हेलो दोस्तों, मेरा नाम विनीत है। आज मैं आपको अपनी जवानी के दिनों में एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं, कि मैंने अपनी हिस्ट्री की टीचर गीता मैडम की चुदाई कैसे की। मैं उस समय कॉलेज के प्रथम वर्ष में था।
हमारी नई टीचर गीता वर्मा (बदला हुआ नाम) हरियाणा से थी। वो बहुत गोरी थी। उनका चेहरा गोल था, बाल काले और लम्बे थे। वो बहुत ही सेक्सी थी। मैडम का फिगर 36-32-38 था। क्योंकि हमारे कॉलेज में सिर्फ एक ही लेडी टीचर थी, इसलिए हर एक जेंट्स टीचर उन्हें फसाने की सोचता था, और उनको चोदने की भी।
गीता मैडम के पति एक आईटी कंपनी में चंडीगढ़ से बाहर काम करते थे, और 6-7 महीनो में ही घर आते थे। गीता मैडम इतनी सुंदर थी कि कॉलेज ऐसा कोई लड़का नहीं होगा, जो उनके नाम की मूठ नहीं मारता होगा।
कभी-कभी मैडम एक अफगानी सलवार-कमीज़ पहन कर आती थी, जो पारदर्शी थी। उसमें मैडम की गोरी-गोरी जांघें सब दिखता था। फिर लंच टाइम में जाके स्टूडेंट्स उस दिन बाथरूम में गीता मैडम के नाम की मुठ मारते थे, और घर जाने के बाद भी मुठ मारते थे।
वैसे तो मैं भी इंटेलिजेंट स्टूडेंट्स में ही आता था। लेकिन गलत संगत की वजह से मैं बंक भी मारता था। और इसी बंक मारने की वजह से मुझे मैडम की गोरी-गोरी फुद्दी मारने को मिली, जिसके लोगों ने सिर्फ सपने ही देखे होंगे।
मैडम का पीरियड लंच के बाद होता था। जो काम करके नहीं लाता था, वो बंक पर चला जाता था। एक दिन मैं भी कुछ याद करके नहीं गया था, इसलिए मैं लंच के बाद मैडम का पीरियड बंक कर गया। जब घंटी बजी तो मैं वापस जा रहा था।
मैडम के पीरियड के बाद इंग्लिश का पीरियड होता था। लेकिन हमारे दिन इंग्लिश वाले सर कहीं चले गए, और अपना पीरियड भी मैडम को दे दिया। मुझे लगा मैडम चले गए होंगे, लेकिन जैसे ही मैं क्लास के दरवाजे पर पहुंचा, मैंने देखा मैडम वही थी। मैं एक-दम से भागा, लेकिन मैडम ने मुझे देख लिया था।
उन्होंने बोला: भागने का कोई फायदा नहीं है विनीत, चुप-चाप इधर आ जाओ। नहीं तो प्रिंसिपल के पास ले जाउंगी।
फिर मुझे चुप-चाप मुड़ना पड़ा।
जैसे ही मैं गया मैडम ने मेरा कान पकड़ लिया और बोली-
मैडम: अच्छा तो क्लास बंक करते हो रोज-रोज। तुमको इसकी सजा मिलके ही रहेगी। मुर्गा बन जाओ।
मैडम ने मुझे सारी क्लास के सामने पहले मुर्गा बना दिया। फिर 15 मिनट के बाद उठा दिया, और 4 डंडे हाथों पर, और बोली-
मैडम: कल तुम्हारे पिता जी आके मिलेंगे मुझसे, नहीं तो नाम कटवा दूंगी कॉलेज से।
फिर अगले दिन मैं पापा को लेकर गया तो उन्हें पापा के सामने ही बहुत डांट लगाई।
मैडम: आपका लड़का रोज मेरा पीरियड बंक करता है, और ना असाइनमेंट चेक करवाता है, ना याद करके आता है। क्या करोगे, तुम फेल हो जाओगे?
