नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं 29 साल का हूं और एम.पी. का रहने वाला हूं। मेरी शादी हो चुकी है, और 2 बच्चे हैं। बीवी मेरी खूबसूरत है, लेकिन शादी के कुछ साल बाद बीवी बोरिंग हो जाती है। हर मर्द इस चीज़ को समझ सकता है।
अभी-अभी करवा चौथ हो गया है। मेरी आज की कहानी उसी दिन की है। इस कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने उसी दिन एक सेक्सी आंटी की चुदाई की। तो चलिए कहानी शुरू करते हैं।
मेरी किराने की दुकान है, और दुकान के थोड़ी आगे एक मंदिर है। अब मंदिर है तो बहुत औरतें वहां जाती हैं। उन सब औरतों को मेरी दुकान के सामने से हो कर जाना पड़ता है। जिस किसी को भी कुछ सामान चाहिए होता है, तो वो मेरी दुकान से ले लेती है। इस तरह से मेरी दुकान पर बहुत सारी औरतें आती हैं।
अब मर्द हूँ, तो औरतों से बातें करना, उनसे फ़्लर्ट करने का मौका कैसे छोड़ सकता हूँ? तो मैं भी हर सेक्सी औरत से बातें करने लग जाता हूँ। इससे वो भी खुश हो जाती है, और मेरा भी लंड सख्त हो जाता है।
करवा चौथ की सुबह थी। दुकान खोले हुए थोड़ी देर ही हुई थी कि एक आंटी मेरी दुकान पर आई। जब मैंने आंटी को देखा तो देखता ही रह गया। आंटी कोई 45-46 साल की होगी। उसका रंग गोरा था, और शरीर गोल-मटोल था। मोटे वाला गोल-मटोल नहीं, सेक्सी वाला।
आंटी ने पीले रंग की साड़ी पहनी थी। मेकअप भी कर रखा था, जिसमें और वो भी सेक्सी लग रही थी। उसके ब्लाउज में उसके बड़े-बड़े स्तन कमाल के लग रहे थे, एक-दम रसदार।
फ़िर आंटी ने कहा: भैया अगरबत्ती मिलेगी।
मैं: जरूर मिलेगी।
फिर मैंने उनसे उनके बारे में पूछना शुरू कर दिया। वो भी इंटरेस्ट लेके बातें करने लगी। बातों के दौरान मेरी नज़र बार-बार उनकी क्लीवेज पर जा रही थी। ये चीज़ आंटी ने भी नोटिस कर ली। लेकिन कुछ कहा नहीं उन्होंने। फिर वो चली गई, और मेरा लंड सुबह-सुबह खड़ा हो गया।
ऐसा ही सारा दिन बीत गया। काफ़ी औरतें आज भी दुकान पर आयी। लेकिन वो आंटी मेरे दिमाग से निकल नहीं रही थी। दिल बार-बार कह रहा था कि काश उसको चोदने को मिल जाए। फिर शाम 4 बजे के करीब एक बाइक मेरी दुकान के अपोजिट साइड आके रुकी। उस पर वही आंटी बैठी थी अपने पति के साथ।
मैंने देखा उसका पति उसको किसी बात पर गुस्सा कर रहा था। फिर वो ऐसे ही आंटी को वहां छोड़ कर चला गया। आंटी वहां उदासी खड़ी हो गई। फिर आंटी ने किसी को कॉल लगाई, लेकिन सामने से किसी ने फोन नहीं उठाया। शायद वो अपने पति को ही कॉल कर रही थी।
ऐसे ही वो वहां कुछ देर खड़ी रही। फ़िर मैंने उनको आवाज़ दी-
मैं: आंटी, आप यहां आके बैठ जाओ जब तक कोई लेने नहीं आता।
2-3 सेकेंड सोचा उन्होंने। फिर आ गई और कुर्सी पर आके बैठ गई। फिर मैंने कहा-
मैं: वैसे जो भी हो, अंकल को आपको बीच रास्ते में नहीं जाना चाहिए था।
आंटी: क्या करे बेटा, कुछ पतियों को पत्नी की वैल्यू नहीं होती।
मैं: पत्नी इतनी खूबसूरत हो, तो चूम-चूम कर रखना चाहिए।
आंटी: अच्छा, तुम्हें मैं खूबसूरत लगी?
