शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-7 (Shimla mein truth dare khel, dono behne chudi relam pel-7)

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पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-6

जैसा कि आपने पिछली कहानी में पढ़ लिया होगा कि कैसे ट्रुथ डेयर खेल में काव्या हारती है और उसे मुझमें या राहुल में से किसी एक को चुनना था जिसके साथ काव्या को पूरी रात बिताना था, तो काव्या ने किसको चुना जानने के लिए आगे पढ़े-

काव्या ने दोनों के शरीर को बहुत करीब से देखा, उसकी आँखों में शरारत और गहरी उत्तेजना साफ़ झलक रही थी। वह कभी राहुल के गठीले बदन को देखती, तो कभी मेरे (राजू के) चौड़े कंधों और उस हिस्से पर नजरें टिकाती जहाँ मर्द की असली ताकत छिपी होती है।

कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि हीटर की सुलगती आवाज और काव्या की तेज़ होती सांसें साफ सुनी जा सकती थी। राहुल अपनी सांसें रोक कर इंतजार कर रहा था, उसका अहंकार और उसकी हवस इस वक्त चरम पर थी। उसे पूरा भरोसा था कि काव्या उसी का नाम लेगी।

काव्या ने एक गहरी सांस ली, अपने होंठों पर उंगली फेरी और फिर मुस्कुराते हुए बोली: “दीदी, वैसे तो राहुल जी का शरीर बहुत गठीला और आकर्षक है। लेकिन अगर बात असल मजबूती, गहराई और सबसे दमदार होने की है, तो राजू भाई का कोई मुकाबला नहीं है। इनका आकार और सख्ती देख कर ही किसी भी औरत के पसीने छूट जाएं।”

काव्या का यह फैसला सुनते ही राहुल के चेहरे का रंग उड़ गया। लेकिन उसकी आँखों में हवस और ज्यादा भड़क उठी। वहीं सपना के चेहरे पर एक गहरी अर्थपूर्ण मुस्कान फैल गई, मानो वह यही सुनना चाहती थी।

काव्या के इस बेबाक फैसले ने कमरे की बची-कुची मर्यादा को भी पूरी तरह से पिघला दिया था। राहुल भले ही इस मुकाबले में पीछे रह गया था, लेकिन काव्या के लगभग नग्न बदन और उसकी इस बेबाकी ने उसे इतना उत्तेजित कर दिया था कि अब वह खुद पर काबू खोने लगा था।

उसने आगे बढ़ कर सीधे सपना को अपनी बाहों में खींच लिया। सपना, जो पहले से ही इस माहौल को देख कर पूरी तरह गरम हो चुकी थी, उसने बिना किसी हिचक के राहुल के गले में अपनी बाहें डाल दीं।

“तो फिर देर किस बात की…” सपना ने राहुल के होंठों के बेहद करीब जाकर फुसफुसाया, “जब सब कुछ सामने है, तो रात को पूरी तरह से जी लिया जाए।”

राहुल ने तुरंत सपना के होंठों को अपने काबू में ले लिया और दोनों सोफे पर ही एक-दूसरे में खो गए। कड़कती ठंड के बीच हीटर की लाल रोशनी में उन दोनों की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी।

इधर काव्या, जो अभी भी मेरे सामने खड़ी थी, उसने जब अपनी बड़ी बहन को राहुल के साथ इस कदर बहकते देखा, तो उसका संयम भी पूरी तरह टूट गया। उसने मेरी आँखों में देखा—उन आँखों में पुराना भरोसा और एक अनकहा अधिकार था।

वह धीरे से नीचे झुकी और अपनी बची हुई ब्रा और पैंटी को भी अपने बदन से पूरी तरह अलग कर दिया। अब वह शिमला की इस ठंडी रात में, बिना किसी पर्दे के, पूरी तरह प्राकृतिक रूप में मेरे सामने खड़ी थी। हीटर की मद्धम रोशनी उसके गोरे और सुडौल बदन पर ऐसे चमक रही थी जैसे सोने पर धूप खिली हो।

“राजू भाई…” काव्या ने बेहद धीमी और कांपती हुई आवाज में कहा, “अब मुझसे और इंतजार नहीं होता। मुझे अपनी बाहों में ले लो।”

