पिछला भाग पढ़े:- बाप का इलाज बेटी की चुदाई-1
हाय दोस्तों, मैं नीना अपनी कहानी का अगला पार्ट लेके आप सब के सामने हाजिर हूं। अगर आप में से किसी ने भी पिछला हिस्सा नहीं पढ़ा है, तो पहले उसको जरूर पढ़ें। पिछले हिस्से में आपने पढ़ा था, कि मेरी मम्मी की मौत के बाद पापा डिप्रेशन में आ गए। इससे उनकी भी तबीयत ख़राब होने लगी। फिर डॉक्टर ने मुझे उनका ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए कहा।
फिर मेरे बॉयफ्रेंड की बात सुन कर मुझे लगा कि उनकी वासना जगा कर अगर मैं उनको उत्साहित करुं, तो उनका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। मैंने वैसा ही किया।
जब मैं रोज़ की तरह उनके कामरे में सफ़ाई करने गई, तो मैंने ऐसे कपड़े पहन लिए, जिससे वो मेरे सेक्सी जिस्म को देख कर उत्साहित हो जाए। और हुआ भी कुछ वैसा ही। अब आगे बढ़ते हैं।
सुबह की सफाई के दौरान मैंने पिता जी को थोड़ा उत्साहित कर दिया था। जब मैं उनके कमरे से बाहर आई, तो मैंने खिड़की से देखा कि उनका हाथ उनके लंड पर था। ये देख कर मुझे ख़ुशी हुई, कि मैं अपने प्लान में कामयाब हो रही थी। सफ़ाई करने के बाद अब बारी थी उनको नहलाने की।
मैं वही कपड़े पहने हुए उनके कमरे में चली गई, और उनको नहलाने के लिए बाथरूम ले जाने लगी। उन दिनों पापा को कमज़ोरी आई हुई थी, तो मैं बाथरूम में उनको बिठा कर नहलाती थी। उन्होंने सिर्फ अंडरवियर पहना होता था। मैंने उनको बिस्तर से उठाया, और उनका दायां हाथ अपने कंधे पर घुमा लिया। फिर मैंने अपना बायां हाथ उनकी कमर पर रखा, और दायें हाथ से उनके दायें हाथ को पकड़ लिया, जो मेरे कंधे पर था। उसके बाद हमने बाथरूम की तरफ जाना शुरू किया।
जाते-जाते मेरे दिमाग में एक खुराफात आई। मैंने अपने दायें हाथ से जो उनका दायां हाथ पकड़ा हुआ था, उसको मैं अपने बूब पर दबाने लग गई। पापा ने भी हाथ पीछे नहीं किया, और मेरे बूब को छूने का मज़ा लेने लगे। फिर हम बाथरूम पहुंच गए। मैंने पापा को स्टूल पर बिठाया, और उनके कपड़े उतारने लगी।
अब पापा सिर्फ काले रंग के अंडरवियर में थे। उनका लंड थोड़ा-थोड़ा खड़ा हुआ लग रहा था। लेकिन मुझे वह पूरी तरह उत्तेजित करना था। फिर मैंने उनकी बॉडी पर पानी डालना शुरू किया। उसके बाद मैं उनको साबुन लगाने लगी। साबुन लगाते हुए मैं झुकी हुई थी और मेरे सेक्सी स्तन का नज़ारा दिख रहा था। मैं देख रही थी, कि पापा मेरे स्तनों को ही देख रहे थे।
मैं खुश थी, क्योंकि मेरा मिशन सफल हो रहा था। लेकिन उनका लंड अभी भी पूरा खड़ा नहीं हुआ था, मतलब वो पूरे जोश में नहीं आये थे। तभी मैंने कुछ ऐसा किया जिससे वो पूरे जोश में आ गए। जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरा पायजामा काफी ट्रांसपेरेंट टाइप का था। मैंने जब उनको नहलाने के लिए पानी डिब्बे में भरा, तो जान-बूझ कर डिब्बा अपने ऊपर गिरा लिया।
