पिछला भाग पढ़े:- ऑफिस में उर्मिला की चुदाई-1
ऑफिस सेक्स स्टोरी अब आगे-
उर्मिला के स्तनों को देखते हुए मैं कहां खो गया मुझे पता ही नहीं चला। मैं ये भूल गया कि थोड़ी देर पहले उसने मेरे हाथ को खुद के स्तन से अलग हटा दिया था। मैं मन ही मन उसे देखता हूँ उसकी चुदाई की कल्पना करने लगा। मेरी आँखें उसके स्तनों पर टिकी हुई थी, और मैं उसके ख्यालों में डूबा हुआ था। तभी अचानक उसने मेरी तरफ देख कर आवाज लगाई-
उर्मिला: सर, लंच का समय है।
मैंने जैसा कुछ सुना ही नहीं। फिर उसने दोबारा कहा: अरे सर, क्या देख रहे हैं?
मैंने कहा: कुछ नहीं। मैं कुछ सोच रहा था।
उसने पूछा: क्या सोच रहे हैं सर?
मैंने मन ही मन जवाब दिया: तुम्हें चोदने के बारे में सोच रहा हूं।
लेकिन मेरी ये बात उसके मुँह पर कहने की हिम्मत नहीं हुई।
मैंने उससे कहा: कुछ नहीं। बॉस ने कुछ काम दिया है उसके बारे में सोच रहा था।
उसने कहा: सर आप काम बाद में कर लेना, पहले चल के लंच कर लेते हैं। मुझे बहुत भूख लगी है।
फिर हम लंच करने चले गए। उस दिन दोपहर के भोजन में सब्जी के साथ नींबू का मीठा अचार लाई थी। उसने मुझे दिया और कहा-
उर्मिला: सर टेस्ट करके बताओ कैसा है।
मैंने टेस्ट लिया। मुझे वो अचार बहुत अच्छा लगा, तो मैंने कहा कि बहुत ही स्वादिष्ट अचार है। उसने बताया कि वो अचार उसने बनाया था। मुझे लगा उसका मूड ठीक था। मुझे फिर हरकत सूझी। मैंने सोचा कि अब इस दोस्ती को यहां से आगे कैसे ले जाऊं। तो मैंने उससे कहा-
मैं: उर्मिला तुम्हारा मोबाइल नंबर लेना है।
उसने कहा: क्यों सर? आप नंबर का क्या करोगे? अपन रोज़ तो ऑफिस में मिल ही लेते हैं। वैसे भी मेरे पति बहुत शक्की स्वभाव के इंसान हैं। मुझे खेद है सर। मैं आपको अपना नंबर नहीं दे सकती।
मेरा तो जैसा दिल ही टूट गया।
मैंने रिक्वेस्ट करते हुए कहा: प्लीज यार, करो ना!
उसने कहा: नहीं सर। मेरे पति ने मना किया है। मुझे माफ़ करें!
अब मुझे लगा कि यहाँ मेरी दाल गलने वाली नहीं थी, और मैं चुप-चाप अपना लंच करके उठ गया। पर मैं इतनी जल्दी हार मानने वालो में से कहा था। थोड़े दिन तक मैंने उससे ज्यादा बात करना बंद कर दिया। ऑफिस के काम से रिलेटेड ही बात करता था। लंच के टाइम पर भी ज्यादा बात नहीं करता था।
फिर कुछ ही दिनों में उसको भी ये महसूस होने लगा। वो बहाने से मुझे बुलाती थी, कि मैं उससे हस के बात करुं। लेकिन मैं तो बस अपना काम करके वहां से हट जाता था। इसी तरह कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। फिर 1 दिन अचानक उसने मुझे लंच पे कहा-
उर्मिला: सर, आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?
मैंने अंजान बनते हुए पूछा: क्या कर रहा हूं?
उर्मिला बोलीं: सर आपको पता है मैं क्या बोलना चाहती हूं।
मैंने एक्टिंग करते हुए कहा: नहीं, मुझे तो नहीं पता।
उर्मिला: सर, आप क्या करोगे मेरा नंबर लेके?
