पिछला भाग पढ़े:- छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-7
आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा कि कैसे मेरी और सपना की बम्पर चुदाई देख दिल्ली में बैठा राहुल सपना से मिलने के तड़प रहा था और अपने लंड को मसल-मसल कर उसका माल अपने ही फोन पर निकाल दिया था। फिर मैंने उसे बोला कि टिकट कर लो और आ जाओ तो उसने बोला कि शुक्रवार को आ जाऊंगा। फिर हम तीनो शुक्रवार की प्रतीक्षा करने लगे।
आखिरकार वो शुक्रवार भी आ गया जिसका इंतजार दिल्ली में बैठे राहुल को और गाँव में बैठी सपना को सबसे ज्यादा था। उस रात की लाइव तबाही को अपनी आँखों से देखने के बाद राहुल के सिर पर सपना के बदन का ऐसा भूत सवार था कि वह पहली उपलब्ध ट्रेन पकड़ कर गाँव के लिए निकल पड़ा।
उधर, सुबह के वक्त जब ट्रेन स्टेशन पर आकर रुकी, तो धूप चारों तरफ बिखर चुकी थी। सपना अपने भाई (मेरे) के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर स्टेशन पहुँची थी।
ट्रेन जैसे ही प्लेटफॉर्म पर रुकी, जेनरल और एसी कोच से सवारियां उतरने लगी। राहुल अपने कंधे पर एक छोटा सा ट्रैवल बैग लटकाए जैसे ही कोच के दरवाजे से बाहर निकला, उसकी नज़र सीधे सामने खड़ी सपना पर पड़ी।
सपना ने उस दिन हल्के पीले रंग का पारदर्शी कॉटन का सूट पहन रखा था। गाँव की तेज धूप में उसका गोरा बदन और बिना ब्रा के कुर्ते के अंदर पूरी तरह उभरे हुए 32 इंच के पपीते जैसे चूचे साफ नज़र आ रहे थे। रात भर की चुदाई की जो थकान थी, उसने उसके चेहरे पर एक अलग ही कामुक निखार ला दिया था।
सपना को इस रूप में देखते ही राहुल प्लेटफॉर्म पर ही पूरी तरह से फ्लैट हो गया। उसके कदम वहीं ठिठक गए। उसने कूपे में उसे देखा था, फोन की स्क्रीन पर नंगा देखा था, लेकिन इस तरह गाँव के देसी लिबास में उसकी गदराई जवानी को देख कर उसका लंड पैंट के अंदर एक ही झटके में लोहे की तरह अकड़ गया।
वह लगभग सम्मोहित सा होकर सपना की तरफ बढ़ा। “सपना… तुम… तुम सच में बेहद कातिलाना लग रही हो,” राहुल ने अपने थूक को निगलते हुए दबी आवाज में कहा, उसकी आँखें सीधे सपना के कुर्ते के उभारों पर टिक गई थी।
सपना कुछ बोलती, इससे पहले ही मैं पीछे से आगे आया और राहुल के चौड़े कंधे पर अपना भारी हाथ रख दिया।
“स्वागत है राहुल भाई, गाँव की मिट्टी में। ट्रेन का सफर तो अच्छा रहा ना?” मैंने एक तीखी और गहरी मुस्कान के साथ कहा।
राहुल मुझे देखते ही थोड़ा सकपका गया। उसे रात के 4 बजे वाला वो खूंखार मंजर याद आ गया जब मैं उसकी आँखों के सामने सपना की रेल बना रहा था। उसने संभलते हुए कहा, “जी भैया, सफर अच्छा था। बस अब और इंतजार नहीं हो रहा था।”
मैंने उसकी पैंट के उभरे हुए हिस्से की तरफ देखा और हंसते हुए कहा, “दिख रहा है राहुल भाई कि तुम्हारी तैयारी पूरी है। चलो, यहाँ ज्यादा देर खड़े रहे तो गाँव के लोग बातें बनाएंगे। सीधे खेतों की तरफ चलते हैं, वहीं तुम्हारी थकान उतारी जाएगी।”
