भाभी देवर और शिमला का राज़-1 (Bhabhi devar aur shimla ka raaz-1)

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नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम दिव्या है। मैं 34 साल की शादी-शुदा औरत हूं। मेरी हाइट 5’5” है, और मैं दूध जैसी गोरी हूं। फिगर मेरा 34-32-36 है। जब मैं टाइट कपड़े पहनती हूं, तो मर्दों के लंड खड़े हो जाते हैं। मुझे मर्दों को अपना जिस्म दिखा कर चिढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

मेरी फैमिली में मैं, मेरी परी, सास-ससुर, देवर, और ननंद है। ननंद की शादी पिछले साल हो गई थी, इसलिए वो मुसीबत अब अपने घर जा चुकी है। अब मैं ही यहां की महारानी हूं। क्या कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि मेरी और मेरे देवर की चुदाई कैसे हुई। तो चलिए शुरू करते हैं।

पहले मैं आप सबको बता दूं, कि हमारा परिवार पंजाब में रहता है। वैसे हम लोग शिमला से हैं। लेकिन काम की वजह से यहां रहते हैं। मेरा देवर अब 26 साल का हो चुका था, इसलिए हम उसके लिए लड़की ढूंढ रहे थे। हमें लड़की शिमला से ही चाहिए थी, क्योंकि पंजाबी लड़कियां बहुत तेज़ होती हैं।

फिर एक दिन वहां से पंडित जी का फोन आया। उन्होंने हमें एक लड़की की प्रोफाइल भेजी। लड़की देखने में अच्छी थी, और अच्छे परिवार से थी। उन्होंने हमने लड़की देखने बुलाया था। सास-ससुर ज्यादा ट्रैवल नहीं कर सकते, इसलिए मैं, मेरे पति, और देवर ही लड़की देखने जाने वाले थे।

हमारा प्लान कुछ ऐसा था कि हम दोपहर को यहां से निकलेंगे और रात तक शिमला पहुंच कर होटल में नाइट स्टे करेंगे। फिर अगले दिन वहां लड़की देख कर दोपहर को वहां से निकल पड़ेंगे।

सब कुछ सेट था, और पैकिंग भी हो गई थी। लेकिन जिस दिन जाना था, उसी दिन सुबह पति के बॉस ने उनको अर्जेंट ऑफिस बुलाया लिया। तो पति ने कहा कि मैं अपने देवर के साथ चली जाऊं। मैंने भी हां कह दिया।

अब देवर के बारे में बताती हूँ। वो 26 साल का हट्टा-कट्टा और स्मार्ट लड़का है। उसने जिम जाकर अच्छी बॉडी बनाई है। उसको देख कर कोई भी लड़की उस पर मोहित हो जाये। देवर और मेरी इक्वेशन काफी अच्छी है। उसकी और मेरी छेड़-छाड़ चलती रहती है। वो हमेशा मेरे पास से गुज़रते हुए मेरे साथ पंगे लेता रहता है, और मुझे टच करता रहता है। मैंने भी कभी बुरा नहीं माना, क्योंकि जवान लड़के ऐसा करते हैं। और वैसे भी कॉलेज टाइम पर भी तो लड़के टच करते ही हैं। उल्टा उसके टच करने से मुझे भी मजा आता है।

फिर हम गाड़ी से निकल पड़े। देवर ड्राइव कर रहा था, और हम दोनो बातें कर रहे थे। ऐसे ही बातें करते-करते हम शिमला पहुंच गए। वहां हमारे दिन काफी ठंड थे। हम लोगों ने होटल में चेक-इन किया। हम तीनों ने एक ही कमरे में रहने का प्लान किया था। और अब मैं और देवर वहां रहने वाले थे। लेकिन मुझे इसमें कोई समस्या नहीं थी।

