मेरा नाम सुरेश है। हम लोग पंजाबी हैं। सब लड़कों की तरह मैंने भी जवानी की दहलीज़ मैं कदम रखा था। मैं 19 साल का था जब पहली बार मुठ मारी थी। मेरे टाइम मैं इंटरनेट नहीं था और मैं ज्यादा सोशल भी नहीं था। बस एक भाभी थी रिश्ते में जिसके बदन की तरफ आकर्षित था।
दोस्तों ये बात पुरानी है जब मोबाइल फ़ोन नहीं थे। हमारे दिनों मैं सिर्फ कभी-कभी वीसीआर पर दोस्त लोग चुपके से ब्लू फिल्म देख लेते थे। मुझे चूत के बारे में बहुत जिज्ञासा हो गई। इतनी ज्यादा कि और कहीं बस नहीं चला तो अपनी बड़ी बहन किरन (जो कि उस समय 21 साल की थी और बहुत ही शरीफ और संस्कारी थी) के बारे में गन्दा सोचने लगा।
क्योंकि घर में मैं सबसे करीब अपनी बहन के साथ था। मुझे कभी-कभी उसको चोदने के सपने भी आते थे तो सुबह उठा कर मुझे बुरा लगता। लेकिन मैं ये सोच के हैरान होता कि अपनी सगी बहन के बारे में सोच कर भी मेरा क्यों खड़ा होता है।
वो 5 फ़ीट 2 इंच की औसत कद की लड़की थी। पतला गोरा शरीर, छाती 30″ की होंगी। भारी नहीं थी। मैंने कभी-कभी दीदी जब कोई काम करते झुकती थी, तो आधी-आधी चूचियां देखी थी। कभी उसकी गांड पर 1 सेकंड के लिए गलती से हाथ लग जाता, तो बहुत अच्छा फील होता था।
दीदी की गांड बहुत नरम थी। पहले खराब भी लगा यह गलत है। पर फिर ये सोच कर की वो भी एक औरत है और उसकी जांघों में भी चूत है। सिर्फ देखने से या कभी छूने से कुछ बुरा नहीं है। अपने आप को समझा लिया और बाथरूम के दरवाजे में छेद करने के बारे में सोचा, कि शायद अपनी बडी बहन के नंगे जिस्म के दीदार हो जाएं तो मज़ा आ जाएगा। पर ये स्कीम मैंने छोड़ दी क्योंकि डर गया कि सब को पता चल जाएगा।
मैं मौका लगते ही कभी-कभी अपनी बहन की पेंटी सूंघ लेता था। ऐसा लगता था अपनी दीदी की चूत ही सूंघ रहा हूँ और उसको लंड पर लपेट कर मुठ मार लेता था। कभी-कभी उसकी इस्तेमाल की हुई पेंटी मिल जाती तो मेरा दिन बन जाता।
मुझे उसकी बिना धोई हुई पेंटी से उसकी बुर की खुशबू आती थी। मेरा लंड लोहा बन जाता यह सोच के कि यहाँ इसी पेंटी में मेरी प्यारी किरन दीदी की बुर सारा दिन चिपकी रहती है। किरन दीदी ब्रा नहीं पहनती थी। वो समीज़ (बनियान) डालती थी उसकी चूची छोटी थी शायद।
कभी-कभी दोनों भाई-बहन टीवी देखते थे तो कोई सेक्सी गाना आ जाता तो वो चैनल चेंज कर देती। या कभी-कभी कोई लड़की बिकिनी मैं आती तो हम दोनों हँसते। एक दिन घर मैं कोई नहीं था और हम लोग एक हिंदी मूवी देख रहे थे। उन दिनों केबल टीवी का ज़माना था। मुझे मालूम था क फिल्म में हॉट सीन थे और यह भी की किरन चैनल चेंज कर देगी। इसलिए मैंने एक तरकीब निकाली और टॉयलेट के बहाने उठ कर चला गया।
मैं दरवाजे के छेद से छिप कर देखने लगा की जैसे ही हॉट सीन आया, दीदी बहुत मजे से उसका आनंद ले रही थी और मुड़ कर पीछे भी देख लेती थी। ऐसे ही जैसे दोबारा से एक सीन आया तो मैं अचानक अंदर चला गया और दीदी से मारे घबराहट में चैनल चेंज ही नहीं हुआ। मैं अंदर से खुश था लेकिन पूरा मजा ले रहा था।