स्टेशन से बाहर आकर हम मोटरसाइकिल पर बैठे। मैंने बाइक स्टार्ट की, बीच में सपना बैठी और सबसे पीछे राहुल। गाँव के उबड़-खाबड़ रास्तों पर जैसे ही गाड़ी ने रफ्तार पकड़ी, खेल शुरू हो गया।
जिस्मों का टकराव: हर झटके के साथ सपना की भारी, कद्दू जैसी गांड पीछे बैठे राहुल की जांघों और उसके कड़े लंड से टकरा रही थी। राहुल ने बिना कोई वक्त गंवाए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और बाइक के झटके का बहाना बना कर सपना की पतली कमर को कस कर पकड़ लिया।
राहुल की हथेलियों की गरमाहट जैसे ही उसके पतले सूट के पार उसकी चमड़ी को छुई, सपना ने पीछे मुड़ कर राहुल को एक मदहोश नज़र से देखा। उसके चूचे आगे मेरे सीने से दब रहे थे और पीछे उसकी गांड राहुल के लंड को महसूस कर रही थी।
“भैया… गाड़ी थोड़ा धीरे चलाओ ना… खेतों का रास्ता अभी दूर है क्या?” सपना ने जान-बूझ कर माहौल को और गर्म करते हुए कहा।
“रास्ता बस आने ही वाला है सपना रानी, तुम्हारी इस चूत के दोनों आशिक आज तुम्हें इस गन्ने के खेत में ऐसा पेलेंगे कि तुम शहर भूल जाओगी,” मैंने बाइक को सीधे मुख्य सड़क से हटा कर घने गन्ने के खेतों की पगडंडी पर मोड़ते हुए कहा।
गन्ने के ऊंचे-ऊंचे खेत चारों तरफ से रास्ता घेर चुके थे, जहाँ दूर-दूर तक कोई तीसरा देखने वाला नहीं था। राहुल अब पूरी तरह से बेकाबू हो रहा था, उसकी उंगलियां सपना की जांघों की तरफ सरकने लगी थीं।
गन्ने के घने खेतों के बीच मोटरसाइकिल के रुकते ही चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा छा गया। दोपहर की तेज धूप गन्ने की ऊंची-ऊंची पत्तियों को चीरती हुई नीचे की सूखी मिट्टी पर छन कर आ रही थी, जिससे उस जगह की गरमाहट और बढ़ गई थी। दूर-दूर तक कोई तीसरा इंसान नहीं था—सिर्फ मैं, राहुल और उनके बीच खड़ी सपना।
मोटरसाइकिल से उतरते ही राहुल की सांसें तेज हो चुकी थी। वह एक पल भी और गंवाना नहीं चाहता था। उसने अपना बैग वहीं जमीन पर फेंका और सीधे सपना के सामने आकर खड़ा हो गया।
राहुल ने आगे बढ़ कर सपना के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया। धूप की वजह से सपना के चेहरे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थी, जो उसकी कामुकता को और बढ़ा रही थी।
“सपना, दिल्ली में बैठ कर हर रात मैंने सिर्फ इस पल का सपना देखा है। उस कूपे के बाद आज तुम्हें इस तरह सामने देख कर मुझसे और सब्र नहीं हो रहा,” राहुल ने बेहद भारी आवाज में कहा।
सपना ने शर्माते हुए अपनी नजरें झुका ली, लेकिन उसने राहुल के हाथों को झटका नहीं। उसकी पारदर्शी पीले कुर्ते के अंदर उसके 32 इंच के चूचे उसकी तेज सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
मैंने पीछे खड़े होकर मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल भाई, जब इतनी दूर आए ही हो, तो शुरुआत ज़रा तसल्ली से करो। गाँव की दोपहर लंबी होती है और हमारे पास वक्त ही वक्त है।”
राहुल ने मेरी बात सुन कर हामी भरी। उसने बहुत धीरे से अपनी उंगलियां सपना के गले की तरफ बढ़ाईं। सपना का पीला दुपट्टा, जो उसके सीने को आंशिक रूप से ढके हुए था, राहुल की उंगलियों की छुअन से धीरे-धीरे सरकने लगा।
