हरामी बिहारी माँ और नालायक बेटा-2 (Harami bihari maa aur nalayak beta-2)

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पिछला भाग पढ़े:- हरामी बिहारी माँ और नालायक बेटा-1

तो चलिए फिर आगे की सेक्स कहानी अब शुरू करते हैं।

मैं अपने घर पर अकेला बैठा हुआ था, क्योंकि अभी आदित्य और शुभम अपने अपने घर चले गए पैसे लेने के लिए, ताकि आज शाम को हम उस मिल्फ़ रंडी को चोद सकें और उसके मजे ले पाए। मगर मेरे दिमाग में यही बात चल रही थी कि कहीं वह औरत गलती से भी मेरी माँ ना निकले। वरना सब बर्बाद हो जाएगा। और ये ख्याल मेरे दिमाग से जा ही नहीं रहा था। यहीं सोचते-सोचते कब शाम हो गई ये मुझे पता ही नहीं चला। तभी मुझे मेरे दोस्त शुभम का फोन आया।

शुभम: अबे रंडवे क्या कर रहा है?

मैं: कुछ नहीं मादरचोद बता फ़ोन क्यों किया?

शुभम: ओये लवड़े, टाइम देख उस रंडी को कोठे पर जाकर चोदना भी तो है। और वे भी मादरचोद तो आज तू बनेगा।

वो मेरे मजे ले रहा था क्योंकि मैं ये सोच कर डर रहा था कि कहीं वो रंडी मेरी माँ ना निकल जाये।

मैं: ऐसा नहीं होगा। मुझे भरोसा है अपनी मां पर। वो ऐसा काम कभी नहीं करेगी।

शुभम: अच्छा चल अब आजा आदित्य के घर। वहां से कोठे पर जाएंगे और अपने लंड को तैयार रखना। मालूम पढ़ा उस रंडी के सामने तेरा खड़ा ही नहीं हुआ लंड।

वो जान-बूझ कर मेरी टांग खींच रहा था, क्योंकि मैं डर रहा था।

मैं: भाई जिस हिसाब से उस रंडी के बारे में सुना है साली को देखते ही लंड खड़ा हो जाएगा। चल मैं अब निकल रहा हूं आदित्य के घर के लिए।

मैंने पैसे ले लिए और मैं निकल गया। वहा पर आदित्य और शुभम मेरा इंतजार कर रहे थे। उन दोनों के हाथ में एक गोली थी। जब मैंने पूछा कि ये क्या हैं तो उन्हें बताया कि-

आदित्य: भाई इसे खाने से स्टैमिना बढ़ता है और सेक्स में बहुत ज्यादा मजा आता है। कोठे में पहुंचते ही अपन लोग ये खा लेंगे और उस रंडी की चुदाई शुरू कर देंगे।

हम सब एक ऑटो बुक करके कोठे के पास वाले इलाके में पहुंच गए और चुप-चाप अपना मुंह छुपाए हुए कोठे के अंदर चले गए। वहां पर हमने उस रंडी को कॉल लगाया और उससे पूछा कि वो कहा थी। तो उसने हमें बताया कि वो कोठे के अंदर ही थी। सबसे ऊपर वाले रूम में वो हमारा इंतजार कर रही थी। सबसे ऊपर वाला रूम सबसे ज्यादा बड़ा था जिसमें चार लोग आराम से सेक्स कर सकते थे। शायद इसलिए वो उस रूम में थी ऐसा मुझे आदित्य ने बताया।

फिर हम जल्दी से अंदर घुस गये। आदित्य जाकर एक बुड्ढी आंटी से बात करने लगा। हमने सुना नहीं वो क्या बोल रहा था पर शायद वो उसको सब कुछ बता रहा था। फिर उस बूढ़ी आंटी ने हमें ऊपर जाने दिया और हमसे पैसे ले लिए। फिर हम ऊपर जाने लगे। ऊपर पूछते ही हमने देखा कि दरवाजा तो कमरे का पहले से ही खुला हुआ था। तो ये देख कर हम तीनों बेशरमों की तरह बिना दस्तक किए अंदर घुस गए।

हमारे सामने का नज़ारा काफ़ी हसीन था। वो रंडी पूरी नंगी लेटी हुई थी। हमें बस उसकी गांड दिख रही थी क्योंकि वो उलटा लेटी हुई थी और उसका मुँह दूसरी साइड में था। ये देख कर हम तीनों का लंड हमारे पैंट के अंदर खड़ा हो गया। उसकी गांड बहुत ज्यादा ही बड़ी और मोटी थी इतनी बड़ी गांड तो मैंने बस सेक्स वीडियो में ही देखी थी।

तभी अचानक से वो खड़ी हुई और पलट गई। उसका चेहरा देख कर मैं और मेरे सारे दोस्त शॉक हो गए। क्योंकि वो मेरी माँ ही थी और मेरा डर सही था और मैंने सही अंदाज़ा लगाया था।

ये देख कर मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं ख़ुशी से उन्हें चोद डालू या फिर गुस्से में घर चला जाऊँ। ये सब मेरे लिए बहुत अजीब था। मेरी मां भी हमें देख कर डर गई और अपने कपड़ों से खुद के शरीर को छुपाने लगी।

माँ: अबे नालायक तू यहाँ क्या कर रहा है?

