पिछला भाग पढ़े:- बाप का इलाज बेटी की चुदाई-2
हाय दोस्तों, मैं नीना अपनी सेक्स कहानी का अगला पार्ट लेके आप सब के सामने हाजिर हूं। अगर आप में से किसी ने भी पिछला हिस्सा नहीं पढ़ा है, तो पहले उसको जरूर पढ़ें। उम्मीद है आपको मेरी कहानी पसंद आ रही होगी।
पिछले हिस्सों में आप सब ने पढ़ा कि मैं अपने पापा को ठीक करने के लिए उनको उत्तेजित करने में लगी हुई थी। इसके लिए मैंने पापा के सामने अपने जिस्म की नुमाइश शुरू कर दी थी। उसका रिजल्ट भी मुझे पॉजिटिव लग रहा था। अब आगे बढ़ते हैं-
रात को पापा को उत्तेजित करने के लिए मेरे दिमाग में एक धांसू आइडिया आया था। मैं रेगुलर 9 बजे सोती थी, और पापा को सोने में 11 बजे जाते थे। मैंने आज सोने से पहले एक पतली टी-शर्ट, और साथ में शॉर्ट्स पहन ली। मेरा प्लान ये था, कि अगर मैं पापा के साथ सो जाऊं, तो इसे पापा सबसे ज्यादा उत्तेजित हो जाएंगे। क्योंकि औरत को सिर्फ देखना और उसके जिस्म की गर्मी को महसूस करने में बहुत फर्क होता है।
9 बज चुके थे, लेकिन मैं अभी तक सोई नहीं थी। मैं 9:30 बजे बजने की प्रतीक्षा कर रही थी। फिर जैसे ही 9:30 बजे, मैं अपने बिस्तर से उठी, और पापा के कमरे का दरवाजा खटखटाया।
मैं: पापा मैं आ सकती हूं (दरवाज़ा खटखटाते हुए)?
पापा: हाँ बेटा, आ जाओ।
फिर मैं अंदर गई, और पापा को बोला-
मैं: पापा मुझे बहुत बुरा सपना आया है। आप ठीक हैं?
पापा: हां बेटा मैं बिल्कुल ठीक हूं। तुम्हारी सेवा से मेरी हालत में बहुत सुधार है।
मैं: पापा मुझे अपने कमरे में डर लग रहा है। क्या मैं आपके साथ आज सो सकती हूं?
पापा: हां बेटा, बिल्कुल सो सकती हो।
ये बोल कर पापा ने अपने साथ जगह बनाई, और मैं पापा के साथ लेट गई। फ़िर मैंने चादर ओढ़ ली। मैंने मुंह दूसरी तरफ कर लिया, ताकि पापा को मेरी गांड के दर्शन हो सकें। कुछ देर में पापा ने लाइट बंद कर दी, और खुद भी सो गए। मैं सोयी नहीं थी, बस सोने का नाटक कर रही थी।
तकरीबन एक घंटे के बाद मुझे अपनी गांड पर पापा का हाथ महसूस हुआ। पापा मेरी गांड पर धीरे-धीरे हाथ फेर रहे थे। मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, ताकि पापा को लगे कि मैं गहरी नींद में थी। फ़िर पापा ने मुझे हल्की सी आवाज़ लगाई।
पापा: बेटा, बेटा।
लेकिन मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अब पापा को कन्फर्म हो गया था कि मैं गहरी नींद में थी। फ़िर उन्हें मेरे चूतड़ दबाने शुरू कर दिए। मैं खुश थी, क्योंकि पापा ठीक होने वाले थे मेरी वजह से। फिर पापा ने मेरी टी-शर्ट पीछे से उठाई, और अपना हाथ मेरी पीठ पर फेरने लगे। साथ में ही मुझे अपनी गांड पर कुछ और भी महसूस हुआ। शायद वो पापा का लंड था। वो बिल्कुल हार्ड लग रहा था।
मुझसे उम्मीद नहीं थी, कि पापा मुझे साथ लेते हुए देख कर इतना आगे बढ़ जायेंगे। लेकिन इस बात की ख़ुशी थी, कि वो ठीक हो रहे थे किसी तरह। पीठ पर हाथ फेरते-फेरते पापा अपना हाथ धीरे-धीरे आगे की तरफ आने लगे। मैंने आज ब्रा नहीं पहनी थी, तो पापा जिस चीज़ को महसूस करना चाहते थे, उसका रास्ता बहुत आसान था।
