नमस्कार दोस्तों मेरा नाम दीपक कुमार गुप्ता है। मैं आप सभी को अपने साले और मेरी गांड चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूं। मेरी उम्र अभी 38 साल है। पेट थोड़ा सा निकला हुआ है और मेरा लंड 7.5 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।
यह बात तब की है, जब मेरी शादी पटना की लकड़ी से हुई थी। मेरी बीवी का नाम मधु है और मैंने उसकी फ़ोटो देख कर ही शादी के लिए हां बोल दिया था। मैं एक मिल्क कम्पनी में प्रोडक्शन हेड की जॉब करता था। इसलिए कम्पनी ने मुझे एक फ्लैट भी दिया था, जो कि 3rd फ़्लोर पर था। शादी के बाद मधु और मेरी चुदाई का कार्यक्रम उसी बिल्डिंग में मस्त चलता था, और मैं अपनी शादी-शुदा जिंदगी को एंजॉय कर रहा था।
ऐसे ही एक रात की चुदाई के बाद मधु ने मुझसे बोला कि मैं उसके मामा जी के बेटे को अपने कम्पनी में जॉब लगवा दूंगा।
मधु: कुछ जुगाड़ करके उसकी जॉब स्टोर में लगवा दीजिए। उसका नाम अमन है।
मैंने उसका रहने का इंतजाम फर्स्ट फ्लोर पर कर दिया था। वो एक-दम गोरा था। छाती उसकी थोड़ी सी फूली थी, और गांड को वो थोड़ा मटका-मटका कर चलता था। अमन काम करने में एक नंबर बंदा था और मुझे उसकी कोई भी दिक्कत नहीं होती थी।
कुछ दिन बाद वो मुझसे भी अच्छे से घुल मिल गया, और अब वो हर सन्डे हमारे साथ घूमने भी जाता था। एक सन्डे को मधु हमारे लिये खाना बना रही थी और अमन न्यूज पेपर पढ़े रहा था। मैं बाथरूम से नहा कर निकल कर अपना अंडरवियर ढूंढ रहा था, पर मिल नहीं रहा था। तो मैंने मधु को बोला, पर उसने ध्यान नहीं दिया।
फिर मैंने एक बार फिर देखा तो मिल गया। जैसे ही मैं अंडरवियर को उठाने लगा तो तौलिया निकल गया। इससे मेरी गांड दिख गई अमन को। ऐसा मैंने अपनी ड्रेसिंग टेबल से देख लिया। मैंने फौरन अंडरवियर पहना कर अमन की तरफ देखा तो मुझसे नज़र नहीं मिला कर बस हस रहा था।
मैंने बोला: प्लीज अपनी मधु दीदी को नहीं बताना, वरना मुझसे फालतू में लड़ेगी।
तो अमन बोला: नहीं बताऊंगा। पर एक बात तो है, बहुत-बहुत मस्त।
और ऐसा बोल कर वो मधु के पास चला गया। फिर मैं भी रेडी हो कर सब के साथ खाना खा लिया। तब भी अमन मुझे बड़े प्यार से देखता रहा और हंस रहा था। मुझे शर्म आ रही थी, पर कुछ नहीं कर सकता था।
फिर कुछ दिन बाद एक दिन मेरी मां का फोन आया और बोली कि: बेटा बहु को अपने घर जाना है राखी के लिए। कल उसके भाई साहब रेलवे स्टेशन से ले जाएंगे। तुम उसको स्टेशन पर छोड़ देना।
मां की बात टाल नहीं सकता हूं, तो बस हां बोला दिया। फिर जब रात को घर आ गया तो मधु ने अपने जाने की पूरी पैकिंग कर ली थी।
तो मैंने बोला: तुम चली जाओगी तो मेरा मन कैसे लगेगा? और मैं चोदूंगा किसको?
