पिछला भाग पढ़े:- मामी और उनकी बेटी की चूत मारी-7
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मामी ने जवाब दिया: कि मुझे डोली के साथ जाना है आपके घर और आपके कमरे में हम दोनों भी शादी करेंगे।
मैंने ये बात माला को नहीं बताई। क्योंकि मुझे पता था कि वो इस बात के लिए नहीं मानेगी। तभी मैंने सोचा कुछ तो करना पड़ेगा। वरना मामी साथ ही जाएगी।
मैंने माला से कहा: सुनो ना, तुम नीचे जाकर बोल देना कि मम्मी डोली से अगले दिन जब फेरा डालने आउंगी, तो हम डिनर बाहर करेंगे।
अब हम नीचे जाने लगे तो माला ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे होठों पर चूमा और बोला कि, “आप मेरे बारे में कितना सोचते हो।”
अब हम नीचे पहुंचे तो मामी मुझे गुस्से से देख रही थी और माला से उनकी जलन साफ चेहरे पे दिख रही थी।
माला: तो आप लोगों ने सब फैसला कर लिया?
मामी: हां बेटा, मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी डोली में ही। और जब तक तुम सेट नहीं हो जाती हो, तब तक मैं तुम्हारे साथ रुकूंगी।
माला: नहीं मम्मी, मैंने कुछ और प्लान बनाया है।
मामी मुझे देख रही थी और मैंने ऐसा रिएक्ट किया जैसे मुझे कुछ नहीं पता था।
मामी: क्या प्लान है?
माला: मैं अगले दिन आऊंगी फेरा डालने, और वैसे भी मैं बुआ जी के घर ही तो शादी करके जा रही हूं। तो कोई समस्या नहीं होगी। हम सब मेरे आने पे फैमिली डिनर करेंगे। क्यों बुआ जी सही हैं ना?
मम्मी: जैसा तू कहे मेरी बच्ची।
मामी का मूड खराब हो गया और वो किचन में चली गई। मैं भी पानी पीने के बहाने किचन में चला गया। कहीं ना कहीं मुझे मामी से भी प्यार था और थोड़ा बुरा भी लग रहा था।
मैंने मामी से कहा: जान टेंशन ना लो। तुम मेरे साथ अपनी बेटी से पहली शादी करोगी।
मामी: वो कैसे?
मैं: हम आज रात ही शादी करेंगे और सुहागरात भी।
मेरी मामी ये सुन कर खुश हो गई और थोड़ा चौंक भी गई।
मामी: ये कैसा होगा?
तभी मैंने नींद की गोली की पट्टी मामी को दी और बोला: आज खीर बनाओ और उसमें ये डाल दो। बस हम दोनों की कटोरी में मत डालना।
मामी: ठीक है, मैं दोनों की खीर पहले निकाल लूंगी और फ्रिज में रख दूंगी। वैसे भी तुम्हें ठंडी खीर पसंद है।
मैं: ठंडी खीर और गरम औरत दोनों अच्छे लगते हैं। अच्छा सुनो, रात को नई दुल्हन की तरह तैयार होना।
मामी: ठीक है, मेहंदी भी लगा लूंगी।
मैं: अरे कैसे, सब को पता लग जाएगा।
मामी: तुम फिकर मत करो। किसी को पता नहीं लगेगा, तुमको भी नहीं।
मैं: मुझे कुछ समझ नहीं आया।
मामी: रात का इंतज़ार करो पतिदेव, सब समझ आएंगे।
फिर हम किचन से बाहर आ गये, सब अपने काम में लग गये। बस मैं और माला बैठे हुए बात कर रहे थे। मेरा लंड फिर से जागने लगा। माला ने मुझे देखा तो वो हल्का सा हंसी।
माला: ये फिर खड़ा हो रहा है।
मैं: यार कुछ करो ना, चूस लो।
माला: कैसे?
मैं: मुझे नहीं पता।
माला: अच्छा सुनो, छत पर चलते है। अँधेरा हो गया है। वहीं करती हूँ इसको ठंडा।
और ये कह कर उसने मेरा लंड दबाया।
मैं: चलो ठीक है। तुम चलो, मैं आता हूं।
इतना कह कर मैं किचन में गया और मामी से कहा: सुनो मामी, माला मेरे साथ छत पर जा रही हो। आप संभाल लेना।
मामी: क्यूं जाना है?
