पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-4
आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा कि कैसे सभी राहुल और काव्या को एक साथ करने की कोशिश कर रहे थे। पर कुछ काम नहीं आ रहा था। आगे क्या हुआ सुनिये-
कमरे के भीतर अब सच और झूठ का खेल पूरी तरह खत्म हो चुका था। चारों के सारे गुप्त राज सामने आने के बाद हवा में एक अजीब सी उत्तेजना और बेबाकी तैर रही थी। सब को एक-दूसरे की असलियत पता चल चुकी थी, जिसने बची-कुची झिझक को भी पूरी तरह मिटा दिया था।
इसी माहौल का फायदा उठाने के लिए राहुल ने अपनी शातिर चाल चली। उसने टेबल पर रखी खाली बोतल को हाथ में लिया और मुस्कुराते हुए चारों तरफ देखा।
राहुल ने अपनी आवाज को थोड़ा और गहरा करते हुए कहा, “भाई, ट्रुथ का दौर अब खत्म हुआ। सबके सारे कांड और सच बाहर आ चुके हैं, इसलिए अब ट्रुथ चुनने में कोई मजा नहीं रह गया। अब असली परीक्षा होगी। तो नियम यह है कि अब जो भी बोतल के निशाने पर आएगा, उसे सिर्फ और सिर्फ ‘डेयर’ (चुनौती) ही चुनना होगा। कोई पीछे नहीं हटेगा।”
उसकी आँखों में छिपी शरारत और इरादे बिल्कुल साफ थे। वह अच्छे से जानता था कि अगर इस बार काव्या निशाने पर आई, तो वह उसे ऐसा डेयर देगा जिससे वह सीधे काव्या के और करीब आ सके।
काव्या ने राहुल की इस बात पर अपने बालों को पीछे झटका और हीटर की रोशनी में चमकते अपने चेहरे के साथ कहा, “चलो, यह भी मंजूर है। जब सच से नहीं डरे, तो डेयर से क्या डरना।”
राहुल ने पूरी ताकत से बोतल को फर्श पर घुमा दिया। कांच की बोतल हीटर की लाल रोशनी को परावर्तित करती हुई तेजी से चक्कर काटने लगी। सबकी सांसें एक बार फिर थम गई। बोतल धीरे-धीरे धीमी हुई और उसका मुंह बिल्कुल सटीकता से काव्या की तरफ जाकर रुक गया, जबकि उसका पिछला हिस्सा खुद राहुल के सामने था।
राहुल के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गई, जिसकी उसे तलाश थी। मैदान पूरी तरह साफ था और काव्या अब उसके जाल में थी। सपना और मैं भी सोफे पर एक-दूसरे के करीब बैठे बड़े गौर से देख रहे थे कि राहुल अब क्या चाल चलने वाला है।
राहुल ने सोफे पर काव्या की तरफ अपनी पोजीशन बदली और सीधे उसकी आँखों में देखते हुए कहा-
“तो काव्या जी, नियम के मुताबिक आपको डेयर ही करना है। और आपका डेयर यह है कि इस कड़कती ठंड में, तुम उस कोने वाले सोफे को छोड़ कर सीधे मेरे पास आओगी, और अगली दो बार बोतल घूमने तक तुम्हें मेरी गोदी में सिर रख कर लेटना होगा। देखते हैं चंडीगढ़ की यह बिंदास लड़की इस चुनौती को कितनी बेबाकी से पूरा करती है।”
यह डेयर सुनते ही कमरे का माहौल एक झटके में और ज्यादा रोमांटिक और कशिश से भर गया। राहुल सीधे काव्या की इस नई जवानी और उसके बदन के करीब पहुँचना चाहता था।
काव्या ने एक पल के लिए मेरी और सपना की तरफ देखा, लेकिन जब उसने देखा कि हम दोनों खुद एक-दूसरे के करीब कम्फर्टेबल होकर बैठे थे, तो उसने अपने होंठों पर एक नटखट मुस्कान लाई। उसने कंबल को एक तरफ हटाया, सोफे से उठी और धीरे-धीरे चल कर राहुल के ठीक पास आ गई।
राहुल ने अपनी बाहें फैला दी, और काव्या बिना किसी झिझक के राहुल के बेहद करीब सिमटते हुए उसकी गोद में अपना सिर रख कर लेट गई। राहुल का मजबूत हाथ तुरंत काव्या के मुलायम कंधों पर आ टिका, और शिमला की उस बर्फीली रात में दोनों के बीच की शारीरिक दूरियां अब पूरी तरह से खत्म होने लगी थी।
राहुल की शातिर चाल और आँखों के इशारे को मैं अच्छी तरह समझ चुका था। अब खेल को उसी दिशा में आगे बढ़ाना था जहाँ हम दोनों अपनी-अपनी मंजिलों के करीब पहुँच सकें। मैंने बोतल को एक बार फिर फर्श पर घुमाया, और इस बार किस्मत ने बिल्कुल सही पत्ता खोला—बोतल का मुंह सीधे मेरी तरफ आकर रुका, और पिछला हिस्सा राहुल के सामने था।
