पिछला भाग पढ़े:- शिमला में ट्रुथ डेयर खेल, दोनों बहनें चुदी रेलम पेल-10
आशा है आपने पिछली सेक्स कहानी को पढ़ लिया होगा कि कैसे राहुल सपना की गांड को ढोल की तरह पीट-पीट कर चोद रहा था और चोदते-चोदते सपना की गांड को सुखाने की बात कर रहा था।
जैसे-जैसे राहुल अपनी स्पीड बढ़ाते हुए सपना की गांड को ढोल की तरह बजाना शुरू किया सपना पूरी तरह से सुध-बुध खोने लगी। हीटर की लाल रोशनी में उसकी पीठ पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। जब राहुल ने महसूस किया कि सपना अब अपने चरम पर पहुँचने वाली थी, तो उसने अपनी रफ्तार को दोगुना कर दिया।
मैंने भी आगे बढ़ कर अपने हाथों से उसके स्तनों को कस कर भींचना शुरू किया। सपना ने एक बेहद तीखी, लंबी और कंपकपाती हुई आह भरी—”आह्ह्ह्ह… राजू… राहुल… मैं… मैं अब गई… उम्म्म्म!”
उसी पल राहुल ने अपनी पूरी ताकत समेट कर आखिरी के तीन-चार बेहद गहरे झटके मारे और अपना पूरा गर्म गुबार सपना की तंग गहराई के भीतर ही उड़ेल दिया। सपना का पूरा बदन कुछ पलों के लिए हवा में अकड़ा, और फिर वह पूरी तरह ढीली होकर तकिये पर निढाल हो गई। राहुल भी थका-हारा सीधे उसकी गीली पीठ पर ढह गया, दोनों की हांफने की आवाजें शांत सुइट में गूंज रही थी।
कमरे में कुछ मिनटों तक सिर्फ दोनों की भारी सांसों और हीटर की सरसराहट की आवाज गूंजती रही। राहुल धीरे-धीरे सपना के ऊपर से हटा और बेड पर करवट लेकर लेट गया। सपना का बदन अभी भी हल्के-हल्के कांप रहा था, और उसकी आँखों के कोने में दर्द और बेइंतहा मजे के मिले-जुले आँसू चमक रहे थे। उसकी गांड की गहराई से राहुल का छोड़ा हुआ गर्म गुबार धीरे-धीरे बाहर रिसने लगा था।
यह पूरा नजारा देखकर बेड के कोने में दुबकी काव्या की सांसें पूरी तरह थम चुकी थी। अपनी बहन की इस कदर बेबसी और बेबाकी ने उसके भीतर के डर को अब एक अजीब सी कामुक ईर्ष्या में बदल दिया था।
मैंने देखा कि सपना अभी भी पूरी तरह से मदहोश पड़ी हुई है, और उसका वह गर्म, गीला बदन अब मेरी बारी का इंतजार कर रहा था। राहुल ने हांफते हुए मेरी तरफ देखा और एक थका हुआ लेकिन शैतानी ठहाका लगाया।
राहुल (मुस्कुराते हुए और अपनी छाती पर हाथ फेरते हुए): “राजू… रास्ता मैंने पूरी तरह साफ और चिकना कर दिया है। अब तेरी बारी है… देख, भाभी अभी भी पूरी तरह तैयार खड़ी है।”
सपना (कमजोर आवाज में, अपना चेहरा घुमा कर मुझे देखते हुए): “राजू… प्लीज… थोड़ा रहम करना… राहुल ने पहले ही मेरी जान निकाल दी है… पर… पर मैं तुम्हें मना नहीं करूँगी… आओ…”
मैंने बिना एक पल गंवाए सपना को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ा। उसकी जांघों को थोड़ा और फैला कर, मैंने अपने पूरे वजूद को उस पहले से ही सुलगते और गीले रास्ते पर टिका दिया। जैसे ही मैंने धीरे से अपना पहला दबाव बनाया, सपना की आँखों से फिर से पानी निकल गया, लेकिन इस बार उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया।
उधर काव्या अब खुद को रोक नहीं पा रही थी। अपनी बहन को इस तरह दो मर्दों के बीच पूरी तरह टूटते और बिखरते देखना उसके बर्दाश्त के बाहर हो चुका था।
काव्या (थरथराते हाथों से अपने खुद के बदन को सहलाते हुए, राहुल के पास खिसक कर): “राहुल… मुझे… मुझे भी अकेला मत छोड़ो… मुझे बहुत अजीब लग रहा है। मेरी छाती बहुत भारी हो रही है… प्लीज मुझे अपनी बाहों में ले लो।”
राहुल (हंसते हुए, काव्या को खींच कर अपने नीचे दबाते हुए): “क्यों? अभी तो तू बहुत डर रही थी! अब अपनी बहन को देख कर तेरी भी हवस जाग उठी? आ… आज तुझे भी नहीं छोड़ूँगा!”
