नमस्कार पाठकों, यह मेरा पहला सच्चा सेक्स अनुभव है जो मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ। आशा है आपको पसंद आएगा। अब सीधी कहानी पर आते हैं।
मेरी फैमिली में हम तीन लोग थे, मेरे मम्मी-पापा और मैं। ये कहानी कोविड के समय की है। मैं सेकन ईयर का छात्र था जब कोविड की वजह से लॉकडाउन लगा। हम सब घर पर ही होते थे। मेरी भी ऑनलाइन क्लास होती थी, और पापा का भी वर्क फ्रॉम होम था। हम लोग सब लॉकडाउन नियमों का पालन करते थे।
फिर दूसरी लहर के समय पापा की कोविड से मौत हो गई। मम्मी और पापा में बहुत प्यार था, और उनकी सेक्स लाइफ भी अच्छी थी। मेरी मम्मी की उम्र 40 साल थी और फिगर भी कमाल का था। मोटे स्तन, पतली कमर, गांड निकली हुई जिसे कोई देख ले तो दीवाना हो जाए।
मैंने मम्मी को कभी गलत नज़र से नहीं देखा था। पापा की मौत के बाद हम अकेले हो गये थे। मम्मी भी बहुत अकेली महसूस करती थी, और हमेशा उदास रहती थी। मैंने घर का खर्चा चलाने के लिए जॉब जॉइन कर ली कुछ, जो वर्क फ्रॉम होम ही था। तो हम लोग ज्यादा टाइम घर पर भी गुजारते थे।
मैं मम्मी को खुश करने के लिए मम्मी को मजाक सुनाता हूं। कुछ समय तो वो खुश हो जाती है, लेकिन फिर उदास हो जाती है। मुझे समझ नहीं आ रहा था, कि मम्मी को कैसे खुश करूँ। एक शाम के बाद मम्मी अकेली बालकनी में बैठी थी। जब मैं पास गया तो रोने की आवाज सुनी। मैं मम्मी के पास गया, और उनको पूछा क्या हुआ।
मम्मी: कुछ नहीं बेटा।
मैं: लेकिन रो क्यों रही हो आप?
मम्मी: कुछ नहीं बेटा, तेरे पापा की याद आ रही है।
मैं: मैं हूं ना आपके पास। प्लीज रोना बंद करो। वरना मुझे भी रोना आ जाएगा।
मम्मी हमेशा साड़ी पहनती थी, जिसका पेट खुला होता था, कमर सेक्सी लगती थी, और स्तन मानो बाहर आने को बेताब होते थे।
मम्मी: तेरे पापा की कमी बहुत खुलती है (और फिर रोने लगी)।
मैंने मम्मी को गले लगाया, और बोला: मैं आपके पास हूं ना आपका ख्याल रखने के लिए।
जब मैंने मम्मी को गले लगाया, तो मेरे जिस्म में एक अलग तरह का करंट लगा। मेरी छाती मम्मी के स्तन से स्पर्श हो रहे थे। मम्मी ने भी मुझे गले लगा लिया। शायद बहुत दिनों से गले नहीं लगाया था पापा को, इसी वजह से खुद को रोका नहीं गया। मेरे दिमाग में अभी तक कोई गलत ख्याल नहीं था। लेकिन क्या गले लगाने के बाद से मुझे एक अजीब लग रहा है। अब मम्मी ने रोना बंद किया और बोली-
मम्मी: बेटा तू मुझे छोड़ कर मत जाना।
मैं: नहीं जाउंगा, कभी नहीं जाउंगा।
मम्मी: वादा करो।
मैं: पक्का वाला वादा।
मम्मी: अच्छा मैं तेरे लिए चाय लाती हूं। साथ चाय पीते हैं आज।
मैं: जी।
मैं मम्मी के गले लगना याद कर रहा था, और मेरा लंड बिल्कुल रॉड के तरह तन गया था। थोड़ी देर बाद मम्मी चाय ले कर आई। मेरा लंड अभी भी सलामी दे रहा था। शायद मम्मी ने नोटिस किया, लेकिन कुछ बोली नहीं। फिर हम चाय पीने लगे, और मैं मम्मी को देख रहा था। मम्मी बोली-
मम्मी: क्या हुआ, क्या देख रहा है?
मैं: कुछ नहीं।
मम्मी ने बोला: बेटा बताओ, शर्माओ मत।
मैं बोला: आप बहुत खूबसूरत हो।
मम्मी: तू बिगड़ गया है। मम्मी से ऐसी बात करते हैं?
मैं: मैंने कुछ ग़लत बोला क्या?
मम्मी कुछ देर बाद बोली: गलत नहीं बोला।
मैं: मैं जानता हूं पापा की मौत के बाद आप बिल्कुल अकेली हो गई हो, और बिल्कुल चुप-चाप रहती हो। मुझसे कुछ शेयर नहीं करते।
मम्मी: नहीं बेटा ऐसी बात नहीं है।
मैं: फिर इतनी उदासी क्यों रहती हो?
मम्मी: तेरे पापा की कमी है।
मैं: मैं हूं ना पापा की कमी दूर करने के लिए।
मम्मी: हां वो तो है, लेकिन कुछ कमी तू पूरी नहीं कर सकता।
मैं समझ गया था कि मम्मी क्या बोलना चाहती थी। लेकिन जान कर पूछ-
मैं: कोन सी कामी?
