हैलो दोस्तों, कैसे हों आप सब? आज जो स्टोरी मैं आपको बता रहा हूं, वो मुझे किसी ने भेजी थी। जो उसकी एक सच्ची कहानी है।
एक 50 साल के व्यक्ति जिसका नाम फिरोज है। फिरोज एक 6 फीट का हट्टा-कट्टा तंदरुस्त मर्द है। जिसका गठीला बदन और 8 इंच का मजबूत लंड है। उसकी एकलौती बेटी हाशमा जो 21 साल की एक 5.3 इंच लंबी, गोरा रंग, कसा हुआ बदन, चूची एक-दम उभरी हुई। जो अब उसकी उम्र से काफी बड़ी हो गयी थी और गांड चोड़ाई में थोड़ा फ़ैल गई थी। बिल्कुल एक औरत की तरह।
हाशमा करीब एक साल पहले कालेज के एक पुराने कमरे में एक बार अपने ब्वायफ्रेंड रौनक से चुद चुकी थी। जिसका लंड 4-5 इंच लम्बा और 2 इंच मोटा होगा। उसका ब्वायफ्रेंड 5 मिनट ही उसे चोद पाया। उसकी टाईट चूत की गर्मी और उसके गोरे हुस्न को वो संभाल नहीं सका।
दोनों बाप बेटी एक-दूसरे के साथ मजे से अभी 3 महीने पहले एक गांव में आकर बसे थे। और यहां उन्होंने गांव के बाहर एक घर बनाया और जगह लेकर रहते थे। अभी गांव में उन्हें कोई नहीं जानता था। वो खुद किसी से मतलब नहीं रखते और उनके घर के चारों तरफ खेत थे।
उसकी पत्नी और बेटे की कार ऐक्सिडेंट में मौत हुई थी, जो 6 महीने पहले हुई थी। जिससे वो शहर की भीड़-भाड़ से उब कर, सब बेच कर यहां दूर एक गांव में आकर बस गया था। और यहां कुछ खेत भी लिए जिसमें वो खेती-बाड़ी करके अच्छी कमाई भी कर लें। उसको यहां रहते हुए अभी 2 महीने ही हुए थे कि एक बार कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल कर रख दिया।
एक बार फिरोज बस धोती में छत पर कसरत करके बैठा अपनी बीवी और उसकी चुदाई के बारे में सोच रहा था। इससे उसका लंड धोती में पूरा खड़ा हुआ था। चुदाई के बारे में सोच-सोच कर उसका 8 इंच का लंड बेचैन हो रहा था।
तभी सीढ़ियों पर क़दमों की आहट सुनाई देती है। फिरोज दरवाज़े पर नज़रे गड़ाये खड़े हो जाता है। तभी हाशमा एक हाथ में चाय का प्याला और दूसरे हाथ में कपड़ो से भरी बाल्टी लेकर दरवाज़े से छत पर आती है। फिरोज की नज़र सीधे हाशमा की बड़ी बड़ी चूचियों पर जाती है जो टाइट टॉप में कसी हुई है। हाशमा अपने अब्बू की धोती में खड़े लंड को देख कर और उसकी नज़र को अपनी चूचियों पर भांप लेती है। उसके अब्बू उसे किस तरह से घूर रहे थे। तभी फिरोज का लंड धोती में एक झटका खाता है।
फिरोज: आ गई मेरी हाशी!
हाशमा: जी अब्बू।
फिरोज: ला ये बाल्टी मुझे दे (हाशमा के हाथ से बाल्टी लेते हुए)। कहां रखूँ इसे हाशी?
हाशमा: यहां रख दीजिये। खटिया के पास। मैं यहीं से कपड़े निचोड़ के सूखने डाल दूंगी।
फिरोज: ठीक है बेटी।
फिरोज बाल्टी उठा के खटिया के पास रख देता है। हाशमा चाय का प्याला लिए खड़ी थी। फिरोज उसे देखते है और मुस्कुराते हुए खटिये पर बैठ जाते है।
फिरोज: ला चाय देदे।
हाशमा धीरे-धीरे चल के अब्बू के पास आती है। हाथ बढ़ा के चाय का प्याला देते हुए वो आगे झुक जाती है।
हाशमा: लीजिये, आपकी चाय।
हाशमा के झुकते ही फिरोज की आँखों के सामने टॉप के बड़े गले से उसकी आधी चूचियां दिखने लगती है। बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच की गहराई देख कर फिरोज की हालत फिर से ख़राब हो जाती है। वो एक तक उस गहराई को घूरे जा रहा था तभी उसके कानों में हाशमा की आवाज़ पड़ती है।
हाशमा: कहां खो गए अब्बू, चाय लीजिये ना?
