पिछला भाग पढ़े:- बड़ी बहन के साथ छोटे भाई के कामुक किस्से-2
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
दीदी बाथरूम से बाहर आई तो मैं हैरान रह गया। मेरी बहन बिलकुल नंगी थी। उसने अपनी पेंटी निकाल दी थी। दीदी की जांघें केले के तने जैसी चिकनी थी। दोनों जाँघों के बीच चूत का त्रिकोण बहुत ही मादक लग रहा था। मैंने दीदी की चूत के पहली बार दर्शन किये। अपनी दीदी को एक-दम नंगी देख कर मेरा लंड फिर लोहा बन गया।
मुझे नहीं पता था कि साधारण सी दिखनी वाली मेरी बहन अंदर से इतनी गोरी चिकनी और मादक होगी। उसकी चूत पर बहुत बाल थे। एक-दम जंगल। बालों पर पेशाब की बूंदे अभी भी लगी हुई थी शायद दीदी पर काम वासना पूरी तरह से चढ़ गई थी। दीदी चूत खुजा रही थी। मैंने मौका देखा और सीधे दीदी की जाँघों को चूमता हुआ खड़े-खड़े ही चूत को चूमने लगा।
दीदी हैरान हो गई। उसे नहीं पता था औरत की चूत को चूमा भी जाता है। बोली, “सुरेश ये क्या?” मैं तो बस काम वासना के रथ पर सवार हो कर दीदी की टांगें खोल कर चूत को सूंघ-सूंघ कर चूमने लगा। वही नशीली खुश्बू थी जो उसकी पेंटी से आती होती थी। हलकी से पेशाब की भी खुश्बू मिक्स थी। दीदी बोली कि, “बैडरूम में चलते हैं।”
दीदी आगे-आगे नग्न अवस्था और मैं उसके पीछे-पीछे। बिना कपड़ों की किरन दीदी किसी रंडी की तरह लग रही थी। उसकी गोल-मटोल गोरी गांड अच्छी लग रही थी। सलवार में नहीं पता चलता पर लड़कियों की गांड उभरी होती है। दीदी बैडरूम में लेट गई और डिम लाइट जला दी। फिर अपने आप ही टांगें खोल दी।
शायद मेरा चूत चूमना अच्छा लगा। दीदी की हाइट ज्यादा नहीं थी। मैंने सोचा था कि उनकी चूत छोटी सी होगी पर उस दिन मुझे पता चला कि जवान लड़की की चूत अच्छी खासी साइज की होती है। मैंने जिंदगी में पहली बार कोई रियल चूत देखी और वो भी अपनी सगी बड़ी बहन की। मैंने किरन की जाँघों को खूब चूमा-चाटा और फिर अपनी प्यारी दीदी किरन की चूत को पास से निहारने लगा।
जीवन में पहली बार किसी जवान लड़की की चूत को देख रहा था। किरन की चूत हलके ब्राउन रंग की थी और अंदर लिप्स जैसे बने थे। ब्लू फिल्मों में तो देखी थी पर करीब से रियल चूत देखने का मज़ा ही अलग था। मैं चूत के बाल थोड़े साइड करके देखने लगा तो किरन दीदी ने टांगें और खोल दी है। उनकी बुर को सहलाने से उन्हें मज़ा आ रहा था। दीदी की चूत को हलके से खोला तो अंदर का भाग गुलाबी सा था।
मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं था। अंदर बहुत चिकनाई थी। मेरे से रहा नहीं गया और मैंने दीदी की चूत के होंठ चाटने शुरू कर दिए। अंदर से दीदी की चूत ने कुछ लिपलिपा सा पदार्थ छोड़ना शुरू कर दिया। हम दोनों को बहुत ही आनंद आ रहा था। दीदी की मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी और आंखें बंद थी। एक हाथ अपने माथे पर और दूसरा मेरे सर पर था। मेरे लंड से भी चिपचिपा सा कुछ निकल रहा था।
दीदी की चूत की दरार को मैं अच्छे से अंदर तक जीभ डाल कर चाट रहा था। फिर दीदी ने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और कहा कि, “अंदर मत डालना, ये पाप होगा, हम लोग सगे भाई-बहन हैं।” मैंने दीदी को समझाया कि इस वक़्त वो एक औरत और मैं एक मर्द हूँ और उसकी बुर को मेरा लंड चाहिए। दीदी बोली “फिर भी” तो मैंने मुँह पर ऊँगली रख दी।
मैंने कहा कि दीदी अगर ऐसा ना होता तो मेरा लंड खड़ा ही नहीं होता उनको नंगा देख कर और ना ही वो चुदास जाती। दोनों के शरीर बहुत गरम हो गए थे। दीदी ने कहा कि ये बात तू सही बोल रहा है पर उसे मेरे खड़े लंड को देख कर बहुत डर लग रहा था। क्योंकि उसकी “वो” में कैसे जाएगा?