किरन शर्मिंदा थी और यहाँ-वहाँ की बातें करने लगी। मैंने बाद में पूछा कि दीदी यह मुँह में मुंह वाली चुम्मी क्या हुई तो बहुत गुस्सा हुई और बोली कि तू गन्दा हो रहा है और अपनी पढ़ाई में ध्यान दिया कर और टीवी बंद कर दिया। मैं भी गुस्सा हो गया और बोला कि दीदी आप खुद क्यों गंदे सीन देख रही थी।
पहले तो वो हैरान रह गई और मुझे एक थप्पड़ मार दिया। मैं दूसरे रूम में चला गया। शाम को दीदी मेरे पास आयी और मनाने की कोशिश की। मैंने बोला कि पहले बताओ की हेरोइन की टांगें इतनी गोरी क्यों होती हैं। वो मुझे प्यार से बताने लगी की सभी लड़कियों की टांगें अंदर से गोरी ही होती हैं। मैंने कहा कि दीदी आपकी भी? तो बोली की तू बहुत बदमाश हो गया है। बोली की गोरी ही हैं।
मेरा मन मचल रहा था और कह दिया कि दीदी अपनी टांगें दिखाओ ना। बोली कि तेरी बड़ी बहन हूँ। मैंने बोला की इसमें क्या शर्म। टांगें ही तो दिखानें को कहा। कुछ लड़कियां तो स्कर्ट भी पहन कर अपने घरों में भी तो टांगें दिखाती ही हैं। तो कुछ सोच कर रूम के एक कोने के पास जा कर बोली कि बताना मत किसी को और अपनी सलवार ऊपर उठा दी घुटनों तक।
मेरा लंड अपनी बड़ी बहन किरन की गोरी टांगें देख कर खडा हो गया। हलके-हलके बाल थे। कहा दीदी और ऊपर तो बोली बदमाश इस से ऊपर नहीं। बहुत कहने पर भी नहीं मानी।
कुछ दिनों बाद वो अपना सूट चेंज कर रही थी तो से सलवार नहीं डाली थी और शायद उसको सलवार मैं नाला डालने के लिए नाले पुनि नहीं मिल रही थी। उसने मुझे आवाज़ लगाई ढूंढ़ने के लिए। मैं दीदी को ये सोच कर के नीचे से नंगी है, लंड खड़ा हो गया। शायद किरन दीदी को पता चल गया था।
मैंने बोला कि आज अपनी गोरी टांगों के फुल दर्शन करवाओ। तो थोड़ी ना-नुकुर करने के बाद अपना कमीज ऊपर उठा कर हलकी सी जांघों की झलक दिखला दी। अपनी बड़ी जवान बहन की जांघों की झलक पा कर मेरा दिमाग खराब हो गया। मैं ज़िद करने लगा कि और थोड़ा ऊपर करो तो मुझे गुस्सा हुई और भगा दिया।
फिर दूसरे कमरे में आयी और बोलने लगी कि देख एक बार आज दिखा दूँगी पर रोज़ रोज़ मत बोला कर। तो मैंने कहा कि ओके प्यारी दीदी और उसने अपनी सूट की कमीज़ घुटनों से ऊपर कर दी और मुँह दूसरी और कर के खड़ी हो गई।
दीदी की जांघें बहुत ही चिकनी थी पहली बार किसी जवान लड़की की जांघें लाइव देख रहा था। लंड टाइट था और मेरे पायजामे से उसका उभार दिखाई दे रहा था। दीदी को शायद ये अच्छा लगने लगा था। किरन दीदी की गोरी-गोरी जांघों के ऊपर काली पेंटी और मैं अपनी सगी बहन की बुर के बारे मैं सोचने लगा।
इतने में दीदी बोली कि भाग जा अब। मैं दीदी की जांघों को भूल नहीं पा रहा था और तुरंत बाथरूम मैं जा कर अपनी बहन के बारे मैं सोच कर मुठ मार दी।
इसके आगे क्या हुआ, अगले पार्ट में पढ़िए।