ऑफिस के सीनियर को चूत का लालच देकर चुदाई कराई-1 (Office ke senior ko chut ka laalach dekar chudai karayi-1)

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अनामिका है और मेरा फिगर 40-38-42 है। कहा जा सकता है कि मेरा बदन भरा हुआ और गदराया है। मेरे बूब्स बड़े हैं, जो काफी लोगों को पसंद आते हैं।

दोस्तों, वैसे तो मैं 19 साल की उम्र से चुद रही हूं, लेकिन यह कहानी खास है। इस चुदाई के सेशन के बाद मुझे विश्वास आया था कि मैं जब चाहूं चुद सकती हूं।

दरअसल, 2019 में मैंने एक रेफरेंस के कहने से उसकी कंपनी जॉइन की। काम और पैसा दोनों ही अच्छा था। हमारी बहुत बड़ी टीम नहीं थी, इसलिए जगह सीमित होने की वजह से नए लोगों को दूसरे डिपार्टमेंट के साथ मिला कर बिठाया गया था।

मेरी सीट के बगल में एक सीनियर बैठते थे। वह अक्सर मुझे घूरते या स्माइल करते थे। मैंने उनके बारे में अपनी सहेली को भी बताया था और हमें वो पसंद नहीं थे। एक दिन उन्होंने मेरा नंबर मेरी टीम से लेकर मुझे रात में मैसेज किया। उन्होंने अपने बारे में बताया और यह भी कि उन्हें मैं पसंद हूं।

पहले तो मैं घबरा गई, लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि हमारे बीच की बातों को वो किसी के आगे नहीं रखेंगे। मैं फिर भी डर रही थी, तो मैंने उन्हें डांट कर फोन काट दिया। अगले दिन ऑफिस में उन्होंने मेरी तरफ नहीं देखा। मुझे लगा शायद मैंने उन्हें ऑफेंड कर दिया है, तो मैंने उन्हें शाम को मैसेज में सॉरी लिखा। उन्होंने कहा कि वो वाकई मुझे पसंद करते थे। इस बात का मुझ पर कोई जवाब नहीं था। दरअसल, वो पहले से शादी-शुदा थे। मैंने जब उनसे पूछा कि शादी होने के बाद उन्हें मैं क्यों पसंद थी, तो उन्होंने जो जवाब दिया उससे मैं हक्की-बक्की रह गई।

उन्होंने बताया कि उन्होंने जब पहली बार मुझे देखा था, तो उनकी नज़रें मेरे बूब्स पर पड़ी थी। मैं शायद तेज चल रही थी, तो बूब्स अपनी स्पीड से हिल रहे थे और वो देखते ही उनका लंड खड़ा हो गया था। इसके बाद अक्सर वो मुझे नज़रें चुरा कर देखते थे। जान-बूझ कर मेरे आगे-पीछे खड़े होते, ताकि मेरी क्लीवेज के ज़रिए मेरे मलाईदार बूब्स को निहार सकें।

यह सुनते ही मैं गुस्से से लाल-पीली हो गई, लेकिन चुप रही। मगर वो नहीं रुके। वो मुझे बस एक बार चोदना चाहते थे। उन्होंने कहा था उन्हें मेरी चूत चाटनी है और मुझे एक बार बेदर्दी तरीके से रंडी बना कर चोदना है।

इतना सुनते ही मैं चिढ़ गई और मैंने उन्हें सुना कर फोन काट दिया। मगर फोन काटने के बाद ना जाने क्यों एक बिजली मेरे शरीर में कौंध गई। मेरा बॉयफ्रेंड था, लेकिन वो मुझे इस तरह नहीं चोदता था। ना कभी किसी और ने मुझे साफ दिल से चोदने की बात की थी। मुझे अंदर से अच्छा लगने लगा और ना जाने कब मेरी पैंटी गीली हो गई।

अगले दिन ऑफिस में मैंने गुस्से वाला चेहरा बना कर रखा, लेकिन जान-बूझ कर तेज चलती या बार-बार कपड़े ठीक करती। वो मुझे देखते और मुस्कुरा कर अपने काम में लग जाते। ऐसा कुछ दिनों तक चला। एक रात उन्होंने फिर मुझे मैसेज किया, लेकिन मैं उन्हें तरसाना चाहती थी।

