दोस्तों मेरा नाम अरुणा है। मैं 50 साल की हूं, और मुंबई की रहने वाली हूं। रंग मेरा गोरा है और फिगर मेरा मोटा है। आज भी जवान लड़के मुझे देख कर अपने मुँह से लार बहाते हैं। मैं भी उनको स्माइल पास करके उनका दिन बना देती हूं।
मेरे पति की मौत 3 साल पहले हो चुकी है। उनके जाने के बाद से मैं अकेली ही रहती हूं। वैसे मेरी एक बेटी है, जिसकी शादी 4 साल पहले पुणे में हो चुकी है। वो अपने घर में अच्छे से सेटल है।
मेरे पति की सरकारी नौकरी थी, तो मुझे उनकी पेंशन आती है। इसलिए मेरा गुजारा अच्छे से हो जाता है, और मुझे नौकरी करने की जरूरत नहीं है। पति के जाने के बाद मेरी चूत की प्यास बुझाने के लिए मैं अक्सर फिंगरिंग करती हूं।
कभी-कभी दिल करता था कि बॉयफ्रेंड बना लू, लेकिन समाज में बदनामी के डर से ऐसा कुछ नहीं किया। और क्योंकि बाहर आना ज्यादा नहीं है, तो दूर के किसी मर्द से रिश्ता बन नहीं पाता।
लेकिन एक दिन मेरे जमाई की कृपा से मेरी चूत को एक बढ़िया लंड मिल गया। इस कहानी में मैं आपको वही बताऊंगा कि मुझे चुदाई का सुख कैसे मिला।
सुबह का वक्त था, और मैं तैयार होकर नाश्ता कर रही थी। तभी मेरा फोन बजा। देखा तो मेरे जमाई का फोन था। मैने फ़ोन पिक किया।
मैं: हैलो।
जमायी: नमस्कार मम्मी जी।
मैं: नमस्कार बेटा, कैसा हो?
जमायी: मैं ठीक हूं, आप बताओ कैसे हो?
मैं: मैं भी ठीक हूं। आज कैसे याद किया?
जमायी: एक काम था आपसे।
मैं: बोलो।
जमायी: मेरा एक दोस्त है, जो दिल्ली से आ रहा है। उसका इंटरव्यू है एक कंपनी में जिसका ऑफिस आपके घर के नजदीक है। तो क्या वो एक रात आपके घर रुक सकता है?
मैं: हां बिल्कुल, तुम्हारा दोस्त है तो मेरे बेटे जैसा हुआ। भेज दो उसको।
फिर उसने अपने दोस्त को मेरा पता और मेरी लोकेशन दे दी। शाम 7 बजे मुझे एक अनजान नंबर पर कॉल आया। मैंने फ़ोन पिक किया।
मैं: हैलो।
सामने वाला: नमस्कार आंटी जी। मैं अर्जुन (मेरा जमायी) का दोस्त।
मैं: अरे हां बेटा, आ गये तुम?
लड़का: जी, मैं बाहर ही हूं। लेकिन आपके घर का गेट कौन सा है?