मैं: हां, आप बहुत खूबसूरत हो।
आंटी: मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं कहा मुझे।
मैं: फिर तो उनकी आंखें ख़राब लगती हैं।
ये सुन कर आंटी हंसने लग गई। मैं समझ गया कि बात बन सकती थी। फ़िर ऐसे ही मैं उनसे फ्रेंडली होने लगा। कुछ देर बाद आंटी ने पूछा-
आंटी: बेटा यहाँ बाथरूम है?
मैं: जी है। पीछे रूम है। उसी में बाथरूम भी है।
तभी आंटी उठी, और अंदर कमरे वाले बाथरूम में चली गई। कुछ देर में मुझे उनके चिल्लाने की आवाज आई। मैं जल्दी से भाग कर अंदर गया, और बाथरूम के बाहर जाके खड़ा हो गया। मैंने दरवाजा खटखटा कर पूछा-
मैं: क्या हुआ आंटी?
तभी आंटी ने दरवाजा खोला, और चीखती हुई बाहर आई। जब वो बाहर आई तो सामने मैं खड़ा था। वो आके मेरे गले लग गई। इसके उनके मोटे स्तन मेरी छाती में दब गये। मैंने पूछा-
मैं: क्या हो गया?
आंटी: अन्दर चूहा है।
मैं: हाहा, चूहे का इतना डर।
आंटी: मुझे घिन आती है चूहे से।
मैं: कोई बात नहीं, अब आप सुरक्षित हैं।
फिर आंटी मुझसे अलग होने लगी, तो उनकी चेन मेरी शर्ट के बटन में फंस गई। अब मैं उनकी चेन निकालने लगा। हमारे चेहरे एक-दम करीब थे, तो हमारी सांसें टकराने लगी। इससे मुझे गर्मी चढ़ने लगी। चेन निकालते हुए जब मैंने आंटी की तरफ देखा, तो आंटी मुझे ही देख रही थी। फिर मैं भी उनको देखने लगा। मुझे लगा मोमेंट बन चूका था, तो मैंने अपना फेस आंटी के फेस की तरफ बढ़ाया।
आंटी वैसे ही खड़ी रही, और मैंने अपने होठों से चिपका दिया। अब मैं आंटी के होठों को चूसने लगा। हैरानी की बात है कि वो भी मेरा साथ देने लगी। मेरी तो लॉटरी लग गई। मैंने आंटी को बाहों में भर लिया और उनकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उनको चुना लगा।
आंटी भी अपना हाथ मेरे बालों में फेरने लगी। हम दोनों की किस्स पैशनेट होने लगी। फिर मैंने आंटी का पल्लू हटाया और ब्लाउज-ब्रा खोल कर स्तन नंगे कर दिये। बहुत बड़े और सेक्सी स्तन थे उसके। मैं उनके स्तन चूसने लगा और वो आहें भरने लगी। उसके बाद मैंने आंटी की बाकी साड़ी भी उतार कर फेंक दी।
अब आंटी मेरे सामने नंगी खड़ी थी। मैंने उनको कमरे में पड़े बिस्तर पर लिटाया और टांगें खोल कर उनकी चिकनी चूत को चूसने लगा। आंटी पागल सी होने लगी। कुछ देर चूत चूसने के बाद मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतारे। अब मेरा काला मोटा लंड आंटी के सामने था।
मैंने लंड आंटी की चूत पर सेट किया, और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। आंटी आहें भरने लगी। लंड पूरा अंदर जाते ही मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। उनकी चूत की गर्मी मुझे बहुत मजा दे रही थी। तकरीबन 15 मिनट मैंने आंटी की चुदाई की। साथ में मैंने उनके स्तन भी चूसे।
फिर मेरा निकलने वाला हो गया, तो मैंने लंड बाहर निकाल कर उनके पेट पर अपना माल निकाल दिया। उसके बाद मैं कपड़े पहन कर बाहर आ गया। कुछ देर में आंटी भी बाहर आ गयी। उन्होंने मुझे कहा-
आंटी: आज तुम्हारे साथ मुझे बहुत मजा आया है। मैं फिर आऊंगी।
मैं: आपका हार्दिक स्वागत है आंटी।
फिर आंटी चली गई। अब देखो दोबारा आएगी या नहीं। कहानी कैसी लगी, फीडबैक [email protected] पर दे।