अगले दिन मैंने जान-बूझ कर एक शॉर्ट ड्रेस पहनी, जिसका क्लीवेज गहरा था। स्कर्ट की लेंथ घुटने तक थी। मैं अक्सर आलती-पालती मार कर चेयर पर बैठती थी। मेरी सीट दीवार की ओर थी, तो कोई दिक्कत नहीं होती थी। उस दिन मैंने जान-बूझ कर अपनी चेयर को टेढ़ा किया और पेन गिराया। उन्होंने अपने क्यूबिकल से जैसे ही मेरी तरफ देखा मैं झुक गई।

मेरी क्लीवेज देख कर वो खड़े होकर बाहर चले गए। फिर जैसे ही वो आए, मैंने उन्हें कुछ पूछने के बहाने से बुला कर फिर पेन गिराया और इस बार अपनी इनर थाई दिखाई। यह देख कर शायद उनसे रहा नहीं गया, तो उन्होंने मुंह घुमा लिया।

मुझे पता था कि मेरी टेक्टिक्स काम कर रही हैं। मैं 10-15 दिन लगातार इसी तरह उन्हें तरसा रही थी। वो रोज रात को मुझे अलग-अलग ढंग से चोदने की बात करते लेकिन मैं उन्हें इग्नोर कर रही थी।

एक रोज मैंने उनके मैसेज का जवाब दिया। वो खुश हुए और मुझे मिलने के लिए कहने लगे। मेरे मन में हलचल हो गई। यह इमेजिन करके कि कोई दूसरा आदमी मुझे चोदना चाहता है, मेरे अंदर अलग इमोशन्स थे। हमने मिलने का प्लान किया और वो दिन आ गया, जब मुझे उनसे मिलना था।

हमने दिल्ली में एक कमरा बुक किया। मैं जान कर सेक्सी कपड़े पहन कर गई थी। जैसे ही मैं कमरे में घुसी उन्होंने मुझे गले लगा कर थैंक्यू बोला। मैंने उन्हें हटाया और उनसे पूछा कि उन्होंने मुझे कमरे में क्यों बुलाया था। मैं अंजान बनने का नाटक करने लगी, तो उन्होंने कहा-

गौरव: तुम्हें नहीं पता मैंने क्यों बुलाया है तुम्हें?

मैं: नहीं, बताओ क्या काम है?

गौरव: तुम्हें देखना था।

मैं: अच्छा ऑफिस में नहीं देखते?

गौरव: ऑफिस में तुम कपड़े पहने होती हो न। मुझे तुम्हारे शरीर को देखना था।

मैं (हंसते हुए): अच्छा, शरीर तो देखते ही हो।

गौरव: नहीं यार, तुम्हारे नंगे बदन को। तुम्हारे दुधिया संतरों को, तुम्हारी चूत को… उससे निकलता पानी देखना था।

मैं: ओहो, क्यों?

गौरव: क्योंकि मुझे तुम पसंद हो अनामिका, सच में। मैंने कई लड़कियों को चोदा है… लेकिन तुम्हारी बात अलग है। मेरा बस चले तो तुम्हारी चूत में रोज लंड डाल दूं।

मैं: और जैसे मैं करने दूंगी ये सब? मैं कैसे मानूं कि तुम मुझे पसंद करते हो?

गौरव: एक बार मुझे अपने बूब्स पर हाथ लगाने दो, तुम्हें पता चल जाएगा।

मैं: नहीं, दूर से बात करो।

गौरव: क्यों? यार ऐसा मत करो, देखो तुम्हें देखने भर से मेरा लंड खड़ा हो गया है। प्लीज, अनामिका… एक बार।

मैं: अच्छा, बस एक बार… 10 सेकेंड के लिए।

गौरव ने सुनते ही मेरे एक बूब को हाथ में पकड़ लिया…. और बोला: अरे बहनचोद, कितना कोमल है।

मैंने उसका हाथ एक-दम हटाया। बस… 10 सेकेंड कहा था ना…!