राहुल के चेहरे पर एक गहरी, संतोष भरी मुस्कान आ गई। उसे पता था कि यही वह मौका था जहाँ से वह मुझे और सपना को एक साथ ला सकता था, ताकि काव्या के साथ उसका रास्ता पूरी तरह साफ हो जाए।
राहुल ने सोफे पर सीधे बैठते हुए, बेहद दमदार और बेबाक आवाज में कहा-
“हाँ तो भाई, नियम के मुताबिक तुम्हें सिर्फ ‘डेयर’ ही चुनना है। और आज की इस जादुई रात का सबसे बड़ा डेयर मैं तुम्हें देता हूँ। तुम अभी सोफे से उठोगे, सीधे सपना के पास जाओगे, और सब के सामने उसे एक बेहद लंबा और गहरा ‘किस’ (चुम्बन) करोगे। देखते हैं कि तुम दोनों के बीच जो जयपुर और खेतों की गर्माहट थी, वो आज इस शिमला की ठंड में कितनी शिद्दत से बाहर आती है।”
राहुल का यह डेयर सुनते ही कमरे का माहौल एक झटके में पूरी तरह बदल गया। सपना का दिल तेजी से धड़कने लगा और उसने शरमाते हुए अपनी नजरें झुका ली, लेकिन उसकी सांसों की रफ्तार बता रही थी कि वह अंदर ही अंदर इस पल का कितनी बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
काव्या जो राहुल की गोद के पास बैठी यह सब देख रही थी, उसकी आँखें भी फटी की फटी रह गई। वह एक टक मुझे देखने लगी कि मैं अपनी सगी जैसी बड़ी बहन को राहुल और उसके सामने कैसे चूमता हूँ।
मैंने बिना किसी झिझक के मुस्कुराते हुए कहा, “चलो भाई, जब डेयर मिला है तो पीछे हटने का तो सवाल ही नहीं उठता।”
मैं अपनी जगह से उठा और धीरे-धीरे चल कर सपना के ठीक पास पहुँच गया। सपना ने अपनी झुकी हुई पलकें उठाई और हीटर की लाल रोशनी में उसका चेहरा इस वक्त गुलाब की तरह सुर्ख लग रहा था। मैंने आगे बढ़ कर अपना एक हाथ उसकी नाजुक कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाया।
राहुल और काव्या बिल्कुल सांस रोक कर हमें देख रहे थे। मैंने धीरे-धीरे अपना चेहरा सपना के करीब लाया, और हमारी सांसें एक-दूसरे से टकराने लगी। अगले ही पल, मैंने अपने होंठ सीधे सपना के कांपते हुए होंठों पर रख दिए। सपना ने एक ठंडी आह भरी और अपनी दोनों बाहें मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट दी।
कमरे के भीतर इस गहरे और लंबे किस्स ने बची-कुची मर्यादा को भी पूरी तरह भस्म कर दिया। राहुल ने काव्या की तरफ देखा, जो इस दृश्य को देख कर पूरी तरह से उत्तेजित और सुन्न हो चुकी थी। राहुल ने धीरे से अपना हाथ काव्या की कमर पर कस दिया, और काव्या ने इस बार जरा भी विरोध नहीं किया। खेल अब अपनी सारी हदें पार कर चुका था।
सपना और मेरे बीच का वो गहरा किस्स जब खत्म हुआ, तो कमरे की हवा में एक अलग ही नशा घुल चुका था। घड़ी की सुइयां अब रात के 11 बजा रही थी। बाहर पहाड़ों पर बर्फबारी की वजह से पूरी तरह सन्नाटा था, लेकिन हमारे इस बंद सुइट के अंदर का तापमान और धड़कनें अपनी चरम सीमा पर थी।
सपना अब पूरी तरह से राहुल के इशारे और हमारी इस अनकही योजना को समझ चुकी थी। वह भी इस रात को पूरी तरह से बेबाक और यादगार बनाने के मूड में आ चुकी थी। उसकी अपनी नज़रों में अब काव्या और राहुल को और करीब आते देखने की एक अजीब सी उत्सुकता और कशिश साफ नज़र आ रही थी।
खेल को आगे बढ़ाते हुए, पोजीशन बदलने के सिलसिले में इस बार जब पासा पलटा, तो सपना को काव्या को डेयर देने का मौका मिला। सपना ने सोफे पर थोड़ा आगे झुकते हुए, अपनी आँखों में एक बेहद शरारती और गहरी चमक के साथ काव्या की तरफ देखा।
सपना ने अपने चेहरे पर एक शातिर मुस्कान लाते हुए कहा- “काव्या, अब तक तुम सिर्फ दूसरों के किस्से सुन रही थी और राहुल जी के करीब बैठी थी। लेकिन अब खेल असली मोड़ पर है और तुम्हें पीछे हटने की इजाजत नहीं है। मेरा डेयर यह है कि तुम सीधे राहुल जी की आँखों में देखोगी, उनके दोनों हाथों को अपने हाथों में लोगी, और पूरी शिद्दत के साथ उन्हें इस तरह प्रपोज करोगी… जैसे तुम वाकई उनकी दीवानी हो चुकी हो। देखते हैं चंडीगढ़ की हमारी यह बिंदास लड़की इस चुनौती को कितनी गहराई से निभाती है।”