फिर मैं बाहर गई, और लड़के को अंदर लेके आई। उसका नाम नीतीश था। नीतीश देखने में हैंडसम था और हट्टा-कट्टा था। ऐसा, कि कोई भी औरत उसको देख कर मोहित हो जाए। मेरा भी हाल कुछ ऐसा ही था। उस दिन मैंने लेगिंग्स और कमीज़ पहनी थी। लेगिंग्स में मेरी मोटी गांड बहुत सेक्सी लग रही थी। और मेरी गांड पर नीतीश की भी नज़र बार-बार जा रही थी।
ये देख कर मैं भी खुश थी। फ़िर वो फ्रेश हुआ। उसके बाद हमने डिनर किया, और साथ में काफ़ी बातें की। बातों के दौर में वो बार-बार मेरे जिस्म पर अपनी नजरें घुमा रहा था। उसकी जवानी देख कर मेरे भी अरमान जाग रहे थे। लेकिन फिर हम सो गये अपने-अपने कमरे में जा कर।
अगली सुबह उसने नाश्ता किया और अपने इंटरव्यू के लिए चला गया। मैं थोड़ा उदास हो गई, क्योंकि वो आज वापस जाने वाला था। दोपहर को वो वापस आया। वो बहुत खुश था, क्योंकि उसका चयन हो गया था। उसने कहा-
नीतीश: आंटी चलो आज शाम पार्टी करते हैं, मेरी नौकरी लगने की खुशी में।
मैंने भी हां कह दी। फिर शाम को वो मुझे एक क्लब में ले गया। मैंने काली साड़ी पहन ली थी, जिसमें मैं बहुत सेक्सी लग रही थी। मेरी क्लीवेज पर बार-बार उसकी नजर जा रही थी। मेरा भी दिल था कि वो कुछ करे, लेकिन वो सिर्फ देख ही रहा था।
डिनर करने के बाद उसने मुझसे ड्रिंक के लिए पूछा। वैसे तो मैं ड्रिंक नहीं करती, लेकिन फिर भी मैंने हां कह दी। उसके बाद हमने 2-2 पैग पिए। अब मुझे पूरा सुरूर चढ़ गया था। अब मैं उसको कामुकता भरी नज़रों से देख रही थी। ये देख कर वो बोला-
नितीश: आंटी आप अकेली रहती हो। कैसे मैनेज करते हो?
मैं: बस हो ही जाता है।
नितीश: अंकल की कंपनी को मिस नहीं करते?
मैं: बहुत मिस करती हूं। लेकिन अब क्या कर सकते हैं?
नीतीश: मैं कल सुबह जा रहा हूं।
मैं: हां पता है।
नीतीश: अगर आप चाहें तो मैं आज रात आपको कंपनी दे सकता हूं।
मुझे तो बस इसी का इंतज़ार था। तो मैने कहा-
मैं: फिर बातों में टाइम वेस्ट क्यों कर रहे हो?
ये सुन कर वो खुश हो गया। फिर हमने कैब की और घर की तरफ निकल गये। रास्ते में हमसे कंट्रोल नहीं हुआ, तो हम कैब में ही एक-दूसरे को किस्स करने लगे। कैब वाला देख लेगा, इसकी भी शुरुआत नहीं की हमने।
घर पहुंच कर मैंने दरवाजा खोला। उसने अंदर जाते ही मुझे पकड़ लिया। हमारी पैशनेट किसिंग होने लगी, और उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा निकाल कर मेरे स्तन नंगे कर दिये। अब वो पागलों जैसा मेरे स्तन चूसने लगा। मैं आहें भरने लगी।
धीरे-धीरे उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया। फिर खुद के भी कपड़े उतार दिये। उसका लंड मोटा और लम्बा था। मैं घुटनो पर बैठ का उसका लंड चूसने लगी। वो मेरे मुँह में धक्के देने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उसने मुझे बाल पकड़ कर खड़ा किया और बिस्तर पर पटाक दिया।
उसके बाद मेरी टांगें खोली, और मेरी चूत पर मुँह लगा कर चूसने लगा। मैं तो स्वर्ग पहुंच गई। उसने इतना अच्छा चाटा, उसकी चुदाई से पहले ही मैं एक बार झड़ गई। उसके बाद वो मेरी टांगों के बीच लंड लेके आया, और मेरी चूत पर सेट हो गया। ज़ोर का धक्का मार कर उसने पूरा लंड उसने मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी चीख निकल गयी, लेकिन मजा बहुत आया।
उसके बाद वो जबरदस्त धक्के देके मुझे चोदने लगा। मैं तो सातवे आसमान पर थी। मेरी चूत पानी-पानी हो रही थी, और फुल स्पीड के धक्के लगाने से थप-थप की आवाज आने लगी। 20 मिनट की ज़बरदस्त चुदाई के बाद उसने मेरे स्तनों पर अपना माल निकाल दिया।
उस रात हमारी 4 बार चुदाई हुई। मेरी चूत सूज गई थी, और चरमसुख को पा चुकी थी। फिर सुबह होते ही वो तैयार हो गया और चला गया, इस वादे के साथ कि जल्दी ही वापस आएगा। कहानी कैसी लगी [email protected] पर फीडबैक दे।