शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-6 (Shimla mein truth dare khel, dono behne chudi relam pel-6)

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पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-5

आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा कि कैसे काव्या को डेयर मिलता है और राहुल को आई लव यू बोलती है, आगे पढ़िए क्या हुआ-

काव्या ने जैसे ही “आई लव यू” कहा, कमरे का माहौल बेहद रोमांटिक हो चुका था। राहुल उसे पूरी तरह अपनी बाहों में समेटने ही वाला था कि अचानक काव्या ने अपने हाथ पीछे खींचे और राहुल से थोड़ी दूर हटते हुए एक शरारती मुस्कान के साथ बोली, “बस राहुल जी, मेरा डेयर पूरा हो गया!”

काव्या के इस अचानक पीछे हटने से कमरे में जैसे एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। राहुल का चेहरा एक-दम से उतर गया और सपना भी हैरान रह गई कि इतनी गहरी कशिश के बीच काव्या ने अचानक ब्रेक कैसे लगा दिया। माहौल में थोड़ी अजीब सी खामोशी छाने लगी थी।

राहुल एक शातिर खिलाड़ी था, वह जानता था कि अगर इस वक्त उसने जबरदस्ती की या गुस्सा दिखाया, तो पूरी रात का मजा किरकिरा हो जाएगा। उसने तुरंत स्थिति को संभाला, एक नकली हंसी हंसते हुए अपनी शर्ट को ठीक किया और बोला, “वाह काव्या जी, आपकी एक्टिंग की दाद देनी पड़ेगी! हमें तो लगा आप सच में पिघल गई। खैर, डेयर पूरा हुआ, चलिए खेल को आगे बढ़ाते हैं।”

खेल एक बार फिर शुरू हुआ। राहुल के दिमाग में अब एक ही बात चल रही थी कि काव्या को पूरी तरह से कैसे बे-पर्दा किया जाए। उसने बोतल को दोबारा फर्श पर घुमाया। किस्मत कहिए या राहुल की सोची-समझी टाइमिंग, बोतल घूम कर एक बार फिर काव्या पर आकर रुक गई। पूछने का हक फिर से राहुल के पास था।

राहुल के चेहरे पर एक कुटिल और गहरी मुस्कान लौट आई। वह समझ चुका था कि अगर उसने काव्या को सीधे अपनी गोद में बैठने या अपने सामने कपड़े उतारने को कहा, तो काव्या अपनी सुरक्षात्मक भावना (defensive mode) में आकर खेल बंद कर सकती है। इसलिए उसने मेरा पासा फेंकने का फैसला किया।

राहुल ने सीधे काव्या की आँखों में देखते हुए कहा,‌ “काव्या जी, पिछला डेयर तो सिर्फ एक्टिंग था, लेकिन इस बार का डेयर असली इम्तिहान है। तुमने खुद सब के सामने कबूल किया है कि चंडीगढ़ जाने से पहले तुम राजू भाई के सामने पूरी तरह बेबाक हो चुकी हो और उनके साथ वक्त बिता चुकी हो। तो आज का तुम्हारा डेयर यह है कि तुम राजू भाई यानी अपने उसी पुराने साथी के सामने, जैसे पहले बिना कपड़ों के आ चुकी हो, वैसे ही आज फिर से अपने कपड़े उतारोगी और सीधे जाकर राजू भाई की गोद में बैठोगी।”

राहुल का यह दांव बेहद शातिर था, वह जानता था कि काव्या मेरे साथ पहले भी सहज रह चुकी थी, इसलिए वह मेरे सामने कपड़े उतारने या मेरी गोद में बैठने से इनकार नहीं कर पाएगी।

इस बहाने राहुल का असली मकसद पूरा हो रहा था—वह काव्या को बिना कपड़ों के अपनी आँखों के सामने देखना चाहता था, ताकि उसकी जवानी का दीदार कर सके।
बाकी मैं, राहुल और सपना तो अंदर ही अंदर एक-दूसरे के इरादे समझ ही चुके थे। हमें पता था कि एक बार काव्या के कपड़े उतर गए, तो खेल के अगले दौर में कहानी पूरी तरह हमारे हाथ में होगी।

यह डेयर सुनते ही सपना ने मेरी तरफ देखा और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। वह भी देखना चाहती थी कि उसकी छोटी बहन इस चुनौती को कैसे स्वीकार करती है।

