पिछला भाग पढ़े:- संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-27
मम्मी को इस तरह चक्कर खाकर गिरते हुए देख कर मौसी और मैं घबरा जाते हैं। मैं तुरंत उन्हें बेड पर लेटाता हूं। मौसी उनके पैरों की मालिश करती हैं और उनके चेहरे पर पानी की बूँदें गिरा कर उन्हें होश में लाने की कोशिश करती हैं। कुछ देर में आरिफ भी कमरे में आ जाता है। मम्मी को इस हाल में देख उसके भी पसीने छूट जाते हैं।
मैं घबराते हुए उसे किसी डॉक्टर को बुलाने के लिए कहता हूं। आरिफ तुरंत अपनी कार लेकर निकल जाता है। वो कुछ देर में एक नज़दीकी डॉक्टर को लेकर आता है। कुछ दवाई देने और चेक करने के बाद डॉक्टर ने कहा: “घबराने वाली बात नहीं है, बस छोटा पैनिक अटैक था। थोड़ी देर में ये ठीक हो जाएंगी। आप लोग बस इनसे अभी ज़्यादा सवाल-जवाब मत करना।”
करीब एक घंटे बाद जब माँ को होश आया, वो रोते हुए बोली: “मेरा हार गायब है!”
हम सब उन्हें शांत करने में लगे हुए थे। मैं उन्हें दिलासा देता हूं कि मेरे लिए तुम कीमती हो, हार नहीं! पर मम्मी को उसे खोने का बड़ा सदमा लग गया था। फिर मम्मी जैसे-तैसे अपने आप को शांत करती हैं। आरिफ उनकी हालत को देख कर उन्हें एक दिन और होटल में रुकने के लिए बोलता है।
मैं आरिफ की इस बात पर थोड़े गुस्सैल भाव से कहा: “आरिफ, आपके होटल में हमारा इतना बड़ा नुकसान हो गया है। तुम हमें और यहाँ रुकने के लिए बोल रहे हो!”
आरिफ: “राहुल, मुझे तुम्हारे नुकसान का अफ़सोस है। मैं बस सविता जी की हालत देख रोकना चाहता था। मैं तुम्हारा कीमती हार ढूँढ़ने में पूरी मदद करूँगा। जिसने भी ये गलती करी है, मैं उसका तुम्हारे सामने बुरा हाल करूँगा, राहुल, ये मेरा वादा है!”
मौसी मेरे करीब आकर बोली: “राहुल बेटा, आरिफ जी तुमसे बड़े हैं। इन पर गुस्सा मत करो। ये तो हमारी मदद ही कर रहे हैं!”
मैं: “जुनैद का भाव मुझे आज कुछ ठीक नहीं लगा था, आरिफ। तुम्हारे साथ उसका झगड़ा होना और मम्मी के साथ उसका ज़बान लड़ाना, मुझे लग रहा है यह उसने ही किया है।”
मम्मी बेड पर लेटे हुए बोली: “राहुल, तुम्हें क्या हो गया है? प्लीज़ शांत रहो। वो ऐसा क्यों करेगा भला?”
आरिफ मम्मी की तरफ देख कर बोला: “सविता जी, राहुल को लगता है अगर जुनैद ने हार चुराया है, तो मैं उसे ढूँढ़ कर छोडूँगा नहीं…”
मैं गुस्सैल भाव में कहा: “कोई मुझे बताएगा कि आपस में झगड़े क्यों हो रहे थे?”
