लाइब्रेरियन के साथ लेस्बियन सेक्स (Librarian ke sath lesbian sex)

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नमस्ते, मेरा नाम ब्रिस्टी है। ये कहानी मेरी लाइफ की पहली सेक्स स्टोरी है। मैं कभी भी लेस्बियन नहीं थी, जब तक मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ नहीं तब तक। क्या हुआ, कैसे हुआ, सब कुछ पढ़ें आगे की कहानी में।

मैं अपनी 12वीं ख़तम करके जूलॉजी में प्रथम वर्ष में भरती हुई हूं। मैं देखने में बहुत गोल-मटोल हूं। बचपन से ही मेरी जो चूचियां है, बहुत बड़ी है (36-32-34)। मेरी ऊंचाई 5’3″ है, और मैं हर समय बैकलेस कुर्तियां और बैकलेस चूड़ीदार पहनती हूं। क्योंकि मेरी पीठ चौड़ी है, तो मुझे ऐसे कपड़े अच्छे लगते हैं। अब कहानी पर आती हूँ-

जब मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया, तब मेरी इतनी खास कोई दोस्त नहीं थी। मेरा ज्यादा समय मेरे लड़के दोस्तों के साथ ही कट जाता था। पर उनकी कोई ना कोई गर्लफ्रेंड थी, और हर समय मुझे उनको चोदने की कहानियां सुननी पड़ती थी।लेकिन मुझे कभी किसी से आकर्षण नहीं हुआ।

कुछ दिन कॉलेज जाने के बाद मैं लाइब्रेरी गई एक किताब लेने। तब मुझे पहली बार एक लड़की को देख कर आकर्षण महसूस हुआ। वो लड़की हमारी लाइब्रेरियन (सुष्मिता) थी। वो बिल्कुल हॉट थी देखने में। लंबाई 5’6″, बॉडी (34-32-36) थी।

वो उस दिन साड़ी पहनने हुई थी। ब्लाउज इतनी ज्यादा टाइट लग रही थी, जैसे अभी चूचियां बाहर आ जाएंगी। मैंने उस दिन उसको हैरान होके देखा। फिर मुझे सुष्मिता ने बुलाया और पूछा-

सुष्मिता: ब्रिस्टी क्या हुआ? और कुछ किताबें चाहिए?

मैं बोली: नहीं मैडम, आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

पर उसे थोड़ा समझ आ गया था कि मैं उसको घूर रही थी। फिर मैं बाहर आ गई, लेकिन मेरे घर जाने के बाद भी मेरे दिमाग में सिर्फ उनके स्तन और उनका चेहरा घूम रहा था।

फिर उन्हें देखने मैं डेली लाइब्रेरी जाने लगी। वो रोज़ साड़ी पहनती थी, डीप कट ब्लाउज़, और आधी चूचियां बाहर। उनकी कमर पूरी देखने को मिलती थी।

एक दिन मैं कॉलेज में बैठी थी। क्योंकि मैं थोड़ी गोल-मटोल हूं, तो मुझे सभी लड़के छेड़ते थे। मैं उस दिन रो पड़ी गार्डन में। फिर सुष्मिता ने मुझे रोते हुए देख लिया। वो मेरे पास आई और उसने मुझसे पूछा-

सुष्मिता: ब्रिस्ती क्या हुआ तुम्हें? रो क्यों रही हो तुम?

मैं: कुछ नहीं मैडम। मैं दिखने में ख़राब हूं, तो मुझे ये सब चिढ़ाते है।

सुष्मिता: ऐसा नहीं है बाबू। तुम बिलकुल भी ख़राब नहीं हो। तुम आओ मेरे साथ।

फिर मैं उनके साथ लाइब्रेरी में चली गई। वो दोपहर का वक्त था। सब लोग लंच पर गये थे। फिर मैम ने मुझे कहा-

मैडम: आओ मेरे पास।

मैं उनके पास गई, और उन्होंने मुझे गले लगाया। मेरा सर उनके स्तन में था, और मैंने नोटिस किया कि वो मेरी ड्रेस के ऊपर से पीठ को सहलाते हुए मुझे चुप करा रही थी। हमें वक्त मुझे कुछ नहीं सूझा, और मैंने सीधे उन्हें किस्स कर दिया।

