Drishyam, ek chudai ki kahani-50

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series जब हवस दिमाग पे हावी हो तो तरिका तौर नहीं होता, बस लण्ड और चूत ही होती है, बाकी कुछ और नहीं होता। लण्ड तगड़ा हो चूत हो राजी दिन रात चुदाई होती है, फिर चूत सूजे या पाँव डुले उस पर कोई … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-49

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series जिंदगी प्यार की दो चार घडी होती है चाहे छोटी भी हो यह उमर बड़ी होती है। कड़ी चुदाई हो तेरी अगर मोहब्बत से आखिरी लम्हें तक वह याद खड़ी होती है। आरती अपने कूल्हे हिला कर अपनी उत्तेजना को सम्हालने की कोशिश … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-48

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series जहां लण्ड और चूत में गर्मी हो वहाँ रस्मोरिवाज का क्या करना? जब प्यार हवस से चुदता है, कोरे अलफ़ाज़ का क्या करना? चूत छोटी सी हो लण्ड बड़ा तगड़ी चुदाई तब होती है लण्ड ठोक रहा नाजुक चूत को चूत हो नासाज़ … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-47

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series पाठक गण, अगर कहानी ठीक लगी हो तो जरूर कमैंट्स लिखे! उस तगड़े मोटे लण्ड से अब आज मुझे चुदवाना है हाय मेरी माँ बचने को चलना नहीं कोई बहाना है। एक बार चुदवा लुंगी तो नशा मुझे हो जाएगा। फिर छोटे मोटे … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-43

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series किसी गैर से चुदवाने का जोश दिमाग में छाया है, मुझे चोदने प्रेमी मेरा आज मेरे घर आया है। एक बालम था अब तक मेरा जिसका लण्ड लिया मैंने, अब इस प्रेमी का लुंगी मैं जो मेरे मन भाया है। ब्याह रचाएगा मुझसे … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-42

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series लण्ड मेरा यह बेकाबू है तेरी सूरत देखि जब से, चूत से मिलने को पागल है वह खड़ा ही रहता है तब से। कैसे उसको मैं शांत करूँ कैसे उसको मैं मनाऊंगा, थोड़ा सा सेहला दोगी तो शायद मैं समझा पाउँगा। इस सारी … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-41

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series बाँहों में नंगी कर के वह जब चोदेगा मुझ पर चढ़ कर, चूत में घुस कर फाड़ेगा जब तब मुझको है मरने का डर। चूत मेरी सुई की आंख सम लण्ड उसका है जैसे अजगर, अगर मुझे मारना ही है तो फिर जो … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-39

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series ना डरना ओ मेरे राही अगर राहों में भटके हो। यदि हो चाह मंजिल की तो रास्ते मिल ही जाते हैं। ना हो मुश्किल जो राहों में सफर का क्या मज़ा साहिल, लगादें जान जो अपनी वही मंजिल को पाते हैं। यदि आपके … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-38

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series कोई क्या जाने दिल की हालत जो परवानों की होती है। ख़ौफ़ मरने का तो है फिरभी जितअरमानों की होती है। परवाने यह जानते हुए भी की वह शमाकी लौ में जल जाने वाले हैं, शमा की आग में कूदने से बाज नहीं … Read more

Drishyam, ek chudai ki kahani-37

This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर, सितारों से आगे यह कैसा जहां है?” आरती की समझ में यह नहीं आ रहा था की मैं और उसका पति अर्जुन उसे कौनसी कामुकता की नयी दुनिया में ले जा रहे थे और वह दुनिया … Read more