पिछला भाग पढ़े:- माँ, बुआ और चाची का जंगल में गैंगबैंग-1
इस सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे प्रतीक अपनी बुआ की चुदाई करता है और कैसे वो अपनी मां और चाची को रंडी की तरह चोदते देखता है।
तो दोस्तों ये मेरी पिछली कहानी का अगला भाग है। आपको इसे समझने के लिए पिछले भाग पढ़ने होंगे। तो मैं अब कहानी शुरू करता हूं-
बुआ: देख प्रतीक में इस चुदाई के लिए राजी हुई हूं। क्योंकि मुझे भरोसा है कि तू ये बात किसी को नहीं बताएगा। अगर ये बात बाहर फेल गई तो बहुत बड़ी परेशानी हो जाएगी, इसलिए तू किसी को भी इसके बारे में मत बताना।
मैं: ठीक है बुआ, जैसा आप बोलो।
मेरी बुआ मेरे सामने अब पूरी नंगी हो जाती हैं और मुझे आके किस्स करने लगती हैं, और मेरा लंड मसलने लगती हैं अपने हाथ से। मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था। मैं मेरी बुआ की गांड दबाने लगता हूं और उनकी गांड की छेद में अपनी उंगली डालने लगता हूं।
बुआ: आह प्रतीक मुझे बहुत मजा आ रहा है। शाबाश! ऐसे ही करते रहो।
मैं थोड़ी देर उनकी गांड में उंगली करता रहता हूं। फिर मैं वहीं उंगली अपने मुंह में डाल लेता हूं। ये देख के मेरी बुआ शर्मा जाती हैं।
बुआ: कसम से बेशरम हैं तू, बेशरम!
फिर वो मेरा लंड अपनी गीली चूत में डाल देती है। उनकी चूत में काफी बाल थे, पर उनकी चूत बहुत ज्यादा टाइट भी थी। उनको चोदने में मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपनी बुआ को चोद रहा हूं।
बुआ: आह प्रतीक बस मेरी चूत में मत झड़ जाना। जब तेरा निकलने वाला होगा, उससे पहले मुझे बता देना।
मैं: हां बुआ, अभी आप चुदाई के मजे लो। इतना सोचो मत।
मैं उनको ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। बहुत देर बाद-
मैं: बुआ मेरा निकलने वाला है।
बुआ: हां, अपना लंड निकाल दे और मेरे मुंह में अपना लंड डाल दे।
मैंने वैसा ही किया और अपना लंड उनके मुंह में डाल दिया। वो मुझे ब्लोजॉब दे रही थी। मुझे तो जैसे मानो जन्नत नसीब हो गई थी। मैंने थोड़ी देर बाद मेरा स्पर्म उनके मुंह में ही निकाल दिया। वो पूरा पी गई। फिर हम थोड़ी देर आराम करने लगे, क्योंकि इतनी अच्छी चुदाई के बाद हम दोनों थक गए। तभी अचानक से हमें एक महिला की ज़ोर की चिल्लाने की आवाज़ आई-
बुआ: अरे ये आवाज तो तेरी मां अंजलि की है, चल उनके टेंट में जाके देखते हैं कि वहां क्या हो रहा है, जो तेरी मां इतनी जोर से चिल्ला रही है।
फिर मैं और बुआ भागते हुए टेंट के पास गए। जो हमने देखा, वो देख कर मैं शॉक हो गया था। मेरी मां और चाची पूरी नंगी लेटी हुई थी। वसीम का लंड मेरी मां के मुंह में था, और पंकज मेरी मां की चूत मार रहा था। तो वहीं पर अहमद चाची के स्तन दबा रहा था। ये नज़ारा देख के मेरा लंड खड़ा हो गया था, मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी मां और चाची रंडियों की तरह कुछ अंजान लड़के से अपनी चुदाई करवा रही थी। मेरा लंड ये सब देख कर दोबारा खड़ा हो गया था। मेरी बुआ ये सब देख कर हंसती हैं और मेरे कान में बोलती हैं-
बुआ: तेरा लंड तो अपनी मां की चुदाई देखते हुए खड़ा हो गया है। कितना बेशरम है तू तो।
मैं: हां बुआ, पर अब मेरी मां है ही इतनी खूबसूरत कि मैं खुद को रोक नहीं पाता हूं।
बुआ: वैसे तू अपनी मां को चोदना चाहता है क्या?