फिरोज (हड़बड़ाते हुए): अ… आ… कहीं नहीं हाशी। ला चाय दे मुझे।
चाय देकर हाशमा खड़ी हो जाती है। फिरोज चाय लेकर एक चुस्की लेते है।
फिरोज: वाह हाशमा, चाय को तेरे हाथ लगते ही इसका स्वाद और उम्दा हो गया।
हाशमा (अपने हाथ के साथ रूमाल को घुमाते हुए कहती है): थैंक्यू अब्बू। अब आपको अपने हाथों से बनी चाय पिलाउंगी रोज।
फिरोज: हां हाशी। मेरा भी दिल करता है की मैं तेरे हाथ की चाय पीता रहूं।
तभी हाशमा जान बूझ के अपने हाथ का रुमाल गिरा देती है। शायद उसे भी अपने बाप का लंड पसंद आ गया होगा।
हाशमा: मैं आपको स्पेशल चाय पिलाउंगी अब्बू। (रुमाल उठाने के लिए झुकती है। उसकी आधी नंगी चूचियां अब्बू की आँखों के सामने फिर से आ जाती है) डबल दूध वाली।
सामने का नज़ारा देख के फिरोज का लंड धोती के अन्दर झटके लेते हुए लार की 2-3 बूंदें टपका देता है। हाशमा की आधी नंगी गोरी और बड़ी चूचियां और उसके मुँह से डबल दूध वाली चाय की बात सुन कर फिरोज के होश उड़ जाते है। वो कुछ सोच कर कहते है।
फिरोज: हाशमा तुझे तो पता है बेटी। मैं बाज़ार के पैकेट वाला दूध नहीं पीता हूँ। मुझे तो घर की गाय का दूध ही पसंद है।
फिरोज की बात सुन के हाशमा मन ही मन मुस्कुरा देती है। बाप बेटी को कोई देखने सुनने वाला कोई नहीं था, इसलिए अपनी हवस में डबल मीनिंग बातें करते हुए। फिर कुछ सोच के कहती है।
हाशमा: लेकिन अब्बू। घर की गाय तो अभी इतना दूध नहीं देती है।
फिरोज खड़े होते है और हाशमा के सर पर हाथ फेरते हुए कहते है।
फिरोज (हाशमा के सर पर हाथ फेरते हुए): जानता हूँ बेटी। घर की गाय अभी इतना दूध नहीं देती। लेकिन अब ज्यादा दूध देने लायक तो हो गई हैं ना। तुझे तो पता है कि अब्बू ने उसकी कितनी देख-भाल की है। कुछ दिन अब्बू के हाथ का चारा खाएगी तो हो सकता है कि ज्यादा दूध भी देने लग जाए।
फिरोज की बातें सुन के हाशमा के जिस्म के आग लग जाती है। उसका रोम-रोम उस आग में जलने लगता है। रौनक ने पहले ही हाशमा के लाज-शर्म के कपड़े उतार दिये थे। अब्बू की इस बात ने उसकी थोड़ी बहुत बची हुई लाज-शर्म को जैसे छू-मंतर कर दिया। अब हाशमा अब्बू के सामने एक ऐसी लड़की की तरह थी जो कपड़े पहन के भी पूरी नंगी हो।
हाशमा और फिरोज की नज़रें आपस में मिलती है। दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे की आँखों में देखते रहते है मानो एक-दूसरे का हाल समझने की कोशिश कर रहे हो। तभी हाशमा अपने होंठों को काटते हुए कहती है।
हाशमा: अच्छा अब्बू ,अब मैं कपड़े डालने जाती हूँ।
फिरोज: हां बेटी, ठीक है।
हाशमा घूम कर अपनी चौड़े चूतड़ हिलाते हुए जाने लगती है। फिरोज हिलते चूतड़ों को देखते हुए अपने लंड को धोती के ऊपर से एक बार जोर से मसल देता है। हाशमा कपड़ो की बाल्टी के पास पेशाब करने के अंदाज़ में बैठ जाती है। फिरोज ठीक उसके सामने खटिया पर बैठ जाता है।
हाशमा अब अपने अब्बू को उकसाते हुए बाल्टी से एक कपड़ा निकालती है और दोनों हाथों से जोर-जोर से रगड़ने लगती है। हाशमा की बड़ी-बड़ी चूचियां हिलने लगती है। चूचियों के बीच की खाई, चुचियों के हिलने से कभी छोटी तो कभी लम्बी होने लगती है। बीच-बीच में हाशमा और फिरोज की नज़रे मिलती है तो दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे की आँखों में घूरते ही रह जाते है।
