पिछला भाग पढ़े:- बेटे के दोस्त ने माँ को चोदा-1
हिंदी चुदाई कहानी आगे-
रोहन के वीर्य से मेरी चूत अभी भी भरी हुई थी। मैं सोफे पर लेटी हुई पसीने से तर थी। रोहन मेरे ऊपर से उठा, अपना लंड पैंट में डाला और मेरे कान में फुसफुसाया, “आंटी, अब उठो… आर्यन आने वाला है।”
मैं घबरा कर जल्दी से उठी। साड़ी ठीक की, ब्लाउज के हुक लगाए, पल्लू संभाला। लेकिन मेरे चेहरे पर चुदाई का नशा साफ दिख रहा था — गाल लाल, बाल बिखरे हुए, होंठ सूजे हुए और आँखों में अभी भी वासना बाकी थी। मेरी पैंटी में रोहन का गाढ़ा वीर्य रिस-रिस कर जांघों पर बह रहा था।
मैंने जल्दी से बाथरूम जाकर चेहरा धोया और खुद को कुछ हद तक संभाला। जैसे ही मैं बाहर आई, दरवाजे की घंटी बज गई।
आर्यन घर आ गया था। मैं शर्मा कर तुरंत किचन में चली गई। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मेरी चूत अभी भी रोहन के वीर्य से गीली थी और हर कदम के साथ एक अजीब सी सिहरन हो रही थी। आर्यन अंदर आया और सीधे लिविंग रूम में रोहन को देख कर बोला, “अरे भाई! तू तो पहले से ही यहाँ है?”
रोहन आराम से सोफे पर बैठा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ यार, थोड़ी देर पहले आ गया था। आंटी से बातें कर रहा था।”
आर्यन ने मेरी तरफ देखा, जो किचन में चाय बनाने का बहाना कर रही थी। “मम्मी, तुम ठीक हो? चेहरा लाल क्यों है?”
मैं शर्म से पानी की केतली पकड़े हुए बिना मुड़े बोली, “कुछ नहीं बेटा… गर्मी लग रही थी। चाय बना रही हूं।”
रोहन ने शैतानी मुस्कान के साथ आर्यन से कहा, “भाई, आंटी आज बहुत अच्छी चाय बना रही हैं। मैंने थोड़ी देर पहले ही पी थी… बहुत गर्म और स्वादिष्ट थी।”
मैं किचन में खड़ी शर्मा गई। मेरे गाल और लाल हो गए। रोहन जान-बूझ कर मुझे छेड़ रहा था। आर्यन कुछ समझा नहीं। वह हँस दिया और बोला, “चल भाई, मेरे रूम में चलते हैं। गेम खेलते हैं।”
दोनों ऊपर आर्यन के रूम में चले गए। मैं किचन में अकेली रह गई। मेरे हाथ काँप रहे थे। मैंने चाय बनाई, लेकिन मन कहीं और था। मेरी चूत में रोहन का वीर्य अभी भी गर्म था। हर बार जब मैं हिलती, तो एक अजीब सी गीली सनसनी होती। कुछ देर बाद आर्यन नीचे आया और बोला, “मम्मी, रोहन रुक रहा है आज रात को। खाना बना दो।”
मैंने सर हिलाया, लेकिन अंदर से घबराहट हो रही थी। रोहन रात को रुक रहा था… यानी आज रात फिर कुछ हो सकता था।
शाम को जब मैं खाना बना रही थी, रोहन किचन में आ गया। आर्यन ऊपर अपने रूम में फोन पर बात कर रहा था। रोहन मेरे पीछे खड़ा हो गया। उसने धीरे से मेरी कमर पकड़ ली और कान में फुसफुसाया,
“आंटी… अभी भी मेरे वीर्य से भरी हुई हो ना? मैं देख रहा हूं तुम्हारी चाल में।”
