पिछला भाग पढ़े:- बारिश की रात में साले की गांड चोदी-2
नमस्ते दोस्तों, मेरी गे सेक्स स्टोरी के अगले भाग में आपका स्वागत है। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों कि आप सभी को मेरी यह रियल सेक्स स्टोरी पसंद आई। चलिए अब मैं आपको बताता हूँ कि आगे क्या-क्या हुआ? और अब मैं आपको हमारी उसी रात की दूसरी बार हुई चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
पहली चुदाई के बाद हम दोनों जीजा-साले एक ही बिस्तर पर नग्न होकर सो रहे थे। मेरी मजबूत छाती पर घने मर्दाना बाल थे, और लंड के आस-पास भी काफी झाँट के बाल थे जो मुझे और भी कामुक बनाते थे। अमन मेरी छाती से चिपक कर सो रहा था, उसकी नंगी फटी हुई गांड मेरी ही तरफ थी। तभी अचानक बहुत ही ज़ोर से बिजली चमकी, एक भयानक कड़कड़ाती आवाज़ के साथ। मेरी नींद खुल गई और मैं जाग गया, आँखें फैली हुई थी और दिल ज़ोर से धड़क रहा था।
फिर मुझे समझ आया कि बस बिजली चमकी थी। मैंने करवट बदली, और मेरी नज़र अमन के चेहरे पर पड़ी। वह शांत, आधे खुले होठों के साथ सो रहा था। फिर मेरी नज़र नीचे खिसकी, अमन की फटी हुई गांड़, जिसे मैंने खुद अपने 7 इंच के मूसल लंड से फाड़ा था।
सब कुछ याद आ गया। अमन की सिसकियां, उसकी कसमसाहट, और वह रात भर की हवस। मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। नींद का नशा छँट गया, और शरीर में फिर से वह जानलेवा हवस दौड़ने लगी।
मैं उठा और बाथरूम गया। मूत कर, हाथ-मुँह धोकर वापस बिस्तर पर लेट गया। अमन को देखने लगा। अमन पूरी तरह नींद के नशे में था, बेखबर कि उसका जीजा उसे घूर रहा था। पर फिर मैंने एक बार फिर से अपने साले की गांड चोदनी चाही।
मैंने धीरे से अमन की गांड को सहलाना शुरू किया। अमन की गांड के अंदर अभी भी मेरा वीर्य था, जो एक चिकनाई का काम कर रहा था। मेरी उंगलियां अमन की गांड़ के छेद पर फिसली, और फिर धीरे-धीरे अंदर घुसी। मैं उंगलियां अंदर-बाहर करने लगा, आहिस्ता-आहिस्ता, फिर थोड़ा तेज़। अमन की आँखें हिली, उसकी सांसें गहरी हुई, और फिर वह जाग गया।
पल भर तक उसने घबराई आँखों से अपने जीजा जी को देखा, फिर समझ गया। और फिर एक मुस्कान फैल गई उसके चेहरे पर। उसने खुश होकर फिर से चुदने का मन बना लिया।
मैंने अमन को फिर से उसके होठों पर किस्स किया। धीरे-धीरे, फिर गहरा। अपनी जीभ अमन के मुँह में डाल कर उसे गर्म करने लगा। साथ-साथ मेरी उंगलियां अमन की गांड़ में पूरे ज़ोर से अंदर-बाहर चलने लगीं। अमन कराह उठा, “जीजा… आह…” मेरी जीभ उसके मुँह में घूम रही थी, और उंगलियां उसकी गांड में अंदर-बाहर। अमन का लौड़ा खड़ा हो गया, और वह अपने जीजा के ऊपर आ गया।
