पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-7
जैसा कि आपने पिछली सेक्स कहानी में पढ़ लिया होगा कि कैसे ट्रुथ डेयर खेल में काव्या हारती है, और फिर वो राजू से चुदने को तैयार होती है। राजू से देर रात तक काव्या चुदती है और राहुल सपना को चोद-चोद कर मदहोश कर देता है। जब दोनो नींद में थी, तभी राहुल मुझसे बोल कर जगह बदल लेता है और वो काव्या को जोरदार चोदना शुरू करता है। जब काव्या की चीखें निकलना शुरू होता है तभी सपना की नज़र सामने वाले सोफे पर पड़ी, जहाँ राहुल पूरी तरह पागल हो चुका था।
वह काव्या के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़े, बिना रुके, जंगली रफ़्तार से जोर-जोर से धक्के मारे जा रहा था। काव्या दर्द और मजे के दोराहे पर खड़ी होकर रोते और चिल्लाते हुए पूरी तरह बेहाल हो रही थी।
सपना ने अपना सिर पकड़ लिया और गुस्से तथा उत्तेजना के मिले-जुली आवाज में बोली: “यह राहुल तो बिल्कुल पागल हो गया है! देखो कैसे जंगली की तरह धक्के मार-मार कर काव्या की जान निकाल रहा है। और यह पागल लड़की अभी भी इसे राजू भाई समझ कर चिल्लाए जा रही है!”
माहौल अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका था। रोशनी जलने के बाद भी राहुल रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसकी हवस इस कदर हावी थी कि वह अपनी जीत के नशे में अंधा हो चुका था।
सपना बेड पर बैठी यह सब देख रही थी, और उसके जिस्म में भी इस बेबाक नजारे को देख कर एक अजीब सी थरथराहट होने लगी थी। उसने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में अब शिकायत से ज्यादा एक अजीब सी बेबसी और उत्तेजना तैर रही थी।
शिमला की उस बर्फीली रात में कमरे का माहौल अब अपनी सारी हदें पार कर चुका था। हीटर की लाल रोशनी और लैंप के पीले उजाले में हवस का एक ऐसा नग्न नाच चल रहा था, जिसने मर्यादा की हर दीवार को ढहा दिया था।
राहुल के लगातार पड़ते जोरदार धक्कों ने काव्या के भीतर छुपी कामुकता को पूरी तरह से जगा दिया था। वह दर्द और बेइंतहा मजे के उस मुकाम पर पहुँच चुकी थी जहाँ सही और गलत का अंतर मिट जाता है। वह अभी भी राहुल को राजू ही समझ रही थी, और अब उसका खुद पर से काबू पूरी तरह टूट चुका था।
काव्या अब पागल सी हो गई थी। राहुल के हर तीखे और गहरे झटके का जवाब वह अपनी गांड को हवा में मटका-मटका कर देने लगी। उसका गोरा बदन पसीने से चमक रहा था। वह बिस्तर पर अपनी पोजीशन बदलते हुए खुद ही अपनी गांड को तेजी से आगे-पीछे करने लगी, ताकि राहुल का हर झटका उसकी गहराई को पूरी तरह छू सके।
“आहह… राजू भाई… हाँ… ऐसे ही… और जोर से… आज मुझे पूरी तरह से अपना बना लो!” काव्या मदहोशी में चिल्ला रही थी और राहुल के धक्कों के साथ अपनी कमर की लय मिला रही थी।
इधर बेड पर बैठी सपना अपनी छोटी बहन का यह रूप और राहुल की उस जंगली मर्दानगी को देख रही थी। काव्या की चीखें, उसके बदन का मटकना और राहुल के कड़क धक्कों की आवाज सीधे सपना के कानों में पिघले शीशे की तरह उतर रही थी।
सपना का पूरा बदन गर्मी से तपने लगा। उसकी जांघों के बीच एक अजीब सी बेचैनी और गीलापन बढ़ने लगा था। वह खुद को रोक नहीं पा रही थी। उसने अपनी चादर को पूरी तरह से बदन से हटा कर फेंक दिया।