कमरे में अब एक साथ दो-दो तूफ़ान उठ खड़े हुए थे। एक तरफ मैं सपना की गांड को अपनी रफ्तार से फतेह कर रहा था, और दूसरी तरफ राहुल एक बार फिर काव्या के बदन को बेरहमी से रौंदने में जुट गया था। शिमला की वह बर्फीली रात अब हवस, चीखों और सिसकियों के सबसे खौफनाक और सुहाने दलदल में तब्दील हो चुकी थी।
राहुल का दिमाग अब पूरी तरह शैतानी और वहशी चालों में डूबा हुआ था। वह समझ चुका था कि काव्या अपनी गांड पर सीधे प्रहार की बात सुन कर ही बुरी तरह डर रही है, लेकिन उसका मन काव्या की उस तंग जगह को फतह करने के लिए लगातार मचल रहा था। उसने अपने मन में एक बेहद शातिर और खौफनाक योजना बनाई।
उसने सोचा कि क्यों ना पहले काव्या को उसकी मर्जी के मुताबिक चूत में ही मजा दिया जाए, और जैसे ही वह उस आनंद में बह कर खुद को ढीला छोड़ दे, ठीक उसी पल बिना मौका गंवाए अपनी पूरी ताकत से उसकी गांड को चीर दिया जाए।
राहुल ने पास पड़ी तेल की शीशी से अपने हाथ में बहुत सारा तेल लिया। उसने अपने पूरे लंड को तेल से पूरी तरह चिकना और लथ-पथ कर लिया, ताकि उसकी यह चाल बिल्कुल सटीक और बेबाक रहे।
राहुल (बेहद प्यार से काव्या के गालों को सहलाते हुए, चेहरे पर झूठी हमदर्दी लाकर): “ठीक है मेरी जान, मैं तुम्हें और दर्द नहीं देना चाहता। अगर तुम्हारी मर्जी नहीं है, तो मैं तुम्हारी गांड को हाथ भी नहीं लगाऊँगा। चलो, आज तुम्हारी चूत में ही तुम्हें जन्नत की सैर कराता हूँ।”
काव्या (एक गहरी और राहत भरी सांस लेते हुए): “थैंक यू राहुल… मुझे सच में बहुत डर लग रहा था। पर अब तुम जो चाहो करो… मैं पूरी तरह तुम्हारी हूँ।”
काव्या इस बात से बिल्कुल बेखबर थी कि यह राहुल का एक बहुत बड़ा जाल था। राहुल ने उसे सीधा लेटाया और उसकी दोनों जांघों को अपने कंधों पर टिका दिया। तेल से सराबोर उसका लंड जैसे ही काव्या की चूत के मुहाने पर फिरा, काव्या ने अपनी आँखें बंद कर ली।
राहुल ने बेहद प्यार और सधे हुए तरीके से अपने लंड को काव्या की चूत में दाखिल किया। तेल की चिकनाहट और काव्या के खुद के गीलेपन की वजह से शुरुआत बहुत ही आसान और सुखद रही।
राहुल ने बहुत ही धीमे-धीमे और मखमली झटके मारना शुरू किया।
काव्या धीरे-धीरे अपनी सुध-बुध खोने लगी। उसकी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठने लगी और वह राहुल की लय में बहने लगी। कुछ ही मिनटों में काव्या का बदन पूरी तरह से गर्म हो गया, उसकी सांसें तेज हो गईं और वह अपने चरम के करीब पहुँचने लगी।
काव्या (मदहोशी में कराहते हुए): “अह्ह्ह… हाँ राहुल… यही… बहुत मजा आ रहा है… उफ्फ, मुझे और जोर से छुओ… मैं पूरी तरह गरम हो चुकी हूँ…”
राहुल इसी मौके की तलाश में था। जब उसने देखा कि काव्या पूरी तरह मदहोश हो चुकी है, उसने अपना पूरा शरीर ढीला छोड़ दिया है और उसका पूरा ध्यान चूत के मजे पर है, तो राहुल ने अचानक से अपना लंड बाहर निकाला।
काव्या अभी कुछ समझ पाती या अपनी आँखें खोल पाती, उससे पहले ही राहुल ने अपनी उंगली से उसकी गांड की तंग मोरी को तेल से थोड़ा सहलाया और बिना एक पल गंवाए, अपनी पूरी ताकत बटोर कर एक ही झटके में अपना पूरा तगड़ा लंड काव्या की गांड में ठोक दिया!
