मुसीबत में चढ़ी बॉस के लंड पर-3 (Museebat mein chadhi boss ke lund par-3)

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पिछला भाग पढ़े:- मुसीबत में चढ़ी बॉस के लंड पर-2

नमस्कार दोस्तों, मैं अनुष्का अपनी चुदाई कहानी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हूं। उम्मीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा। अगर नहीं पढ़ा है तो उसको पहले ज़रूर पढ़े।

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि मैं बॉस के केबिन में घुटनों पर बैठ कर उनका लंड चूस रही थी। फिर बॉस को हेड ऑफिस से फोन आया और उन्होंने मुझे खुशबखबरी देते हुए कहा कि मेरी जॉब बच चुकी थी। ये सुन कर मैं बहुत खुश हुई। फिर जब मैं दोबारा उनका लंड चूसने लगी, तो उन्होंने कहा कि अब सिर्फ लंड नहीं चूसना है, अब बाकी काम भी होगा। ये बोल कर बॉस मुझे एक फाइव स्टार होटल में ले गए।

कमरे में जा कर वो नंगे हो गए और मुझे भी नंगी कर दिया। अब हम दोनों 69 पोजीशन में थे। वो मेरी चूत चूस रहे थे और मैं उनका लंड चूस रही थी। अब आगे बढ़ते है-

फिर बॉस मेरी चूत के अंदर जीभ डालने लगे और चूत की चुस्कियां लेके उसको चूसने लगे। वो ऐसे मेरी चूत चूस रहे थे, जैसे सारा पानी चूस कर ही निकाल लेंगे।

कुछ देर हम दोनों का ऐसे ही चलता रहा। फिर बॉस ने अपना हाथ मेरी चूत पर रखा और चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगे। अब उनकी उंगली और उनकी जीभ दोनों साथ मिल कर काम कर रहे थे। वो अपनी 2 उंगलियों के बीच मेरी चूत के दाने को पकड़ कर दबा रहे थे। इससे तो मैं पागल हुई जा रही थी। मेरा बॉयफ्रेंड भी चूत को चाटता था, लेकिन बॉस जैसे नहीं। ऐसा लग रहा था कि बॉस अपना सारा तजुर्बा इस्तेमाल करके मेरी चूत को मज़ा दे रहे थे।

वो ऐसे ही करते रहे और मैं मदहोशी में उनका लंड चूसती रही। मैं इतने मजे में थी, कि थोड़ी ही देर बाद मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। जैसे ही मेरा पानी निकला, बॉस ने अपना मुंह मेरी चूत पर लगा दिया। मेरे कांपते हुए जिस्म से निकलते पानी को बॉस पूरा पी गए। अब मैं ढीली पड़ गई थी, लेकिन बॉस का लंड चूसती जा रही थी।

फिर बॉस ने मुझे अपने ऊपर से उठाया और बिस्तर पर सीधी लिटा दिया। मैं सिर्फ ब्रा में उनके सामने थी। उन्होंने मेरी सेक्सी जांघों को चूमना शुरू किया। इससे मेरे जिस्म में खलबली सी उठने लगी। जांघों को चूमते हुए वो ऊपर आने लगे, और मेरे पेट पर चूमने लगे। मुझे गुदगुदी होने लगी। फिर उन्होंने मेरी नाभि में जीभ डालनी शुरू की।नाभि चूसने के बाद वो ऊपर आए, और मेरी ब्रा खींच कर मेरे चूचे बाहर निकाल लिए।

दोस्तों मैं आपको बता दूं, कि मेरे चूचे देख कर कोई भी मर्द मेरा दीवाना बन जाए, और हर मर्द मेरे चूचों को खा जाना चाहेगा। बॉस का भी कुछ ऐसा ही इरादा था।

बॉस ने मेरे दोनों चूचों को अपने हाथों में ले लिया और एक-एक करके दोनों के निप्पलों पर अपनी जुबान फेरने लगे। फिर वो एक-एक करके मेरे चूचों को चूसने लग गए। वो बड़ी जोर से मेरे चूचे चूस रहे थे। निप्पल पर मुंह लगा कर उसको मुंह के अंदर खींच रहे थे। चूचे पर हल्के-हल्के दांत गढ़ा रहे थे। उनके ऐसे करने से मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था। चूचे चूसने से जिस्म में जो करेंट पैदा हो रहा था, वो सीधे मेरी चूत तक जा रहा था, और उसको दोबारा से गरम कर रहा था।

कुछ देर तक वो ऐसे ही चूचे चूसते रहे। उनका लंड मेरी चूत पर रगड़ खा रहा था, और मेरी चूत उनके लंड को लेने के लिए तड़प रही थी। फिर मैंने मजबूर हो कर बॉस को कहा-

मैं: बॉस अब डाल दो ना, कितना गरम करोगे और?

