छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-9 (Chhoti behan Sapna ki bumper chudai alag-alag lund se-9)

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पिछला भाग पढ़े:- छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-8

आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा, कि कैसे राहुल को वो मेरी और सपना की लाईव चुदाई वाली बात याद आते ही वो सपना की चूत में जोर-जोर से धक्के मारना शुरू किया।

जब से वो हमारी लाईव चुदाई देख कर तड़पा था, तब से उसके अंदर हवस और जलन का तूफान उठ गया था, जो अब इस गन्ने के खेत में पूरी तरह से फट पड़ा। राहुल ने बिना किसी रहम के, बिल्कुल जंगली और खूंखार तरीके से सपना को पेलना शुरू कर दिया था।

राहुल जिस बेरहमी और रफ्तार से धक्के मार रहा था। उसे देख कर कुछ ही पलों में मेरे पैरों के नीचे की जमीन खिसकने लगी। मैं खुद को इस खेल का उस्ताद समझता था। लेकिन राहुल का यह रूप देख कर मैं अंदर से हिल गया कि कोई किसी को इतनी भयानक रफ्तार और ताकत से कैसे पेल सकता है!

उसने सपना की पतली कमर को अपने दोनों हाथों से इस कदर जकड़ लिया था कि उसकी उंगलियां गोरी चमड़ी में धंस रही थी। राहुल बिना एक सेकंड के लिए भी रुके, पूरी ताकत से पीछे हटता और फिर पूरे वेग से अपना लंड अंदर धंसा देता।

हर धक्के के साथ सपना का पूरा गदराया बदन गन्ने की सूखी पत्तियों पर आगे-पीछे घिसट रहा था। ‘चट-चट-चट’ की अंधाधुंध गूंज होना शुरू हो चुकी थी जब से राहुल की रफ्तार किसी एक्सप्रेस ट्रेन जैसी होनी शुरू हुई। वह एक के बाद एक, शॉट पर शॉट मारे जा रहा था। उसकी जांघें जब सपना के भारी चूतड़ों से टकराती, तो उस शांत और एकांत गन्ने के खेत में ‘चट-चट-चट-चट’ की इतनी तेज और लगातार आवाजें गूंजने लगी कि पूरा माहौल दहल उठा।

सपना की चूत का काम-रस और राहुल की रफ्तार मिल कर एक रसीला दलदल बना चुके थे, जिससे हर धक्के के साथ ‘फच-फच-फटाक’ का शोर निकल रहा था।

इस भयानक मार से सपना की आँखें पूरी तरह से उलट चुकी थी। वह ना तो ठीक से सिसक पा रही थी और ना ही रो पा रही थी। उसका मुंह खुला का खुला रह गया था और वह हवा में हाथ-पैर मारते हुए बस बेडशीट (अंगोछे) को अपनी उंगलियों से फाड़ने की कोशिश कर रही थी।

“आहहह… राहुल… म… मर जाऊंगी… धीरे… उफ्फ… भैया… बचाओ…” सपना के टूटे हुए सुर उस घने खेत की हवा में विलीन हो रहे थे।

थपेड़ों की रफ्तार और बेकाबू हवस देख मुझे समझ आ गया था कि राहुल पर जैसे कोई भूत सवार था। दिल्ली की उस रात की अपनी पूरी लाचारी का बदला वह आज सीधे सपना के इस जिस्म से ले रहा था। उसकी पीठ पर पसीने की धाराएं बह रही थी, जो सपना के गोरे पेट और बूब्स पर टपक रही थी।

“देखा भैया! रात भर तुमने इसे नचाया था ना? आज देखो कि दिल्ली का लौंडा जब अपनी पर आता है तो क्या करता है!”

राहुल ने हांफते हुए, दांत पीस कर मुझसे कहा और एक के बाद एक तीन-चार ऐसे गहरे और कड़क शॉट मारे कि सपना का पूरा शरीर हवा में उछल गया।

मैं स्तब्ध खड़ा उस नजारे को देख रहा था। चूत से निकलने वाली ‘चट-चट’ की आवाजें अब और तेज हो चुकी थी, जिसने गन्ने के पत्तों की सरसराहट को पूरी तरह से दबा दिया था। खेल अब अपने सबसे खतरनाक और कामुक मोड़ पर पहुँच चुका था।