मेरे इस सवाल से सब एक-दूसरे के चेहरे देखने लगते हैं। कुछ देर के लिए कमरे में खामोशी सी छा गई थी।
मौसी माहौल को देखते हुए बोली: “राहुल बेटा, सविता की तबियत खराब है। ये सब बात करने का देखो अभी ठीक समय नहीं है।”
कुछ घंटे बाद हमारे घर निकलने का समय हो जाता है। सारे बैग मैंने कार के पीछे रख दिए और फिर मैं मम्मी को लेकर आया। फिर मौसी को बुलाने कमरे में गया तो देखा मौसी आरिफ की बाहों में लिपट कर उसके होंठ चूम रही थी। आरिफ मौसी की गांड को अपने हाथों से मसल रहा था।
मेरे अचानक कमरे में घुसते ही कदमों की आवाज सुन दोनों घबराते हुए एक-दूसरे की बाहों से अलग होते हैं। मौसी अपनी नज़रें झुकाए हड़बड़ी में अपने आप को संभालती हैं।
मैं उन्हें इस हाल में देख पीछे पलट कर कहा: “बाहर गाड़ी तैयार है, आ जाओ।”
इतना बोल कर मैं कमरे से बाहर आ जाता हूं और आगे वाली सीट पर बैठ जाता हूं। थोड़ी देर बाद मौसी अपनी नज़रें मुझसे नीचे किए कार में मम्मी के साथ बैठ जाती हैं। फिर हम शांत बैठे स्टेशन की तरफ निकल जाते हैं।
पूरी रात सफ़र करने के बाद हम सुबह अपने घर पहुँच जाते हैं। सफ़र की थकान उतारने के लिए हम कुछ घंटे नींद ले रहे थे। मेरी आँख दिन की दोपहरी में खुलती है। मैं फ़्रेश होने के बाद अपने कमरे में लौट रहा था, तभी मैंने दूसरे कमरे में देखा, मौसी बैग पैक कर रही थी।
मैं उनके पास गया और कहा: “मौसी, आप ये क्या कर रही हो?”
मौसी पलट कर मेरी तरफ देख कर बोली: “राहुल, वो मैं अपने घर जाने की तैयारी… तुम्हारे मौसा जी का फ़ोन आया था। अब तुम सविता का अच्छे से ख्याल रखना!”
मैं: “मौसी, आज रात तक आप रुक जाती तो मम्मी को भी अच्छा लगता।”
मौसी: “राहुल बेटा, सविता को ऐसे अकेले छोड़ के जाने का मन तो मेरा भी नहीं है, पर क्या करूँ, तुम्हारे मौसा जी का ऑर्डर है!…”
मैं मौसी से आँखें मिलाते हुए कहा: “मौसी, वैसे आपसे एक बात पूछूँ?”
मौसी थोड़ा घबराते हुए बोली: “हाँ-हाँ, पूछो! ऐसी क्या बात है?”
मैं: “आरिफ और जुनैद के बीच क्यों झगड़ा हो रहा था, और वो मम्मी के साथ भी किसी बात को लेकर बहस कर रहा था?”
मौसी: “राहुल बेटा, देखो, आरिफ-जुनैद के बीच का झगड़ा तो मुझे भी नहीं पता क्यों हो रहा था, पर इतना पता है कि जुनैद सविता से कुछ डिमांड कर रहा था।”
मैं थोड़ा हैरानी से कहा: “मम्मी से क्या डिमांड कर रहा था वो?”
मौसी मेरे कंधों पर हाथ फेरते हुए: “राहुल, अभी इस बारे में मैं तुम्हें कुछ नहीं बता सकती हूं!”
मैं थोड़ा भावुक होकर कहा: “मौसी, जुनैद ने हार चुराया है, आप मुझे बता क्यों नहीं रहीं उसके बारे में?”
मौसी: “राहुल, देखो, सविता की अभी तबियत ठीक नहीं है। ऊपर से तुम ऐसे भावुक होगे तो कुछ ठीक नहीं हो पाएगा। तुम मेरी बात को समझो, सविता के ठीक होने के बाद तुम्हें सब पता चल जाएगा।”
मैं बोला: “मौसी, आरिफ तो जुनैद का दोस्त है, उसको तो जुनैद के बारे में सब पहले से पता ही होगा। ये जुनैद की चाल थी रिसॉर्ट पर जाकर हार चुराने की। मुझे लगता है इसमें आरिफ भी कहीं मिला हुआ था।”
मौसी: “राहुल, क्या बोल रहे हो? आरिफ जी भला ऐसी गंदी हरकत क्यों करेंगें!”