मम्मी: तू नहीं समझेगा।
मैं: तुम समझोगी तो समझ जाऊँगा।
मम्मी: अरे बेटा (शर्मा कर), औरत की कुछ ज़रूरतें होती हैं।
मैं (अंजन बन कर): क्या जरूरतें होती हैं?
मम्मी: अभी तू नहीं समझेगा। जब तेरी शादी होगी, तब खुद समझ जाएगा।
मैं: नहीं मुझे आप समझो।
मम्मी (टॉपिक को चेंज करते हुए बोली): बेटा अभी नहीं, अभी खाना बनाना है।
और वो चली गई। मुझे ये सब अजीब तो लग रहा था, लेकिन एक अजीब सी फीलिंग भी हो रही थी, जो अच्छी लग रही थी। मैंने सोच लिया आज कोशिश करूंगा। अगर मम्मी मान गई तो ठीक, और इस मम्मी की ज़रूरत भी पूरी हो जाएगी, और मम्मी खुश भी रहेगी।
थोड़ी देर बाद मुख्य रसोई में पानी पीने के बहाने से गया। मम्मी रोटी बना रही थी, और पूरा जिस्म पसीने से भीग चुका था। मम्मी ने पल्लू को कमर में सामने से रखा था। इस स्तन का आकार और भी बड़ा और आकर्षक दिख रही थी।
मेरा तो ये देखता ही लंड तन गया, और मैं मम्मी की गांड को टच करता हुआ गुजरा। लेकिन माँ ने कुछ नहीं बोला, और एक स्माइल दी। इसका मतलब ग्रीन सिग्नल था उनकी तरफ से। अब हमने रात का खाना खाया, और टीवी देखने लगे। फ़िर मम्मी चली गई अपने कमरे में।
मैं थोड़ी देर बाद गया तो देखा मम्मी रो रही थी। मैं मम्मी के कदमों में बैठ गया, और हाथ पकड़ कर सहलाने लगा। मम्मी को मैं चुप करने लगा। लेकिन मम्मी और भी रोने लगी। मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करू।
मैं: मम्मी प्लीज़ आप रोना बंद करो। मैं हूं ना, सब ठीक हो जाएगा।
मम्मी ने कुछ नहीं बोला, बस रोटी जा रही थी। मैं फिर उठा, और मम्मी को गले लगाया और बोला-
मैं: मैं हूं ना, सब ठीक हो जाएगा।
मम्मी रोटी हुई बोली: तेरे पापा की बहुत याद आ रही है।
अब मम्मी बिल्कुल एक छोटी बच्ची की तरह मुझसे चिपक गई। इससे उनके जिस्म की गरमी मुझे महसूस हो रही थी।
मम्मी: बेटा तू हमेशा मेरे साथ रहना।
मैं: जी मैं हमेशा आपके साथ ही रहूंगा।
अब मैं मम्मी की पीठ को सहला रहा था, जिसकी शायद मम्मी अब गरम हो रही थी। मैंने सोचा ट्राई करना चाहिए, तो मैंने मम्मी को एक किस्स किया गाल पर। फिर दूसरे गाल पर। मम्मी ने कुछ नहीं बोला। फिर मैंने उनको गले लगा लिया। शायद मम्मी ये भूल गई थी, कि मैं बेटा था उनका।
मम्मी की सांसें तेज़ हो रही थी, और स्तन मेरी छाती से बिल्कुल चिपके थे। और दूसरी तरफ मेरा लंड पैंट से बाहर आने को बेताब था।
अब मैंने मम्मी की आँखों में देखा, जो वासना से भर चुकी थी। फिर उनके होठों पर किस्स किया। दोस्तों, ये मेरा पहला लिप किस्स था। मैं बता नहीं सकता कि मुझे कैसा महसूस हो रहा था। अब मम्मी ने भी मुझे किस्स करना शुरू कर दिया। 5-8 मिनट हमने एक-दूसरे को किस्स किया।
अब मम्मी की सांसे और तेज़ हो गई और वो पूरी तरह गरम हो गई थी। क्योंकि बहुत दिनों से सेक्स नहीं किया था मम्मी ने।
मैं आगे बढ़ा और चुंबन करते हुए एक हाथ से उनके स्तनों को सहलाने लगा। अब मम्मी कराहने लगी, और मेरा दूसरा हाथ उनके कमर से होता हुआ गांड को सहलाने लगा। हम ऐसा करते हुए अपने रिश्ते को भूल चुके थे।
मैंने अब मम्मी का पल्लू हटा दिया, और स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से दबा रहा था। मम्मी की आँखें बंद थी, और वो कराह रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने मम्मी की साड़ी खोल दी। अब मम्मी मेरे सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी। मैंने जब देखा तो लगा मानो कोई रूप की देवी प्रगट हुई हो, जो मुझे अपने अंदर समाना चाहती हो।
दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में। आप लोगों को बताऊंगा कि किस तरह हमारा दो जिस्म एक जान बना। वो भी तब, जब आप लोगों को ये कहानी अच्छी लगे तो। आप अपना फीडबैक मुझे मेल कर सकते हैं, और किसी को सेक्स करना चाहते हैं, तो मुझे मेल कर सकते हैं।