मैं: चोदना तो चाहता हूं लेकिन ये सब कैसे होगा? क्योंकि मुझे नहीं लगता मां इन सब चीज़ों के लिए मानेगी।
बुआ: तू चिंता मत कर प्रतीक। तू खुद ही देख तेरी मां केसे रंडियों की तरह दो लंड अपनी तरफ ले जा रही है। और यहाँ तक कि ये लोग सेक्स करने में इतने व्यस्त हैं, कि इन्होने अभी तक हमें नहीं देखा।
मैंने वापस से अपने मुंह टेंट में डाला और मेरे सामने जो नज़ारा था वो ऐसा था कि मेरी मां की चूत में पंकज का लंड था। मेरी मां के मुंह में वसीम का लंड था, और उनकी गांड में अहमद का लंड था। वो एक साथ तीन-तीन लंड ले रही थी और वहीं पर बाजू में मेरी चाची खुद को उंगली कर रही थी। ये सब देख के मेरा लंड खड़ा हो चुका था।
बुआ: देख अगर तू तेरी मां को चोदना चाहता है, तो तुझे थोड़ी सी एक्टिंग करनी पड़ेगी।
मैं: बुआ में मम्मी को चोदने के लिए कुछ भी कर सकता हूं। आप बस बोल के तो देखो।
बुआ: ठीक है, जब मैं इशारा करू तब अंदर आना। अभी के लिए हमें उनसे चुदता हुआ देख और अपना लंड हिलाता रह।
ये कह के मेरी बुआ अंदर घुस जाती हैं टेंट में, और ये देखे मेरी मम्मी और चाची कुछ भी रिएक्ट नहीं करते हैं। ये देख कर मुझे शक होने लगता है शायद ये सब इन्होंने पहले से ही प्लान करके रखा था। तभी तो ये लोग कुछ नहीं कह रहे हैं।
मां: क्या हुआ आपके आने में इतनी देर कैसे हो गई? वैसे प्रतीक तो सो गया है ना?
बुआ: हां प्रतीक तो गया है। मेरे लिए तुम दोनों थोड़ा इंतजार तो कर लेती। इतना जल्दी शुरू करने की क्या जरूरत थी? और तुम दोनों तो बस इन जवान लड़कों से फ्लर्ट करने वाली थी, तो अब सेक्स क्यों कर रही हो? जब मैंने कहा था तब तो मुझे बहुत सुनना रही थी कि ये सब किसी और के साथ करना गलत होता है पति के अलावा।
चाची: हां हम तो बस अरुण के दोस्तों से फ़्लर्ट ही करने वाले थे। इनको भी बस फ़्लर्ट करने के लिए ही तो बुलाया था। पर हमसे इनकी मस्त बॉडी देख रहा नहीं गया। जो आग हमारे पति नहीं बुझा पाए, वो ये लड़के बुझा रहे हैं।
मैं ये सब सुन के हैरान था। क्योंकि वो सारे लड़के अरुण (मेरी चाची का बेटा) के दोस्त थे और मेरी मम्मी और चाची उनसे चुदाई करवा रही थी, और ये सब पहले से ही उनका प्लान था। उनको बस मेरे सामने सब नाटक करना था, ताकि मुझे कोई शक ना हो उन पर।
मां: आ जाओ, आप भी कपड़े उतार दो, और हमारे साथ इनसे चुदाई करवा लो। इनका जवान लंड बहुत मस्त है आह।
बुआ: लेकिन इन लड़कों से पहले तुमने कब बात की थी तुमने अनुराधा?
चाची: एक बार ये सारे लड़के अरुण के जन्मदिन पर आए थे, तब से ये लोग मुझपे लाइन मारते थे। जब भी मैं इनसे कहती थी कि मैं तुमसे उमर में बड़ी हूं, तब ये लड़के मुझे बताते थे कि लड़कों को अपने से बड़ी उमर की औरतों में और भाभियों में दिलचस्पी होती है, और मुझे भी ये लोग अच्छे लगते है।
मां: हां फिर अनुराधा ने ये सब मुझे बताया कि ये लड़के उससे फ़्लर्ट करते हैं। तब मैंने हां करने कहा और मैंने भी इसके लिए हां कर दी।
पंकज: हमें भूख लगी है। हम खाना ढूंढ के लाते हैं। तब तक आप सब दूसरे राउंड के लिए थोड़ा आराम कर लो।
ये कह के वो तीनों पीछे वाले टेंट के रास्ते से निकल जाते हैं और अंदर मेरी बुआ चाची और मम्मी नंगी लेटी हुई थी।
बुआ: वैसे तुम लोगों को मुझे एक राज़ बताना है। बस अंजलि तू वादा कर कि तू मुझसे गुस्सा नहीं करेगी।
मां: ऐसी क्या बात है?