मेरी बात सुन कर बॉस मुस्कुराए और बोले: चुदाई करने का मजा सबसे ज्यादा तभी आता है, जब औरत लंड मांग रही हो।

ये बॉस का अनुभव था, जो बोल रहा था। फिर बॉस ने चूत पर लंड सेट किया, और प्रेशर बनाने लगे। उनका लंड धीरे-धीरे मेरी चूत के अंदर जाने लगा। मोटा तगड़ा लंड मेरी चूत की दीवारों को और चौड़ा कर रहा था, और अंदर घुसा रहा था। थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था, लेकिन हवस इतनी बढ़ चुकी थी, कि उस दर्द की कोई परवाह नहीं थी।

प्रेशर बनाते हुए लंड अंदर जाता गया। फिर एक जगह जा कर रुक गया, क्योंकि आगे से चूत और टाइट थी। फिर बॉस ने लंड पीछे किया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए चुदाई करने लगे।

उनका लंड अंदर बाहर होते हुए मेरी चूत की दीवारों के साथ रगड़ खा रहा था, जिसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था। धीरे-धीरे अंदर-बाहर होता हुआ लंड मेरे जिस्म में करेंट जैसे पैदा कर रहा था। साथ में बॉस कभी मेरे होंठ तो कभी मेरे चूचे चूस रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था।

फिर बॉस ने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू की। मेरी सिसकारियां भी तेज़ होने लगी। धक्के मारते-मारते एक-दम से जोर के धक्के मारने लगा। इससे मुझे बहुत दर्द होने लगा और उनका लंड चूत के बचे हुए हिस्से को फाड़ने लगा। मैं चीखने लगी और बॉस को रुकने के लिए कहने लगी। लेकिन अब बॉस कहां रुकने वाले थे। वो तब तक जोर के धक्के चूत में पेलते रहे, जब तक कि उनका लंड मेरी चूत को पूरा फाड़ कर अंदर नहीं घुस गया। और मैं उनके नीचे तड़पती रही।

पूरा लंड चूत में घुसाने के बाद बॉस थोड़ी देर के लिए रुके। जब मेरा रोना-धोना खत्म हुआ, तब उन्होंने दोबारा चुदाई शुरू की। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं भी गांड उठा-उठा कर चूत चुदवाने लगी। ये देख कर बॉस अपनी स्पीड बढ़ाने लगे।

धीरे-धीरे बॉस ने चुदाई की स्पीड बहुत तेज़ कर दी। अब हमारी चुदाई से थप-थप की आवाजें आने लगी। उनके धक्के इतने जोर के थे, कि बेड भी थोड़ा हिलता हुआ महसूस हो रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था, कि मैं पहली बार चुद रही थी। क्योंकि इतनी जबरदस्त चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी।

बॉस मुझे ऐसे ही चोदते रहे, और मैं मज़े लेते हुए सिसकियां भरती रही। कुछ देर बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया। अब मैं उनके लंड के ऊपर उछल-उछल कर चूत का मज़ा उनको दे रही थी। वो साथ में मेरे चूचे दबा रहे थे।

मैं ऐसे ही कुछ देर उनके लंड पर उछलती रही। मेरा पानी निकल चुका था, लेकिन फिर भी मैं नहीं रुकी। फिर मुझे अपनी चूत में भयंकर बहाव महसूस हुआ। वो बॉस के लंड का पानी था, जो उनके लंड से निकल कर मेरी चूत में भर रहा था। मैं ये महसूस करके लंड से उठने लगी। लेकिन बॉस ने मुझे पकड़ लिया और अपना सारा माल मेरे अंदर भर दिया।

फिर उन्होंने मुझे साइड कर दिया और सो गए। मैं उठी, खुद को साफ किया, और कपड़े पहने। बॉस सो चुके थे। फिर मैं वहां से बाहर आई और केमिस्ट की दुकान पर जा कर प्रेगनेंट ना होने की दवाई खाई।

अगले दिन से मेरी लाइफ पहले जैसी हो गई। कहानी कैसी लगी [email protected] पर बताएं।

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