अगले कुछ ही सेकंड में पापा का हाथ मेरे स्तन पर पड़ा। मेरी सिस्की निकलने वाली थी, लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया। फिर पापा हल्के हाथों से मेरे बूब को दबाने लगे। वो अपनी उंगली को मेरे निप्पल के चारों तरफ घुमाने लग गए। इससे मुझे भी मजा आ रहा था। जो भी हो, पापा को औरत को उत्साहित करना अच्छे से आता था।
धीरे-धीरे वो ज़ोर से मेरे बूब को दबाने लगे। शायद वो ये भूल गए थे कि अगर मैं जाग गई तो वो क्या बोलेंगे। हां ये भी हो सकता है कि उन्हें कोई बहाना पहले से सोच रखा हो। मैं अभी भी सोने का नाटक कर रही थी। अब पापा के ठीक होने से ज्यादा मैं जानना चाहती थी, कि वो कितनी आगे बढ़ सकते थे।
कुछ देर बूब्स को दबाने के बाद वो हाथ नीचे ले गए, और मेरे पेट को सहलाने लगे। फिर वो खुद भी नीचे हुए, और चादर के अंदर घुस गए। मैं समझ नहीं पा रही थी, कि वो आगे क्या करने वाले थे। फिर मुझे मेरी पीठ पर कुछ एहसास हुआ। अरे बाप रे! ये मेरे पापा के होंठ थे। और वो मेरी पीठ पर किस्स कर रहे थे। उनके होंठ जैसे ही मेरी पीठ पर पड़ते मैं सिहर जाती।
लेकिन मैं आवाज़ नहीं कर सकती थी। क्योंकि उनकी नज़र में मैं सोई हुई थी। वो मेरी पीठ को प्यार कर रहे थे, और उनका ऐसा करने से मेरी चूत गीली हो रही थी।
पापा का हाथ अब मेरे पेट से नीचे मेरी शॉर्ट्स पर चला गया। वो अपना हाथ मेरी टैंगो के बीच में ले गए, और शॉर्ट्स के ऊपर से मेरी चूत को हल्के-हल्के से दबाने लग गए।
मैं तो जैसा पागल हो रही थी, और मेरी चूत धड़ाधड़ पानी छोड़ रही थी। फिर अपने हाथ से मेरी शॉर्ट्स का बटन खोला, और फिर धीरे-धीरे ज़िप भी नीचे कर दी। मेरी शॉर्ट्स टाइट थी, ज़िप खोलने के लिए ही शॉर्ट्स आगे से खुल गई। फिर पापा ने मेरी शॉर्ट्स के अंदर अपना हाथ डाला, और उनका हाथ सीधा पैंटी के ऊपर से मेरी चूत पर गया।
जैसा ही उन्हें मेरी चूत को छुआ, मैं तो कांप गई। इस बार मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाई थी, तो शायद मेरा कांपना पापा ने भी महसूस किया होगा। लेकिन वो रुके फिर भी नहीं। फिर पापा ने धीरे-धीरे अपना हाथ मेरी पैंटी में डाल दिया। मैं सोच रही थी, कि पापा कितनी आगे बढ़ रहे थे, और कितनी हिम्मत थी उन्हें जो अपनी बेटी की पैंटी में हाथ डाल रहे थे।
फ़िर वो और नीचे गए, और शॉर्ट्स पीछे से थोड़ी और नीचे की। उसके बाद उन्हें अपने होठों से मेरे चूतड़ को चूमा। उनका हाथ जो मेरी पैंटी में था, मेरी चूत तक पहुंच चुका था। फ़िर जैसा ही उनको मेरी चूत पर हाथ लग गया, मैं पीछे मुड़ गई, और बोली-
मैं: पापा आप क्या कर रहे हो?
पापा ने मुझे क्या जवाब दिया, और इसके आगे क्या हुआ वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। अगर आपको कहानी का मजा आया हो तो फीडबैक ज़रूर दें।