मैं शर्मा कर बोली, “रोहन… प्लीज… आर्यन ऊपर है।” रोहन ने मेरी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा और बोला, “डरो मत आंटी। आज रात मैं तुम्हें फिर चोदूँगा। लेकिन इस बार और जोर से। आर्यन जब सो जाएगा, तब तुम मेरे पास आना… या फिर मैं तुम्हारे बेडरूम में आ जाऊँगा।”
मैं कुछ बोल नहीं पाई। बस शर्म से सिर झुका लिया। रात का खाना हम तीनों ने साथ खाया। रोहन बार-बार मेरी तरफ देख रहा था। उसकी नज़र मेरी छातियों और होंठों पर अटक जाती। मैं नजरें झुकाए खाना खा रही थी। आर्यन कुछ नहीं समझ पा रहा था।
खाना खाने के बाद आर्यन बोला, “मम्मी, मैं थक गया हूं। सो जाता हूं। रोहन, तू मेरे रूम में सो जाना।”
रोहन मुस्कुराया और बोला, “ठीक है भाई… तू सो जा। मैं थोड़ी देर आंटी से बात करके आता हूं।”
आर्यन ऊपर चला गया। जब घर शांत हो गया, रोहन किचन में आया जहाँ मैं बर्तन धो रही थी। उसने पीछे से मुझे कस कर पकड़ लिया। उसका खड़ा लंड मेरी गांड से सट गया।
“आंटी… अब आर्यन सो गया है। आज रात तुम पूरी तरह मेरी हो।”
मैं काँपते हुए बोली, “रोहन… प्लीज… आज मत… बहुत रिस्क है…”
लेकिन रोहन ने मेरी साड़ी ऊपर की और अपनी उंगलियां मेरी चूत में डाल दी।
“आंटी, तुम्हारी चूत अभी भी मेरे वीर्य से गीली है… तुम खुद चाहती हो।”
मैं फिर कमजोर पड़ गई। रोहन ने मुझे किचन की दीवार से सटा दिया और पीछे से मेरी साड़ी उठा कर लंड मेरी चूत में घुसा दिया। “आह्ह्ह… रोहन…” मैं फुसफुसाई।
रोहन धीरे-धीरे चोदने लगा और मेरे कान में बोला, “आंटी… आज रात मैं तुम्हें कई बार चोदूँगा… और हर बार तुम्हें याद दिलाऊँगा कि तुम अब मेरी हो।”
मैं चुप-चाप सिसकियां लेते हुए सोच रही थी — मैं वंदना, अपने बेटे की माँ… अब अपने बेटे के दोस्त की चुदने वाली औरत बन गई हूं।
अगले कुछ दिनों में रोहन और मेरे बीच का रिश्ता और खतरनाक हो गया। मैं खुद को रोकने की कोशिश करती, लेकिन रोहन की हिम्मत और मेरी कमजोरी दोनों बढ़ती जा रही थी।
**सबसे रिस्की शाम**
एक शाम आर्यन घर पर ही था। वह अपने रूम में लैपटॉप पर असाइनमेंट कर रहा था। रोहन शाम 7 बजे आया। आर्यन ने उसे देख कर कहा, “भाई आ गया? चल मेरे रूम में बैठते हैं।”
रोहन मुस्कुराया और बोला, “नहीं यार, आज मैं आंटी की मदद करता हूं किचन में। तू अपना काम कर ले।”
आर्यन ने कुछ नहीं सोचा और अपने रूम में चला गया। रोहन सीधा किचन में आया। मैं खाना बना रही थी। जैसे ही वह अंदर आया, उसने मुझे पीछे से कस कर पकड़ लिया। उसका खड़ा लंड मेरी साड़ी की गांड पर सट गया।
“आंटी… आर्यन बिल्कुल पास है… आज मैं तुम्हें यहीं चोदने वाला हूं।”
मैं घबरा गई। “रोहन… पागल हो गए हो क्या? आर्यन बगल वाले रूम में है। आवाज आएगी तो?”
