पिछला भाग पढ़े:- मैं, मां और ट्रेन का सफर-4
मां-बेटा सेक्स स्टोरी अब आगे-
जब मुझे मम्मी का साथ मिला तो मैं भी मम्मी की चूचियों को जोर-जोर से दबा कर उनके होंठों को जबरदस्त तरीके से चूसना शुरू कर दिया। ऐसे ही 2 मिनट हम एक-दूसरे में ऐसे खो गये जैसे नया प्रेमी जोड़े की पहली सुहागरात हो। कुछ देर बाद मैंने किस्स तोड़ा और उनके माथे को फिर से चूम कर पीछे लेटते हुए उनका चेहरा अपने हाथों में लेकर लंड की तरफ दबाया।
मम्मी मेरा इशारा समझ गयी थी। इसलिए वो मेरे लंड को कुछ देर देखने के बाद फिर मेरी तरफ प्यार से देखते हुए लंड के आगे के टोपे पर जीभ फेरने लगी। मुझे अपनी तरफ देखते हुए बोली-
मां: बेटा अजीब लग रहा है। मुझसे नहीं होगा।
मैं: मम्मी आप मुझसे प्यार करती हो ना?
मां: मेरी तरफ प्यार से देखते हुए नज़रें झुका ली।
फिर मैं उन्हें समझाते हुए बोला-
मैं: मम्मी ऐसे लंड पर जीभ नहीं फेरों। इसे अपने मुंह में लो और कुल्फी की तरह चूसते हुए उपर-नीचे करो।
मां ( मेरी तरफ देखते हुए): तेरा ये है भी तो बहुत मोटा और लम्बा है। मुंह में आयेगा कैसे?
मैं (हंसते हुए बोला): जैसे आपकी चूत में आया था।
और फिर मैंने हल्के से उनके सर को अपने लंड पर दबाव बनाया। मम्मी ने थोडा मुंह खोला और धीरे-धीरे मेरे लंड को तीन से चार इंच मुंह में ले गयी। मैंने अआआआहह मम्मी की आवाज़ करते हुए उनका सर वहीं रखा ताकि मम्मी लंड मुंह से निकाल ना दे और मम्मी से बोला-
मैं: हां अआआआहह मम्मी, ऐसे ही अब इसे कुल्फी की तरह चूसो और जहां तक हो इसे मुंह में लेकर चूसो।
मम्मी अब अपना सर उपर-नीचे करने लगी। मेरी मुंह से अआआआहह हां मम्मी ऐसे ही निकल रहा थी। मेरे लंड पर मम्मी के मुंह की गर्मी इस तरह से लग रही थी जैसे किसी भट्टी में लंड डाल दिया हो। मैं मम्मी को और मम्मी लंड चूसते हुए मुझे अपनी आंखें ऊपर करके देखते हुए लंड चूस रही थी।
करीब एक या दो मिनट में ही मम्मी के मुंह से निकले स्लाइवा की वजह से मेरा पूरा लंड गीला होने लगा। पच पच पच की आवाजे आने लगी। पर मम्मी अभी भी मेरा लंड चूसे जा रही थी। अब वो खुद से ही लंड को 4-5 इंच तक उनके मुंह में लेकर चूसने लगी थी। और मेरा लंड पहले से ज्यादा बड़ा होकर लोहे की रॉड की तरह सख्त और चमकदार हो गया था।
मैं कूप की सीट पर बैठा था और मम्मी अभी भी नीचे बैठ कर मेरा लंड थोड़ा 4-5 इंच ही मुंह में लेकर चूस रही थी। मुझे मम्मी के लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और मैं लगातार उनके सर पर हाथ से सहलाते हुए। अआआआहह मममममीम मजा आ रहा है थोड़ा और अन्दर लो अआआहहह। मम्मी बार-बार लंड चूसते हुए मुझे देख रही थी।
उनके लंड चूसते हुए मुझे इस तरह देखने से पता नहीं मुझको क्या हुआ। मुझे अआआआहह मममममी करते हुए तभी मुझे एक जोश सा चढ़ा और मैंने ऐसे ही मम्मी को अपना लंड चुसाते हुए खड़ा होकर मम्मी के सर को दोनों तरफ से पकड़ा और उनके मुंह में हलक तक अपना लंड डाल दिया।
मम्मी ममम ममम करने लगी पर मैंने लंड उनके मुंह से बाहर नहीं निकाला तो वो उममम उममम करते हुए पीछे को गिर कर अपनी गांड पर बैठ गई। अब उनके गले में मेरा लगभग 7 इंच लंड था। मैंने जैसे ही आगे-पीछे किया तभी मम्मी ने अपना मुंह मेरे लंड से हटाया और मेरी जांघों पर दो थप्पड़ मारते हुए बोली-
मम्मी: कमीनें, जानवर, मुझे मारना चाहता है क्या (अपने गले पर हाथ फेरते हुए खांसने लगी)?