“आआआआहहहहहहह!!!”
कमरे में काव्या की ऐसी चीख गूंजी जैसे किसी ने उसकी जान ही निकाल ली हो। वह दर्द के मारे सीधे बेड से ऊपर उछल गई, लेकिन राहुल ने उसकी दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से जकड़ रखा था। काव्या की आँखें फटी की फटी रह गई, उसके मुंह से चीख भी ढंग से नहीं निकल पा रही थी और उसकी आँखों से आँसू की धार बहने लगी। राहुल का भारी लंड तेल से लिपटा होने के बावजूद काव्या की उस तंग और अनछुई गांड को अंदर तक पूरी तरह चीर चुका था।
काव्या का पूरा बदन इस अचानक और भयानक हमले से थर-थर कांप रहा था। उसकी आँखों के आगे जैसे अंधेरा छा गया था। उसकी जांघों की मांसपेशियां पूरी तरह से खिंच चुकी थी और वह दर्द के मारे बेड की चादर को अपने हाथों में कस कर भींच रही थी। राहुल का पूरा का पूरा लंड उसकी अनछुई गांड को चीरता हुआ अंदर धंसा हुआ था, और वह कुछ पलों के लिए उसी स्थिति में रुका रहा ताकि काव्या का बदन इस असहनीय दबाव को थोड़ा सोख सके।
काव्या (गले से घुटती हुई आवाज में): “राहुल… आअअह्ह! मार डाला… निकालो इसे… भगवान के लिए निकालो! मेरी जान निकल रही है… आह्ह्ह! तुमने… तुमने मुझसे झूठ बोला… तुमने मुझे धोखा दिया… उफ्फ, माँ!”
राहुल (उसकी पीठ पर अपना पूरा वजन डालते हुए, उसके कानों के पास हांफते हुए): “चुप एक-दम! अब कुछ नहीं होगा। तेरी गांड की यह तंग जगह… भाई साहब, क्या लाजवाब है! आज तो मैं इसे पूरी तरह फतह करके ही दम लूँगा।”
काव्या (राजू और सपना की तरफ देखते हुए, बेबसी से हाथ हिला कर): “दीदी… राजू भाई… मुझे बचाओ… यह मुझे जान से मार देगा… अंदर सब फट गया है… बहुत खून आ रहा होगा… प्लीज इसे हटाओ मेरे ऊपर से…”
बेड के दूसरी तरफ, सपना जो अभी-अभी मेरे साथ शांत हुई थी, काव्या की यह चीख सुन कर सहम गई। उसने काव्या की आँखों में वह असली मौत जैसा दर्द देखा, तो उसका दिल कांप उठा।
सपना (घबरा कर राहुल का कंधा पकड़ते हुए): “राहुल! रुक जाओ यार… देखो उसे कितना दर्द हो रहा है। पहली बार है उसका, ऐसे अचानक मत करो… उसे चोट लग जाएगी।”
राहुल (सपना को झटकते हुए, अपनी आँखें लाल किए हुए): “भाभी, आज कोई बीच में नहीं आएगा! कल रात इसने मुझे बहुत नचाया है, आज इसका सारा घमंड इस दर्द के साथ ही टूटेगा।” ये कहते हुए राहुल ने और तेज-तेज झटके मारने शुरू किया और काव्या का घमंड तोड़ने की बात बार-बार कह रहा था।
क्या सच में राहुल काव्या का घमंड तोड़ पाएगा, जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ धन्यवाद !
कमेन्ट करके जरूर बताएं कि कहानी कैसी लगी।
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