उसका लंड मेरे देसी बदन पर रगड़ना शुरू हो गया। मेरी घनी छाती के बालों में अमन का लंड घुस-निकल रहा था। अब अमन भी फुल जोश में आ गया था, वह जीजा जी का साथ देने लगा था। दोनों के शरीर गर्म थे, पसीने और कामुकता की महक उनके बीच तैर रही थी।
तभी अमन की नज़र बिस्तर के पास रखी तेल की बोतल पर गई। एक-दम से वह मेरी छाती के ऊपर से उतर कर उठ खड़ा हुआ और बोतल लेने भागा। मैं कुछ समझ नहीं पाया। “कहा गया साला… गांडू… गाँव की देसी मां-बहन…” गालियां देने लगा। पर अमन फिर से वापस आकर बोला — “जीजा जी, पहले मैं आपकी मालिश करूँगा, फिर अपनी गांड आपको दूँगा।”
मेरा चेहरा थोड़ा नरम पड़ा। अमन ने काफी सारा तेल अपने जीजा की देसी मर्दाना छाती पर गिराया। घने बालों वाली छाती पर तेल फैल गया और चिकना हो गया। अमन ने मेरे पूरे शरीर को तेल से चिकना कर दिया, छाती, पेट, जांघें, और फिर लंड पर भी तेल लगा कर अमन ने अपना लौड़ा और मेरा लंड आपस में रगड़ना शुरू कर दिया। दोनों काफी कामुक आवाजें निकालने लगे, “उम्म… आह… जीजा… साले…” तेल की चिकनाई में दोनों लंड फिसल-फिसल कर एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे।
फिर जीजा ने अमन को घोड़ी बना दिया। उसकी गांड को तेल से भर दिया। तेल छेद में घुस गया और उसे चिकना कर गया। फिर मैंने पहले अमन को अपना तेल लगा लंड चूसने दिया। अमन कराह उठा, फिर मैंने अमन की गांड़ चाटी। जीभ अंदर घुसी, तेल और वीर्य का स्वाद मिला। और फिर अपना तेल लगा लंड अमन की गांड में डाल दिया। चिकनाई से आराम से चला गया, पूरा 7 इंच अंदर तक।
फिर मैंने कामुक झटके मारे, और अमन की गांड चाटो मार-मार कर लाल कर दी। पर जैसे ही पहला ज़ोरदार झटका लगा, अमन को दर्द हुआ, “आह… जीजा… धीरे…” पर मुझे वापिस से मज़ा आ गया। और मैं ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा — “ले साले… ले मेरा लंड… तेरी गांड तो फटी हुई है पर अभी भी कसी हुई है…” अमन की सिसकियां और मेरी देसी गालियां कमरे में गूंजने लगी।
काफी देर के बाद मैंने अमन को अपने पेट पर बिठा लिया। अब मैं नीचे से अमन की गांड चोद रहा था। काउबॉय की स्थिति में, अमन मेरे ऊपर था और मैं नीचे से अपना लंड पूरा अंदर घुसा रहा था। साथ-साथ उसने अमन के लंड की मूठ भी मारनी शुरू कर दी। एक हाथ से अमन का लंड पकड़ कर झटके लगा रहा था, और नीचे से अपना लंड अमन की गांड में पेल रहा था।
अमन की आँखें बंद थी, मुँह खुला था, और वह बुदबुदा रहा था, “जीजा… मेरा निकलने वाला है… वीर्य…” पर मैं नहीं माना। उसने रुकने नहीं दिया। और फिर, अमन का वीर्य मेरी छाती पर निकल गया। गाढ़ा, गर्म, चिकना। फिर मैंने अमन को एक कस कर चाटा मारा, और फिर उसका वीर्य अपनी छाती से उंगली पर लेकर अमन को चटा दिया। “ले साले… अपना रस पी ले…” अमन ने बिना शर्माए मेरी उंगलियां चाटी और अपना ही वीर्य निगला।
