मामी और उनकी बेटी की चूत मारी-9 (Mami aur unki beti ki chut maari-9)

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हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-

मैं: पहले चूस तो ले लंड को।

माला: टाइम कम है और भूख बहुत ज्यादा है, अंदर डालो और मुझे ठंडा करो।

मैंने झट से लंड को झटका दिया और उसकी गीली चूत में डाल दिया। अब मैं उसे धक्के देना लगा। वो बस आह ऊह ओह चोदो चोदो मुझे, फाड़ दो मेरी चूत, आह आह करने लगी।

शायद मामी से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और वो माला को फोन करती है।

माला: उफ्फ मेरी सौतन का फोन भी अभी आना था।

पर उसने फोन नहीं उठाया। मामी ने लगाया 3-4 बार फोन किया, तो हमें लगा कुछ पंगा ना हो जाए, इसलिए माला ने फोन उठाया।

माला: मम्मी बोलो क्या हुआ? आआह..

मामी: जल्दी नीचे आओ।

माला: हुआ आह क्या?

मामी: तेरे चाचा-चाची आ रहे हैं।

माला: बस 5 मिनट आह आ रही हूँ। आआहह…

मैंने भी स्पीड बढ़ा दी और जल्दी से चुदाई का खेल ख़त्म करके नीचे गये। पर जब तक हम नीचे गए माला के चाचा-चाची आ चुके थे। दोस्तों माला की चाची एक-दम कड़क माल थी। उसने साड़ी पहनी हुई थी काले रंग की और स्लीवलेस ब्लाउज में उसका गोरा बदन कहर ढा रहा था।

मेरे मन में ख़याल आया कि काश इसकी चूत मिल जाए। चाची सोफ़े पे बैठी हुई थी और उनकी एक टांग दूसरी टांग के ऊपर थी। जिसकी वजह से उनकी गोरी टांग का कुछ हिस्सा मुझे देखने को मिल गया। मैं उनके पास गया और पहले चाचा के गंदे काले पांव जो हल्का सा टच किया और फिर चाची के पांव छूने लगा।

मैंने चाची के पांव छूने झुका तो पता नहीं कहां से हिम्मत आई। मैंने एक हाथ उनके घुटनों पर रख दिया और दूसरा हाथ उनके पांव से होते हुए उनकी टांग पर रख कर दबा दिया।

चाची के जिस्म में एक ऐसी लहर उठी कि उन्हें अपना एक हाथ मेरे हाथ पे रख दिया, जो उनके घुटनों पर था और दबा दिया। फिर मुझे देखते हुए हंसी और आशीर्वाद दिया।

मैं उनके सामने बैठ गया और मेरी नज़र बार-बार उनकी पैर पे जा रही थी। चाची ने ये देख लिया तो बात करते-करते वो अपनी टांग हिला देती, जिससे उनकी साड़ी थोड़ी और ऊपर हो जाती। एक बात तो पक्की हो गई थी, कि चाची की जवानी प्यासी थी पर समस्या ये थी कि बात आगे कैसे बढ़े?
हम सब बैठे हुए बात कर रहे थे। तो चाची ने अपना मोबाइल निकाला और बोली, “चलो क्यों ना एक शादी ग्रुप बना लेते हैं। मैं सब को ऐड कर देती हूं।” सब ने कहा कि आइडिया अच्छा है।

चाची ने मामी, माला, मामा को ग्रुप में ऐड किया।

मामी बोली: दीदी, जीजू और जस्सी को भी ऐड करो।

चाची ने हम सब के नंबर ले लिए और ऐड कर दिया। अब मुझे चाची का नंबर तो मिल गया था। पर मैं सोच रहा था कि बात आगे कैसे बढ़ेगी?

खैर वो लोग चाय पी कर घर से निकल गए। चाची जाने लगी तो बोली, “क्या हुआ जमाई जी, हम जा रहे हैं आप आशीर्वाद नहीं लोगे?” ये सुन कर मैं एक-दम चौक गया और झट से जाकर फिर से चाची के पाव पकड़े, और इस बार कुछ ज्यादा समय के लिए।

आह क्या जिस्म था चाची का। चाची ने मेरे गले पे हाथ फेरा और मुझे आशीर्वाद दिया। फिर जैसे ही वो गेट पर पहुंचें तो बोली, “नंबर सेव कर लेना और स्टेटस भी लाइक कर देना।” मैंने भी उनका नंबर सेव कर लिया पर अभी कोई स्टेटस नहीं था।

हम लोगों ने खाना काया और फिर मामी ने प्लान के हिसाब से सब को खीर खिला दी। हम सब टीवी देख रहे थे।

माला मेरे बगल में थी तो सबसे पहले माला बोली: मुझे नींद आ रही है। आप लोग टीवी देखो मैं सोने जा रही हूं।

हमारा प्लान कामयाब हो गया और एक-एक करके सब सोने चले गए।

मामी: तो पतिदेव क्या इरादा है?

