शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-10 (Shimla mein truth dare khel, dono behne chudi relam pel-10)

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पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-9

आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा कि कैसे काव्या की जोरदार चुदाई के बाद वो उठ भी नहीं पा रही थी और घूमने जाने के बजाय आराम करने के लिए बोली।

सभी आराम कर रहे थे, पर दोपहर होते-होते कमरे का माहौल एक बार फिर करवट लेने लगा। नहाने-धोने के बाद जब चारों हल्के कपड़ों में आए, तो जिस्मों की वह कशिश दोबारा जाग उठी। अब किसी तरह की हिचक या पर्दा नहीं बचा था।

कमरे के दो अलग-अलग कोनों में दो प्यारे जोड़े अपने-अपने तरीके से सुस्ताने लगे:

राहुल और काव्या: राहुल ने धीरे से खिड़की के पास पड़े सोफे पर लेटी काव्या को अपनी बाहों में समेट लिया। काव्या ने इस बार कोई विरोध नहीं किया। राहुल ने बेहद प्यार से उसकी थकी हुई कमर को दबाना शुरू किया, जिससे काव्या को बहुत सुकून मिला। राहुल ने उसके गालों और होंठों पर हल्के-हल्के चूमना शुरू किया, और काव्या भी उसकी छाती पर सिर टिकाकर धीरे-धीरे उसके प्यार के अहसास में खोने लगी।

राजू और सपना: उधर बेड पर सपना मेरे बेहद करीब आ गई। उसने अपना सिर मेरी चौड़ी छाती पर रख दिया। मैंने उसकी रेशमी जुल्फों को अपनी उंगलियों से संवारा और उसके माथे को चूम लिया। सपना ने अपना चेहरा ऊपर उठाया और अपनी सुलगती आँखें मेरी आँखों में डाल दी। हमारे होंठ बिना किसी जल्दबाजी के, बेहद धीरे-धीरे और गहराई से एक-दूसरे से मिल गए। दोपहर की उस शांत धूप में हमारा यह धीमा रोमांस बेहद जादुई लग रहा था।

दोपहर भर एक-दूसरे के जिस्म की गर्मी और मीठे रोमांस का आनंद लेने के बाद, शाम होते-होते सब की थकान काफी हद तक कम हो चुकी थी। अब शिमला की ठंडी वादियों का दीदार करने का वक्त था।
शाम के करीब 5 बजे, चारों ने ऊनी कपड़े पहने, जैकेट चढ़ाई और पूरी तरह तैयार होकर होटल से बाहर निकल पड़े। शिमला की बर्फीली हवाएं चेहरे को छू रही थी, लेकिन भीतर रात के रोमांस और दोपहर की गर्माहट का नशा अभी भी ताजा था।

काव्या अब राहुल का हाथ थाम कर चल रही थी और सपना मेरे बगल में मुस्कुराती हुई कदम से कदम मिला रही थी। खेल भले ही खत्म हो गया था, लेकिन उनकी जिंदगी का यह सफर अब एक नए रंग में रंग चुका था।

शाम की ठंडी और खुशनुमा सैर के बाद, रात के करीब 9 बजे चारों वापस अपने होटल के गरम सुइट में लौट आए। बाहर बर्फीली हवाएं चल रही थी, लेकिन कमरे के भीतर हीटर चालू होते ही फिर से वही पुरानी गर्माहट और कामुक माहौल वापस लौटने लगा था। कल रात की बेबाकी के बाद अब किसी के बीच कोई झिझक नहीं बची थी, बल्कि एक-दूसरे के जिस्म को पूरी तरह से निचोड़ लेने की चाहत और बढ़ गई थी।

आज की रात का माहौल थोड़ा अलग और बेहद चरम पर जाने वाला था। राहुल के दिमाग में अब एक नया वहशी ख्याल आ चुका था।

कमरे में कपड़े बदलते ही राहुल ने काव्या को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके कान के पास फुसफुसाते हुए अपनी इच्छा जाहिर की:

“काव्या, कल रात तो तुम्हारी चूत का पानी निकाला था… लेकिन आज की रात कुछ और खास होनी चाहिए। आज मुझे तुम्हारी उस गोल और खूबसूरत गांड का स्वाद चखना है।”

