पिछला भाग पढ़े:- बाप के अरमान बेटी की आह-1
बाप-बेटी सेक्स कहानी अब आगे-
फिरोज हाशमा को छत पर से जाते हुए उसकी हिलती हुई लचीली गांड को देखता रहा। हाशमा कुछ-कुछ जोहा तौकीर की तरह दिखती है। वो अपनी चोड़ी गांड मटकाती हुई नीचे चली गई। अभी फिरोज के दिमाग में हाशमा की बड़ी चूचियां और गांड ही चल रही थी। और उसका डबल मीनिंग में हर बात का ज़वाब फिरोज को जिस तरह हाशमा ने दिया, उसने फिरोज के लंड और दिमाग को अपनी बेटी की चुदाई की और मोड़ दिया था। अभी ये सब सोचते-सोचते 10 मिनट ही हुए थे, कि फिरोज छत से उठा और वो धीरे से उठ कर हाशमा के कमरे की तरफ बढ़ने लगता है।
अब हाशमा अपने कमरे में बिस्तर पर टाँगे खोल कर लेटी थी। उसका घाघरा जांघो तक था और पैन्टी दिख रही थी। वो अपने फ़ोन में कुछ देख रही थी और फ़ोन की रौशनी से उसका गोरा चेहरा चमक रहा था। तभी उसे पापा की आवाज़ आती है।
फिरोज: क्या कर रही है मेरी बेटी?
पापा की आवाज़ सुन कर हाशमा खुश हो जाती है। और वो भी शरारती मुस्कुराते हुए जवाब देती है-
हाशमा: कुछ नहीं बस ऐसे ही लेट कर फ़ोन के साथ वक़्त बिता रही हूँ।
फिरोज चलते हुए हाशमा के पास आकर बैठ जाता है। हिम्मत और हवस में अपने हाथों से वो हाशमा की जाँघों को सहलाने लगते है। जिससे हाशमा को समझने में देर नहीं लगती वो भी ये सब ही चाहती थी। फिरोज अब धीरे-धीरे से अपने हाथ हाशमा की जांघो पर फिसलते हुए जाँघों की जड़ों तक चले जाते है और हाशमा की पैन्टी को छूने लगते है। और बोलता है-
फिरोज: हाशिया बेटी पापा का बड़ा मन करता है।
हाशमा: क्या मन करता है?
फिरोज: अपनी हाशमा बिटिया को खूब प्यार करूं।
हाशमा: मन तो मेरा भी बहुत करता है कि आप मुझे दिन-रात प्यार करें पापा।
अब फिरोज फिर से डबल मीनिंग में बोला-
फिरोज: पर बेटी मेरा प्यार बहुत बड़ा है और तुझे देख कर तो मेरा प्यार और भी बड़ा हो जाता है।
हाशमा: सच पापा?
फिरोज: हां बेटी (तभी उत्तेजना में फिरोज हाशमा का हाथ पकड़ कर अपनी धोती में घुसा देते है और अपना मोटा लंड उसके हाथ में दे देते है)। देख कितना बड़ा है तेरे पापा का प्यार।
हाशमा बड़ी-बड़ी आँखों से पापा को देखने लगती है और पापा के लंड की मोटाई को अपने हाथों से महसूस करने लगती है। हाशमा को ऐसा लगता है कि किसी ने उसके हाथों में लम्बा और मोटा डंडा पकड़ा दिया हो। वो सीसीसी करते हुए आश्चर्य से अपने पापा से कहती है।
हाशमा: पापा यह तो बहुत लम्बा और मोटा है।
फिरोज: हां हाशमा और जब मेरी बिटिया रानी घर में बिना ब्रा के अपने बड़े-बड़े दूध उठा के घुमती है तो ये और भी बड़ा हो जाता है।
हाशमा: सच पापा?