गन्ने के खेतों में राहुल की हवस का जो तूफान उठा था, वह अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। सपना की चूत को अपनी भयानक रफ्तार से छलनी करने के बाद भी राहुल की भूख शांत नहीं हुई थी। उसकी आँखों में वासना का जो सुरूर उतरा था, उसने उसे पूरी तरह से अंधा कर दिया था।

राहुल ने एक झटके में सपना को घुटनों के बल लाकर डॉगी पोजीशन में खड़ा कर दिया। इस पोजीशन में आते ही सपना की भारी, कद्दू जैसी गांड पूरी तरह से पीछे की तरफ तन गई और उसके 32 इंच के चूचे नीचे हवा में पागलों की तरह झूलने लगे।

राहुल ने बिना एक पल गंवाए पीछे से उसकी दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से भींचा और अपने कड़े लंड को उसकी चूत में दोबारा पेलना शुरू कर दिया।

आवाजों का शोर बढ़ता जा रहा था ‘फट-फट-फट’ और ‘चट-चट-चट’ की आवाजें पहले से भी कहीं ज्यादा तेज़ हो गई। राहुल कमर से पूरे वेग के साथ धक्के पर धक्का मार रहा था। हर धक्के के साथ सपना का सिर गन्ने की सूखी पत्तियों से टकरा रहा था।

सपना की सिसकी निकलना शुरू हो चुकी थी “आहहह… राहुल… बस करो… अब और जान मत लो मेरी…” सपना पूरी तरह पसीने से नहा चुकी थी और उसकी जांघें राहुल की बेरहम मार से लाल पड़ चुकी थी।

करीब दस मिनट तक डॉगी स्टाइल में पेलने के बाद, राहुल का पागलपन एक कदम और आगे बढ़ गया। उसने सपना की गांड के दोनों भारी चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से फैलाया, जिससे उसकी गांड का छोटा, गुलाबी सुराख पूरी तरह से सामने नज़र आने लगा। वह अपने थूक को अपने लंड पर लगा कर उसे गांड के मुहाने पर सेट करने लगा।

यह देखते ही सपना बुरी तरह से डर गई। उसने पीछे मुड़ कर देखा और रोते हुए मना करने लगी, “नहीं राहुल… प्लीज… वहाँ नहीं… बहुत दर्द होगा… मैं नहीं सह पाऊंगी… प्लीज छोड़ दो मुझे।”

सपना को इस तरह तड़पते देख मुझसे भी रहा नहीं गया। मैं आगे बढ़ा और राहुल का कंधा पकड़ कर पीछे खींचते हुए कड़क आवाज में बोला, “बस कर राहुल! चूत मारनी है तो मार, लेकिन गांड मारने की जिद मत कर। गाँव की लड़की है, यह सब सहन नहीं कर पाएगी। रुक जा अब।”

मेरा टोकना राहुल को इस कदर नागवार गुजरा कि उसने झटके से मेरा हाथ अपने कंधे से हटाया और मेरी तरफ घूम कर गुस्से से लाल आँखें टिका दी।

“हट साले पीछे! बहुत बड़ा रखवाला बनता है ना अपनी बहन का? रात भर जब फोन पर इसकी गांड की रेल बना रहा था, तब बड़ा मजा आ रहा था तुझे? आज दिल्ली का लौंडा अपने रंग में आया है, तो बीच में मत बोल! चुप-चाप खड़ा रह, नहीं तो तुझे भी यहीं गाड़ दूंगा!” राहुल ने मुझे सरेआम गाली देते हुए चिल्ला कर चुप करा दिया।

मैं उसकी आँखों में छिपा वो पागलपन देख कर स्तब्ध रह गया। राहुल दोबारा सपना के ऊपर हावी हो गया। उसने सपना की दोनों बाहों को आगे से पूरी तरह से दबा दिया ताकि वह हिल ना सके और अपनी भारी गांड को पीछे की तरफ खींच लिया।

उसने अपने 8 इंच के कड़े लंड की पूरी ताकत बटोरी और सपना की इच्छा कम थी, फिर भी उसकी गांड के छोटे से सुराख में एक ही भयानक, सीधा धक्का मारते हुए लंड को अंदर ठूसना शुरू कर दिया।
‘सड़सड़-पकाक’ की एक बेहद तीखी और सूखी आवाज हुई।