फिर 5 मिनट और अमन की गांड चोदने के बाद, मैंने अमन को मिशनरी स्थिति में लिया। अमन को चित लिटा कर, उसकी टांगें फैलाई, और सामने से चोदने लगा। अमन के छोटे-छोटे बूब्स मेरी नज़र में आए। फिर झुक कर उन्हें एक-एक करके चूसने लगा।
“आह… जीजा… और चूसो…” अमन की उंगलियां मेरी घनी छाती के बालों में उलझी। मेरा भी होने वाला था, तो मैं भी ज़ोर-ज़ोर से झटके मार रहा था, और फिर अपना गर्म-गर्म वीर्य अमन की गांड में छोड़ दिया। पूरा लंड अंदर धकेल कर, अमन पर ही दबाव छोड़ दिया। अमन की गांड भर गई दूसरी बार। 5-10 मिनट के बाद मैंने अपना लंड निकाला, और अमन की छाती पर बैठ गया। अपना बचा हुआ वीर्य अमन को चाट कर साफ करने का आदेश दिया, “ले साले… चाट ले अपने जीजा का लंड… साफ कर ले।”
अमन ने बिना शर्माए अपने जीजा का लंड चाटा और वीर्य निगला। और फिर, अपने जीजा की असली लुगाई की तरह उससे चिपक गया। अपना चेहरा दीपक की घनी छाती पर छुपा लिया। दीपक ने अपनी भारी भुजाओं से अमन को जकड़ लिया। बारिश अभी भी बरस रही थी, और हम दोनों जीजा-साले एक-दूसरे से चिपक कर, नग्न, तेल और वीर्य से सने, वापस सो गए।
सुबह सात बजे अलार्म बजने से पहले ही अमन की आँखें खुल गई। मैं अभी गहरी नींद में सो रहा था। अमन का नंगा शरीर तेल और सूखे वीर्य की परत से चिकना था और छाती के बाल गुथे हुए थे। अमन ने धीरे से मेरी बाँह निकाली और बिस्तर से उतर कर नंगा ही रसोई में जाकर चाय बनाने लगा।
गैस पर आँच लगी, पतीली में पानी उबलने लगा, और अमन ने दो कप में चायपत्ती, चीनी और दूध डाला। चाय बनने के बाद वह कप लेकर बेडरूम में आया और फिर मेरा लंड हिला कर मुझे जगाया। “जीजू, चाय बनी है, उठो।” फिर मैंने आँखें मलते हुए उठ कर, अमन की नंगी देह देख कर मुस्कुराया और कप लेकर चुस्कियाँ लेने लगा।
दोनों ने चाय पी और फिर नंगे ही बाथरूम में घुस गए। इस बार हमने बस नहाते हुए एक-दूसरे की मूठ मारी। अमन ने दीपक के नरम लंड को पानी में सहलाया, मैंने अमन का लंड अपनी मुट्ठी में रगड़ा, और दोनों तेज़ झटकों के बीच एक-दूसरे की गर्दन चूमते हुए तैयार हुए।
ऑफिस के लिए निकलने से पहले अमन ने मुझसे कहा, “जीजू, मुझे राखी के लिए गाँव जाना होगा, दीदी से राखी बंधवानी है।” मेरा चेहरा उतर गया। “नहीं जाना, यहीं रहो।” पर अमन ने हार नहीं मानी, जिस पर मुझे गुस्सा आया और फिर मैं अपने ऑफिस कैबिन में जाकर काम में जुट गया। अमन भी अपने काम में लग गया।
दोपहर के भोजन के समय अमन केबिन में गया। “जीजू, चलो खाना खाते हैं।” फिर मैंने बिना आँख उठाए मना कर दिया। अमन ने दरवाजा अंदर से बंद किया पर लॉक नहीं किया, और मेरी कुर्सी के सामने घुटनों के बल बैठ गया, और मेरी पैंट की ज़िप खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया। मेरी तो गांड ही फट गई — “कोई आ ना जाए, मादरचोद!”