मैं: मम्मी ये तो मुझे आपसे पूछना चाहिए। आप यहां पर ऐसे नंगी क्यों हो? क्या आप एक रंडी हो?

माँ: हां।

मैं: पर आपने ये रास्ता क्यों चुना?

माँ: तेरी नालायक हरकतों की वजह से। तू सारा पैसा बर्बाद कर देता था और तेरे पापा की मौत के बाद जब से ही मुझे काम मिलना बंद हो गया था और तेरी हर ज़िद को पूरी करने के लिए और तुझे खुश रखने के लिए मेरे पास बस यही एक रास्ता था।

शुभम: आंटी मगर आपको गैर मर्दों से चुदवाने में मजा आता है क्या?

मेरी माँ ये सुन कर शर्मीली हैं और बिंदास बोलती हैं: हां, जब से इसके पापा मारे हैं, तब से ही मैं चुदाई की भूखी हूं। एक तो साला ये बढ़ती उमर के साथ मेरी हवस भी बढ़ रही है।

शुभम: तो आंटी आप हमसे चुदवाओ ना? हमने आपको पैसे तो हमने भी दे दिये हैं।

माँ: पर ये ग़लत है। तुम मेरे बेटे के दोस्त हो। तुम भी मेरे बेटे जैसे ही हो।

आदित्य: हां आंटी, मगर आप ही सोचिए कि अगर मैंने बाहर के लोगों को बता दिया कि आप एक रंडी हो तो समाज में आपकी इज्जत का क्या होगा?

मेरी मां ये सुन कर चुप हो गई और वो समझ गई कि अब उनको उन दोनों से चुदवाना ही पड़ेगा और उनके पास इसके अलावा कोई भी रास्ता नहीं था।

मैं: भाई वो मेरी माँ है। क्या तुम दोनों मेरी माँ के साथ…

आदित्य: भाई अब इसमें हम भी क्या कर सकते हैं? तेरी माँ एक तो कड़क माल है। साली के गांड को देखने के बाद तो इसको चोदने का मौका में अपने हाथों से नहीं जाने दूंगा। वैसे भी भाई तू ही सोच तेरी माँ कितने मर्दों से पहले से ही चुदवा चुकी है और दो से चुदवा लेगी तो क्या बिगाड़ जाएगा?

माँ: बेटा तू यहाँ से चल जा।

शुभम: आंटी इसका मतलब आप मुझसे और आदित्य से चुदवाने के लिए तैयार हो क्या?

माँ: हां बेटा, मैं तैयार हूं। बस मैं प्रतीक से नहीं चुदवा सकती हूं, क्योंकि वह मेरा बेटा है। और अगर तुम दोनों मुझे चोदने के पैसे दे रहे हो तो मैं मना नहीं कर सकती हूं।

मैं ये सुन कर पूरे गुस्से में आ गया और ज़ोर से बोला: अबे रंडी, तुझे चोदने के पैसे तो मैं भी दे रहा हूँ फिर तू मुझसे चुदवाने के लिए तैयार क्यों नहीं है?

मेरी माँ मुझे देखा और कहा: चुप-चाप घर चला जा। ये सब तेरी गलती है। आज तेरी वजह से मैं एक रंडी हूं। अगर तू इस दुनिया में नहीं होता तो बहुत अच्छा होता।

शुभम ये सुन कर हंसता है और कहता है: प्रतीक आज तेरी वजह से हमारा फायदा हो गया हमें एक मिल्फ़ आंटी की चूत मारने का मौका मिल गया।

आदित्य: शुभम बिल्कुल सही कह रहा है। पर आंटी पैसे तो प्रतीक ने भी दिए हैं। मैं क्या कहता हूं कि आप प्रतीक के सामने हमसे चुदवाओ। इसके हम ज्यादा पैसे देंगे?

मेरी मम्मी थोड़ी देर सोच कर बोली: हां पैसे के लिए तो कुछ भी।

ऐसा कह कर मेरी मां अपने कपड़ों को नीचे गिरा देती हैं और पूरी नंगी हो जाती हैं। अब उनके बड़े-बड़े सफ़ेद चूचे और उनकी झाट से भरी हल्की सी गुलाबी चूत हमारी आँखों के सामने थी क्योंकि वो अपनी टांगें खोलके बेशर्मों की तरह खड़ी थी।

आगे की कहानी अगले भाग में। तब तक के लिए लड़कियाँ अपनी चूत में उंगली करती रहिए और लड़के अपने लंड को हिलाते हुए मेरे अगले कहानी का इंतज़ार करें।
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