बुआ: मैंने प्रतीक के साथ सेक्स किया है, और उसने तुम्हारे प्लान के बारे में सब बता दिया है।
मेरी मम्मी और चाची ये सुन के बहुत गुस्सा हो जाती हैं और गुस्से से बुआ को देखने लगती हैं।
चाची: ये आपने क्या किया? अब अगर प्रतीक ने हमारे पतियों को बता दिया, तो और वो सब तो बाद की बात है। आपको शर्म नहीं है उसके साथ सेक्स करते हुए? वो हमारे ही खून हैं हमारा ही बच्चा है।
मां: वहीं तो, आपने तो हद पार कर दी है।
बुआ: मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। तुम लोग जो इन मर्दों से चुदवा रही हो, और तुम्हें मजा आ रहा है। वैसे ही प्रतीक से चुदवाने में मुझे मजा आया और प्रतीक को भी मुझे चोदने में काफी मजा आया।
चाची: पर ये सब आप दोनों में हुआ कैसे?
मेरी बुआ चाची और मम्मी को सब बताती हैं और मुझे टेंट के अंदर बुला लेती हैं और अंदर आ जाता हूं। मेरी बुआ चाची और चाची अपने नंगे शरीर को ढकने की कोशिश करती हैं, पर इसका कोई फायदा नहीं था, क्योंकि उनके रसीले बदन को पूरी तरह से अच्छे से देख पा रहा था।
मां: बेटा थोड़ी तो शर्म कर। मैं जानती हूं कि तुझे सब पता है। लेकिन कम से कम अपनी आंखें तो बंद कर ले, या फिर नज़रें तो घुमा ले। हमें ऐसे घूर मत।
चाची: ये सब गीता जी के कारण हुआ है। इन्होंने प्रतीक को बिगाड़ दिया है, वरना प्रतीक हमारा कभी ऐसा नहीं था।
बुआ: जो भी तुम लोग कहो। लेकिन मैं तुम्हें एक बात समझाती हूं। अगर कल को हम सब यहां से चले गए वापस हमारे घर। तो तुम लोग इन लड़कों से नहीं चुदवा पाओगी। लेकिन प्रतीक से कभी भी चुदवा सकती हो, घर पर भी, बाहर भी। और वो भी जब मन हो तब।
मां: आपकी बात सही है। लेकिन ये ग़लत है काफ़ी।
बुआ: तुम लोग अरुण के दोस्तों से चुदवाने के बाद कहती हो कि ये सब गलत हैं?
चाची: पर वो हमारे अपने नहीं हैं।
बुआ: पर प्रतीक हमारा अपना है। वो हमारे हर दुख को समझता है आज। ये मत भूलो कि वहीं हमें यहां घुमाने लाया है। जब हम उन लड़कों से फ़्लर्ट कर रहे थे, तब भी वो शांत था। उसने कुछ भी नहीं बोला और अगर वो चाहता तो हमारे पतियों को ये सब कब का बता चुका होता। तुम्हें नहीं लगता इसके लिए प्रतीक हमारा समर्थक है। जो हमारी हर चीज में मदद करता है, उसको भी इसके बदले कुछ मिलना चाहिए?
मेरी चाची और मम्मी बहुत देर तक सोचती हैं। पर उनको ये सब सोचने के लिए टाइम चाहिए था। इसलिए वो मुझे एक दिन का टाइम लेती हैं। मैं भी अपने टेंट में जा कर सो जाता हूं और मम्मी बुआ और चाची भी उन लड़कों के साथ खाना खा के नंगी हो जाती हैं।
अब अगले पार्ट्स में पढ़ें कि क्या मेरी मम्मी और चाची मुझसे चुदवाने के लिए मानती हैं या नहीं और आगे क्या मजेदार चीजें होती हैं।
अगला भाग पढ़े:- माँ, बुआ और चाची का जंगल में गैंगबैंग-3