यह सुनते ही काव्या का चेहरा डर और घबराहट से पीला पड़ गया। वह कल रात के ही गहरे धक्कों के दर्द से पूरी तरह उभर नहीं पाई थी, और गांड मारने के नाम से ही उसकी रूह कांप उठी। उसने तुरंत राहुल के हाथ अपनी कमर से हटाए और पीछे हटते हुए हाथ जोड़ कर मना कर दिया:

“नहीं राहुल, प्लीज! मुझसे यह बिल्कुल नहीं होगा। कल रात के दर्द से मेरी जांघें अभी भी दुख रही हैं। गांड मारने की बात तो सोचना भी मत, मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी। प्लीज मुझे बख्श दो!”

काव्या का साफ इंकार देख कर राहुल का चेहरा थोड़ा उतर गया, लेकिन वह रुकने वालों में से नहीं था। उसने तुरंत अपनी नज़रें सोफे पर बैठी सपना पर टिका दी।
मैंने और राहुल ने एक-दूसरे की तरफ देखा और हमारी आँखों में एक ही शरारती और वहशी इशारा तैर गया। अगर काव्या तैयार नहीं थी, तो सपना वहाँ मौजूद थी जो पहले ही कल रात का नजारा देख कर अंदर तक सुलग रही थी।

मैंने आगे बढ़ कर सपना का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “भाभी… जब छोटी बहन डर गई है, तो बड़ी बहन को तो अपनी हिम्मत दिखानी ही पड़ेगी।”

सपना ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में डर तो था लेकिन उससे कहीं ज्यादा उत्तेजना और चुनौती स्वीकार करने का नशा था। उसने एक गहरी सांस ली और मुस्कुराते हुए बोली, “तुम दोनों मिल कर मेरी जान लेने की तैयारी कर रहे हो क्या? चलो, आज देख ही लेती हूँ कि तुम दोनों में कितना दम है।”

राहुल तुरंत जोश में आ गया। उसने बिना देर किए सपना को बेड पर पेट के बल लेटने का इशारा किया। सपना ने अपनी गाउन को ऊपर सरकाया और बेड पर उल्टा लेट कर अपनी भारी और सुडौल गांड को हवा में उठा दिया। हीटर की लाल रोशनी सीधे उसकी गोल और गोरी गांड पर पड़ रही थी, जिससे वह नजारा बेहद कातिलाना लग रहा था।

मैंने और राहुल ने तुरंत अपने कपड़े उतारे और सपना की इस कयामत जैसी गांड को पूरी तरह से फतेह करने की तैयारी में जुट गए। काव्या बेड के कोने में बैठ कर अपनी बड़ी बहन की इस बेबाकी और हिम्मत को फटी आँखों से देख रही थी, जहाँ अब दर्द और मजे का एक नया दौर शुरू होने जा रहा था।

राहुल ने तुरंत साइड टेबल से बॉडी लोशन उठाया और उसकी कुछ बूंदें सपना की दोनों सुडौल जांघों के बीच की पतली लकीर पर गिरा दी। अपनी उंगलियों से उस हिस्से को सहलाते हुए उसने लोशन को अच्छी तरह से फैलाया, ताकि वहां की त्वचा थोड़ी नरम हो सके। सपना ने जैसे ही उस ठंडे लोशन और राहुल की उंगलियों का अहसास पाया, उसके मुंह से एक हल्की सी सिहरन भरी आह निकल गई।

मैंने आगे बढ़ कर सपना के सिर के पास अपनी जगह बनाई। उसने अपना चेहरा तकिये में थोड़ा छिपा लिया था, उसकी सांसें अब काफी तेज चल रही थी। मैंने उसके चेहरे को सहलाते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, ताकि उसका ध्यान उस आने वाले भारी दबाव से थोड़ा भटक सके।

राहुल अब पूरी तरह तैयार हो चुका था। उसने सपना के कूल्हों को अपने दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ा और अपनी पूरी ताकत के साथ पहला धीमा लेकिन गहरा दबाव बनाया।

सपना (तकिये को अपने दांतों से दबाते हुए, सिसकी भर कर): “अह्ह्ह…! राजू… राहुल… रुको… बहुत ज्यादा टाइट है… उफ्फ, अंदर बहुत तेज चुभन हो रही है… थोड़ा धीरे…!”