पर मधु कुछ नहीं बोली। पर उस रात मैंने मधु के साथ एक बार शॉवर सेक्स किया और दो बार पलंग तोड़ चुदाई की। मधु ने भी फुल एंजॉय किया। फिर मैंने मधु से वापिस आने पर उसकी गांड चुदाने का प्रॉमिस लिया।
फिर नेक्स्ट मॉर्निंग मैं और अमन मधु को रेलवे स्टेशन छोड़ कर वापिस प्लांट पर आ गये। फिर जब लंच टाइम पर अमन ने मुझसे अपनी छुट्टी पर जाने की परमिशन मांगी, तो मैंने बोला-
मैं: हां चले जाना, पर अभी तो टाइम है रक्षाबंधन में, और कौन सा तुमको लकड़ियों जैसी तैयारी करनी है। चले जाना एक-दो दिन पहले।
फिर रात में जब रूम पर आया तो कल रात की मस्त चुदाई की याद आ गई। पर मधु नहीं थी तो क्या करता? तब ही मेरा ध्यान पता नहीं अमन की गांड पर जाने लगा। फिर मैं अपना लंड मसलने लगा तो और भी मजा आने लगा। फिर फोन मैं एनल सेक्स देखा और पता ही नहीं चला कब रात से सुबह हो गई। फिर मैं ऑफ़िस चला गया।
आज ऑफ़िस में कम काम था, और अमन आज मेरे ही ऑफिस से अपना काम कर रहा था। मैं उसकी गांड को ही देखे जा रहा था, तो मैंने अमन से शाम के बाद पास के मॉल चलने को कहा। तो पहले भोंसड़ी के ने नाटक किया और फिर मान गया। फिर ऑफ़िस का काम करके मैं उसे अपनी बाइक पर बिठा कर लें गया। वो बहन का लौड़ा एक-दम मधु की तरह ही मुझसे चिपक कर बैठा था, और उसके हाथ मेरी जांघ पर थे। पर मैंने उसे कुछ नहीं बोला।
फिर रास्ते में हल्की सी बारिश हो गई तो मैंने बाइक एक जगह रोक दी। फिर मॉल में जा कर मैंने कुछ घर का सामान, और एक बियर की बोतल ली। अमन ने अपने लिए भी कुछ लिया, और फिर जब हम वापिस प्लांट पर लौट रहे थे, तब बहुत ही अच्छी बारिश हुई जिससे हम दोनों पूरे गीले हो गए।
फिर जब मैं रूम का लॉक ओपन करके हम दोनों अन्दर आ गए, तो देखा कि हमारे पूरे कपड़े गीले हो गए थे। इस वजह से मैंने अपने सारे कपड़े निकालने चालू किये।
पर जब जींस उतारने में कुछ प्रॉब्लम हो रही थी, तो अमन से हेल्प ली। अमन ने एक-दम से जोर लगाया तो जीन्स के साथ मेरा अंडरवेयर भी कुछ निकल गया। तो उसको मेरी झाट के बाल भी देख गए। तब अमन फिर से हंसने लगा ओर बोला-
अमन: क्या जीजा जी, कुछ दिन पहले अपने अपनी गांड को दिखा दिया, और आज आप तो पूरे नग्न हो रहे है। शायद आपको कपड़े पसंद नहीं है।
फिर मैंने भी बोला: हां यार, जब से शादी हुई है, तब से बस ऑफिस टाइम में ही कपड़े पहन लो। वरना तेरी दीदी को मैं बिना कपड़ों के ही पसंद हूँ।
और ऐसा बोल कर मैंने उसको भी कपड़े निकालने को बोला।
पर उसने कहा नहीं वो ऐसे ही ठीक है।
मैंने बोला: समझा करो साले जी, गीले कपड़ों में ठंड लग जाएगी। और मैं भी तो अंडरवियर में हूं, और मुझसे क्या शर्माना। तुम भी मर्द और मैं भी।
और ऐसा बोल कर मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसकी शर्ट उतार दी। उसकी छाती एक-दम गोरी और उसके निप्पलों का रंग एक दम पिंक है। मैं उसका पजामा उतार रहा था, तब उसकी गांड से एक-दम चिपक रहा था। फिर हम दोनों के लंड एक-दूसरे से चिपक रहे थे। बस अंडरवियर की दीवार थी, वरना हम दोनों एक-दम नंगे ही हो जाते।
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