मैंने कहा: मुझे अब आपका नंबर नहीं चाहिए।
फिर थोड़ा नाटक करने के बाद मैं मान गया और उसने मुझे अपना नंबर दे दिया। उसने मुझे बताया कि उसके पति बहुत शक्की किस्म के थे, इसलिए वह मेरा नंबर किसी लड़की के नाम से सेव करेगी।
धीरे-धीरे हमारी दोस्ती गहरी हो गई। हम अक्सर व्हाट्सएप पर चैटिंग करते हैं। मुझे पता चला कि वो अपने पति को पसंद नहीं करती थी। उसने सिर्फ अपने माता-पिता की ख़ुशी के लिए उससे शादी की थी। उसकी बातों से मुझे लगता था कि उसका पति अच्छे से संतुष्ट नहीं होता था। वो सेक्स की भूखी लगती थी, पर उसने मुझे कभी कहा नहीं।
वो अक्सर मुझे देर रात मैसेज कर देती थी। जो मुझे थोड़ा अजीब लगता था। वो कहती थी उसके पति सो गए और उसे नींद नहीं आ रही थी, इसलिए वो मैसेज कर रही थी। लेकिन मैं उससे रात में कैसे बात करता?
मैं तो खुद शादी-शुदा था। एक दिन मुझे अपना मौका मिल गया। मैंने सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी वो मुझसे सेट हो जाएगी। लेकिन प्यार की भूखी औरत प्यार के लिए कुछ भी कर सकती है।
तो हुआ यू कि हम दोनों हमेशा की तरह ऑफिस में काम कर रहे थे। मैं उसे कंप्यूटर पे कुछ बता रहा था। मैं हमेशा की तरह उससे थोड़ा चिपक के बैठा हुआ था। मैंने सोचा यही मौका था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया।
वो बहुत गरम लग रही थी। मुझे अलग ही आनंद की अनुभूति हो रही थी। वो मजा मैं बता नहीं सकता। वो शायद समझ गई थी, पर ऐसा शो कर रही थी जैसे उसे कुछ पता नहीं हो। उसके चुप रहने से मेरी हिम्मत और बढ़ गई, और मैं अपना हाथ उसकी जाँघों पर फेरने लगा।
उन्होंने एक्टिंग करते हुए कहा: सर, आप क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा: उर्मिला, मैं तुमसे प्यार करता हूँ!
वो शॉक हो गई और कहने लगी: नहीं सर, ये गलत है। आप और मैं हम दोनों शादी-शुदा हैं। ये सही नहीं है।
पर मैं कहां रुकने वाला था।
मैंने कहा: उर्मिला, मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं। जब से तुम्हें देखा है तब से मैं पागल सा हो गया हूं। कृपया मुझे मत रोको।
थोड़ा नाटक करने के बाद वो मान गई और मैं तो जैसी ख़ुशी के मारे पागल ही हो गया। फिर मैंने उसे कस के गले लगा लिया। मैं उसके होठों को किसिंग करने लगा और वो एन्जॉय करने लगी। हम दोनों ने खूब अच्छे से स्मूच किया।
क्या रसीले होंठ थे, और बीच-बीच में मैं उसका दूध भी दबा रहा था। पर फिर उसने मुझे रोक दिया और बोली-
उर्मिला: बस, कोई आ जाएगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी।
फिर हम अपनी जगह पर बैठ के काम करने लगे। लेकिन मेरा मन तो उर्मिला में था। मैंने फिर से मस्ती शुरू कर दी, और वो भी कुछ नहीं बोल रही थी। मैंने साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया और उसके नंगे बदन पे हाथ फेरने लगा, और वो भी मजे लेने लगी। आज मेरी मनोकामना पूरी होने वाली थी।
जिस दिन का मुझे कई महीनों से इंतजार था, वो आने ही वाला था। हम दोनों पूरी तरह हवस में डूबे हुए थे। तभी अचानक हमें कुछ आवाज आई। हमें लगा शायद हमारे बॉस आ गए। हमने खुद को ठीक किया, और बॉस के अंदर आने से पहले ही काम करने की एक्टिंग करने लगे।
शुकर है कि हम ऐसी हालत में नहीं थे कि बॉस को कुछ पता चलता। हम दोनों बाल-बाल बच गये। लेकिन ये जो कुछ हम दोनों के बीच जो हुआ था, उसने हम दोनों में हवस की आग भड़का दी थी।
उस दिन के बाद हमें मौका नहीं मिला। लेकिन उसके ठीक दो दिन बाद ही हमने मिल के खुल कर चुदाई की। ये सब कैसे हुआ, अगर आप सच में जानना चाहते हैं, तो मुझे मेल करके बताएं कि आपको मेरी कहानी कैसी लगेगी।
अगर मुझे कम से कम 10 मेल आएंगे तो ही मैं वो कहानी आप सबको सुनाऊंगा। मुझे आप सभी के मेल का इंतज़ार रहेगा।
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