मैं: नहीं, साॅरी मम्मी आपके मुंह की गर्मी से मुझे इतना मज़ा आया कि मैं ये सब कर बैठा।
मम्मी (थोड़ा गुस्से में): तूं होश में रह कर ये कर। मैं कोई बाज़ारू थोड़ी हूं जो तुम अपने पैसे वसूलने में लगे हो। जानवर!
मैं: आपने सिर्फ आज के लिए बोला ना तो इस वज़ह से बस।
मम्मी: तो इसका मतलब तुम अपनी मां के साथ इस तरह से करोगे?
मैं: सारी मम्मी अब नहीं करूंगा।
और फिर मैं सीट से उठा और उनको कंधे से पकड़ कर नीचे से उठाते हुए कूप की सीट पर बैठा दिया। फिर उनको पीछे की तरफ लिटा कर उनको कूप की दीवार से लगा दिया बिल्कुल कुर्सी के जैसे। फिर उनके पैरों को फैला कर मोड़ दिया।
अब मैं उनकी चूत पर एक-दम से मुंह लगा कर चूत जोर-जोर से चाटने लगा। मम्मी एक दम से अआआहहह रूकककक क्या कर रहा है, मत कर, बोलने लगी और अपनी आंखें बंद करके अआआह मममां अआआआहह बेटटटा करने लगी। अभी 2 मिनट ही हुए थे मां की चूत को चूसते और चाटते हुए, कि मैं मम्मी की चूत के दाने को अपनी जीभ से चाटते हुए ही उनके बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगा। इससे वो और ज्यादा गर्म होने लगी और अपने हाथों से मेरे बाल सहलाते हुए बोली-
मम्मी: अआआहहह मेरा प्यारा बेटटटा अहहह रूकककनना नननहही अआआहहह।
मैं मां के बड़े-बड़े दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था जिसके कारण मां की दोनों चूचियां फूल कर सीधी खड़ी हो गयी थी, जैसे जवान नयी शादी-शुदा महिला की। मां लगातार आंखें बंद किये हुए थी बस।
मां:अआआआहह बेटटटा क्ययययाआ कर रहा है। इतना मज़ा कभी नहीं मिला मुझे।
मैं मां की चूत चाटने के साथ-साथ उनकी चूत में ऊंगली डाल कर आगे-पीछे करने लगा। मुझे अभी 2 मिनट ही हुए मां की चूत चाटते हुए कि मां अहहह अआआहहह बेटटटा अआआहहह की आवाजों के साथ मेरे सर को अपनी चूत पर और तेजी से दबाव बढ़ाने लगी। वो तेज़ बेटा अआआह करके मेरा मुंह अपनी चिकनी चूत में दबाने लगी।
मैं भी उनकी चूत को चाटते हुए कभी चूचियां दबाता तो कभी उनकी चूत में ऊंगली करने लगता। कुछ देर बाद मम्मी जब और तेज अआआहहह बेटा करते हुए ऊपर को मुंह करके सांसें लेने लगी। तो मैं तुरंत समझ गया अब मम्मी अपना पानी छोड़ने वाली थी। मैं अपना मुंह उनकी चूत से हटाते हुए एक-दम से खड़ा हुआ और अपना लंड सहलाते हुए मां को देख कर उन्हें निहारने लगा।
