छत पर पड़ोसी का लंड अपनी रसीली चूत में डलवाया-4 (Chhat par padosi ka lund apni raseeli chut mein dalawaya-4)

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पिछला भाग पढ़े:- छत पर पड़ोसी का लंड अपनी रसीली चूत में डलवाया-3

हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-

मेरी आँखें बंद हो गई थी और मैं उससे अपनी चूत चटवाने का मजा ले रही थी। उसने धीरे-धीरे मेरी चूत को पूरा गीला कर लिया था और अपनी जीभ चूत पे घुमाए जा रहा था, चाटे जा रहा था। मुझे चूत चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने उसका सर अपनी चूत में दबा दिया।

मैं अब जोर-जोर से सिसकार रही थी आह्ह आह्ह ओह्ह आराम से आह पागल हो रही हूं। आह्ह ऐसे चाटो। मैं आहहहह उहह सीईईई ऊफफफफफ आहहहहह की जोरदार आवाज़ निकाल रही थी और कह रही थी, “खा जाओ मेरी चूत को और अंदर तक जुबान डालो।”

फिर उसने मेरी कमीज़ निकालने को बोला तो मैंने खुद ही दोनों हाथ ऊपर कर दिए और उसने मेरी कमीज़ निकाल दी। अब ब्रा में कैद मेरी दोनों चूचियां उसके सामने तनी हुई थी। फिर उसने ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूंचियों को धीमे-धीमे सहलाया। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। फिर मैंने ही अपनी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा मेरे शरीर से अलग की, तो दोनों चूचियां फड़फड़ा कर उसके सामने लहराने लगी।

वो मेरे निप्पलों को अपने हाथ से मसलने लगा। मैं सिसकारियां भरने लगी। फिर उसने मेरी नंगी चूचियां अपने हाथों में भर ली, और मेरी चूचियों को मसलते हुए जोर-जोर से मेरी चूत को चाटने लगा।

दोस्तों अब मैं खुद ही अपने बूब्स को दबा रही थी। मेरी चूचियों के निप्पल गोल-गोल ऊपर उभर आये थे। मैंने उसकी जीभ को अपने चूत के अंदर महसूस किया। वो मेरी चूत में अपनी जीभ डाल कर चाट रहा था। उसकी जीभ मेरी चूत में घुस रही थी ओर मेरे मुँह से श्आऊआऊमममम अहह्ह्ह्हह सी सी हा हा हा की आवाज निकल रही थी।

फिर मैंने उसके सिर को अपने हाथों से चूत पर दबाना शुरू कर दिया। मैं जोर से सिसकारने लगी आह्ह और जोर से चूसो आह्ह हाय आह्ह चूसते रहो। वो जोर से मेरी चूत में जीभ अन्दर-बाहर करने लगा। मैं अपनी चूत को हिला-हिला कर चटवा रही थी। वो मेरी चूत को ऐसे चाट रहा था, जैसे बहुत दिन से भूखा हो। वो मेरे मोटे चूतड़ों पर हाथ रख के मेरी गर्म चूत को चाट रहा था।

वो अपनी जीभ को गोल-गोल घुमा कर मेरी चूत चाट रहा था। मुझे थोड़ी गुदगुदी भी हो रही थी। वाकई दोस्तों, चूत चटवाने में बहुत आनंद मिलता है।

मैं आहहहहहहहह आहहहहहहहहह! आहहहहह आहहहह रुको! अब और नहीं सहन होता! जल्दी डालो अन्दर! कहने लगी।

मैं उसके सिर को जोर से दबा रही थी। मुझे इतना मजा आ रहा था कि में अपनी चूत उठा उठा कर उसके चेहरे पर दबा रही थी। मैंने अपनी दोनों जांघों में उसका सर दबा लिया और अपने दोनों हाथ उसके बालों में फिराने लगी।

उसने मेरी चूत के फांको को फैलाया और और जीभ को अंतरंग गहराइयों मे घुसते हुए मेरी चूत को जीभ सख़्त करके चोदने लगा। मैंने उसका मुंह अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत से पूरी तरह से सटा दिए और मैं अपनी गांड को धीरे से हिला-हिला कर अपनी चूत उसके पूरे मुंह पर रगड़ने लगी। मुझे लंड की जबरदस्त तलब हो रही थी।

धीरे-धीरे मेरी चूत चाटते-चाटते उसने मेरी चूत में अपनी एक उंगली करते हुए मुझसे पूछा, “कैसा लग रहा है सीमा तुझे?” पहले तो मैंने कुछ जवाब नहीं दिया उसको। और वो मेरी चूत चाटने लगा फिर। उसने चाटते-चाटते मेरी चूत में अपनी दूसरी उँगली डालते हुए पूछा, “कैसा लग रहा है सीमा तुझे?”