फिरोज: हां बहुत लगता है फट जायेगा।
ये कहते ही फिरोज हाशमा के सूट में एक हाथ डाल देता है और उसके दूध को मसलने लगता है। पापा की इस हरकत से हाशमा भी जोश में आ जाती है और लंड को जोर से दबा देती है। फिरोज का लंड फूल के और भी मोटा हो जाता है।
हाशमा: पापा आप मेरे दूध मसलते है तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… आहहह पपपपा।
फिरोज: जानता हूँ बेटी। जवान लड़कियों को अपने दूध मसलवाना बहुत पसंद है, ख़ास कर अपने पापा से।
हाशिया: सच कहा पापा (हाशमा अब गर्म होने लगी थी)।
उधर फिरोज भी अपनी बेटी के मुलायम हाथों से उसके लौड़े को पकड़ने और भींचने से पूरे जोश में था।
फिरोज: बेटी तूने देखा होगा कि बहुत सी लड़कियों के छोटी उम्र में ही बड़े-बड़े दूध हो जाते है। ऐसी लडकियां अपने पापा से ही तो दबवा के अपने दूध बड़े करवाती है।
हाशमा (बड़ी-बड़ी आँखों से): हां पापा… मेरी सहेली की दीदी के भी बहुत बड़े दूध थे। मेरी सहेली बोल रही थी कि जब उसकी मम्मी घर पर नहीं होती थी, तो पापा दीदी के रूम में चले जाते थे और दरवाज़ा बंद करके घंटो तक रहते थे।
फिरोज: सही कहा बेटी… तेरी सहेली के पापा अपनी बड़ी बेटी के दूध को घंटो मसलते होंगे। और मुझे तो ये भी लगता है की उसके पापा उसकी दीदी पर चढ़ के भी प्यार करते होंगे।
पापा की इस बात पर हाशमा शर्मा जाती है। फिर धीरे-धीरे पापा के लंड को सहलाते हुए कहती है-
हाशमा: पापा क्या सच में बाप अपनी बेटी पर चढ़ के प्यार कर सकता है?
फिरोज (अब पैन्टी की साइड से अन्दर हाथ डाल कर उसके चूत के बालों से खेलने लगता है): हां बेटी, बाप अपनी बेटियों पर चढ़ के खूब प्यार करते है।
हाशमा (पूरी मस्ती में): ओह पापा बहुत गर्मी लग रही है।
फिरोज: मेरी बेटी तो पहले से ही बहुत गरम है। गर्मी तो लगेगी ही…
फिरोज हाशमा के माथे, गले और पेट पर बहते पसीने को हाथ से पोंछता है। तभी फिरोज हाशमा की पैन्टी से हाथ निकाल कर, दोनों हाथों से उसका सूट उठा कर, दोनों दूध के ऊपर कर देता है। हाशमा के बड़े-बड़े सख्त और गोरे दूध पापा की आँखों के सामने आ जाते है। वो दोनों दूध को गौर से देखता है। दोनों हाथों से पकड़ के आपस में मिला देता है।
फिरोज अपना एक पैर बिस्तर पर रखता है और दूसरे पैर को घुटनों से मोड़ कर हाशमा पर झुक जाता है। फिरोज का लंड हाशमा के हाथ में है और वो उसे जोर-जोर से हिला रही है। फिरोज झुक कर एक निप्पल मुह में ले लेता है। हाशमा लंड मुठियाते हुए मचल जाती है। फिरोज हाशमा के गुलाबी निप्पल को मुंह में भर के चूसने लगता है। हाशमा का दूसरा हाथ पापा के सर पर आ जाता है और वो उनके बालों को पकड़ लेती है।
फिरोज निप्पल चूसते हुए बीच-बीच में अपना बड़ा मुंह पूरा खोल कर दूध को मुंह में भर लेता है। कुछ देर चूसने के बाद फिरोज हाशमा के दूसरे दूध पर धावा बोल देता है। दूसरे दूध के निप्पल को जोर-जोर से चूसने से हाशमा सिस्कारियां लेने लगती है।
हाशमा: हां पापा। ऐसे ही से ही मेरा दूध पीजिये पापा।
हाशमा को ऐसे मस्ती में आता हुआ देख कर फिरोज का जोश दुगना हो जाता है। वो उसके दूध को दबा-दबा के पीने लगता है और एक हाथ से अपने लंड की चमड़ी पूरी नीचे कर देता है। तभी फिरोज अपनी बेटी के निप्पल को हलके से दांतों से काट लेता है हाशमा उछल कर फिरोज से लिपट जाती है।
फिरोज हाशमा को उठा के अपने सीने से लगा लेता है तो वो अपनी दोनों टाँगे फिरोज की कमर में लपेट कर सीने से चिपक जाती है। फिरोज का लंड हाशमा की पैन्टी के ऊपर से उसकी चूत पर रगड़ खाने लगता है। चूत की गरमी और हाशमा के बड़े-बड़े दूध फिरोज के सीना पर चिपके हुए थे। बेटी के बड़े और मुलायम दूध के स्पर्श से ही फिरोज का लंड झटके खाते हुए हाशमा की चूत से टकराने लगता है।
फिरोज: अच्छा लगा रहा है बेटी?