“उई मां!!! भैया… मर गई… निकालो इसे… आअह्ह!” सपना के मुंह से एक ऐसी गगनभेदी चीख निकली कि पूरा गन्ने का खेत दहल उठा। दर्द के मारे उसकी आँखें पूरी तरह से बंद हो गई और उसने अपने दांतों से नीचे बिछे कपड़े को बुरी तरह से चबा लिया। राहुल का मोटा लंड उसकी गांड के संकरे रास्ते को चीरता हुआ धीरे-धीरे गहराई में समा रहा था, और राहुल बिना रहम खाए लगातार छोटे-छोटे कड़क धक्के मारने लगा था।

खेतों के उस वीरान सन्नाटे में राहुल पूरी तरह होश खो चुका था। दिल्ली की उस रात का जो गुस्सा और हीनभावना उसके अंदर दबी थी, वह अब एक सनक बन चुकी थी। वह बिना रुके, बिना कोई रहम दिखाए सपना की गांड में लगातार झटके पर झटके, झटके पर झटके मारे जा रहा था।

हर झटके के साथ सपना के मुंह से बेबस चीखें निकल रही थी, लेकिन राहुल पर इसका कोई असर नहीं हो रहा था।

राहुल सिर्फ सपना को दर्द नहीं दे रहा था, बल्कि वह सीधे मेरी तरफ देख रहा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी क्रूर चमक थी। वह जान-बूझ कर अपनी रफ्तार बढ़ाता और मेरी तरफ देख कर दांत पीसते हुए मुस्कुराता।

“देख साले! बहुत बड़ा उस्ताद बनता था ना? अपनी आँखों से देख कि दिल्ली का लौंडा तेरी इस जादुई चूत वाली बहन की गांड का क्या हाल कर रहा है! अब बोल, अब क्यों बंद हो गई तेरी सिट्टी-पिट्टी?” राहुल ने एक और जोरदार झटका मारते हुए मुझे चिढ़ाया।

मैं गुस्से से कांप रहा था, लेकिन राहुल का वो पागलपन देख कर मैं भी एक पल के लिए ठिठक गया था। सपना दर्द के मारे बेहाल थी, उसकी आँखें आंसुओं से भरी थी पर चेहरे पर संतुष्टी झलक रही थी पर वह लगातार मेरी तरफ देख देख कर शरमा रही थी।

अलग-अलग पोजीशन में बेरहम मार से चूत चोदने के बाद भी राहुल इतने पर ही नहीं रुका। उसने खेल को और रोमांचक दर्दभरा बनाने के लिए पोजीशन बदलने का फैसला किया।

उसने सपना को एक करवट पर लिटाया और उसके एक पैर को हवा में उठा कर अपनी कमर के पास कसा। इस टेढ़े एंगल से उसने दोबारा गांड में लंड ठूसना शुरू किया। हर धक्के के साथ सपना का पूरा जिस्म गन्ने की सूखी पत्तियों पर रगड़ खा रहा था।

इसके बाद उसने सपना को जबरदस्ती खड़ा किया और पीछे से उसकी कमर को लॉक कर दिया। सपना के पैर कांप रहे थे, वह खड़ी भी नहीं हो पा रही थी, लेकिन राहुल ने उसे अपने सहारे टिका कर पीछे से ताबड़तोड़ झटके मारना जारी रखा।

कमरे की वो ‘चट-चट’ की आवाजें अब इस गन्ने के खेत में और भी डरावनी और भारी सुनाई दे रही थी। सपना की चीखें अब धीरे-धीरे धीमी पड़ने लगी थी, उसका गला पूरी तरह बैठ चुका था।

राहुल लगातार मुझे नीचा दिखाने के लिए चीख रहा था और सपना का कचरा निकाल रहा था। मेरी आँखों के सामने मेरी ही बहन की इस तरह बेरहमी से रेल बनाई जा रही थी और वह लौंडा मुझे सरेआम चुनौती दे रहा था।

अब मेरे बर्दाश्त की हद पार हो चुकी थी। राहुल ने मर्यादा की हर दीवार तोड़ दी थी, और मुझे समझ आ गया था कि अगर मैंने अब इसे नहीं रोका, तो यह सपना की चूत का भोसड़ा बना देगा। मैने राहुल से बोला भाई धीरे कर वो कहीं भाग थोड़ी रही है। मेरी यह बात शायद राहुल के कानो मे गूंज उठी, क्या मेरी बातों का उस पर असर हुआ? जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ।

धन्यवाद !

अगला भाग पढ़े:- छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-10

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