मैंने बिना एक पल गंवाए काव्या की पतली कमर को अपने हाथों में जकड़ा और उसे अपनी गोदी में खींच लिया। जब उसका बेहद गर्म बदन मेरे नंगे शरीर से छुआ, तो मेरे पूरे जिस्म में बिजली की एक लहर दौड़ गई। उसने अपनी दोनों टांगें मेरी कमर के दोनों तरफ फैला दी और अपने होंठ सीधे मेरे होंठों पर रख दिए।

कमरे के एक कोने में राहुल और सपना अपनी दुनिया में मदहोश थे, और दूसरे कोने में काव्या मेरे जिस्म की गर्मी में खुद को पूरी तरह सौंप चुकी थी। शिमला का वह सुइट अब केवल एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि चारों के मिलन और बेइंतहा हवस का गवाह बन चुका था।

काव्या और मेरा मिलन अब उस मोड़ पर पहुँच चुका था जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था। मेरी गोदी में बैठी काव्या की साँसें इतनी गर्म थी कि शिमला की कड़ाके की ठंड का नामोनिशान मिट चुका था। उसने अपने दोनों हाथ मेरे गले में डाल दिए और अपनी आँखें बंद करके पूरी तरह मेरे अहसास में डूब गई।

उधर सोफे के दूसरे कोने से राहुल और सपना की सिसकियाँ और गहरी होती जा रही थी। राहुल, जो काव्या के फैसले से थोड़ा झेंप गया था, अब अपनी पूरी भड़ास और हवस सपना पर निकाल रहा था। सपना भी पूरी तरह से मदहोश होकर राहुल की हर हरकत का साथ दे रही थी।
कमरे के हीटर की लाल रोशनी में चारों नग्न बदन एक अजीब सी लय में चल रहे थे।

काव्या ने धीरे से अपनी आँखें खोली। उसकी आँखों में इस वक्त कोई हिचक या शरम नहीं थी, बल्कि सिर्फ और सिर्फ मुझे पूरी तरह हासिल करने की चाहत थी। उसने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और बेहद धीमी आवाज़ में फुसफुसाया: “राजू भाई… आज के बाद मैं किसी और की नहीं हो पाऊँगी। मुझे उस चरम तक पहुँचा दो जहाँ आज तक कोई नहीं पहुँचा सका।”

उसकी यह बात सुनते ही मेरे भीतर का पुरुषार्थ जाग उठा। मैंने उसकी कमर को मजबूती से थामा और उसे सोफे पर सीधे अपने नीचे ले लिया। काव्या का गोरा, सुडौल बदन हीटर की रोशनी में चमक रहा था। जब हमारे बदन एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े, तो काव्या के मुंह से एक तीखी और मदहोश कर देने वाली आह निकल गई।

उधर राहुल की नज़रें लगातार हम पर टिकी हुई थी। सपना को अपनी बाहों में भींचे होने के बावजूद, उसकी आँखें काव्या के इस समर्पण को देख कर फटी की फटी रह गई थी। लेकिन अब कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था।

घंटों तक उस कमरे में सिर्फ सांसों की रफ्तार, हीटर की सरसराहट और चारों जिस्मों के टकराने की आवाजें गूंजती रही। शिमला की वह बर्फीली रात इस बात की गवाह बन चुकी थी कि जब मर्यादा की दीवारें टूटती हैं, तो वासना का सैलाब किस कदर सब कुछ बहा ले जाता है।

रात के करीब 3 बज चुके थे। शिमला की उस कड़कती ठंड में हीटर की गरमाहट के बीच काव्या और सपना पूरी तरह से थक कर और मदहोश होकर गहरी नींद में सो चुकी थी। दोनों के बदन पर छाई थकान और नशे ने उन्हें बेखबर कर दिया था।

कमरे में डिम लाइट जल रही थी और चारों तरफ सन्नाटा था। ठीक इसी वक्त, राहुल ने अपनी नजरें सोफे पर सोई काव्या पर टिकाई और फिर मेरी तरफ देखा। उसके चेहरे पर वही शातिर और कुटिल मुस्कान लौट आई थी जो उसने सुबह दिखाई थी।

राहुल ने बिना कोई आवाज किए, अपनी उंगली से मुझे इशारा किया। उसने इशारों-इशारों में ही अपनी वह पुरानी चाल चल दी, जिसके बारे में उसने सुबह हिंट दिया था। उसने मुझे सपना की तरफ जाने का इशारा किया और खुद दबे पांव काव्या के सोफे की तरफ बढ़ने लगा। उसने मुझसे फुसफुसाते हुए कहा, “राजू भाई, जैसा तय हुआ था… अब जगह बदलने का वक्त आ गया है।”