हाशमा: हां पापा…बहुत अच्छा लग रहा है।
हाशमा अपने सीने को ऊपर नीचे करते हुए बड़े-बड़े दूध को पापा की छाती पर रगड़ने लगती है। फिरोज का जोश अब और बढ़ जाता है। वो एक ऊँगली मुंह में लेता है और पीछे से हाशमा की पैन्टी में डाल कर उसके दोनों बड़े गांड के पट को खोलते हुए उसके छोटे से गांड के छेद में घुसाने लगता है। हाशमा उछल कर पापा से फिर से चिपक जाती है।
फिरोज ऊँगली नीचे ले जा कर उसकी गीली चूत पर 4-5 बार रगड़ता है और फिर उसके गांड के छेद में घुसाने लगता है। चूत के रस से भीगी ऊँगली हाशमा के छेद में घुस जाती है। फिरोज थोड़ा और जोर लगता है तो ऊँगली आधी अन्दर घुस जाती है। अपनी गांड में पापा की ऊँगली को महसूस कर के हाशमा मस्ती में आ जाती है। चूत से तो वो कई बार खेल और चुदाई भी कर चुकी थी, लेकिन गांड के छेद में आज पहली बार कोई ऊँगली गई थी।
हाशमा को अपने सीने से लगाये कभी अपनी ऊँगली गांड के अन्दर-बाहर कर देते, तो कभी लंड को हाशमा की चूत पर रगड़ देते तो वो अपना होश पहले ही खो बैठी थी। फिरोज अब मौका देख कर अपने लंड को पैन्टी के साइड से अन्दर डाल के हाशमा की चूत पर रखता है और धीरे-धीरे टोपे को उसकी चूत पर रगड़ने लगता है। हर बार लंड रगड़ने पर हाशमा किसी बच्चे की तरह उछल जाती। तभी एक तेज फोन की रिंग से सारा कमरा गूंज उठता है। दोनों बाप-बेटी मिलन के बहुत करीब थे पर किस्मत को कुछ और मंजूर था।
हाशमा आँखे खोलती है तो कमरे का दरवाज़ा पर कोई ठोक रहा था। वो झट से पापा की गोद से उतर जाती है और अपना सूट नीचे कर लेती है। फिरोज भी अपने कुर्ते और धोती को ठीक करता है। हाशमा अपने बाल ठीक करते हुए फिरोज के ऊपर से उतर जाती है। आज पापा के साथ जो कुछ ही हुआ उसने हाशमा की चूत की आग को कहीं ज्यादा भड़का दिया था। कुछ ही क्षण में दोनों होश में आते ही और एक-दूसरे को देख मुस्कुराने लगते है।
फिरोज: मजा आया मेरी बेटी को?
हाशमा (नखरे दिखाते हुए): पापा…!!
तभी बाहर से मोहन की आवाज आती है। जिससे फिरोज की जान-पहचान कुछ दिन पहले ही खेतों पर हुई थी। मोहन भी 48 साल का एक हट्टा-कट्टा मर्द था, जो खेतों में काम करने की वज़ह से फिरोज से ज्यादा कसरती बदन का मालिक था। जिसका लंड 9 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा था। वो गांव की कितनी औरतों को चोद चुका था। आज भी उसने फिरोज हाशमा को सब करतें हुए देख लिया था और उसे अपने मोबाइल में कैद भी कर लिया था।
मोहन को हाशमा की जवानी और बड़ी चूचियां गुलाबी निप्पल और बड़ी गांड व चूत से बहता हुआ पानी पसंद आ गए थे। अब वो भी उसे चोदना चाहता था। पर उसे ये नहीं पता था ये बाप-बेटी का पहला मिलन था। मोहन ने फिरोज को चोदने नहीं दिया ताकि फिरोज थोड़ा जोश में रहें और मोहन उसकी बेटी को चोदने को बोल सके।
मोहन: जल्दी आजा फिरोज खाद लाने में देरी हो जायेंगी।
फिरोज: आया 2 मिनट।
फिर फिर हाशमा को देखते हुए अपने लंड को धोती में करते हुए बोला।
फिरोज: बेटी पापा शाम को आकर अच्छे से प्यार करेंगे।
आगे की कहानी अगले पार्ट में।