डिब्बा सीधा जाके मेरे पेट पर गिरा, जिससे मेरा नीचे का हिस्सा पूरा भीग कर दिखने लगा। अब मेरी जाँघें पूरी दिख रही थी, और मेरी बालों वाली चूत भी दिख रही थी।तभी मैं बोली-
मैं: ओ हो! ये क्या हो गया। अब आपको नहलाने के बाद मुझे फिर से नहाना पड़ेगा।
ये बोल कर मैंने पापा को नहलाना जारी रखा। मैं देख सकती थी, कि पापा का लंड मुझे देख कर पूरा खड़ा हो गया था। होता भी कैसे नहीं। मेरी मस्त जाँघें और चूत को देख कर तो किसी भी मर्द का खड़ा हो जाये। ऐसे ही करते हुए मैंने पापा को उत्तेजित कर दिया। फिर मैं 2 मिनट के लिए बाथरूम से बाहर चली गई, ताकि वो अपना अंडरवियर उतार कर बदल सके।
उसके बाद मैंने उनके कपड़े पहनने में मदद की, और हम फिर उनके कमरे की तरफ चल पड़े। मैंने फिर उनको वैसे ही पकड़ा था। लेकिन इस बार मैंने उनके दायें हाथ पर अपना हाथ नहीं रखा। मैं देखना चाहती थी कि क्या पापा अपनी तरफ से कुछ करेंगे या नहीं। और हुआ भी वैसा ही इस बार पापा ने खुद से मेरे बूब पर अपना हाथ रख लिया, और उसको हल्के-हल्के प्रेस करने लगे।
मैंने इस पर कोई रिएक्शन नहीं दिया, और पापा भी अंजान बन कर मेरा बूब दबा रहे थे। फिर मैंने जाके पापा को बिस्तर पर बिठा दिया। जब मैं कमरे से बाहर जाने लगी, तो पापा बोले-
पापा: बेटी वो सामने दराज से मेरी किताब निकाल दो।
मैं: जी पापा, कौन सी दराज में पड़ी है?
पापा: वो नीचे वाले में पड़ी है।
मैं समझ गई थी कि पापा मेरे पीछे से मेरी गांड का नजारा देखना चाहते थे। जब मैं नीचे झुकी, तो मैंने सामने लागे एक छोटे से शीशे में देखा। मैं बिल्कुल सही थी। पापा हवस भारी नज़रों से मेरी गांड ताड़ रहे थे। मैं खुश हो गई, क्योंकि अगर ऐसा चलता रहता, तो पापा कुछ ही दिनों में ठीक हो जायेंगे।
फिर मैंने किताब निकाल के पापा को दी, और कमरे से बाहर चली गई। मैंने फिर खिड़की में से पापा को देखा। अब भी उनका हाथ उनके लंड पर था। मुझे पूरा विश्वास था कि मैं अपने पापा को जल्दी ही ठीक कर दूंगी। उसके बाद मैंने कपड़े बदल लिए, और सामान्य जींस और टी-शर्ट पहन ली।
जब मैंने पापा को खाना खिलाया, तो मैंने नोटिस किया कि पापा मेरी टी-शर्ट में से मेरी क्लीवेज देखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन इस टी-शर्ट में से उनको ज्यादा कुछ मिलने वाला नहीं था। मैं देख रही थी, पापा पॉजिटिव रिस्पॉन्स दे रहे थे। ऐसे ही करते हुए शाम हो गई। अब मैं सोच रही थी, कि मैं ऐसा क्या करूँ, कि पापा और उत्साहित हो जाएं। मैं ध्यान भी रख रही थी, कि कहीं पापा को ऐसा ना लगे कि मैं जान-बूझ कर ऐसा कर रही थी।
फिर मेरे दिमाग में एक धांसू आइडिया आया, जिससे मैं पापा को काफी उत्साहित कर सकती थी। अब वो आइडिया क्या था, और कैसे मैंने शाम में पापा को उत्साहित किया। ये सब जानने के लिए आपको कहानी के अगले भाग की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। कहानी पढ़ने के लिए आप सबका धन्यवाद। अगला हिस्सा जल्दी ही आएगा।
अगला भाग पढ़े:- बाप का इलाज बेटी की चुदाई-3