रोहन ने मेरी साड़ी का पल्लू सरका दिया, ब्लाउज के हुक खोले और ब्रा नीचे सरका दी। मेरी छातियां बाहर आ गई। उसने दोनों छातियों को जोर से दबाया और कान में फुसफुसाया, “आंटी, इसी में तो मजा है। तुम्हारा बेटा बगल में बैठा है और मैं उसकी माँ की छातियां दबा रहा हूं।”
उसने मेरी साड़ी और पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया। पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रख दिया। “रोहन… नहीं… प्लीज…” मैं फुसफुसाई, लेकिन मेरी चूत पहले से गीली हो चुकी थी।
रोहन ने धीरे से लंड अंदर किया। मैंने मुंह पर हाथ रख लिया ताकि आवाज ना निकले। लेकिन रोहन जान-बूझ कर धीरे-धीरे गहरे धक्के मारने लगा। “आंटी… चुप रहो… लेकिन मैं नहीं रुकने वाला।”
कुछ ही देर में उसकी स्पीड बढ़ गई। अब “थप-थप” की हल्की आवाज किचन में होने लगी। मैं सिसकियां दबा रही थी — “म्म्म्ह्ह… आह्ह्ह… रोहन… धीरे…”
तभी आर्यन की आवाज आई — वह अपने रूम से निकल कर पानी पीने आ रहा था।
रोहन ने मुझे नहीं छोड़ा। बल्कि उसने मुझे किचन के काउंटर पर झुका दिया और पीछे से और जोर से चोदना शुरू कर दिया। मेरी छातियां काउंटर पर दब रही थी।
आर्यन किचन के पास आया और बोला,
“मम्मी, पानी का गिलास कहाँ है?”
मैं घबरा कर बोली, “बेटा… ऊपर… अलमारी में…”
मेरी आवाज काँप रही थी। रोहन ने मेरी कमर पकड़ कर और तेज धक्के मारे। मैंने मुंह कस कर बंद कर लिया, लेकिन एक छोटी सी सिसकी निकल गई — “आह्ह्ह…”
आर्यन ने पूछा, “मम्मी, तुम ठीक हो? आवाज अजीब सी आ रही है।”
रोहन ने मेरे कान में फुसफुसाया, “बोलो आंटी… बोलो कि तुम ठीक हो… जबकि मैं तुम्हारी चूत फाड़ रहा हूं।”
मैं काँपते हुए बोली, “हाँ बेटा… मैं… ठीक हूं… बस… खाना बना रही हूं… आह्ह्ह…”
आर्यन ने कुछ नहीं समझा। वह पानी लेकर वापस अपने रूम में चला गया।
जैसे ही आर्यन का दरवाजा बंद हुआ, रोहन ने मुझे पूरी तरह काउंटर पर झुका दिया और पागलों की तरह चोदने लगा।
“आंटी… तुम्हारा बेटा अभी पानी पीकर गया… और मैं उसकी माँ को किचन में चोद रहा हूं… बोलो… कितना मजा आ रहा है?”
मैं अब सिसकियां नहीं रोक पा रही थी —
“आह्ह्ह… रोहन… बहुत रिस्की है… आह्ह्ह… लेकिन बहुत मजा आ रहा है… और जोर से चोद… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह…”
रोहन ने मुझे डॉगी स्टाइल में किचन काउंटर पर ही चोदा। मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोला, “आंटी, एक दिन मैं तुम्हें आर्यन के सामने चोदूँगा… ताकि वो देखे कि उसकी माँ कितनी रंडी है।”
मैं झड़ गई। मेरी चूत रोहन के लंड को कस कर दबाने लगी। रोहन भी मेरी चूत में ही झड़ गया। हम दोनों कुछ देर किचन में ही लेटे रहे। फिर रोहन ने मेरी साड़ी ठीक की और मेरे होंठों पर किस्स किया।
“आंटी… अब से हर रोज ऐसे रिस्की सीन होंगे। तुम मेरी हो… और मैं तुम्हें जब चाहूं चोदूँगा — किचन में, बालकनी में, या आर्यन के बगल वाले रूम में भी।”
मैं शर्म से सिर झुकाए खड़ी रही, लेकिन अंदर से एक नई उत्तेजना महसूस कर रही थी।