नज़रें हटते ही हाशमा की चूचियों का हिलना और तेज़ हो जाता है। हाशमा 3-4 कपड़ों को रगड़ के बाल्टी को दूसरी तरफ रख देती है। अब अचानक फिरोज उठ के छत पर चलते हुए वो हाशमा के पास आता है और अपनी धोती को हाथों से जांघो तक चढ़ा के हाशमा के सामने पेशाब करने के अंदाज़ में बैठ जाता है।
फिरोज के नीचे बैठते ही उसकी नज़रे हाशमा की नज़रों से मिलती है। फिरोज की आँखों में देखते हुए हाशमा अपने होंठों को दाँतों से काट लेती है। अब हाशमा के हाथ में एक कपड़ा है। फिरोज उस कपड़े की और ऊँगली से इशारा करते हुए कहता है।
फिरोज (हाशमा को देखते हुए): हाशी।लगता है इस कपड़े पर चाय गिर गई थी। ठीक से साफ़ नहीं हुआ।
हाशमा (कपड़े पर उस धब्बे को देखती है): हां अब्बू। ये तो वाशिंग मशीन में भी साफ़ नहीं हुआ। लगता है मुझे ही इसे अच्छे से इसे साफ़ करना पड़ेगा।
ये कह कर हाशमा उस कपड़े को ज़मीन पर फैला देती है और घोड़ी के अंदाज़ में एक हाथ से कपड़े के एक कोने को दबा देती है। वो घोड़ी बन के सामने झुकती है तो हाशमा की बड़ी-बड़ी चूचियां फिरोज की नजरो के ठीक सामने आ जाती है। घोड़ी बन के झुकने से अब टॉप के बड़े गले से चूचियां आधे से ज्यादा दिखने लगी है।
चूचियों के बीच की गहराई अब सीध में दिखने लगी है। वो एक बार अब्बू की आँखों में देखती है और फिर नज़रे कपड़े पर डाले जोर-जोर से रगड़ने लगती है। फिरोज हाशमा की जोर-जोर से हिलती चूचियां दखते है। गौर करता है तो देखते है की हाशमा के हाथों की गति धीमी है और चूचियों के हिलने की गति ज्यादा।
ये देख कर फिरोज के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। उसे भनक लग गई थी कि उसकी बेटी गर्म होने लगी थी। वो कुछ देर वैसे ही हिलती बड़ी-बड़ी चूचियों का मज़ा लेते है फिर हाशमा को देख कर कहते है।
फिरोज: बेटी लगता है ये दाग नहीं निकलेगा। देखो तो तुम्हें कितना पसीना आ गया है। पूरी टॉप भीग गई है।
हाशमा: हां अब्बू। लगता है ये दाग नहीं निकलेगा।
वो खड़ी हो कर अपने माथे का पसीना पोंछती है। फिर दोनों हाथो को उठा के अपने बालों को पीछे ले जा कर बाँधने लगती है। फिरोज की नज़र हाशमा की बगलों पर पड़ती है। टॉप की छोटी बांहों से बगल के हलके काले रेशमी बाल दिख रहे है और नीचे पसीने से गीला धब्बा। ये नज़ारा देख के फिरोज का लंड और सक्त हो जाता है। वो हाशमा के पास जाता है। नज़रें बगलों पर थी। हाशमा को समझने में देर नहीं लगती की अब्बू की नज़रें कहां थी। वो वैसे ही हाथो से बालों को ठीक करते हुए खड़ी थी।
रमेश अपनी नाक हाशिया की बाएं बगल की तरफ ले जाता है। और हाशमा भी अपना हाथ और ऊपर उठा देती है।
फिरोज: हम्म! खुशबू तो अच्छी है।
हाशमा: क्या अब्बू (शायद उसे लगा अब उसके अब्बू यही उसे चोदना शुरू कर दें तो)।
वो दोनों एक बार एक-दूसरे को देख के मुस्कुरा देते है। और हाशमा बाल्टी उठा के जाने लगती है। फिरोज पीछे से उसकी चूतड़ को देखते हुए लंड मसलने लगता है।तभी हाशमा पीछे मुड़ कर अपने अब्बू की इस हरकत को देख लेती है।
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