पर अमन ने नहीं सुना, जीभ से मेरे सुपाड़े पर घुमाते हुए गहराई तक चूसने लगा। मेरा लंड फूल कर खड़ा हो गया, और तभी दरवाजे पर दस्तक पड़ी — पीयून था, दूसरे डिपार्टमेंट से। दीपक ने अमन को टेबल के नीचे धकेल दिया और “आओ” बोला।
पीयून अंदर आया और काम लेकर गया। इस दौरान अमन ने टेबल के नीचे से मेरा लंड ऐसे चूसा कि मेरे होंठ भींच गए, और मैंने अपना पूरा वीर्य अमन के मुँह में उगल दिया। अमन ने हर बूँद निगल ली। पीयून के जाते ही मैंने अमन को टेबल से निकाला और बोला, “गांडू, रंडी, छिनाल, जा गाँव — पर रात को सुहागरात वाली चुदाई देनी होगी।” अमन ने कहा, “मधु की साड़ी पहनूँगी, पर मुझे भी शरीर के बाल साफ करने होंगे।”
ऑफिस खत्म होने के बाद दोनों मेरे घर आए। अमन कमरे में तैयार होने चला गया, और मैं बाथरूम में जाकर अपने झाँट के बाल साफ करने लगा। उस्तरे से झाँट के बाल हटाने के बाद मेरा देसी लंड बिना बालों के काफी बड़ा और सुंदर दिखने लगा। तभी अमन ने बाहर से आवाज़ दी — “जीजू, कमरे में आओ।”
मैंने बस एक टी-शर्ट पहनी और तौलिया लपेटा और कमरे में गया। अमन गुलाबी रंग की साड़ी में हल्का श्रृंगार किए, घूँघट निकाले खिड़की के सामने खड़ा था। मेरा दिल ज़ोर से धड़का — अमन बिल्कुल मधु जैसा लग रहा था। “मधु…” मैंने कहा।
अमन ने मुस्कुरा कर केसर वाला दूध पीने को दिया और मुँह दिखाई माँगी। पर मेरे पास कुछ नहीं था, तो उसने मधु की चैन निकाल कर अमन के गले में पहना दी।
फिर मैंने अमन का घूँघट उठाया और उसकी तारीफ की, “मेरी रानी, कितनी सुंदर लग रही है।” फिर उसका माथा चूमा और होंठों पर गहरा चुंबन किया। अमन ने आँखें बंद कर ली।
फिर मैंने कहा, “अब जो मैं करूँ, वो करने देना।” फिर मैंने अमन की साड़ी का पल्लू धीरे से खोला, ब्लाउज़ के हुक एक-एक करके खोले, बूब्स चूसे और हर अंग को चूमा — गर्दन, कंधे, छाती, नाभि। फिर साड़ी और पेटीकोट निकाल कर अमन को पूरा नग्न कर दिया।
फिर अमन ने भी मेरी टी-शर्ट उतारी, मेरा चिकना बदन, बिना बालों वाला लंड और सुपाड़ा चूमा। फिर जीजा ने अमन की गांड अपने थूक से गीली की। जब अमन ने अपने पति का लंड माँगा, तो दीपक ने उसकी गांड पर चांटे मार कर पिटाई की — “रंडी, पहले तैयार कर।” फिर कंडोम लगा कर पहले उसकी गांड में अपना मूसल लंड डाला और काफी जोर से उसकी गांड मारना शुरू कर दिया।
फिर पोजीशन चेंज की, उसे अपने लंड पर बिठाकर चोदने लगा। वह बिल्कुल एक अच्छी पत्नी की तरह अपने पति की हर बात मान रही थी। बीच-बीच में दीपक उसे मेरा लंड भी चूसने का आदेश देता और अमन वह भी कर रही थी। रात में तीन बार अमन की गांड चोदी — मिशनरी और डॉगी आसन में, फिर ऊपर बैठ कर। हर बार दीपक ने गालियाँ दी — “मादरचोद, बहन की लोड़ी, गांडू, छिनाल” — और अमन ने भी पूरी हवस से मज़ा लिया।
सुबह अमन अपनी गांड में अपने पति का वीर्य भर कर गाँव चला गया, और मैं अकेला रह गया।