उन्होंने शुरू में मुझे ढकेल दिया। मैं उनको ऐसा करने पर शॉक लगा था। मैंने सोचा, कि ये क्या किया मैंने। फिर मैंने देखा कि वो गई, और लाइब्रेरी का गेट बंद किया अंदर से। फिर उन्हें दरवाजे के पास ही खड़े हो कर अपनी साड़ी के आंचल को नीचे गिरा दिया, और मुझे बुलाया।

मैं गई उनके पास जैसे ही, वो मुझे पकड़ के ज़ोर से किस्स करने लगी, और मैं भी साथ में साथ देके किस्स कर रही थी। फ़िर उन्हें मेरे हाथ पकड़ के उनके चूचों के ऊपर रखे, और बोली-

मैडम: ज़ोर से दबा बाबू।

मैं थोड़ी डर गई। फिर उन्होंने मुझसे पूछा-

मैडम: तुमने पहले कभी सेक्स किया है?

मैं बोली: नहीं मैडम, मैंने नहीं किया।

फ़िर वो बोली: मैं सिखाती हूँ।

उसके बाद वो मेरी चूड़ीदार को खोलने को बोली। मैंने भी उतार दी। फिर वो मुझसे बोली-

मैडम: पीछे की तरफ घूमो।

मैं भी घूम गयी। फिर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया, और मेरे बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। फिर वो पीछे से मेरे स्तन मसलती गई, और मेरी गर्दन पर चुंबन करती गई। मैं पूरे होश खो बैठी थी।

फिर मैंने भी उनका ब्लाउज उतारा, और उनके स्तनों को दबा रही थी, और किस्स कर रही थी। फ़िर उन्होंने बोला-

मैडम: मेरे स्तनों को चूसो।

मैंने फिर अपना सर नीचे किया, और उनकी चूचियां चूसने लगी। मैं ज़ोर-ज़ोर से दांतों से पकड़ के चूसने लगी, और एक बूब को मसल रही थी। फिर हम दोनों ही पूरे नंगे हो गए, और वो मेरी गांड में थप्पड़ मार रही थी।

मैं उनकी चूचियां चूस रही थी। फिर उन्हें मुझे टेबल पर लिटाया, और मेरी चूचियों को चूसने लगी। फिर वो मेरे पेट और मेरी नाभि में किस्स करने लगी, और एक हाथ मेरे जोड़ों के बीच में से चूत पर ले गई। अब वो मेरी चूत को सहला रही थी।

मुझसे अब रहा नहीं गया। मैंने उनके सर को नीचे ढकेल दिया, ताकि वो चाटे अच्छे से मेरी चूत को। और वो तभी नीचे गई, और मेरी चूत में अपनी जीभ रख कर चाटने लगी। मैं अब सिसकारियां ले रही थी।

मैं: आअहह आअहह आआह।

और साथ में मैं उनके सर को दबा के रख रही थी। मैं ज़ोर-ज़ोर से आह आह किये जा रही थी, और फिर उन्हें एक उंगली डाल दी मेरी चूत में। क्योंकि मैं वर्जिन थी, तो मैं ज़ोर से चिल्लाई आअहह करके। वो फिर जीभ को चूत के पास रखी, और चाटने लगी। फिर उन्हें दोबारा उंगली डाल दी। इस बार मुझे अच्छा लगने लगा, और मैं आह-आह करने जा रही थी।

फ़िर वो क्लिट को चूसने और चाटने लगी। वो चाटती गई, और मैंने पानी छोड़ दिया। फिर मैंने उनकी चूत में एक उंगली डाली, और उनकी योनि के ऊपर जीभ रखी। वो पागल हो रही थी, और मैं उन्हें तड़पा रही थी सिर्फ जीभ को टच करवा के रख रही थी। फ़िर वो ज़ोर से बोली-

मैम: साली रंडी, चोद ना मुझे अपनी जीभ से।

फिर मैं उनकी चूत को चाट गई, और चूसने लगी क्लिट को और दो उंगलियों को अंदर-बाहर कर रही थी। थोड़ी ही देर में वो आह आह करती-करती झड़ गई, और मैं उनके साथ लिपट के टेबल में ही सो गई। फिर चौकीदार आया, और उसने दरवाजा खटखटाया। तब हम सब पहन के बाहर आये।

दोस्तों ये मेरी पहली लेस्बियन सेक्स स्टोरी है।

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