कम्बल के अंदर माँ की चुदाई (Kambal ke andar maa ki chudai)

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हेलो दोस्तों, मेरा नाम मिलेश है। मेरी उम्र 22 साल है और मैं अभी ग्रेजुएशन कर रहा हूं। मैं दिखने में अच्छी खासी बॉडी वाला लड़का हूं। मैं काफी शर्मीला होने के कारण अभी तक एक भी लड़की नहीं पटा पाया। मैं मुठ मार के ही अपना काम चला रहा हूं।

मेरे घर में मम्मी पापा और एक छोटी बहन है। पापा दुकान संभालते है और मम्मी घर का काम देखती है। बड़ी बहन की शादी हो गई है और छोटी बहन अभी स्कूल जाती है।

मेरी मम्मी का नाम दीप्ती पंडित है। उनकी उम्र 42 साल है और अभी पूरी जवान दिखती है। उनकी बॉडी फिगर 36-30-36 की है, रंग गोरा और बदन भरा हुआ। मम्मी का गदराया हुआ बदन देख कर लोगों के पेंट में तम्बू बन जाते है।

मम्मी ज्यादातर साड़ी ही पहनती है। साड़ी में मम्मी की मोटी गांड और उनकी चूचियाँ मस्त दिखती है। मैं मम्मी के बारे में कभी गलत विचार नहीं रखता था, लेकिन जैसे-जैस बड़ा हुआ, विचार बदलते गये। मैं घर में कई बार मम्मी-पापा को चुदाई करते देखा था। मम्मी जब भी नहाती है, बाथरूम का दरवाजा खोल कर मैं कई बार अचानक पहुंच जाता हूं, और उनकी चूचियों के दर्शन हो जाते है।

मम्मी केवल पेटीकोट में नहाती है। कई बार मम्मी को जांघो में साबुन लगाते समय उनकी चूत की भी झलक ले ली है। जब मम्मी मूतने बैठती है, तब मैं अचानक पहुंच जाता हूं, और मम्मी की चूत के दर्शन हो जाते है। मम्मी भी कुछ नही बोलती थी। ऐसा बिहेव करती की सब नॉर्मल है।

एक बार ठंडी के मौसम में मैं मम्मी को लेकर मौसी के लड़की की शादी में गया था। मौसी की लड़की की शादी गाव में हो रही थी। ठंडी का मौसम था, सोने को घर में कमरे कम थे।

तब एक कमरे में पुआल बिछा कर सभी के सोने की व्यवस्था एक ही जगह कर दी गयी। सभी वहीं सोने गये। लेकिन अभी भी तीन लोगों की व्यवस्था नहीं हो पाई, मैं मम्मी और मौसा। तब मौसा ने बगल के कमरे में इंतजाम किया, और हमें वही सोने को बोल दिये।

सभी लोग आधी रात तक सो गये। अचानक मेरी नींद आधी रात को खुली, मम्मी की पायल और चूड़ी बज रही थी। मम्मी की सांसे भी तेज थी। मुझे ऐसा लगा की हमारे कम्बल में हमारे अलावा कोई और भी था। मैं कम्बल में भीतर हो गया और जानने की कोशिश करने लगा।

तब मुझे पता चला कि मम्मी की चुदाई हो रही थी। मेरे बगल में मौसा लेटे हुए थे और मम्मी को पकड़ के चोद रहे थे। मेरा लंड खड़ा हो गया, मैं अपना पेंट नीचे करके लंड सहलाने लगा। तभी ये दोनों शांत हो गये। फिर मौसा उठ के बाहर चले गये। शायद मौसा झड़ गये थे। वे फिर से मम्मी की चुदाई ना करने लग जाये, इसलिए मैं मम्मी के करीब सट गया।

मम्मी अभी भी कम्बल में थी। उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी। मौसा कमरे में आये और मुझे मम्मी के पास सोता देख बगल में सो गये। मौसा चुदाई के बाद थक के जल्दी सो गये, लेकिन मम्मी अभी जगी हुई थी।

मम्मी ने फुसफुसाते हुए कहा: क्या हुआ जीजू, करो ना?

मम्मी मुझे मौसा समझ रही थी, मैं चुप-चाप लेटा रहा। उन्होंने मेरे लंड को पकड़ के खुद ही अपनी गांड से लगाते हुए, चूत में घुसाने लगी। मम्मी दूसरी तरफ मुंह की हुई थी। उनके पैर आगे-पीछे थे, जिसके चलते उनकी चूत पीछे से खुली हुई थी। मैं अपना लंड उनकी चूत पे लगते ही धक्का मर के घुसा दिया।

मम्मी चीख पड़ी: हाए! इतना मोटा कैसे हो गया आपका लंड जीजू? थोड़ा धीरे करो ना… आअह्ह्ह।

मम्मी मुझे मौसा समझ रही थी। मैं भी अंजान बन कर पीछे से अपना लंड मम्मी की चूत में पेलता रहा। मम्मी मजे से चुद रही थी। उनकी गीली चूत में मेरा लंड अंदर बाहर आराम से हो रहा था। मम्मी की सांसे तेज थी और उनकी मुह से हलकी सिसकारी निकल रही थी।

