पिछला भाग पढ़े:- मैं, मां और ट्रेन का सफर-3
मां की चुदाई कहानी अब आगे-
माफ़ करना आपके कम ईमेल और कमेन्ट की वजह से देरी हुई, पर अब नहीं होगी। जैसा मैंने पिछले पार्ट में बताया कि मैं मां की चूत में मैं अपना पानी छोड़ कर लंड को मां की चूत में ही डाले हुए उनके उपर लेटा था। और मां भी मेरी इस तगड़ी चुदाई के कारण आंखें बंद करके लेटी हुई थी। अब आगे-
मुझे ऐसे ही मां के उपर लेटे हुए करीब 15 मिनट हो गए थे। मेरा लंड अभी भी मुरझाए हुए उनकी चूत में ही था और मैं उनकी चूचियों में मुंह दिये हुए उन्हें चाट रहा था। फिर कुछ देर बाद मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला और मां के उपर से उठा। तभी मां ने भी आंखें खोली और मुझे और मेरे ढीले, नीचे की तरफ लटके पड़े लंड को देखने लगी, जो अभी भी 4 से 5 इंच होगा।
पर मैं वहां से अपना कच्छा और बनियान पहन कर ट्रेन के बाथरूम में गया और जाकर और फ्रेश होकर आया। तब तक मां ने भी नाईटी पहन ली और उनके बाकी कपड़े बेग में रख दिये थे। जब मैं कूप में आया तो वो मुझसे नज़रें चुरा कर और बिना कुछ बोले ही वो कूप से बाहर निकल कर बाथरूम की तरफ चली गयी। जाते हुए मैंने उनको जब देखा तो वो थोड़ी टांगें फैला कर चल रही थी। शायद मेरी तगड़ी चुदाई से मम्मी की चूत फैली होगी। फिर मैं ऐसे ही बैठे हुए मम्मी की चुदाई के बारे में सोच रहा था।
तब फिर मेरे दिमाग में आया कि एक और राउंड कर लिया जाये यही मौका है। शायद मम्मी मुझसे खुल भी जाये और फिर जब चाहे जहां चाहूं घोड़ी बना कर चोदा दूं। फिर मैंने अपना कालेज बेग से वो गोली निकाली जिसको में अपनी गर्लफ्रेंड प्रिया के लिए लेकर आया था। वो गोली थोड़ा चुदाई करने का टाइम और लंड का साइज़ बढ़ा देती है।
मैंने सोचा मम्मी की चुदाई और यादगार बना देता हूं। ताकि मम्मी मुझसे चुदाने के लिए तड़प उठें और बाद में जब मैं चोदूं तो मना नहीं कर सके। अभी यहां मम्मी चुदने के लिए मना भी करेगी तो मैं उनको मना सकता हूं पर घर पर ये नहीं होंगा वहां दादा जी होते हैं। फिर मैंने गोली निकाली (जिसको नाम जानना है वो ईमेल करें)।
मैंने जल्दी से वो गोली खा ली और मम्मी का इंतजार करने लगा, पर मम्मी 15 मिनट तक नहीं आयी। अब इधर मेरा लंड पहले से ज्यादा बड़ा होकर खड़ा हो गया था। तो मैं अपने कपड़े निकाल कर, खुद को नंगा करके अपने लंड को सहलाते हुए मां का इंतजार करने लगा। मेरा लंड उपर की तरफ किसी चूड़ीदार सरिये की तरह खड़ा था। तभी 5 मिनट बाद मम्मी केबिन में आयी और मुझे इस हालत में देख कर हड़बड़ाहट में जल्दी से कूप बंद करके बोली।
मां: अब फिर ये क्या कर रहे हो? अब ये फिर से दोबारा नहीं होंगा। कपड़े पहनो अपने।
(मैं मम्मी की तरफ देख कर अपने लंड की और इशारा करते हुए)
मैं: मां अभी इसका मन शांत नहीं हुआ आपसे और प्यार करना चाहता है आपकी बड़ी गांड को देखकर मेरा लंड अब और भी बड़ा हो गया है। अब जब तक इसका मन शांत नहीं होगा ये नहीं मानेगा।
मां (गुस्से में): बस अब आगे से कुछ नहीं होंगा। जो करना था कर लिया।
मैं (खड़े होते हुए): मां मेरा प्यार आपको अच्छा नहीं लगा?