जब उसने फिर पूछा तो पता नहीं क्यों मेरे मुँह से निकल गया, “पूछो मत कुछ, बस चाटते जाओ-जाओ मेरी चूत को। आज तुम खा जाओ, ये बस आज तुम्हारे लिए है। मेरी चूत को चाटो।” ये सुनते ही वो मेरी चूत को ओर गहरा चाटने लगा।

उसने दूसरी उंगली जोड़ी, अब दो उंगलियां अंदर-बाहर करते हुए तेजी से मेरी चूत की दीवारों को सहलाते हुए गर्मी को और भड़काते हुए मैं सिसकारियां भर रही थी। मैं अपनी टांगें और फैलाने लगी। “आआह्हहह ह्ह्ह्हह ओओह्हहहह तेरी उंगली कितनी गहरी जा रही है। आहहहह फिर आआह्हहहहहहहह ह्ह्ह्ह ओओह्ह तेरी उंगलियां जादू कर रही हैं। मुझे पागल कर रही है।”

अब वो मेरी चूत में अपनी उंगली डाल कर चोद रहा था और मैं अपने हाथ से उसके लंड को सहला रही थी। मैं बोली, “मेरी चूत में वासना की आग भड़क रही है उसे बुझा यार! खा जा मेरी चूत को! इसकी खुजली मिटा दे यार!”

मेरी चूत में उँगलियों के साथ-साथ अपनी जीभ भी डाल रहा था। मेरी तो साँसें तेज़ चल रही थी। मैं अपनी दोनों टांगों को खोल कर उससे बोली, “तुम मेरे कुत्ते हो और कुत्ते के जैसे चाटो मेरी चूत को।” मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने उसका सिर अपने पैरों से पकड़ लिया और झटके देने लगी।

मैंने उसके बाल खींच लिए और उसके मुंह को अपनी जाँघों में दबा लिया। मेरे मुख से सिसकारियां सी निकल रही थी मैं अहह उन्ह हम्म आहा सश्ह हाँ आंहहहहहह ओहहहहहह कर रही थी। फिर एक-दम से मेरी चूत से ढेर सारा गर्म-गर्म पानी बाहर निकलने लगा। मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, जो उसके मुँह पर फैल गया। मेरा बदन अकड़ गया। उसने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया। फिर मेरी पूरी चूत को चाट-चाट कर साफ भी कर दिया।

जब मैं थोड़ी ढीली पड़ी तो वो उठा और मेरी टांगे चौड़ी करके उनके बीच बैठ गया। “मज़ा आया?” उसने पूछा। मैं बोली,‌ “हाँ बहुत।”

मैं भी चुदाई में माहिर थी और उस वक्त पूरे जोश से भरी हुई थी। फिर उसने लंड मुंह में लेने को बोला तो मैं उसके सामने घुटनों पर बैठ गयी और वो खड़ा हो गया।। फिर मैं अपने हाथों से उसके घुटनों से होते हुए उनकी जांघों को सहलाने लगी। अब हम दोनों की नज़रे एक-दूसरे से अटक गयी थी और कोई भी नज़र नहीं हटा रहा था।

मैंने अपना एक हाथ बढ़ा कर उसके लंड को थाम लिया और लंड को सहलाते हुए मैंने अपनी जीभ निकाली और उसके लंड के सुपारे पर फिराने लगी। मेरी इस हरकत से उसकी सिसकारी निकल गई। मैं उसके लंड को सहलाते हुए उसे चूमने लगी। उसके लंड से मस्त मादक गंध आ रही थी जिससे मेरा जोश और ज़्यादा बढ़ रहा था।

इसके आगे की कहानी, अगले पार्ट में पढ़िएगा। [email protected]

अगला भाग पढ़े:- छत पर पड़ोसी का लंड अपनी रसीली चूत में डलवाया-5

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