बारिश की रात में साले की गांड चोदी-4 (Barish ki raat mein saale ki gaand chodi-4)

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पिछला भाग पढ़े:- बारिश की रात में साले की गांड चोदी-3

नमस्ते दोस्तों, मेरी इस सेक्स स्टोरी के अगले भाग में आपका स्वागत है। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों कि आप सभी को मेरी यह रियल सेक्स स्टोरी पसंद आई। चलिए अब मैं आपको बताता हूँ कि आगे क्या-क्या हुआ।

जैसा कि आप सब ने पढ़ा कि अब अमन भी चला गया है और मैं अकेला रह गया था। राखी भी खत्म हो गई, पर अभी तक मधु नहीं आई थी, और ना ही मेरा प्यारा गांडू साला अमन। अब मेरा लंड बस 2 महीनों से बस मूत रहा था।

फिर एक दिन माँ का कॉल आया कि मधु को वापस लेने मुझे ही जाना होगा और उसके गांव में हमारी शादी के बाद की कुछ रस्में और रिवाज़ करने थे, तो मुझे भी मधु के घर रहना होगा। कम से कम 20 दिन या उससे भी ज़्यादा लग सकते थे।

पहले तो मैंने साफ़-साफ़ मना कर दिया और फ़ोन भी काट दिया क्योंकि इतनी छुट्टी तो मिलने से रही। पर अब मुझे छेद तो चाहिए ही था। तो अपने बॉस को पटा कर पूरे 1 महीने की छुट्टी ली और मधु के मायके जाने के लिए अपना बैग पैक किया और चला गया।

फिर उन रस्मों और रिवाज़ों के चलते मेरी सासू माँ ने मुझे मधु से दूर रखा। पर मेरे रियल बड़े साले साहब विकास ने मेरी मदद की और फिर मैंने अपने ससुराल में अपनी बीवी की चूत चोदी।
पढ़िए सब कैसे हुआ-

दीपक, रस्मों की वजह से मधु से दूर, साले विकास के साथ सोने को मजबूर है। विकास की बेशर्म बातें, दीपक की हवस को बढ़ा देती है। जब विकास सब को पूजा ले जाता है, दीपक मधु को बाथरूम में बुला कर अपनी प्यास बुझाने की योजना बनाता है। क्या मधु उसकी चाल में आएगी?

दीपक ने अपना बैग पैक किया और मधु के गांव के लिए निकल पड़ा। राखी के त्योहार के बाद उसने पंद्रह दिनों की छुट्टी ले रखी थी क्योंकि उसकी माँ ने कहा था कि मधु के गांव में कुछ खास रस्में और पूजा होने वाली थी।

दीपक, जो खुद 28 साल का एक देसी, काले बालों वाला मर्द था, अपनी मधु से मिलने की उत्सुकता में बेचैन था। गांव पहुँच कर उसका स्वागत हुआ, लेकिन रात का खाना खत्म होते ही उसकी सास ने उसे रोक दिया। जब दीपक मधु के कमरे की ओर बढ़ा, तो सास ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि जब तक गांव की रस्में और पूजा पूरी नहीं होती, तब तक उसे मधु के कमरे में नहीं जाना है। उसे अपने साले विकास के कमरे में ही सोना होगा।

दीपक के मन में तो आग लग गई और उसने मन ही मन में सास को कई गंदी गालियाँ दी। लेकिन चेहरे पर एक झूठी मुस्कान लिए उसने अपना बैग उठाया और विकास के कमरे की ओर चला गया।

विकास 32 साल का एक देसी मर्द था, जिसकी बीवी दूसरे बच्चे को जन्म देने अपने मायके गई हुई थी। विकास की बातों में एक अलग ही बेशर्मी और गंदी भाषा का इस्तेमाल था। दीपक ने दरवाज़ा बजाया, तो विकास ने उसे अंदर बुलाया और उसका बैग ले लिया। थोड़ी देर बाद विकास ने दरवाज़ा बंद किया और दीपक को आरामदायक महसूस कराने के लिए कपड़े बदलने को कहा। शुरू में दीपक शर्माया रहा, लेकिन विकास की बेरुखी ने उसे खोल दिया।