मैंने कहा कि दीदी अपनी चूत अपने आप रास्ता देगी मेरे लंड को। बोली कि तुझे कैसे पता, तो मैंने कहा की ब्लू मूवीज मैं देखा है। भाई बहन दोनों नंगे थे बैडरूम में। हम दोनों को चुदाई का कोई एक्सपीरियंस नहीं था। दीदी बोली कि क्या पूरा अंदर जाता है, तो मुझे भी कोई आईडिया नहीं था। मैंने कहा कि कोशिश करके देखेंगे।
फिर किरन बोली कि धीरे-धीरे कोशिश करना। दीदी मेरा लंड सहला रही थी और मैं बच्चों की तरह उसके दूध चूस रहा था। उसके निप्पल टाइट थे। फिर दीदी खुद ही मेरा लंड अपनी चूत के छेद की तरफ ले गई और मैंने हलके से घुसाने की कोशिश की। दीदी भी अपनी गांड आगे-पीछे करके लंड को चूत मैं लेने की कोशिश करने लगी।
दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिया था और मेरी जाँघों से चिपक रहा था। मैं अनाड़ी था और दीदी की बुर मैं अपना लंड धकेल नहीं पा रहा था। हम दोनों 4-5 मिनट कोशिश करते रहे की अचानक मेरे लंड का सुपाड़ा दीदी की चूत के छेद में फँस गया। मेरी ख़ुशी की सीमा ना रही। दीदी सिसकियाँ ले कर बोली सुरेश इस जगह पर। अपनी सगी बहन की चूत में लंड फंसते ही मैं बहुत खुश हो गया।
वो बहुत ही आनंदित करने वाला क्षण था। मेरी बहन किरन पहली बार चुदने जा रही थी और वो भी अपने छोटे प्यारे भाई सुरेश से। उसने अपने हाथ मेरी छाती पर रख दिए और मैं उसके होंठों को चूमने लगा। धीरे-धीरे मेरा लंड किरन दीदी की चूत के अंदर जाने लगा। दीदी की प्यासी चूत मेरे लंड को रास्ता देते हुए निगलने लगी। दीदी की चूत को यह बिलकुल नहीं पता था कि लंड उसके सगे भाई का था।
उस रोज़ मुझे ये अहसास हुआ कि चूत का नाता सिर्फ लंड से होता है किसी रिश्ते से नहीं। इसलिए कई बेटे भी अपनी माँ को छोड़ देते हैं। दीदी मुझे रोक-रोक कर मेरा लंड अपनी चूत मैं धीरे-धीरे लेती रही।
किरन दीदी की चूत में भी तो आग लगी हुई थी। आखिर मेरा लंड फँस-फँस के बहन की चूत के अंदर समा गया। दीदी की सिसकारियां निकल गई वो मुझे धक्का देने लगी। उसको तकलीफ भी हो रही थी और मज़ा भी आ रहा था। बोली सुरेश क्या पूरा अंदर चला गया क्या? हां दीदी। सच?इतना बड़ा मेरी फुद्दी ने ले लिया? मैं दीदी के मुँह से पहली बार “फुद्दी” शब्द सुन कर पगला गया। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जीवन की पहली चूत अपनी सगी दीदी की मारूंगा।
अब मैंने धीरे-धीरे ब्लू मूवी में जैसा देखा था गांड आगे-पीछे करके धक्के मारने लगा। मेरी बहन पूरी नंगी हो कर अपना सब कुछ लुटा के मेरे नीचे पड़ी थी। सब कुछ एक सपने जैसा लग रहा था। मैंने और झटके तेज़ कर दिए। किरन दीदी की टाइट प्यासी चूत मेरे लंड को बहुत बुरी तरह से रगड़ रही थी और उसको कस के जकड़ रखे थी।
चूत की गर्मी बहुत ज़्यादा होती है और मैं 3-4 मिनट में ही झड़ने वाला था और जल्दी से मैंने लंड बाहर निकाल दिया और दीदी की जाँघों पर सारा माल गिरा दिया। दीदी हैरान हो कर देखती रही। शायद दीदी को मैं ठीक से चोद नहीं पाया और पहले ही स्खलित हो गया।
दीदी बोली की बच्चा तो नहीं होता ना ऐसे सुरेश? मैंने कहा नहीं दीदी बाहर गिरा दो तो नहीं होता। मैंने अपने दोस्तों से सुना था। हम दोनों उसके बाद एक-दूसरे से लिपटे रहे। दीदी की प्यास नहीं बुझी थी और वो हलके हलके अपने चूतड़ उठा कर मेरे लंड से रगड़ रही थी। कुछ देर ऐसा करने के बाद हम एक-दूसरे से अलग हो गए और वो अपने बाथरूम मैं चली गई और मैं भी अपने आप को साफ़ करने लगा।
तो दोस्तों ये थी मेरी अपनी सगी बहन किरन के साथ पहली चुदाई जिसमें कि मैं शायद उसको अनाड़ी होने की वजह से अच्छी तरह चोद नहीं पाया।
क्या आगे जा कर मैं किरन की तसल्ली कर पाया? क्या किरन चुदक्कड़ बन गई? क्या शरीफ और संस्कारी किरन को सेक्स पसंद आने लगा था? आगे-आगे हमने कैसे सेक्स किया? इसको जानने के लिए कमैंट जरूर करें। धन्यवाद!