राहुल ने तुरंत आगे बढ़ कर कमरे की बची-खुची डिम लाइट को भी पूरी तरह बंद कर दिया, ताकि पूरे सुइट में घाना अंधेरा छा जाए और किसी को भी एक-दूसरे के चेहरे या पहचान का पता ना चल सके। हीटर की बेहद मद्धम, हल्की लाल रोशनी के अलावा कमरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

सपना और काव्या अपनी मदहोशी में इतनी चूर थी कि उन्हें इस अदला-बदली की भनक तक नहीं लगी। राहुल चुप-चाप काव्या के कंबल के भीतर दाखिल हो गया, जिसे वह रात भर अपनी आँखों से हासिल करना चाहता था। उधर, मैं सपना के पास पहुंच गया, जो गहरी सांसें लेती हुई सो रही थी।

अंधेरा होते ही कमरे का माहौल एक झटके में पूरी तरह बदल गया। राहुल ने जैसे ही काव्या के रेशमी बदन को अपने हाथों में समेटा, काव्या ने नींद में ही राजू समझ कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। उधर सपना ने जब मेरे चौड़े कंधों और जिस्म की गर्मी को महसूस किया, तो उसने भी बिना आँखें खोले मुझे राहुल समझ कर अपने करीब खींच लिया।

इस भूलभुलैया और अंधेरे के खेल ने उस रात को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था, जहाँ जिस्म तो टकरा रहे थे, लेकिन राज पूरी तरह छिपे हुए थे। यहीं से शिमला की उस बर्फीली रात की असली और सबसे बेबाक कहानी की शुरुआत हुई, जहाँ दोनों बहनें अनजाने में एक नए अहसास में डूबने जा रही थी।

अंधेरे के उस खेल में जहाँ जिस्मों की पहचान पूरी तरह खो चुकी थी, वहाँ अचानक हवस की आग सब पर हावी हो गई।

राहुल, जो काव्या के इस रूप को पाने के लिए तड़प रहा था, अपनी मर्यादा और सब्र की सारी सीमाएं लांघ चुका था। उसने काव्या की मदहोशी का फायदा उठाते हुए बिना किसी भूमिका के उसे अपने नीचे दबा लिया और जोर-जोर से बेहद ताकतवर और तीखे धक्के मारना शुरू कर दिया।

काव्या की हालत पल भर में खराब होने लगी। वह कड़कती ठंड में भी पसीने से तर-बतर हो गई। राहुल की इस आक्रामकता और बेतहाशा ताकत ने नींद में सोई काव्या को एक झटके में जगा दिया। दर्द और बेइंतहा उत्तेजना की मिली-जुली तड़प से उसके मुंह से चीखें निकलने लगी: “आहह… राजू भाई… धीरे… प्लीज थोड़ा धीरे करो… आज आप इतने सख्त कैसे हो गए?”

काव्या अभी भी अंधेरे में राहुल को राजू ही समझ रही थी और उसी नशे में चिल्ला-चिल्ला कर चुद रही थी।

कमरे में गूंजती काव्या की चीखों और बिस्तरों की चरमराहट को सुन कर मेरी और सपना की नींद भी झटके से टूट गई। सपना ने जैसे ही हड़बड़ाकर करवट बदली, उसका हाथ मेरे सीने और चौड़े कंधों पर पड़ा।

उसने अंधेरे में ही मेरे जिस्म के गठीलेपन, मेरी चौड़ाई और मेरी त्वचा के अहसास को छुआ। वह राहुल के शरीर से अच्छी तरह वाकिफ थी, इसलिए पल भर में समझ गई कि उसके बगल में लेटा मर्द राहुल नहीं, बल्कि मैं (राजू) था।

सपना की आँखें डर और हैरानी से फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत कमरे के लैंप का स्विच ऑन कर दिया। पीली रोशनी फैलते ही जो नजारा सामने था, उसने सपना के होश उड़ा दिए। उसने मेरी तरफ देखा और हकलाते हुए बोली: “राजू भाई! यह… यह क्या हो रहा है? तुम यहाँ मेरे पास कैसे? यह अदला-बदली कब और कैसे हुई?!”

आगे क्या हुआ जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, आखिर क्या काव्या जान पाई, और क्या काव्या के साथ राहुल ने बिस्तर गरम किया या नहीं।
धन्यवाद, कमेंट करके जरूर प्रतिक्रिया दें।

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