पापा ने भी बहुत डांटा मुझे। फ़िर उन्होंने बोला-
पापा: मैडम जी, आप इसे अलग से ट्यूशन लगा लो अपने पास।
मैडम: नहीं मैं कॉलेज में ही पढ़ाती हूं, अलग से नहीं।
फिर पापा के रिक्वेस्ट करने पर मैडम मान गई। अब कॉलेज से 2 बजे छुट्टी होती थी। 2:30 बजे मैं घर जाता था। फिर 6-7 बजे मैडम के पास ट्यूशन जाता था।
ऐसे करते-करते करवा चौथ भी आ गया। क्योंकि उस समय हम सी.डी. में ब्लू फिल्म देखते थे, तो सब को पता ही था कि क्या करना था। बस चूत नहीं मिल रही थी। लेकिन ये करवा चौथ खास होने वाला था।
उस दिन करवा चौथ था, और गीता मैडम लंच से पहले ही हाफ डे करके चली गई थी। क्योंकि उन्होंने व्रत रखा था, इसलिए आज का लेक्चर किसी और ने लिया था। लेकिन मुझे ये पता नहीं था कि शाम को मैडम के पास जाना था या नहीं। मैं कॉलेज से छुट्टी लेकर घर चला गया, और आराम करके 6 बजे ट्यूशन चला गया।
उस समय मोबाइल तो था, लेकिन स्मार्ट फोन नहीं था। क्योंकि मैं पैदल ही जाता था, इसलिए कभी-कभी देर हो जाती थी ट्यूशन के लिए। जब मैं पहुंचा तो मैंने डोरबेल बजाई। मैडम ने दरवाजा खोला।
मैडम ने लाल रंग की साड़ी पहनी थी, और हाथों में मेहंदी लगाई हुई थी। नाक में नथ, कानों में बड़े झुमके, माथे पर लाल बिंदी, जोड़ों में पायल जो हरियाणा के लोग ज्यादा पहनते हैं, जिसकी कोई जगह पलानी भी कहते हैं, लाल नेल पॉलिश, हाथों में लाल चूड़ियां। मैं तो मैडम को देखता ही रह गया।
मैडम: अरे विनीत, आज क्यों आये तुम?
मैं: आज नहीं आना था क्या मैडम?
मैडम: नहीं, आज तुम्हें पता नहीं क्या करवा चौथ का व्रत है?
मैं: हां लेकिन आपने बताया नहीं था, और आप कॉलेज से भी जल्दी आ गए।
मैडम: चलो ठीक है कोई बात नहीं। अब आ ही गए हो तो मेरी मदद करो थोड़ी।
मैं: ठीक है मैडम।
फिर मैं अंदर चला गया, और बाजार से सामान लाया, और मैडम की मदद की खाना बनवाने में, जिसे उन्होंने पूजा करने के लिए बनाया था, हलवा, पूरी, और दाल-चावल।
फिर पूजा करने के बाद मैडम ने अपने बड़े बच्चे को खिलाया, और मुझे भी दिया, और अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाने के लिए अंदर दूसरे कमरे में चली गई।
मैं और उनका बड़ा बेटा जो कि हमारे समय 5 साल का ही था, बाहर खेल रहे थे। फिर उसको भी नींद आने लगी तो मैं उसको गोदी में उठा के जिसके कमरे में मैडम थी, वहां चला गया। मैंने पहले बाहर से आवाज़ दी-
मैं: मैडम, रिंकू सोने लगा है।
मैडम: अंदर आ जाओ उसे लेकर।
मैं अंदर गया तो देखा मैडम अपने छोटे बच्चे को चूची पिला रही थी, और उनका चूचा दिख रहा था। जब मैं अंदर गया तो मैडम ने मुझे देख के पल्लू से अपना चूचा ढक लिया। फिर मैंने उनके बड़े बच्चे रिंकू को वहां लिटा दिया।
मैडम ने बोला: विनीत थोड़ी देर बाहर बैठो।
इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। कहानी की फीडबैक में कमेंट जरूर करें। कहानी पढ़ने के लिए आप सबका धन्यवाद। आपकी वैल्यूएबल फीडबैक का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
अगला भाग पढ़े:- हिस्ट्री की टीचर की चुदाई-2