मैं: “ऐसा आपको लगता है, मुझे नहीं। कल जब मैं आपको बुलाने कमरे में आया था, तो मौसी, आप वैसे आरिफ के साथ उस समय क्या कर रही थी?”
मौसी अपना चेहरा घुमा कर दूसरी तरफ देखते हुए: “कुछ भी नहीं, मैं बस उन्हें बाय बोल रही थी!”
मैं: “मौसी, मैं इतना भी बेवकूफ़ नहीं हूं जितना आप समझ रही हैं। सच बताओ क्या चल रहा था?”
मौसी उदास आँखों में नर्मी लिए बोली: “राहुल, मैं आरिफ जी के साथ बस एक दोस्त के रिश्ते से गले लगी हुई थी। बाकी अभी तुम औरत के जज़्बात नहीं समझ पाओगे…”
मैं मौसी की आँखों में देखते हुए थोड़ा नर्म लहजे में कहा: “पर ये गलत है ना, मौसा जी के होते हुए आपका आरिफ के करीब जाना?”
मौसी अपनी आँखों में हल्के आँसू लिए: “राहुल, प्लीज़ इस बारे में उनको मत बताना।”
मैं: “मौसी, मैं इस बारे में किसी को नहीं बताऊँगा, मम्मी को भी नहीं!”
मौसी राहत की साँस लेते हुए मुझे गले लगाकर कहा: “राहुल, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी कि बेटा तुम समझदार हो!”
मैं मौसी के कान में धीरे से कहा: “मौसी, लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा था, आपको आरिफ के साथ ये सब करते हुए देख कर। आप मुझे…”
मौसी मेरी आँखों में शरारत से देखते हुए बोली: “आप मुझे क्या? तुम मुझसे खुलकर बात कर सकते हो!”
मैं अपनी नज़रें झुका कर कहा: “मौसी, आपको जब से ट्रिप पर देखा है, आपको पसंद करने लगा हूं! आपको आरिफ की बाहों में देख कर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था!”
मौसी अपने दोनों कोमल हाथों से मेरे गालों को पकड़ते हुए: “क्या सच में, राहुल? तुम मुझे इतना पसंद करते हो?”
मैं उनकी आँखों की गहराई में देखते हुए बड़े धीरे स्वर में कहा: “हाँ, आप इतनी हॉट हैं कि नज़र हटाने का मन ही नहीं करता!”
मैं और मौसी एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए खो से जाते हैं। धीरे-धीरे मेरी दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थी। दोनों के होंठ एक-दम करीब आ चुके थे। मौसी मेरे कंधों पर अपने हाथों से दबाव बनाए, जैसे वो मुझे किस्स करने की छूट दे रही थी। मैंने एक नज़र उनकी आँखों पर डाली जो बंद पड़ी थी। मैं उनके हल्के खुले होंठों को देख कर अपने होंठों से जोड़ दिए।
होंठों का मिलन होते ही मौसी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लेती हैं। उनके मोटे बूब्स मेरे सीने से चिपक जाते हैं। मौसी के नर्म और मोटे होंठों को चूसने में एक अलग आनंद आ रहा था। मौसी भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी। मौसी एक तजुर्बेकार की तरह बड़े कामुक तरीके से अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला कर चूस रही थी। उनकी ये अदा मेरे लंड में दोगुनी जान डाल रही थी।
मेरा लंड लोअर को फाड़ कर उनकी मोटी, चर्बीदार और गुच्छेदार चूत में ठोकर मारने लगा था। मौसी अपनी आँखें खोल कर मेरी आँखों में देखते हुए मेरे एक हाथ को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख देती हैं। मैंने मौसी के बूब्स को हल्के-हल्के दबाना शुरू किया तो मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ उठा था। क्या बताऊँ दोस्तों, ऐसा एहसास पहली बार महसूस हुआ था।
मैं जोश में मौसी के होंठों को जबरन चूसने और काटने लगा था, एक हाथ से उनके बूब्स की पूरी गोलाई नाप रहा था। मौसी अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़े मेरा ज़ोरदार साथ दे रही थी। वो साथ में अपनी टाँगें खोल कर मेरे खड़े लंड को चूत के मुहाने पर रगड़वाने में लगी हुई थी। हम एक-दूसरे के होंठों को चूसते हुए बेड के किनारे तक कब आ जाते हैं, पता भी नहीं चलता। मेरी कमर बेड के किनारे टिक जाती है।
मौसी मेरे होंठों से अपने होंठों को जुदा करके चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बोली: “तुम जवान तो हो गए हो, पर लगता है तुम्हें सब मुझे ही सिखाना पड़ेगा कि औरत को कैसे खुश करते हैं!”