काव्या का चेहरा इस बार पूरी तरह से लाल हो चुका था। उसकी नज़रें मुझसे मिली। कमरे के हीटर की गरमाहट और पुराने राज खुल जाने का जो नशा था, वह अब काव्या पर पूरी तरह हावी होने लगा था। उसे समझ आ गया था कि इस कमरे में अब छुपने के लिए कुछ नहीं बचा है। उसने धीरे से अपने स्वेटर के निचले हिस्से को छुआ और उसे ऊपर उठाने के लिए तैयार होने लगी।

काव्या ने एक पल के लिए कमरे में बैठे तीनों लोगों की तरफ देखा। सपना की आँखों में एक अजीब सी उत्सुकता थी, राहुल की नजरों में साफ-साफ हवस और बेसब्री तैर रही थी, और मैं शांत बैठा उसकी हर हरकत को देख रहा था।
जब काव्या ने देखा कि इस कमरे में मर्यादा की कोई दीवार बची ही नहीं है, तो उसने अपनी हिचक को पूरी तरह छोड़ देने का फैसला किया।

उसने अपने दोनों हाथों से स्वेटर के निचले हिस्से को पकड़ा और धीरे-धीरे उसे अपने सिर के ऊपर से उतार कर सोफे के एक कोने में रख दिया। हीटर की मद्धम लाल रोशनी सीधे उसके गोरे बदन पर पड़ी। काव्या की सांसें इस कड़कती ठंड में भी बेहद तेज चल रही थी, जिससे उसका सीना तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था।

राहुल की आँखें फटी की फटी रह गई। वह बिना पलक झपकाए काव्या के इस रूप को देख रहा था। उसका शातिर प्लान पूरी तरह कामयाब हो चुका था; भले ही काव्या मेरी गोद की तरफ बढ़ रही थी, लेकिन राहुल का मकसद उसे इस रूप में देखना था, जो पूरा हो रहा था।

काव्या ने इसके बाद बिना किसी देरी के अपनी जींस की बटन खोली और उसे भी पैरों से सरकाते हुए अलग कर दिया। अब वह पूरी तरह से बे-पर्दा हो चुकी थी।

काव्या ने अपने बिखरे हुए बालों को पीछे झटका और बेहद सधी हुई, मदहोश कदमों से चल कर सीधे मेरे पास आई। उसने मेरी आँखों में देखा, जिसमें उसके पुराने साथी की पहचान थी, और वह बिना किसी झिझक के सीधे आकर मेरी गोद में बैठ गई।

जैसे ही उसका गर्म और मुलायम बदन मेरी जांघों से छुआ, कमरे का तापमान जैसे चरम पर पहुँच गया। मैंने सहजता से अपना एक हाथ उसकी खुली कमर पर रख दिया। काव्या ने मेरे कंधे पर अपना सिर टिका दिया, लेकिन उसकी नज़रें अभी भी सामने बैठे राहुल और सपना पर थी।

सपना ने जब अपनी बहन को इस हाल में मेरी गोद में देखा, तो वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी। उसने तुरंत इस मौके का फायदा उठाया और सोफे पर खिसक कर सीधे राहुल के पास चली गई। सपना ने राहुल का हाथ पकड़ लिया, मानो वह कह रही हो कि अब दोनों तरफ के जोड़े पूरी तरह तैयार हैं।

राहुल ने काव्या को इस रूप में देखने के बाद एक गहरी सांस ली। खेल अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था और उसकी जगह उस सुइट के भीतर एक ऐसी रात ने ले ली थी जहाँ चारों लोग अपनी-अपनी वासना और कशिश में पूरी तरह डूबने के लिए तैयार थे। राहुल ने सपना को अपनी बाहों में खींच लिया, और मेरी गोद में बैठी काव्या अब अगले दौर के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रही थी।

जैसे ही सपना सोफे पर खिसक कर राहुल के करीब गई और राहुल ने उसे अपनी बाहों में खींचा, मेरे दिमाग में तुरंत सुबह राहुल का किया हुआ वही इशारा कौंध गया—”आज रात तुम सपना के साथ और मैं काव्या के साथ।”