गौरव: अरे यार अनामिका, प्लीज। मत तरसाओ ना। अच्छा बोलो क्या चाहिए तुमको?

मैं: म्म्म्म्म्म…. कहो, मुझे तुम्हारी चूत चाटनी है, प्लीज चाटने दो।

गौरव: ओके, अनामिका, मुझे तुम्हारी चूत चाटनी है, प्लीज चाटने दो।

मैं: नहीं… हाहाहाहाहा

गौरव: खीजते हुए… क्या मजाक है यार? अभी तुम मना कर रही हो, लेकिन सोचो, अगर तुम मान गई तो मैं तुम्हारा क्या हाल करूंगा?

मैं: और चिढ़ाते हुए… क्या पता यह हमारी आखिरी मुलाकात हो?

गौरव: क्या?

मैं: हां, हो सकता है। चलो इसी बात पर… तुम मेरे बूब्स को छू सकते हो।

गौरव मेरे नजदीक आया और मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथों में भींच कर मसलने लगा।

मैं: आहहह! दर्द हो रहा है… आहहह, आराम से करो प्लीज।

गौरव: नहीं।

वो तेजी से बूब्स को दबाने लगा और उन्हें भींचने लगा।

मैं: आहह, आहहह, मुझे दर्द हो रहा है, छोड़ो…

गौरव: साली, रांड… मुझे मना करेगी। कहा था ना, एक बार हां बोलेगी तो बताऊंगा।

मैं दर्द से कराहने लगी, लेकिन गौरव को मजा आ रहा था। धीरे-धीरे, मैं भी रिदम में आ गई।

गौरव: हाहाहा, क्या हुआ, बोल… मजा आने लगा?

मैं: आहहहहह, म्म्म्मममम, आहहहह, हां।

गौरव ने मेरे बूब्स ब्रा से भी निकाल दिए और देखते ही देखते मैं ऊपर से नंगी हो गई। वो भी शर्ट में था।

मैं: अब क्या करोगे?

गौरव: अभी तो तेरे मखमली बोबों को लाल करूंगा। इन्हें चूसना कहां शुरू किया।

यह कहते ही, गौरव ने एक हाथ में राइट वाला बूब पकड़ा और लेफ्ट वाला मुंह में लेकर चूसने लगा।

गौरव: काश, इनमें से दूध निकलता…. बहन की लोड़ी, तू कमाल है। तुझे पता है तुझे डिपार्टमेंट के कितने लोग चोदना चाहते हैं।

मैं: अच्छा, तो क्या सबसे चुद जाऊं?

गौरव: तू सिर्फ मेरी रंडी है। मेरी रखैल… तेरी बुंड मेरी है, समझी।

यह कहते ही उसने निप्पल काटा।

मैं: आहहह, ऑलमोस्ट रोते हुए… आहहहह, बहुत दर्द हो रहा है। छोड़ दो।

गौरव ने एक नहीं सुनी और वो मेरे दूध मसलता रहा। कभी उन्हें चूसता। कभी उनपर चांटे मारता।

गौरव धीरे-धीरे नीचे आने लगा। उसका हाथ मेरी जांघों को सहला रहा था। मैं मदहोश थी और बूब्स चुसवा रही थी। इतने में अचानक ही उसने एक हाथ मेरी पैंटी में डाला।

गौरव: ओहहहहहह, बहनचोद, गीली हो गई तू तो। ड्रामा कर रही थी और यहां तेरी चूत एक-दम तैयार है।

मैं उसका हाथ हटाने लगी। मगर उसने कस कर मुझे पकड़ लिया। मैं भले ही कुछ भी कहूं लेकिन मुझे मजा आ रहा था।
गौरव ने पैंटी को पहले बाहर से धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। मेरे शरीर में बिजली कौंधने लगी। मैं छूटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन छूटना भी नहीं चाहती थी।

गौरव ने फिर एक हाथ से मेरी स्कर्ट खोल दी। अब मैें उसके आगे बस पैंटी में थी। उसने मुझे ऊपर से नीचे देखा और मुस्कुराने लगा।

इसके आगे क्या हुआ, आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।

अगला भाग पढ़े:- ऑफिस के सीनियर को चूत का लालच देकर चुदाई कराई-2

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