मैंने मौसी के टॉप्स, ब्रा सहित ऊपर किए और दोनों बड़े बूब्स की दरार में होंठों को रगड़ते हुए कहा: “तो जल्दी सिखा दो ना, मौसी!”
मैं उनके एक बूब को मुँह भर कर चूसने लगा था। मौसी मेरे बालों में अपनी हाथों की उँगलियाँ घुमाते हुए सिसकारियाँ भर रही थी। मैं एक-एक करके दोनों बूब्स के निपल्स सहला कर अच्छे से चूस रहा था। उनके बड़े गोल साइज़ के बूब्स मेरे मुँह में सही से जा भी नहीं पा रहे थे, उफ्फ, पर मज़ा बड़ा आ रहा था। मौसी नीचे मेरे लोअर का नाड़ा खोल रही थी। मौसी ने मेरा लोअर नीचे खिसका दिया और मेरे टाइट लंड को अपनी मुट्ठी में थाम लिया।
उफ्फ, उनका हाथ लगते ही मेरे अंदर का लावा सा फूट जाता है। मेरे लंड ने, पहली बार किसी औरत के हाथों में जाते ही, अपनी अँगड़ाइयाँ तोड़ना शुरू कर दिया था।
मौसी ने एक नज़र मेरे लंड की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ एक क़ातिल स्माइल करते हुए बोली: “उफ्फ, राहुल, कितना प्यारा लंड है तेरा। लगता है अभी तक किसी की चूत का रस नहीं चखा है इसने।”
मैं: “मौसी, मैंने तो अभी तक चूत देखी भी नहीं है!”
मौसी मुस्कराते हुए: “कोई बात नहीं बेटा, पहली चूत तू आज अपनी मौसी की देखेगा…”
मैंने झट से मौसी को बेड की तरफ घुमा कर उन्हें आधा बेड पर बैठा दिया। फिर मौसी की पजामी को कमर से पकड़ कर नीचे तक उतारता गया। मौसी की पैंटी भी मैंने एक झटके में उतार फेंकी। मौसी मेरा उतावलापन देख कर कातिलाना मुस्कान दे रही थी।
मैं पहली बार चूत को इतने करीब से देख कर भावुक हो उठा था। मौसी की दोनों टांगें हवा में फैला कर अपना मुंह चूत के करीब लाकर मैं एक प्यासे कुत्ते की तरह उसकी सुगंध ले रहा था। मौसी ने मेरे सिर पर एक हाथ रखा और हल्की सिसकारी भरते हुए बोली, “राहुल बेटा, अब देख क्या रहा है? कर ले अपनी सारी हसरतें पूरी… लगा दे मेरी चूत पर अपनी मुहर!”