मुझे तुरंत समझ आ गया कि अगर सपना इस वक्त राहुल के पास ही रुक गई, तो राहुल और काव्या के बीच का जो खेल हम बनाना चाहते थे, वह बिगड़ जाएगा। राहुल चाह कर भी काव्या के करीब नहीं आ पाएगा और हमारी पूरी प्लानिंग धरी की धरी रह जाएगी। माहौल को वापस पटरी पर लाने के लिए मैंने तुरंत दखल दिया और थोड़ा हंसते हुए बेबाकी से कहा, “चलो भाई, काव्या का डेयर पूरी तरह से पूरा हो गया! उसने अपनी हिम्मत दिखा दी।”

मेरी बात सुनते ही काव्या मेरी गोद से उठी और हम चारों एक बार फिर हीटर के चारों तरफ आमने-सामने की पोजीशन में बैठ गए। सपना भी राहुल की बाहों से थोड़ा अलग होकर वापस अपनी जगह पर आ गई।

काव्या इस वक्त सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में थी। हीटर की मद्धम लाल रोशनी जब उसके सुडौल, गोरे बदन और बूब्स के उतार-चढ़ाव पर पड़ रही थी, तो वह नजारा किसी कयामत से कम नहीं था। उसकी सांसों की रफ्तार के साथ उसके बूब्स जिस तरह ऊपर-नीचे हो रहे थे, उसे देख-देख कर राहुल की हालत खराब हो रही थी। वह अंदर ही अंदर पूरी तरह पागल हो चुका था और बस किसी तरह काव्या को पूरी तरह हासिल करना चाहता था।

झिझक का नामोनिशान मिट चुका था, इसलिए सपना ने अब खेल को उस आखिरी अंजाम तक पहुँचाने का जिम्मा संभाला जहाँ से रात पूरी तरह रंगीन होने वाली थी। मैंने बोतल को फर्श पर घुमाया और वह घूम कर एक बार फिर काव्या के सामने रुकी। इस बार पूछने की बारी खुद सपना की थी।

सपना ने काव्या के उघड़े हुए बदन को देखा, फिर मेरी और राहुल की तरफ देखते हुए एक बेहद शातिर और कातिलाना मुस्कान के साथ कहा, “काव्या, अब जब तुम यहाँ तक आ ही गई हो, तो खेल को उसके सबसे चरम पर ले जाते हैं। तुम्हारा अगला डेयर यह है कि तुम अभी अपनी जगह से उठोगी और राहुल जी और राजू भैया, इन दोनों के सारे कपड़े एक-एक करके पूरी तरह निकाल दोगी। और कपड़े निकालने के बाद, तुम्हें दोनों को बिल्कुल करीब से देखना है और सब के सामने यह फैसला करना है कि किसका लंड सबसे बड़ा और दमदार है और किसका छोटा!”

यह डेयर सुनते ही जैसे कमरे के भीतर की हवा पूरी तरह से थम गई। राहुल की आँखें चमक उठी—यह वही मौका था जिसका वह बेसब्री से इंतजार कर रहा था, जहाँ सब कुछ पूरी तरह नग्न और बे-पर्दा होने वाला था।

काव्या ने जब अपनी दीदी का यह हैरान करने वाला डेयर सुना, तो उसने एक गहरी सांस ली। उसके चेहरे पर अब शरम की जगह एक अजीब सी उत्तेजना और नशा था। उसने अपने होंठों को दांतों तले दबाया, सोफे से खड़ी हुई और अपनी ब्रा-पैंटी में ही मटकती हुई धीरे-धीरे हमारी तरफ बढ़ने लगी। शिमला की उस कड़कती बर्फीली रात में, अब पुरुषों के बदन से भी कपड़े उतरने वाले थे और असली शारीरिक मुकाबले की शुरुआत होने जा रही थी।

काव्या ने खेल के नियम और सपना के दिए गए डेयर को पूरा करने के लिए कदम आगे बढ़ाए। कमरे में छाए सन्नाटे और हीटर की सरसराहट के बीच, उसने एक-एक करके हम दोनों के कपड़े उतारे। अब कमरे में खेल का माहौल अपने सबसे बेबाक मोड़ पर पहुँच चुका था, जहाँ सब कुछ पूरी तरह सामने था।

काव्या ने दोनों को बेहद करीब से देखा और बिना किसी झिझक के अपनी राय सब के सामने रखी।

आखिर काव्या ने किसका नाम लिया जानने के लिए बने रहिए अपने भाई राजू के साथ, धन्यवाद।

अगला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-7

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