।
मैंने उसे चूमते हुए कहा, “निशा… तू बहुत सुंदर है। आज मैं तुझे पूरी तरह अपना बनाना चाहता हूं।”
निशा ने शर्मा कर आँखें बंद कर ली और फुसफुसाई, “भैया… धीरे करना… मैं वर्जिन हूं… डर लग रहा है…”
मैंने उसे प्यार से लिटाया। पहले उसकी छातियाँ चूसी — निप्पल्स को जीभ से घुमाया, हल्का-हल्का काटा। निशा कराह रही थी — “आह्ह्ह… भैया… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”
मेरा हाथ उसकी जांघों के बीच गया। उसकी चूत पहले से गीली थी। मैंने उंगली से क्लिटोरिस सहलाया और फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली।
“आह्ह्ह… भैया… उंगली अंदर… आह्ह्ह…”
मैंने कुछ देर उंगली से उसे तैयार किया। निशा अब अपनी कमर उठा-उठा कर मेरी उंगली को अंदर ले रही थी। फिर मैंने अपनी शॉर्ट्स उतारी। मेरा 7 इंच का लंड पूरी तरह खड़ा था। निशा ने उसे देख कर सांस रोकी।
“भैया… इतना बड़ा… मैं सह पाऊँगी?”
“धीरे करूँगा निशा… तू बस रिलेक्स कर।”
मैंने उसकी टांगें फैलाईं और लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा। बहुत धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुसा तो निशा ने तकिया मुंह में दबा लिया।
“आह्ह्ह… भैया… दर्द हो रहा है… आह्ह्ह…”
मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी टाइट वर्जिन चूत में डाल दिया। निशा की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने मुझे कसकर पकड़ रखा था।
“भैया… पूरा अंदर चला गया… आह्ह्ह… अब हिलना मत… थोड़ी देर ऐसे ही रहो…”
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ, निशा ने खुद अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी।
“भैया… अब… धीरे-धीरे… हाँ… आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है…”
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ निशा की सिसकियां बढ़ रही थी।
“आह्ह्ह… भैया… और गहरा… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है… मेरी चूत भर गई है…”
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। अब बेड हल्का-हल्का हिल रहा था। निशा अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेटे हुए थी और मुझे और गहरा ले रही थी।
“भैया… जोर से… आह्ह्ह… शादी से पहले मुझे पूरी तरह चोद दो… आह्ह्ह… मैं तुम्हारी हूं… सिर्फ तुम्हारी…”
मैंने पोजीशन बदली। निशा को घुटनों के बल करवा कर डॉगी स्टाइल में चोदा। उसकी गोल गांड मेरे हर धक्के पर हिल रही थी। मैंने गांड पर हल्के थप्पड़ मारे।
“आह्ह्ह… भैया… और जोर से… मेरी गांड भी मारो… आह्ह्ह…”
लगभग 15 मिनट बाद निशा जोर से झड़ गई। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ाई और आखिर में उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।
निशा थक कर मेरे सीने पर गिर पड़ी। उसकी सांसें अभी भी तेज थी।
“भैया… मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी पहली चुदाई मेरे भाई से होगी… लेकिन… बहुत अच्छा लगा। मैं अब तुम्हारी हूं… शादी के बाद भी जब मन करे… मुझे बुलाना।”
मैंने उसे कसकर गले लगाया और बोला, “निशा… ये हमारे आखिरी 50 दिन हैं। मैं तुझे हर रात चोदूँगा… कभी धीरे, कभी जोर से। तू मेरी बहन है… और अब मेरी औरत भी।”
निशा शर्मा कर मेरे सीने में छुप गई, लेकिन उसके होंठों पर मुस्कान थी।