मैं चूत की हल्की खुली फांकों की गुलाबी दरार को देख कर खो सा गया था। वहां से आती भीनी-भीनी सुगंध को और महसूस करने के लिए मैंने अपनी नाक सीधा चूत की फांकों में टिका दी थी। उफ़! वह नरम और गर्म एहसास मुझे पागल कर रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने चूत की दरार पर अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी।
मौसी मेरे सिर के बालों में हाथ फेरते हुए बड़े कामुक तरीके से सिसकारियां भर रही थी। वह अपनी कमर को इधर-उधर चला कर अपनी चूत को मेरे मुंह पर रगड़ रही थी। मैं भी चूत के उस लाल दाने को अपने दांतों और होठों में दबा कर अच्छे से चूस रहा था। मौसी की चूत की फांकों से निकलता रस मुझे बड़ा ही मीठा और नमकीन लग रहा था। जोश-जोश में मैं चूत को बुरी तरह चूस रहा था, जो मौसी को पागल कर रहा था।
मौसी ने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में लेकर नोचते हुए लंबी सिसकारियां भरी, “उफ़्फ़ आह… राहुल, खा जाओ मेरी चूत… उफ़्फ़… लग ही नहीं रहा कि तुम पहली बार किसी औरत की चूत चाट रहे हो। इतना मजा तो कोई मंझा हुआ मर्द ही देता है… आह! सविता बहन, क्या बेटा पैदा किया है तूने… उफ़्फ़, मैं गई!”
मौसी हांपते हुए अपनी कामुक आवाज को दबाए अपनी कमर को तेजी से मेरे मुंह पर रगड़ते हुए झड़ गईं। मैं उनकी चूत को फिर भी लगातार चाटे जा रहा था। जब मौसी की चूत थरथरा कर पूरी तरह निचोड़ गई, तब मैंने अपना मुंह हटाया और एक गहरी सांस लेकर अपनी जीभ होंठों पर फेरी।
झड़ने के बाद मौसी थकान भरी आवाज में बोली, “राहुल बेटा, तूने तो मौसी को खुश ही कर दिया। सोचा नहीं था कि तुम इतने जवान हो गए हो, वरना बाहर मर्द ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ती।”
मैं अपने लंड को हल्की मुठ दे रहा था। मौसी बेड से उतर कर जमीन पर अपने घुटनों के बल बैठ गईं और एक कातिल मुस्कान के साथ मेरा लंड अपने हाथों में ले लिया। मौसी बोली, “उफ़्फ़, बेटा कितना कड़क लंड है तेरा! ऐसे कच्चे-कोरे लंड की प्यास हम औरतों को हमेशा रहती है।”
मैंने मौसी के बालों को पकड़ कर उनके होंठों पर अपना लंड रगड़ते हुए पूछा, “मौसी, घर में ही कोरा लंड था, फिर भी आपने उस आरिफ को अपने नजदीक आने दिया?”
मौसी ने नजरें मिलाते हुए कहा, “राहुल बेटा, यह चूत की आग औरत को मजबूर कर देती है किसी भी मर्द के पास जाने के लिए!”
इतना बोल कर मौसी ने मेरे लंड के लिए अपने होंठ खोले और उसे मुंह के अंदर भर लिया। मेरा लंड आज पहली बार किसी औरत के मुंह की गर्मी को थर्मामीटर की तरह नाप रहा था। मौसी मुंह के अंदर ही अंदर मेरे लंड के अगले हिस्से पर जीभ फेर कर मुझे पागल किए जा रही थी। मैंने अपनी आंखें बंद की तो मुझे मां की आरिफ के साथ वह बेदर्दी वाली चुदाई नज़र आने लगी।
उफ़्फ़, बड़ा ही मीठा आनंद आ रहा था। मौसी लगातार मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। मैं जोश में उनके बालों को नोचता और कभी पूरा लंड उनके मुंह में पेल देता। पूरा लंड मुंह में जाते ही मौसी छटपटा जाती और मेरी जांघों पर अपने नाखून गड़ाने लगती। मैंने गुस्से में अपना लंड उनके गले तक उतार दिया और पूछा, “मौसी, सच बताना, आपने आरिफ के साथ सेक्स भी किया है ना?”