मम्मी की मुलायम चूचियों को मैं अच्छे से मसल रहा था और उनकी चूत में लगातार लंड पेल रहा था। मैं कभी सोचा भी नही था कि मैं अपनी ही मम्मी की चूत चोदूंगा। मैंने आज तक किसी लड़की से बात तक नहीं की थी। आज पहली बार किसी चूत में मेरा लंड जा रहा था। वो भी अपनी ही मम्मी की चूत में।

उउउउफ्फ्फ्फ़… ये सोच कर मैं और तेज चोदने लगा। मम्मी की सिसकारियां भी थोड़ी तेज हो गयी। मम्मी बड़े मजे से मेरी बाहों में लेटी अपनी चूत में लंड ले रही थी। उन्हें पता ही नहीं था कि वो अपने बेटे के लंड से चुद रही थी। मैं तेज-तेज चोदते हुए, उनकी चूत में गरम लावा उगल दिया। मम्मी भी शायद झड़ गयी थी। हम दोनों बिल्कुल शांत पड़ गये।

मैं मम्मी से अलग हुआ और दूसरी तरफ मुंह करके सो गया। मौसा काफी गहरी नींद में सो रहे थे। मम्मी भी अपनी साड़ी ठीक की और सो गयी।

दूसरे दिन मम्मी बहुत खुश लग रही थी। रात में उनकी चूत की अच्छी मसाज हो गयी थी। मम्मी बहुत ही खूबसूरत लग रही थी, लेकिन उन्हें लगता था कि उनकी चुदाई उनके जीजू ने की थी। शाम हो चुकी थी, हल्दी की रस्म ख़त्म हो गयी थी और सभी अपने-अपने काम में व्यस्त थे। लेकिन मम्मी और मौसा जी नहीं दिख रहे थे। मैं ढूंढते हुए बाहर पहुँचा, मुझे भैस वाले कमरे में कुछ आवाजे आई, मैं छुप कर देखने गया।

दरवाजे से झांका तो देखा कि मौसा जी और मम्मी एक-दूसरे को गहरा किस्स कर रहे थे। मौसा जी का हाथ मम्मी की चूत में था, उंगलियां अंदर-बाहर हो रही थी।

मम्मी ने कहा: कल रात जो आपने मुझे सुख दिया, वो मैंने कभी नहीं पाई।

मौसा: अरे आज तो और ज्यादा दूंगा, बस मजे लो तुम।

मम्मी मेरी चुदाई का श्रेय मौसा जी को दे रही थी।

फिर मौसा जी मम्मी को जोर से किस्स करने लगे। मौसा जी ने तुरंत मम्मी के सारे कपड़े उतार फेंके। साड़ी, ब्रा, पेटीकोट, पैंटी… सब फेंक दिया। मम्मी पूरी नंगी हो गई।

मौसा जी खुद भी तैयार थे। सिर्फ अंडरवियर पहना था। मम्मी ने उसे भी उतारा। मौसा जी का लंड खड़ा और मोटा था। मम्मी ने उसे हाथ में पकड़ा और मुंह में ले लिया।

मम्मी पागलों की तरह चूसने लगी। ग्ग्ग्ग… गोग… गी… गों… गों… की आवाजें कमरे में गूंजने लगी। मौसा जी मम्मी के बाल पकड़ कर उनका मुंह चोद रहे थे।

“आह मेरी रंडी… मेरी लंड की प्यासी साली… आज तेरी चूत फाड़ कर छोडूंगा।”

फिर मौसा जी ने मम्मी को लिटाया। अपना मुंह उनकी चूत पर रखा और जोर-जोर से चाटने लगे। जीभ अंदर-बाहर, चूत की लकीर पर रगड़ते। मम्मी चिल्ला रही थी… “आह्ह… ओह्ह… और जोर से जीजू… चाटो… मेरी चूत चाटो… इह्ह… ओह्ह्ह…”

कुछ मिनट बाद मौसा जी ऊपर चढ़े। लंड चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर पेल दिया।

धप्प… धप्प… धप्प… कमरा चुदाई की आवाजों से भर गया। मम्मी अपनी गांड ऊपर-नीचे करके चुदवा रही थी।
“और जोर से मेरे राजा… चोदो… मेरे भोसड़े को फाड़ दो… आह्ह्ह… ओह्ह्ह… हाय… कितना मोटा है आपका लंड…”

मौसा जी ने मम्मी को लगातार चोदते जा रहे थे। पहले घोड़ी बना कर, फिर मिशनरी में, फिर मम्मी ऊपर आकर सवार होकर। हर बार मम्मी की चूत से रस टपक रहा था।

मम्मी बड़े मजे से चुद रही थी। तभी मौसा जी का माल निकल गया, और वे लुढ़क गये। मम्मी अभी भी लंड लेना चाहती थी।

मम्मी: क्या हुआ जीजू चोदो ना… कल रात कितना अच्छा चोदा था आपने, इतनी जल्दी कैसे झड़ गये आज।

मौसा थोड़ा गुस्सा होते हुए: साली रंडी रात में मैंने इतना ही चोदा था, पता नहीं किसके साथ सपने में चुद रही थी।

फिर वे मम्मी को वैसे ही छोड़ कर चले गये। मैं वहां से हट गया। मम्मी थोड़ी मायूस होकर कपड़े पहन कर आ गयी।
शादी के घर में सभी खुश थे सिवाय मम्मी के। उनकी चूत अभी भी प्यासी थी।

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