यह डेयर सुनते ही काव्या की सांसें एक पल के लिए थम गई। उसका गोरा चेहरा हीटर की लाल रोशनी में और भी ज्यादा सुर्ख हो गया। राहुल के चेहरे पर एक गहरी, विजयी मुस्कान तैर गई; उसे बिना मांगे वही मिल रहा था जिसकी तलाश में वह सुबह से था।
काव्या ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा, लेकिन जब उसने देखा कि मैं खुद सपना की कमर पर हाथ रखे पूरी तरह कम्फर्टेबल बैठा हूँ और उसे बढ़ावा दे रहा हूँ, तो उसने अपनी बची-कुची हिचक को भी पूरी तरह हवा में उड़ा दिया।
वह सोफे पर पूरी तरह घूम कर राहुल के बिल्कुल करीब आ गई, जहाँ दोनों के जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह सट चुके थे। उसने राहुल के दोनों मजबूत हाथों को अपने कोमल और कांपते हुए हाथों में लिया। राहुल की आँखों में साफ-साफ वही हवस और दीवानगी सुलग रही थी। काव्या ने सीधे उसकी आँखों में झांका, अपने होंठों को हल्के से खोला और बेहद धीमी, मदहोश कर देने वाली आवाज में बोलना शुरू किया…
काव्या ने राहुल की आँखों में सीधे देखते हुए अपनी आवाज़ को बेहद धीमा और कशिश से भरा बनाया। कमरे में 11 बजे का सन्नाटा और हीटर की लाल आंच उस पल को और भी गहरा बना रही थी।
“राहुल जी…” काव्या ने उनके हाथों को थोड़ा और कस कर थामते हुए कहा, “चंडीगढ़ में मैंने बहुत से लड़के देखे हैं, लेकिन आपमें जो एक बेबाक और दमदार बात है, वह किसी में नहीं। सुबह से लेकर अब तक, आपकी बातें और आपकी नज़दीकी मेरे दिल की धड़कनों को जिस तरह बढ़ा रही हैं… मैं खुद को रोक नहीं पा रही हूँ। अगर आज की यह रात हमारी जिंदगी की आखिरी रात हो, तो भी मैं इसे सिर्फ और सिर्फ आपके साथ, आपकी बाहों में बिताना चाहूंगी। आई लव यू।”
काव्या ने भले ही यह सब एक ‘डेयर’ के तौर पर कहा था, लेकिन उसके लहजे की शिद्दत और उसकी आँखों की चमक साफ बता रही थी कि अब यह सिर्फ एक खेल नहीं रह गया था। उसके भीतर का छुपा हुआ आकर्षण पूरी तरह बाहर आ चुका था।
राहुल का दिल यह सुन कर तेज़ी से धड़कने लगा। उसने बिना एक पल गंवाए काव्या को अपनी तरफ खींचा, जिससे उसका गदराया हुआ बदन सीधे राहुल के मजबूत सीने से जा टकराया। राहुल ने काव्या के चेहरे को अपने हाथों में लिया और बेहद करीब आकर कहा, “काव्या, इस प्रपोजल के बाद अब मैं तुम्हें खुद से दूर नहीं होने दूंगा।”
दूसरी तरफ सोफे पर बैठी सपना ने जब अपनी छोटी बहन को राहुल के इतने करीब और इस हद तक तैयार देखा, तो उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा। सपना ने मेरे कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, “भैया, अब खेल की जरूरत नहीं है। समां पूरी तरह बंध चुका है। अब बोतल को एक तरफ रखिए और इस रात को वो मोड़ दीजिए जिसके लिए हम सब इतनी देर से तड़प रहे हैं।”
सपना की बात बिल्कुल सही थी। कमरे का माहौल अब खेल की बंदिशों से बहुत आगे निकल चुका था। मैंने फर्श पर रखी बोतल को उठा कर एक तरफ टेबल पर रख दिया।
अब उस सुइट के भीतर सिर्फ दो जोड़े थे—एक तरफ मैं और सपना, जो अपनी पुरानी यादों और कशिश को एक बार फिर जी रहे थे, और दूसरी तरफ राहुल और काव्या, जिनके बीच की नई और सुलगती हुई वासना अब पूरी तरह से बेकाबू होने के लिए तैयार थी। हीटर की मद्धम रोशनी में चारों के जिस्म एक-दूसरे में सिमटने लगे थे, और शिमला की वह बर्फीली रात अब अपने असली रंग में रंगने जा रही थी।
क्या काव्या राहुल पर अपना सब कुछ लुटा देगी जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, धन्यवाद !
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