दोस्तों मेरा नाम आकाश है। मैं मुंबई में रहता हूं और एक एमएनसी में नौकरी करता हूं। मेरी उमर 30 साल है, और मैं शादी-शुदा हूं। मेरे परिवार में मैं, मेरी पत्नी, मम्मी-डैडी, और मेरा एक साल का बेटा है। आज की सेक्स स्टोरी में मैं आपको बता रहा हूं कि किस तरह मैंने अपनी 23 साल की साली को चोदा। तो चलिए शुरू करते हैं।
सबसे पहले आप सब को अपने बारे में बता दूं। उमर तो बता ही चुका हूं। हाइट मेरी 5’9” है, और बॉडी फिट है। मैं जिम नहीं जाता, लेकिन घर पर रेगुलर एक्सरसाइज करता हूं। ओवरऑल पर्सनैलिटी मेरी अच्छी है।
अब मेरी साली के बारे में जान लीजिये। मेरी साली का नाम रितिका है। वो 23 साल की एक हसीन और चुलबुली लड़की है। रंग उसका गोरा है, और फिगर 32-28-34 का है। वो मॉडर्न ड्रेस पहनती है, और बहुत फ्रेंडली है। हर जीजा की तरह मुझे भी अपनी साली बहुत सेक्सी लगती है, और मैं भी उसको चोदने का सपना देखता था। कई बार मैंने अपनी साली को इमेजिन करके अपनी बीवी को चोदा था। लेकिन ये मौका मुझे सच में मिलेगा, इस बात का मुझे अंदाज़ा नहीं था।
ये बात 6 महीने पहले की है। मेरी साली का कॉलेज ख़त्म हो चुका था। अब उसको नौकरी चाहिए थी। क्योंकि मेरी नौकरी एक अच्छी कंपनी में है, तो मेरी बीवी ने मुझसे कहा कि मैं अपने ऑफिस में रितिका की नौकरी का कोई जुगाड़ लगाऊं।
हमारे ऑफिस में कुछ दिन बाद इंटरव्यू होने वाले थे। और मैं भी सिलेक्शन पैनल में था। तो मैंने ये बात अपनी साली को बताई, और अप्लाई करने को कहा। उसने वैसा ही किया। मैंने एक बात उसको पहले ही बता दी, कि वो ऑफिस में किसी को ये ना बताए कि हम जीजा-साली थे। उसने भी ठीक कह दिया।
फ़िर इंटरव्यू शुरू हुए, और मैंने रितिका का सिलेक्शन करवा दिया। कुछ ही दिनों में उसकी जॉइनिंग भी हो गई। सिलेक्शन के बाद उसने मुझे और अपनी दीदी को ट्रीट दी। उस दिन उसने गुलाबी स्लीवलेस फ्रॉक पहनी थी, जिसमें वह बहुत खूबसूरत लग रही थी। मन तो कर रहा था कि वहीं नंगी करके उसको चोद दूं।
फिर ऐसे ही चलता रहा। ऑफिस में मेरी नज़र काफी बार उस पर जाती है। कभी-कभी काम के सिलसिले में उसके मेरे केबिन में भी आना-जाना होता था। उसका जिस्म टाइट फॉर्मल कपड़ों में बहुत सेक्सी लगता था।
फिर एक दिन मैंने देखा कि वो ऑफिस के एक लड़के मनीष के साथ हंस-हंस कर बातें कर रही थी। मैंने सोचा ऐसी ही कैज़ुअल बातें होंगी। लेकिन मुझे पता नहीं था कि उनके बीच में अच्छी खासी खिचड़ी पक रही थी।
एक दिन मैं ऑफिस में फ्री था। मेरे केबिन के शीशे से पूरा ऑफिस दिखता है। मैंने कॉफी मंगाई, और वहां खड़े रह कर पीने लगा। साथ में ऑफिस का नजारा देखने लगा। मैंने जब रितिका को देखा, तो वो मुस्कुरा रही थी फोन की तरफ देख कर।
जब तक मैं ये समझ पाता, कि वो क्यों मुस्कुरा रही थी, उसने दूसरी तरफ बैठे मनीष की तरफ देखा। मैं समझ गया कि उसको मनीष ने ही मैसेज किया था। फ़िर वो उसको ना का इशारा करने लगी। तभी मनीष ने उसको भोला सा मुंह बना कर हाथ जोड़ दिया।