और इतना बोलते हुए मैंने फिर से मम्मी की नाइटी एक दम से निकलनें लगा तो मम्मी ने रोकने की कोशिश की। पर मैंने थोड़ा मम्मी को ट्रेन की दीवार की तरफ करके उनकी नाइटी उतार फैंकी। मम्मी ने नीचे कुछ नहीं पहना था, इसलिए वो अब मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी तभी मैं उनका हाथ पकड़ कर उन्हें अपनी साथ लाते हुए सीट पर बैठ गया पर मम्मी अभी भी खड़ी थी।
मैंने उनका हाथ अपने हाथ से पकड़ कर अपने लंड पर रखा और उन्हें बोला-
मैं: मम्मी इसे प्यार करो ना (और उनके हाथ पकड़े हुए ही उनसे अपना लंड थोड़ा फोर्स देकर सहलवाने लगा।
मां (सहलाते हुए बोली): तुझे जो करना था कर लिया ना। अब नहीं करो। ये सब मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
मैं: मम्मी आपको चोद कर मुझे जितना मजा आया उतना आजतक किसी के साथ नहीं आया। अब तो आपको रोज प्यार करूंगा। मुझे आपसे अब प्यार हो गया है। आई लव यूं।
मां: ये ग़लत है। किसी को पता चल गया तो क्या कहेंगे लोग बदनामी होगी हमारी।
मैं: मम्मी कौन बतायेगा? मैं तो नहीं बताऊंगा, आप भी नहीं बतायेगी। तो किसी को पता चलने का सवाल ही नहीं उठता।
मम्मी कुछ सोचते हुए, अब मेरा लंड खुद सहलाते हुए बोली-
मां: ठीक है। आज जो करना है कर पर इसके बाद कुछ नहीं।
मैंने इतना सुनते ही थोड़ा हंसते हुए उनको नीचे बैठाते हुए बोला-
मैं: मम्मी आप अभी ये सब छोड़ो और मेरे लंड को अपने प्यारे होठों से प्यार करो बाद की ना सोचों वो तो बाद की बातें हैं। अब मैं तुम्हें ऐसा प्यार दूंगा कि तुम मुझे भूलोगी ही नहीं और रोज ऐसा प्यार और चुदाई मांगने लगोगी।
मम्मी अब नीचे अपनी पैरों की उंगलियों पर बैठी थी। मेरी तरफ देखते हुए मेरा लंड उपर नीचे करते हुए बोली-
मां: तेरा ये पहले से ज्यादा बड़ा और मोटा कैसे लग रहा। मुझे अभी भी पहली बार की जलन हो रही है ( मम्मी खुल कर मेरे लंड और अपनी चूत के बारे में नहीं बोल रही थीं। )
मेरा लंड सही में ही अब ज्यादा कड़क और पहले से आधा-एक इंच लम्बा और थोड़ा मोटा हो गया था। जो मेरी मम्मी को महसूस हुआ होगा क्योंकि इसी लंड से अभी कुछ देर पहले मम्मी खुशी और दर्द भरी चीखें मार रही थी। तभी मैं मम्मी का सर के पीछे हाथ रख कर सहलाते हुए बोला-
मैं: मम्मी ये सब आपको देख कर हो रहा है। ये अब आपकी चूत का दीवाना हो गया। (मैंने मम्मी का सर और गर्दन को सहलाते हुए बोला) अभी ये छोड़ो और अपने होंठों से प्यार करो।
मां: मैंने ये सब कभी नहीं किया। मुझे अच्छा नहीं लगता। और मैं इसे मुंह में नहीं ले पाऊंगी, बहुत मोटा भी है।
मैं: मम्मी सब कुछ पहली बार ही होता है। इससे पहले आप अजनबी लड़के से चुदाने बाथरूम में भी नहीं गयी थी, और अभी कुछ देर पहले अपने सगे बेटे का लंड को भी चूत में भी पहली बार ही लिया था।
(मम्मी मेरी तरफ देखते हुए हल्के-हल्के लंड को ऊपर-नीचे करने में लगी थी। उनका हाथ मेरे लंड पर ही था तभी) और अब देखो तुम अपने बेटे से दोबारा भी चुदने वाली हो। तभी मैं सीट से आगे की तरफ झुक कर एक-दम से मम्मी के होंठों को चूमने लगा और उनकी दोनों चूचियां बारी-बारी से दबाने लगा। जब मम्मी की तरफ से और कोई रिस्पांस नहीं मिला तो मैंने होंठों को चूसना छोड़ उनकी आंखों में देखा।
मम्मी की आंखों में देखा जिसमें साफ सेक्स भरी वासनाएं उतरी हुई थी। पर मम्मी मेरा खुल कर साथ नहीं दे रही थी। फिर मैंने उनके माथे को चूमा जिससे मम्मी ने अपनी आंखें बंद कर ली। माथे को चूमने के बाद मैंने फिर से मम्मी के निचले होंठ को चूसना शुरू किया जिससे मम्मी एक-दम उत्तेजित हो गई और मेरे लंड से हाथ हटा नीचे बैठे हुए ही मेरे सर को दोनों हाथों से घेर कर सहलाते हुए मेरे होंठों को पर जोर जोर से किस्स करने लगी।
इसके आगे क्या हुआ, आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। [email protected]