कमरे में जाते ही हम लोगों ने फ्रेश होने का फैंसला किया। पहले मैं नहाने चली गई। तब तक देवर खाने का इंतेज़ाम करने चला गया। मैंने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया था और बाथरूम में जाने से पहले। 10 मिनट लगे मुझे नहाने में। और नहाने के बाद मैं सीधे कमरे में कपड़े बदलने आ गई। घर पर भी मैं ऐसा ही करती हूं। बाहर आते समय मुझे जरा भी ख्याल नहीं आया कि देवर बाहर हो सकता है। और वही हुआ।

जब मैं नंगी बाहर आई, तो देवर सामने बिस्तर पर बैठा था। जैसे ही मैंने उसको देखा, उसने घबरा कर मुंह दूसरी तरफ कर लिया, और मेरी चीख निकल गई। मैं जल्दी से सॉरी बोलती हुई बाथरूम में भागी।

उधर देवर भी सॉरी बोल रहा था। फिर देवर बाहर चला गया मुझे बोल कर, और मेरे कमरे में आके कपड़े बदले। थोड़ी देर में वो खाना ले आया। हम दोनों में स्थिति थोड़ी अजीब हो गई, लेकिन खाना खाते हुए सब सामान्य हो गया। उसके बाद हम मार्केट गए, और थोड़ा घूम कर वापस आ गए।

फ़िर सोने की तैयारी करने लगे। हम दोनों ने अपना-अपना नाइट सूट पहन लिया। फिर मैंने देखा कि देवर अपना बिस्तर ज़मीन पर लगा रहा था। तभी मैंने उसको कहा-

मैं: ये क्या कर रहे हो?

देवर: भाभी आप ऊपर जाओ। मैं नीचे सो जाता हूं।

मैं: इसकी कोई जरूरी नहीं है। डबल बेड है, दोनों आराम से सो सकते हैं।

देवर: लेकिन भैया होते तब भी तो मैंने नीचे ही सोना था।

मैं: लेकिन वो नहीं है ना।

फिर उसने मेरी बात मान ली, और हम दोनों एक ही बिस्तर पर सो गये। मैं थकी हुई थी, और मुझे तुरंत नींद आ गई।

थोड़ी देर बाद मुझे अपनी गांड पर कुछ महसूस होने लगा। मैं नींद में थी, तो लगा मेरे पति होंगे। लेकिन होश में आई तो ध्यान आया कि मैं होटल में थी, और साथ में देवर सोया था। ये सोच कर मेरी आंखें खुल गयी। मैं एक तरफ मुड़ी हुई थी, और मेरा देवर मेरी गांड पर धीरे-धीरे हाथ फेर रहा था। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। पहले मैंने सोचा कि मैं उसका हाथ हटाऊं। लेकिन फिर अचानक मुझे थोड़े दिन पहले का सीन याद आ गया, जब मैंने अपने देवर का लंड देखा था।

हुआ कुछ ऐसा था, कि सुबह का वक्त था, और मैं छत पर से रात के सूखे कपड़े लेके आई थी। फिर मैंने कपडे फोल्ड किये, और सब के कपड़े उनके कमरों में देने लगी। उन कपड़ो में देवर के भी कुछ कपड़े थे। जब मैं उसके कमरे में गई, तो वो मुझे कहीं नज़र नहीं आया। फिर मैंने कपड़े उसके बिस्तर पर रखे, और वापस आने लगी।

तभी मुझे बाथरूम में से शॉवर ऑन होने की आवाज आई। मैं समझ गई कि वो नहाने लगा था। मेरे मन में एक शरारत आई। मैंने सोचा उसके बाथरूम की लाइट बंद कर देती हूं, जिसे वो दिख जाएगा। ये सोच कर मैं उसके बाथरूम के पास चली गयी। बाथरूम का दरवाजा खुला था, और बटन दरवाजे के बिल्कुल पास है। जैसा ही मैं बटन बंद करने लगी, मेरी नज़र अंदर पड़ गई। बटन तो क्या बंद करना था, देवर का तगड़ा लंड देख कर मैं हैरान रह गई। इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले भाग में पता चलेगा। [email protected] पर कहानी की प्रतिक्रिया दे।

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