उसने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखों में अब कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि सिर्फ और सिर्फ सुलगती हुई प्यास थी। उसने बेहद भारी सांस लेते हुए कहा: “राजू भाई… अब मुझसे और नहीं रहा जाता। उधर देखो, वह दोनों कैसे पागल हो रहे हैं। मुझे भी अभी के अभी वैसे ही धक्के चाहिए… मुझे भी अपनी इस गर्मी से शांत कर दो।”
यह कहते ही सपना बेड पर पूरी तरह से बिखर गई और चोदे जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई। शिमला की वह रात अब अपने सबसे बड़े और बेबाक चरम की तरफ बढ़ रही थी जहाँ चारों जिस्म बिना किसी रोक-टोक के वासना के समंदर में डूबने जा रहे थे।
सपना के मुंह से जैसे ही यह निकला कि उसे भी राजू भाई से उसी तरह चुदना है, काव्या के कानों में यह शब्द पड़ते ही मानो बिजली कौंध गई। वह इस कदर चौंक गई कि मदहोशी में अपनी गांड मटकाते-मटकाते ही झटके से पीछे घूमी।
पीछे मुड़ते ही जो नजारा उसके सामने आया, उसे देख कर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और उसके होश उड़ गए। वह जिसे पूरी रात अपना पुराना साथी ‘राजू भाई’ समझ कर मदहोश हो रही थी और जिसके हर झटके पर खुद को सौंप रही थी, वह कोई और नहीं बल्कि राहुल था! वही राहुल, जिसे उसने कुछ ही घंटे पहले खेल के दौरान रिजेक्ट कर दिया था और कमजोर आंका था।
काव्या का दिमाग सन्न रह गया। वह खुद को संभालती, राहुल की गिरफ्त से पीछे हटने की कोशिश करती या चिल्लाती, इससे पहले ही राहुल ने अपनी शातिर चाल को पूरी तरह अंजाम दे दिया। राहुल इस वक्त अपनी जीत के नशे में पूरी तरह अंधा हो चुका था। उसने काव्या को तनिक भी मौका नहीं दिया।
उसने अपने फौलादी हाथों से काव्या की नाजुक कमर को अपनी लोहे जैसी जकड़ में लिया और उसे पूरी तरह अपने आगोश में भींच लिया।
“अब कहाँ जाओगी काव्या जी? अब तो खेल अपने असली मुकाम पर आ गया है!” राहुल ने उसकी गर्दन के पास फुसफुसाते हुए कहा।
इससे पहले कि काव्या अपने शरीर को छुड़ा पाती, राहुल ने अपनी रफ्तार दोगुनी कर दी और बेहद भयानक, तीखे और ताबड़तोड़ झटके जल्दी-जल्दी मारना शुरू कर दिया। कमरे में थप-थप की आवाजें गूंज उठी। काव्या खुद को छुड़ाना चाहती थी, झटपटा रही थी, लेकिन राहुल उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। उसकी मजबूत पकड़ ने काव्या की हर कोशिश को नाकाम कर दिया और वह फिर से उसी हवस के तूफान में घिरती चली गई।
राहुल ने जब देखा कि काव्या उसकी फौलादी जकड़ से खुद को छुड़ाने के लिए झटपटा रही थी, तो उसका वहशीपन और भी बढ़ गया। उसने काव्या की कमर पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली और बिना रुके, ताबड़तोड़ थप्पड़ उसकी मटकी हुई गांड पर मारना शुरू कर दिया।
“थप! थप! थप!” की आवाज से पूरा कमरा गूंज उठा। काव्या दर्द और छटपटाहट से बिलबिला उठी। लेकिन राहुल के चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान थी। वह उसे चोदते-चोदते सीधे उसके कान के पास झुक कर गंदी गालियां बकने लगा और उसे चिढ़ाने लगा।
राहुल (हाँफते हुए और जोर का झटका मारते हुए): “क्यों बे साली? बड़ा घमंड था ना तुझे अपनी जवानी पर? खेल में मुझे रिजेक्ट करके उस राजू को दमदार बता रही थी? अब बोल! अब किसके धक्के ज्यादा गहरे लग रहे हैं? देख कैसे कुत्ते की तरह दबोच कर चोद रहा हूँ तुझे!”
काव्या ( खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए): “आह्ह! राहुल… छोड़ो मुझे! प्लीज छोड़ो… तुम बहुत गंदे इंसान हो! राहुल, बस करो, मेरी जान निकल जाएगी!”