मैं: उसका मन हो रहा था तो सोचा उसे ठंडी कर दूं। ताकि रात को तुम्हारी चुदाई कर सकूँ।
मामी: ठीक है। पर सच में ना मुझे अब थोड़ी जलन होती है। मैंने तुमको अपना पति माना है और मेरी किस्मत देखो कि अपने पति से खुल कर प्यार भी नहीं कर सकती।
मैं: कोई नहीं, हमारा रिश्ता हमेशा पति-पत्नी का रहेगा।
और मैंने उनके होठों पर किस्स किया। मामी ने पूरा साथ दिया।
मामी: अब जाओ, नहीं तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा।
तभी माला का मैसेज आया जिसमें उसने अपनी सलवार नीचे करके पैंटी की फोटो भेजी और लिखा: आ जाओ जान!
मैं ऊपर गया। पूरा अँधेरा था। माला साइड में खड़ी थी अपने दोनों हाथ उपर करके। उसने अपने बाल पकड़ रखे थे और मुझे देख कर एक कातिल सी स्माइल दी। कसम से एक दम रंडी लग रही थी।
मैं उसके पास गया और उसको अपनी बाहों में भर लिया, उसने भी मुझे खुद से चिपका लिया और मेरा गले चूमने लगी। मेरा हाथ उसकी कमर से उसकी गांड पे गया और मैंने उसकी गांड दबा दिया। उसने अपना एक हाथ मेरे लंड के ऊपर रख दिया।
माला: आज इस शैतान की प्यास बुझाती हूं।
और इतना कह कर वो झुक गई और उसने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया। फिर मुझे देखते हुए उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया।
आह क्या मजा आ रहा था। मैंने उसको कहा कि ऊपर आओ और उसके होंठ चूमते हुए उसकी सलवार में हाथ डाल दिया। उसकी चूत एक दम गर्म और गिली थी।
मैं: सुनो ना, अन्दर लेलो।
माला: मन तो मेरा भी है, पर कोई आ ना जाए?
मैं: कोई नहीं आएगा, जल्दी कर लेंगे।
वो मुझसे दूर हुई, और दीवार के तरफ हो कर उसने अपनी सलवार उतारी। फिर गांड बाहर की तरफ करके अपना चेहरा मेरी तरफ घुमा कर मुझे इशारे से बुलाया और अपनी गांड पर हाथ फेरने लगी।
मैं भी एक दम से उसके पास गया और उसका चेहरा पीछे करके उसके होठों को चूमा आअहह मुउआहह। मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ रखा और दबा दिया। उसने मेरा लंड पकड़ के चूत पर लगाया और बोली: जान जल्दी करो, बाकी रात को कर लेना।
अब उसे क्या पता था कि रात को मैं उसकी माँ की चुदाई करुँगा। मैं उसके पास गया। कसम से क्या गांड थी। मैंने उसकी गांड पर एक थप्पड़ मारा। उसकी गोल-मटोल गांड पूरी लाल हो गई। माला बस आहह करती रह गयी। मैं झुक कर उसकी गांड को चूमने लगा।
माला: आह्ह राजा जी क्या कर रहे हो? मैं पागल हो रही हूं।
उसकी चूत एक दम गीली थी। मैंने अपनी जुबान उसकी चूत पर घुमाते हुए उसकी गांड के छेद पर जैसे ही घुमाई, वो पागल हो गई।
माला: आह्ह पतिदेव, आज तो मेरी जान ही निकाल लोगे आप।
मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली और उसकी गांड को चाटने लगा सूप सुप्प मुआह मुआह।
माला: बस करो। और अपनी पत्नी की चूत में समा जाओ।
मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। वो दीवार का सहारा ले कर खड़ी थी और अपने पैरों को ऊपर उठा रही थी। उसने मेरा सर अपनी चूत में दबा दिया और आह आह करते हुए बोली-
माला: डालो, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। मैं झड़ने वाली हूँ ऊऊह चाटो और चाटो। खा जाओ मेरी चूत को आह आह आह।
मैं उठा और उसका चेहरे को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंठों पर होंठ रख दिए और उसकी गांड और उसकी चूची दबाने लगा। मेरा लंड उसकी चूत के छेद पर रगड़ रहा था और वो पागल हो रही थी। उसने एक हाथ पीछे किया और मेरे लंड को पकड़ के अपनी चूत पर रखा।
इसके आगे क्या हुआ आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। फीडबैक [email protected] पर दें।