दीपक ने शर्ट उतार दी, जिससे उसकी मर्दाना छाती पर बालों की घनी खेती और उसके दमदार बदन का पूरा नज़ारा सामने आ गया। विकास की निगाहें उसके बदन पर टिकी रही। फिर दीपक ने पैंट भी उतार दी और अब वह सिर्फ अंडरवियर में था। उसका आधा खड़ा लंड अंडरवियर के अंदर तनाव महसूस करा रहा था, जिसे दीपक खुजा कर समायोजित करने लगा। विकास ने उसे एक नई लुंगी पकड़ाई और दोनों बेड पर लेट गए।

लेटते ही दीपक ने विकास से उसकी बीवी के बारे में पूछा। विकास ने बताया कि वह बच्चा देने वाली है और अभी अपने मायके गई है। दीपक ने हैरानी से पूछा कि उनका बड़ा बेटा तो अभी 18-20 महीने का ही है। इस पर विकास बेशर्मी से हँस पड़ा और बोला, “अरे जीजा जी, कोई जान-बूझ कर नहीं किया। बस जोश में चढ़ गया और चुदाई कर दी। जब लंड का मज़ा आता है, तो क्या बेटा और क्या बहू, सब भूल जाता है।”

विकास की इस खुली बात सुन कर दीपक पहले तो चौंक गया, फिर दोनों ज़ोर से हँसने लगे। विकास ने इशारों-इशारों में दीपक से पूछ ही लिया कि उसे भी अपनी बीवी मधु की चूत चाहिए। दीपक ने सिर हिला कर सहमति जताई और फिर दोनों सो गए।

सुबह उठते ही दीपक का लंड लुंगी में तन कर खड़ा था। विकास ने उसे देखा और खुश होकर अपना लंड भी सहलाने लगा। तभी विकास के पापा ने उसे बुला लिया। कुछ देर बाद मधु चाय बना कर दीपक को जगाने आई। दीपक ने मधु को देखते ही उसे कस कर पकड़ लिया और पास बिठा लिया।

उसने मधु से कहा, “देखो मधु, पूरे दो महीने हो गए हैं। अब नहीं रुका जाता। सब हो गया, अब चलो घर।” मधु ने उसके होंठों पर एक किस्स दी और शर्माते हुए बोली, “बस पूजा होने दो, फिर घर चलेंगे। आप जो बोलोगे, मैं सब करूँगी।” दीपक नाश्ता करके तैयार हुआ, पड़ोसी और रिश्तेदारों से मिला, और फिर पूजा शुरू हो गई। रात को फिर से उसे विकास के कमरे में सोना पड़ा।

यह सिलसिला 4-5 दिन तक चलता रहा। आज की पूजा काफी लंबी और थकाने वाली थी। दीपक इतना थक गया कि बिना कपड़े उतारे ही बेड पर लेट गया। 1-2 घंटे बाद विकास आया और उसकी हालत पूछी। दीपक ने कहा कि उसकी पीठ और टांगों में बहुत दर्द है। विकास ने उसे मालिश करने को कहा। दीपक ने पहले मना किया, लेकिन विकास ने जबरदस्ती की।

विकास ने दीपक की शर्ट उतार दी और अपने देसी हाथों से उसकी पीठ और कंधों की मालिश शुरू कर दी। दीपक ने खुद ही पैंट उतार दी और अब वह सिर्फ चड्डी में था। विकास पहले से ही चड्डी में था। दोनों देसी मर्द एक-दूसरे के सामने चड्डी में थे।

जब विकास ने दीपक की मोटी टांगों की मालिश करनी शुरू की, तो विकास का लंड भी खड़ा हो गया। वह तेल की शीशी लेकर बाथरूम चला गया। 15 मिनट बाद जब वह वापस आया, तो दीपक ने आंखों से ही सब पूछ लिया। विकास ने बेशर्मी से खुल कर बता दिया कि उसने मुठ मार ली।

दीपक भी हवस में आ गया, लुंगी लपेट कर बाथरूम जाने लगा। लेकिन तभी किसी ने दरवाजा बजा दिया। दीपक बस मूत कर वापस आ गया और कमरे में आकर गंदी गालियां देने लगा। उसने विकास से कहा, “साले साहब, कोई जुगाड़ लगा इसका, वरना मैं पागल हो जाऊंगा।” विकास ने हां कह दी और दोनों चड्डी में सो गए।