उसके हाथ जोड़ने से साफ पता चल रहा था कि वो रितिका को किसी चीज के लिए मना रहा था। लेकिन रितिका ना बोल रही थी। लेकिन किस चीज़ के लिए वो उसको मना रहा था, वो बात अभी तक क्लियर नहीं थी।
तकरीबन 5 मिनट ये मनाने का खेल चलता रहा। फिर रितिका अपनी कुर्सी से उठी, और वहां से चली गई। मनीष भी उसके पीछे-पीछे चला गया। मैं ये जानना चाहता था कि वो दोनों कहां चले गए, तो मैं भी अपने केबिन से बाहर निकला, और उन दोनों के पीछे चला गया।
वो दोनों सीधे ऑफिस लिफ्ट में घुस गए। मैंने सीढ़ियाँ पकड़ी, और उन दोनों के पीछे जाने लगा। हमारी ऑफिस बिल्डिंग सातवीं मंजिल पर है। उन लोगों की लिफ्ट चौथी मंजिल पर जाके रुकी। मैं साइड में हो कर छिप गया। तभी रितिका और मनीष लिफ्ट से बाहर आये। जब वो बाहर आये तो रितिका ने मनीष के होंठ साफ किये।
मनीष के होंठ लाल हुए पड़े थे। साफ पता चल रहा था कि दोनों ने लिफ्ट में किस्स की थी, जिसकी वजह से रितिका के होठों की लिपस्टिक मनीष के होठों पर लगी थी। तभी रितिका लिफ्ट में वापस जाने लगी। लेकिन मनीष ने उसका हाथ पकड़ कर खींचा, और उसको अपनी बाहों में भर लिया। वो उसको दोबारा किस्स करने लगा। रितिका भी उसका साथ देने लगी।
रितिका ने हमें दिन फॉर्मल स्कर्ट और शर्ट पहनी हुई थी। मनीष रितिका को किस्स करते हुए, उसकी स्कर्ट के ऊपर से उसकी गांड दबा रहा था। रितिका भी इसका मजा ले रही थी। मैं समझ चुका था कि उन दोनों में सॉलिड लफड़ा चल रहा था। अपनी साली को किसी और की बाहों में देख कर मेरी सुलग रही थी। लेकिन मेरा लंड पूरा तन गया था।
फिर उनकी किसिंग टूटी। फिर मनीष ने रितिका का हाथ पकड़ा, और उसको इमरजेंसी एग्जिट वाली सीढ़ियों पर ले गया। रितिका भी बिना ना-नुकुर किये उसके साथ चल दी। अब मैं दरवाजे के शीशे से अंदर देखने लगा। मनीष ऊपर वाली सीढ़ी पर खड़ा था, और रितिका 3 सीडियां नीचे खड़ी थी।
अब रितिका का मुंह मनीष की कमर तक था। फिर मनीष ने अपनी पैंट खोली, और अंडरवियर नीचे करके अपना लंड बाहर निकाल लिया। उसका लंड 6 इंच का था, लेकिन मेरे लंड से छोटा था। लंड पूरा तन्ना हुआ था। रितिका ने देखा ही लंड हाथ में लिया और उसको हिलाने लगी।
फ़िर देखते ही देखते उसने अपना लंड अपने मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी। मुझे अब रितिका मेरी साली नहीं, कोई रंडी लग रही थी। क्योंकि वह किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह मनीष को ब्लोजॉब दे रही थी।
कुछ देर वो पूरे जोश से मनीष का लंड चूस रही है। उसका थूक से लंड पूरा तरह से चिकना हो गया था। मनीष भी पूरे मजे में था। फ़िर रितिका ने लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और मनीष ने जिस सीढ़ी पर खड़ा था, वहाँ पर आ गई।
दोस्तों आज की कहानी में इतना ही। आगे की कहानी अगले हिस्से में पढ़िएगा। फीडबैक [email protected] पर दे।