राहुल (सपना की पीठ पर हाथ फेरते हुए और अपनी रफ्तार को बिल्कुल धीमा रखते हुए): “शांत रहो, सपना। बस शुरुआत में ऐसा लग रहा है। एक बार रास्ता बन जाने दो, फिर तुम्हें खुद ही मजा आने लगेगा। बस ढीला छोड़ो खुद को।”

मैं लगातार सपना के होंठों को चूम रहा था और उसके कानों में हौसला दे रहा था, “भाभी, बस थोड़ी देर और। तुम बहुत कमाल की लग रही हो इस वक्त।”

बेड के कोने में बैठी काव्या अपनी बहन की इस हालत को देख कर अपनी उंगलियां चबा रही थी। उसे एक तरफ राहत थी कि वह इस भारी दर्द से बच गई, लेकिन दूसरी तरफ सपना की यह बेबाकी देख कर उसके भीतर भी एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी।

राहुल ने धीरे-धीरे अपने झटकों की रफ्तार बढ़ानी शुरू की। लोशन और लगातार घर्षण की वजह से अब रास्ता थोड़ा आसान हो चला था। सपना की सिसकियाँ अब धीरे-धीरे एक अलग ही लय पकड़ने लगी थी। दर्द का वह पहला अहसास अब धीरे-धीरे एक तीखे नशे में तब्दील हो रहा था।

सपना (हाँफते हुए, अपनी कमर को थोड़ा और ऊपर उठाते हुए): “आह्ह…! राहुल… अब… अब थोड़ा ठीक लग रहा है… पर बहुत गहरा जा रहा है… उम्म्म… राजू, तुम भी मुझे छुओ… मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

मैंने तुरंत अपनी स्थिति बदली और राहुल के साथ तालमेल बिठाते हुए सपना को आगे से संभाल लिया। शिमला की वह रात अब अपने दूसरे और सबसे चरम अध्याय की तरफ बढ़ चुकी थी, जहाँ दर्द और आनंद की सीमाएं पूरी तरह से धुंधली हो चुकी थी।

सपना की देह अब पूरी तरह से इस दोहरे प्रहार के आगे घुटने टेक चुकी थी। राहुल के हर गहरे और सधे हुए धक्के के साथ उसकी सुडौल गांड की मांसपेशियां खिचतीं और फिर खुद-ब-खुद ढीली पड़ जातीं। दर्द का वह शुरुआती तीखापन अब एक गहरे, सुलगते हुए उन्माद में बदल चुका था।

मैंने सपना के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठों को दोबारा अपनी गिरफ्त में ले लिया, ताकि उसकी सिसकियों की आवाज सीधे मेरे मुंह के भीतर ही घुट जाए। वह पूरी तरह बेकाबू होकर अपनी कमर को ऊपर-नीचे लहरा रही थी।

राहुल (अपनी जांघों को उसकी गांड से सटाते हुए, हाँफती आवाज में): “सपना… सच में तुम्हारी इस तंग जगह का कोई जवाब नहीं है। देखो, कैसे मेरा पूरा वजूद इसमें समाता जा रहा है। क्या अभी भी दर्द हो रहा है?”

सपना (मुंह से लार टपकते हुए, मदहोश आँखों से मुझे देखते हुए): “अह्ह्ह…! राहुल… राजू… अब दर्द नहीं… अब तो जैसे पूरा बदन फट रहा है… पर बहुत मजा आ रहा है… उफ्फ, और जोर से… मुझे पूरी तरह खत्म कर दो आज!”

काव्या (बेड के कोने से, थरथराते हाथों से अपनी छाती को दबाते हुए): “दीदी… तुम… तुम सच में यह सब झेल पा रही हो? राहुल, थोड़ा धीरे करो… दीदी की जान निकल जाएगी…”

राहुल (एक और गहरा और बेबाक झटका मारते हुए, हंस कर): “काव्या, तेरी दीदी तुझसे कहीं ज्यादा हिम्मती है! देख कैसे मजे से मेरा पूरा प्रहार झेल रही है। आज तो इसकी गांड का पूरा पानी सुखा कर ही दम लूँगा!”

क्या सच में राहुल सपना की गांड सुखा कर ही मानेगा या सपना पर कुछ देर के लिए रहम करके उसको सांस लेने देगा, जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, धन्यवाद !

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