2-3 दिन बाद दीपक ने फिर विकास से कहा, “साले साहब, अब बर्दाश्त नहीं होता।” विकास ने उसे एक योजना बताई। उसने कहा, “कल की पूजा में तुम्हारी और मधु की कोई जरूरत नहीं है। मैं सब को सुबह ही अपने साथ ले जाऊंगा। तुम्हारे पास 1 से 1.5 घंटे का समय होगा।”

अगली सुबह विकास सब को लेकर चला गया। दीपक उठा और घर में सन्नाटा था। उसने नौकर को कुछ पैसे देकर सामान मंगवा लिया और घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। उसने अपनी चड्डी उतार दी और कमर में एक छोटी सी सूती तौलिया लपेट कर बाथरूम की ओर चला गया। मधु उसके लिए चाय बना रही थी।

करीब 5 मिनट बाद दीपक ने जान-बूझ कर स्नानघर में जोर से चीखा और गिरने का नाटक किया। मधु डर के मारे दौड़ कर बाथरूम में घुस गई। दीपक फर्श पर नंगा पड़ा था और तौलिया जमीन पर बिखरा हुआ था। जैसे ही मधु ने उसे उठाने के लिए उसकी कमर से पकड़ा, दीपक नंगा हो गया।

मधु ने महीनों बाद अपने मर्द का वह 7 इंच का मोटा, काला और झांटों से सजा लंड देखा और वह सब कुछ भूल गई। दीपक ने तुरंत बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और मधु को अपनी बांहों में भर लिया। वह उसके गीले बदन को अपने से चिपका रहा था। उसने मधु के गुलाबी होंठों को चूमा और अपनी जीभ उसके मुख में डाल कर मजे लेने लगा।

मधु कुछ समझ पाती, इससे पहले ही दीपक का एक हाथ उसके मोटे-मोटे स्तनों पर जा दबाया और दूसरा हाथ सीधे उसकी सलवार के अंदर घुस गया। दीपक की उंगलियां उसकी चूत के उस पार जा रही थी। मधु की चूत से पानी निकलने लगा। दीपक ने मधु को घुटनों के बल बिठा कर अपना लंड चूसने को कहा, लेकिन मधु शर्म के मारे मना करने लगी।

दीपक ने उसे फर्श पर लिटा दिया, उसकी सलवार नीचे खींची और उसकी चूत को चाटने लगा। वह उसके स्तनों को भी जोर-जोर से मसल रहा था। जब मधु की चूत का पानी एक बार निकल गया, तो वह बेचैन हो उठी और खुद ही बोली, “अब डाल दो, और रुको मत।”

दीपक खुश हो गया और बोला, “ले साली, आज तेरी चूत की आग बुझाता हूं।” उसने अपने लंड पर थूक लगाया और चूत के छेद पर काफी देर तक लंड घिसा, लेकिन अंदर नहीं डाला। मधु अब बेकाबू हो चुकी थी। उसने खुद ही दीपक का मोटा लंड पकड़ा और अपनी चूत में रख लिया। दीपक ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड अंदर समा गया। दोनों संभोग का मजा लेने लगे। कभी वे दीवार से लग कर, कभी घोड़ी बनकर, और कभी कुत्ते वाली स्थिति में चुदाई करते रहे।

आखिर में दीपक ने मधु को अपने लंड पर बिठा लिया और नीचे से पूरे दम से उसकी चूत को चोदने लगा। दोनों जोर-जोर से आवाजें निकाल रहे थे। जब दीपक का वीर्य निकलने वाला था, तो उसने मधु को नीचे कर दिया। उसने अपना पूरा 7 इंच का मोटा लंड मधु की चूत के अंदर पूरी हवस और शक्ति से ठोका और 6-7 गर्म-गर्म धारें उसकी चूत में छोड़ दी। दोनों एक-दूसरे के ऊपर ही ढेर होकर रह गए और दीपक अभी भी मधु के स्तन चूस रहा था।

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