मैं: सुनो सब रूम में हैं तो हम किस रूम में जायेंगे?

मामी: हम छत पर चलते हैं।

मैं: छत पर क्यूं?

मामी: जहां मेरी सौतन चुदी है मुझे वही चुदना है।

मैं: ठीक है, पर आज हमारी सुहागरात है।

मामी: हां जी,‌मैं बस तैयार हो कर आती हूं। आप ऊपर चलो मैंने गद्दा बिछा दिया है।

मैं ऊपर गया उसी जगह जहां कुछ देर पहले मैंने माला की चुदाई की थी। थोड़ा इंतज़ार करने के बाद मामी भी वहां आ गई। मैंने जैसे ही उनको देखा तो देखता रह गया। उन्होंने लाल रंग का लहंगा पहना हुआ था, और पूरा श्रृंगार कर रखा था। वो मेरे पास आई और मेरे पांव छुई। मैंने उन्हें उठाया और गले लगा कर बोला-

मैं: जान तुम्हारी जगह मेरे पाओ में नहीं, मेरे दिल में है।

मामी ने मुझे सिन्दूर की डिब्बी दी और बोली: मेरी मांग भर दो।

मैंने झट से उनकी मांग भरी और उनको कहा कि अपनी आंख बंद करो। उन्होंने बिना सवाल किए अपनी आंख बंद कर ली और मैंने उनके गले पे मंगलसूत्र पहन लिया।‌ शायद मामी को ये उम्मीद नहीं थी तो जैसे ही उन्होंने देखा उनको चेहरे पे एक अजब से ख़ुशी आ गई और आँख में पानी।

मैं: क्या हुआ पसंद नहीं आया क्या?

मामी: आप भी ना कुछ भी बोलते हो। मैंने ये सोचा भी नहीं था कि आप मेरे लिए मंगलसूत्र लाओगे। आपने तो मुझे आज वो ख़ुशी दी है, जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोची थी। इतना प्यार करते हो आप मुझे?

मैं: सच बोलूं, नाराज़ मत होना?

मामी: मैं अब आपकी हूं। आप गाली भी दोगे तो भी बुरा मानूंगी, बोलिए ना।

मैं: पहले मैंने सोचा था कि तुमसे बस अपना हवस मिटाऊंगा। पर तुम्हारा मेरे लिए प्यार देख कर मुझे खुद नहीं पता कि मुझे तुमसे कब सच्चा प्यार हो गया संजना। आई लव यू दिल से।

मेरी बात सुन कर मामी बोली: अपने इतना प्यार दिया मुझे और अपना काबिल समझा, ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। बस एक वादा करो।

मैं: क्या?

मामी: मुझे कभी छोड़ कर मत जाना। आप जो कहोगे मैं करूंगी। आपको हमेशा खुश रखूंगी। अगर पहले मिले होते तो शायद मुझसे शादी करते और सब के सामने मैं आपकी बीवी रहती।

मैं: बीवी तो तुम मेरी हो ही अब, और वो भी हमेशा के लिए। पागल मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा। पर हां तेरी चूत और गांड रोज़ मारूंगा।

मामी (हस्ते हुए): सब आपका तो है। मेरे जिस्म पर सिर्फ आपका और आपका हक है।

मैं: अच्छा और कभी तुम्हारे पति ने चूत मार ली तो?

मामी: उसको शराब के अलावा किसी से प्यार नहीं है। ठीक है आज से और अभी से मैं आपसे वादा करती हूं कि उसको मैं अपने जिस्म को छूने भी नहीं दूंगी।

मैं: अरे पागल हो क्या? ऐसा मत करना।

मामी: क्यूं जी, आपको अच्छा लगेगा आपकी बीवी किसी और के साथ हमबिस्तर हो रही है?

मैं: नहीं वो बात नहीं है।

मामी: फिर क्या बात है?

मैं: अगर वो कभी छुए तो छूने देना। वैसे भी है तो तुम्हारा पति। और मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे और मामा के बीच में कोई झगड़ा हो सेक्स के लिए और ना ही उन्हें तुम पर शक हो।

मामी: ठीक है पर आपको पता है ना मैं सिर्फ आपकी हूं?

मैं: जानता हूं। तभी कह रहा हूं। भले ही वो तुम्हारे तन से तुम्हें प्यार करे, पर मुझे पता है तुम्हारा दिल मेरे पास है।

मामी: आप कितना सोचते हो मेरे बारे में। इतना प्यार मुझे आज तक नहीं मिला।

हम दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और फिर हम बिस्तर पर बैठ गए।

आगे की कहानी अगले भाग में दूंगा। कृपया अपनी प्रतिक्रिया यहां सांझा करें- [email protected]

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