राहुल ने बेहद तसल्ली से दुपट्टे के दोनों कोनों को पकड़ा और उसे सपना के कंधों से नीचे गिरा दिया। दुपट्टे के हटते ही बिना ब्रा के उसका 32 इंच का सुडौल बूब्स उस पतले सूती कुर्ते के कपड़े को फाड़ कर बाहर आने को बेताब दिखने लगा। पतले कपड़े के पार से उसके निप्पल्स के कड़े उभार साफ नज़र आ रहे थे।
“उफ्फ… सपना…” राहुल के मुंह से एक गहरी सांस निकली। उसने अपनी दोनों हथेलियां सपना के कुर्ते के ऊपर ही उसके बूब्स पर रख दी और उन्हें धीरे-धीरे भींचना शुरू किया।
“आहह… राहुल… भैया भी देख रहे हैं…” सपना ने मद्धम आवाज में सिसकते हुए अपना सिर राहुल के चौड़े सीने से टिका दिया।
मैंने आगे बढ़ कर सपना को पीछे से अपनी बाहों में घेर लिया। मेरे हाथ उसकी पतली कमर पर टिक गए, जबकि राहुल सामने से उसके कुर्ते के नीचे के हिस्से को पकड़ कर धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगा।
खेल अब धीरे-धीरे अपनी रफ्तार पकड़ रहा था। राहुल ने कुर्ते को सपना के पेट से ऊपर उठाया, जिससे उसका गोरा पेट और गहरी नाभि धूप की रोशनी में चमकने लगी। सपना ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए और राहुल ने बेहद शालीनता से उसका पीला कुर्ता उसके सिर के ऊपर से उतारकर गन्ने की सूखी पत्तियों पर रख दिया।
अब सपना सिर्फ अपनी सिल्क की सलवार में, ऊपर से पूरी तरह निर्वस्त्र होकर हमारे सामने खड़ी थी। बिना किसी सहारे के उसके दोनों पपीते जैसे चूचे हवा में आज़ाद होकर झूल रहे थे।
राहुल ने झुक कर उसके एक निप्पल को अपने होठों की गिरफ्त में ले लिया और उसे धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, जबकि उसका दूसरा हाथ उसकी भारी गांड पर जाकर उसे सहलाने लगा। सपना इस दोहरे स्पर्श से पूरी तरह पिघलने लगी थी, और खेतों की उस खामोशी में उसकी रसीली सिसकारियां गूंजने लगी थी।
आगे पढ़े: कैसे राहुल और भाई मिल कर सपना की सलवार को भी जिस्म से जुदा करते हैं, और इस गन्ने के खेत की छांव में राहुल का असली देसी स्वागत शुरू होता है।
गन्ने की सघन छांव में दोपहर की उमस अब चरम पर थी। सपना के बदन की महक और गन्ने की पत्तियों की सोंधी खुशबू मिल कर वहां के माहौल को और भी मदहोश बना रही थी। ऊपर से पूरी तरह निर्वस्त्र सपना जब राहुल के सीने से लगी हुई थी, तब उसकी सांसों की गति और तेज हो गई।
राहुल ने सपना के निप्पल को अपने होठों से आजाद किया, जो अब पूरी तरह से कड़े और लाल हो चुके थे। उसने नीचे झुक कर सपना की सिल्क की सलवार के नाड़े पर अपनी उंगलियां टिका दी। “सपना, उस रात स्क्रीन पर जो तबाही मैंने देखी थी, आज उसे सच होते देखना चाहता हूँ,” राहुल ने हांफते हुए फुसफुसाया।
उसने बहुत ही धीरे-धीरे, बिना किसी जल्द-बाजी के सलवार की गांठ को खोला। रेशमी कपड़ा उसकी गोरी जांघों को छूता हुआ सरसराहट की आवाज के साथ नीचे की तरफ सरकने लगा। सपना ने एक पैर उठाया, फिर दूसरा, और राहुल ने सलवार को उसके पैरों से पूरी तरह बाहर निकाल कर एक तरफ फेंक दिया।