गले में लंड फंसा होने के कारण मौसी सिर्फ ‘हूं हूं हूं’ की आवाज निकाल पाई और आंखें बड़ी करके लंड बाहर निकालने का इशारा किया। जब मैंने अपना लंड मौसी के मुंह से बाहर निकाला तो वह हांफने लगी।
मौसी बोली, “राहुल, वह सब बातें जाने दो ना!”
मैंने फिर कहा, “मौसी, मुझे सब जानना है। आखिर रिसॉर्ट पर चल क्या रहा था? मेरा इतना महंगा हार चोरी हुआ है और मम्मी का जुनैद के साथ वह झगड़ा… आप लोग मुझसे क्या छुपा रहे हो?”
मौसी घबराते हुए और अपनी आंखें नरम करके बोली, “राहुल बेटा, हां मैंने आरिफ जी के साथ चुदाई का मजा लिया है। पर सविता की बात मैं तुम्हें नहीं बता सकती। अगर मैंने तुम्हें कुछ बताया तो मैं अपनी बहन की नज़र में बुरी बन जाऊंगी। इसलिए सारा सच तुम्हें खुद सविता से सुनना होगा! मैं बस इतना कह सकती हूं कि जुनैद अब तक सविता के पैसों पर मौज कर रहा था, और आगे भी करना चाहता है!”
पूरी बात बोल कर मौसी ने मेरे अंडकोष मुंह में भर लिए और उन्हें अच्छे से चूसने लगी, जिससे मेरा गुस्सा ठंडा होने लगा। मौसी ने मेरे लंड को अपने थूक से पूरा चिकना और ठोस बना दिया था। जब मेरा सुपारी वाला हिस्सा फूल कर टमाटर जैसा लाल हो गया, तब मौसी मुस्कुराते हुए बोली, “राहुल बेटा, अब तेरा लंड बिल्कुल तैयार हो गया है। आज तेरी मौसी की चूत खुशनसीब हो जाएगी तेरे इस कोरे लंड से अपनी नथ तुड़वाकर! उफ़्फ़, अब देर ना कर बेटा… डाल दे!”
मौसी बेड के किनारे आधी गांड बेड पर और आधी बाहर करके, टांगें फैलाए अपनी चूत की फांकें खोल कर मुझे ललचाई नजरों से देख रही थी। मैं अपने लंड को हल्का मुठियाते हुए आगे बढ़ा और उसे चूत की गीली फांकों पर रगड़ने लगा। तभी मेरे मन में विचार आया कि अगर मेरे कोरे लंड की नथ मम्मी की चूत में जाकर टूटती, तो कितना अच्छा होता… मां भी खुशनसीब हो जाती।
यह विचार आते ही मैंने मौसी की चूत पर अपना लंड और तेजी से रगड़ना शुरू कर दिया। उनकी चूत किसी भट्टी की तरह तप रही थी और वह लंड के इंतजार में पानी छोड़े जा रही थी। वह बार-बार लंड अंदर डालने के लिए मुझसे गुहार लगा रही थी।
इतने में बाहर से मम्मी की आवाज आई जो मुझे ढूंढ रही थी। उनकी आवाज सुनते ही मेरा लंड बेकाबू हो गया।
तो दोस्तों, इसके आगे क्या हुआ, यह मैं आपको अगले भाग में बताऊंगा। मैं अपने सभी पाठकों से क्षमा चाहता हूं कि काम की व्यस्तता के कारण मैं कहानी के लिए समय नहीं निकाल पा रहा था। उम्मीद करता हूं कि आप मेरी भावनाओं को समझेंगे और आगे की कहानी का आनंद लेंगे।