उनका गठीला बदन प्यारे और गुलाबी होंठ, बड़ी और एक-दम गोरी गांड और बड़ी-बड़ी चूचियां जो मेरे हाथों के मसलने से एक-दम 26 साल की लड़कियों की तरह हो गयी थी, ये सब मुझे पागल कर रहा था। मैंने उनकी चूत इसलिए चाटनी बंद की, ताकि वो और एक-दो बार झड़ने के बाद मुझे चोदने को मना करती और मेरा टेबलेट की वजह से जल्दी निकलता नहीं। अब मैं सिर्फ़ मम्मी को किस पोजिशन में चोदना है वो सोच रहा था।
तभी 1 मिनट बाद मम्मी ने आंखें खोल कर बिना कुछ बोले मेरी तरफ सवालिया निगाहों से देखा जैसे पूछ रही हो, “बेटा तुमने मेरी चूत को क्यों चाटना बंद किया?” तभी मां को छेड़ते हुए मैंने पूछा-
मैं: क्या हुआ मम्मी? आपको मज़ा आया?
मम्मी कुछ नहीं बोली और नीचे मुंह करके मेरे लंड को देखने लगी। मैं फिर बोला-
मैं: बोलों (वो फिर कुछ नहीं बोली। मैं फिर बोला)?
मैंने कहा: अच्छा अब मुझे आपको चोदना है। तो मेरे लंड को थोड़ा चूस कर गीला करो।
और उनको अपने हाथों से सहारा देकर कूप की सीट पर सीधा बैठा दिया और मैं अपना लंड उनके होंठों पर फिराने लगा। पर मां ने अभी मुंह नहीं खोला। तब उनके सर पर दबाव देते हुए बोला।
मैं: मम्मी मुंह खोलो ना और चूसो।
मां (मेरी और देख कर): मेरा मन खराब होता है और फिर तू ज्यादा अन्दर भी कर देता है।
मैं: अब ज्यादा अन्दर नहीं करूंगा, जितना हो सके आप कर लेना और मां बस थोड़ा सा चूस दो प्लीज़।
मां मेरे लंड की और देखते हुए उसको पकड़ा और धीरे-धीरे करके 4-5 इंच अन्दर लेकर चूसने लगी। मैंने उनके सर पर थोड़ा दबाव देकर अपना लंड 7 इंच तक उनके मुंह में उतार कर उसको आगे-पीछे करके 6-7 धक्के लगाये ही थे, कि मम्मी ने जोर देकर अपना मुंह निकाल लिया। वो खांसने लगी मेरा लंड उनकी थूक से पूरी तरह चिकना हो गया था। मुझे थोड़ा मम्मी पर गुस्सा भी आया जो मैं अब उनकी चुदाई पर निकालने वाला था। तभी मेरे दिमाग में उनको जबरदस्त तरीके से चोदने की एक पोजिशन सूझी। मैंने तभी मां का हाथ पकड़ कर उनको सीट से खड़ा किया।
बाक़ी अगले पार्ट में बताता हूं। आपके ईमेल और कमेन्ट ज्यादा हुए तो अगला पार्ट जल्दी आ जायेगा। आगे कैसे मैंने मम्मी को चोदा, और किस पोजिशन में उन्होंने क्यों मेरे हाथ जोड़ कर विनती की, और मैंने क्या शर्त रखी, ये सब बताऊंगा। आप मेल करें।
अगर किसी को परिवार चुदाई में सहायता चाहिए या कुछ अपनी कहानी या मेरे से कोई सवाल करना हो, तो आप अपनी कहानी मुझे PDF में लिख कर मेल [email protected] कर सकते हो।