राहुल (एक और करारा थप्पड़ उसकी जांघ पर मारते हुए): “चुप रह रांड! अब कोई राजू भाई या दीदी तुझे नहीं बचाने वाले। जब तक मैं अपनी पूरी हवस तुझमें नहीं निकाल लेता, तुझे इस बिस्तर से हिलने भी नहीं दूंगा। तू तो राजू समझ कर बड़े मजे से गांड मटका-मटका कर झटके ले रही थी, अब क्या हुआ? अब क्यों रो रही है?”
काव्या ( तड़पते हुए): “मैं… मैं तुम्हें राजू भाई समझ रही थी! मुझे नहीं पता था कि तुम इतने गिरे हुए हो… आह्ह! यह बहुत दर्द दे रहा है, राहुल!
राहुल (अपनी रफ्तार और तेज करते हुए, हंसते हुए): “घंटा निकालूं बाहर! अभी तो असली खेल शुरू हुआ है। तेरी इस गोरी चूत का सारा पानी सुखा कर ही दम लूंगा। चिल्ला… और चिल्ला! तेरी ये चीखें मुझे और ज्यादा पागल कर रही हैं!”
काव्या (कमर को आगे-पीछे हिला कर): “तुम… तुम बहुत बड़े कमीने हो, राहुल!”
कमरे में हीटर की लाल रोशनी के बीच राहुल का वहशीपन और काव्या की बेबसी साफ दिख रही थी। राहुल पूरी तरह से जानवर बन चुका था और काव्या के शरीर को बेरहमी से रौंदे जा रहा था, जबकि सपना और मैं इस उत्तेजक नजारे को देख कर पूरी तरह स्तब्ध थे।
राहुल की वहशीपन की हदें अब पार हो चुकी थीं। कमरे में हीटर की मद्धम लाल रोशनी के बीच काव्या की सिसकियाँ और चीखें अब पूरी तरह से दर्दनाक होती जा रही थीं। राहुल का हर झटका अब पहले से कहीं ज्यादा बेरहम और गहरा था। काव्या का नाजुक बदन इसको सह नहीं पा रहा था, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे और वह दर्द से तड़प रही थी।
राहुल (काव्या के बालों को पीछे खींच कर उसका सिर ऊपर उठाते हुए): “क्यों रे? चीख क्यों रही है अब? रात को तो बड़ा मजा आ रहा था जब राजू समझ रही थी! अब मेरा असली साइज महसूस हो रहा है ना? आज तेरी सारी हेकड़ी इसी बिस्तर पर निकाल दूँगा!”
काव्या: “आहह्ह! राहुल… प्लीज… रुक जाओ… अंदर बहुत तेज जलन हो रही है… सच में मेरी जान निकल जाएगी।”
राहुल (एक और बेरहम झटका मारते हुए): “भीख मांग! और गिड़गिड़ा मेरे सामने! कल रात मुझे सब के सामने नीचा दिखा कर बहुत मजा आ रहा था ना? अब देख, जिसे तूने कमतर समझा था, आज वही तुझे इस हाल में ला चुका है कि तू उठने लायक नहीं बचेगी!”
काव्या (कमर को ढीली छोड़ने की कोशिश करते हुए, सिसकते हुए): “राहुल… प्लीज… मैं… मैं अपनी हार मानती हूँ। तुम बहुत ताकतवर हो… पर प्लीज अब रुक जाओ… !”
राहुल (बेरहमी से हंसते हुए और उसकी पीठ पर थप मारते हुए): “मरने नहीं दूँगा तुझे इतनी आसानी से! अभी तो तुझे मेरी पूरी गर्मी झेलनी है। जितना तू झटपटाएगी, मुझे उतना ही मजा आएगा। चिल्ला साली… और जोर से चिल्ला!”
काव्या: “आऊ! माँ… राहुल, प्लीज… अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा… अंदर सब फट रहा है… प्लीज रहम करो मुझ पर… प्लीज…”
क्या राहुल रहम दिखाएगा या काव्या की जवानी के साथ और खेलेगा? जानने के लिए बने रहिए अपने भाई राजू के साथ धन्यवाद !
कमेन्ट करके जरूर बताएं कहानी कैसी लगी।
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