अब सपना के बदन पर सिर्फ एक महीन पीले रंग की पैंटी बची थी। उसकी कद्दू जैसी भारी गांड और उसकी गोरी, सुडौल जांघों का उभार पूरी तरह हमारे सामने था। कूपे के बाद आज पहली बार राहुल इतने करीब से उसके इस भरे-पूरे बदन को साक्षात देख रहा था।
मैंने आगे बढ़ कर सपना की पैंटी के दोनों किनारों को पकड़ा और बहुत ही तसल्ली से उसे नीचे की तरफ सरका दिया। अब मेरठ कॉलेज की वो बेबाक लड़की इस घने गन्ने के खेत के बीच, सूखी पत्तियों के बिछौने पर पूरी तरह निर्वस्त्र खड़ी थी। धूप की छनकर आती किरणें उसके गोरे बदन पर पड़ रही थीं, जिससे वह किसी अप्सरा जैसी चमक रही थी।
मैंने मोटरसाइकिल पर रखा हुआ एक बड़ा सूती कपड़ा (अंगोछा) निकाला और गन्ने की सूखी पत्तियों के ऊपर बिछा दिया। सपना बिना किसी झिझक के उस पर पीठ के बल लेट गई।
जैसे ही वह लेटी, बिना ब्रा के उसके 32 इंच के बूब्स थोड़े फैल गए और उसकी गुलाबी चूत का मुहाना, जो पहले से ही काम-रस से गीला होने लगा था, पूरी तरह खुल गया।
राहुल ने बिना देर किए अपनी ब्लैक टी-शर्ट और जींस को एक-एक कर उतारा। उसका गठीला बदन और उत्तेजना से पूरी तरह से अकड़ा हुआ लंड देख कर सपना की आँखें फैल गईं। वह दिल्ली की बंद दीवारों से निकल कर आज इस खुली प्रकृति के बीच अपनी हवस के चरम को छूने के लिए तैयार थी।
राहुल सीधे सपना के ऊपर आ गया। उसने अपने मजबूत हाथों से सपना की दोनों गोरी जांघों को उठाया और उन्हें अपने कंधों पर रख लिया। इस पोजीशन से सपना की चूत का हर एक हिस्सा पूरी तरह से ऊपर उठ गया।
“तैयार हो सपना जान?” राहुल ने उसकी आँखों में आँखें डाल कर पूछा।
“राहुल… अब और तड़पाओ मत… पूरा अंदर तक भर लो,” सपना ने मदहोश होकर अपनी बाहें राहुल की गर्दन में डाल दी।
राहुल ने अपने कड़े लंड की टोपी को चूत के मुहाने पर सेट किया और अपनी पूरी ताकत से एक ही गहरा और लंबा धक्का मारा। ‘पकाक-फच!’ की एक ऐसी जोरदार और रसीली आवाज गन्ने के पत्तों के सन्नाटे को चीरती हुई गूंज उठी, जिसकी गूंज सीधे मेरे कानों तक पहुँची।
“उई मां! आहहह राहुल…” सपना के मुंह से एक तीखी चीख निकली, और उसने राहुल के चौड़े कंधों को अपने नाखूनों से नोच लिया। उसकी आँखें पूरी तरह बंद हो गईं, और उसके होठों से लार की एक महीन लकीर बह निकली। राहुल का लंड उसकी चूत की गहराइयों को नाप चुका था, और दिल्ली की उस रात का सारा गुस्सा अब इस पहली चुदाई में बाहर आने लगा था।
मैं पास ही खड़ा होकर इस लाइव थ्रीसम के पहले अध्याय का मजा ले रहा था, और मेरा खुद का लंड अब पैंट फाड़ कर बाहर आने को बेताब था। राहुल के दिमाग में दिल्ली वाली उस रात का मंजर किसी जलते हुए कोयले की तरह सुलग रहा था। जब उसने फोन की स्क्रीन पर मुझे सपना की रेल बनाते देखा था। वो सपना के कमर को जैसे ही कस कर पकड़ा सपना उचक गयी, सपना को नहीं समझ आया था कि अब क्या होने वाला है। आगे क्या हुआ जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ।
धन्यवाद !
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