आंटी की प्यास और जवान किरायेदार-1 (Aunty ki pyaas aur jawan kirayedaar-1)

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दोस्तों मेरा नाम सीमा है। मैं दिल्ली में रहती हूं। मेरी उम्र 43 साल है, और मैं एक सेक्सी आंटी हूँ। मेरे पति की मेन बाजार में किराने की दुकान है, तो उनका काम काफी ज्यादा है। उनकी दुकान सुबह 7 बजे खुलती है, और रात को 11 बजे बंद होती है। अब आप ही सोचिए कि इतना टाइम जब वो सिर्फ दुकान पर रहते हैं, तो मुझे क्या टाइम देते होंगे।

हमारा घर अच्छा खासा है। घर में 3 फ्लोर है। पहले फ्लोर में हम रहते हैं। दूसरा और तीसरा फ्लोर किराय के लिए देते हैं। वैसे इतने किसी पैसे की ज़रूरत नहीं है हमें, लेकिन खाली प्रॉपर्टी का फ़ायदा लेने के लिए किराए पर दे देते हैं।

अपने बारे में बताती हूं तो मेरी हाइट 5’4″ है। रंग मेरा गोरा है, और फिगर मेरा 36-30-38 है। मैं ज्यादातर सलवार-सूट पहनती हूं। कभी-कभी साड़ी पहनती हूं। टाइट कपड़ों में मेरी गांड बहुत सेक्सी लगती है। जब मैं टाइट कपड़ों में बाहर निकलती हूं, तो मर्द घूर-घूर कर देखते हैं।

मेरे पति को सेक्स में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। ऐसा नहीं है कि बढ़ती उमर के साथ उनका इंटरेस्ट कम हुआ है। उनका इंटरेस्ट शुरू से ही सेक्स में कम है। शादी के बाद उन्हें कभी भी मुझे एक रात में 2 बार नहीं छोड़ा। ना उन्हें कभी मेरी चूत चूसी, और ना ही कभी मुझे अपना लंड चुसवाया। बस सीधे-सीधे सिंपल पोजीशन में चुदाई की, और ऐसे ही मुझसे 2 बच्चे पैदा करवा दिए।

बच्चे होने के बाद तो सेक्स भी 3-4 महीने में एक-आध बार होने लगा। इससे मेरी प्यास अधूरी रह गई। अपनी प्यास बुझाने के लिए मैंने कई बार सोचा कि किसी मर्द को पटा लूं। क्योंकि मर्द तो मुझे वैसे ही खा जाने वाली नज़रों से देखते हैं। लेकिन ज्यादा आउटिंग ना होने के कारण मेरी पहुंच सिर्फ मोहल्ले के मर्दों तक हो कर रह गई है। और किसी ने सच ही कहा है कि अगर कीचड़ में मुंह मारना है, तो अपने मोहल्ले के कीचड़ में मत मारो। इस वजह से मैं किसी के साथ रिश्ता भी नहीं बना सकती।

लेकिन फिर मेरी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, और मुझे मेरी प्यास बुझाने वाला लंड मिल गया। जैसा कि मैंने बताया, हम ऊपर वाले फ्लोर किराए पर देते हैं। तो एक दिन मेरे पति ने घर आके मुझसे कहा-

पति: सीमा, टॉप फ्लोर वाला कमरा साफ करा देना।

मैं: कोई नया किरायदार आने वाला है?

पति: हां, एक लड़का है। मेरे दोस्त का बेटा है। पंजाब से है, और उसको यहां के कॉलेज में एडमिशन मिला है। अगले कुछ साल वो यहीं रहेगा, जब तक उसका कॉलेज ख़त्म नहीं हो जाता। उसके खाने पीने का ध्यान रख लेना तुम।

मैं: ठीक है जी। जैसा आप कहें।

फिर पति चले गए, और मैं टॉप फ्लोर साफ करने के लिए चली गई। अब मैं मन ही मन उस लड़के के बारे में सोचने लगी। मैं सोच रही थी कि कैसा होगा वो। मेरे मन में थोड़े गंदे ख्याल भी आने लग गये। कि उसके साथ मेरे कुछ हो जाए तो मजा आ जाए।

ऐसे ही 2 दिन बीत गए। फिर तीसरे दिन शाम को 5 बजे घर की डोरबेल बजाओ। मैंने दरवाजा खोला तो देखा मेरे पति थे। क्या वक्त उनको देख कर मैं थोड़ा हैरान हुई। मैंने उनसे पूछा-

मैं: आप आज इतनी जल्दी कैसे आ गये?

पति: मैं तो बस अंकुश को छोड़ने आया हूं।

मैं: अंकुश?

पति: हां, बताया था ना मैंने मेरे दोस्त का लड़का। हमारे यहां रहने आएंगे।

मैं: अच्छा, लेकिन कहां है वो?

पति: बाहर से सामान ला रहा है।

तभी एक लड़का पीछे से आया, और मेरे सामने आके खड़ा हो गया। 5’11” की हाइट। अच्छी पर्सनैलिटी। फिट लड़का था वो। जवान और बांका नौजवान। जो किसी भी लड़की का दिल मोह ले। उसको देख कर एक बार तो मैं ख्वाबों की दुनिया में खो गई। वो दुनिया जिसमें मैं अपनी चूत उससे चुदवा रही थी।

फिर उस लड़के ने मेरे पांव छूए। मैंने उसको आशीर्वाद दिया। उसके बाद हम लोग अंदर आये, और मेरे पति दुकान पर वापस निकल गये। मैं उसको बोली-

मैं: कैसा रहा सफर अंकुश?

अंकुश: ठीक था आंटी। बस थोड़ी थकान हो गई है।

मैं: तुम सामान रूम में रख कर फ्रेश हो जाओ। मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने को बना देती हूं।

अंकुश: जी आंटी, बहुत भूख लगी है।

मैं मन ही मन सोच रही थी कि, “तुझे खाने की भूख लगी है। लेकिन मेरी भूख तो कुछ और है। क्या तुम मेरी भूख मिटाओगे?”

फिर अंकुश सामान लेके अपने कमरे में चला गया। और मैं उसके लिए कुछ खाने को बनाने लगी। थोड़ी देर में मैंने उसके लिए आलू के परांठे बनाए। फिर वो बाहर आया, तो उसने शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहन ली थी। उसकी शॉर्ट्स काफी ऊंची थी।

अगर उसने नीचे अंडरवियर ना पहना हो, तो मुझे उसका लंड दिख जाना था। वो टेबल पर आके बैठ गया, और मैंने उसको खाना परोसा। वो जल्दी-जल्दी खाने लगा। बहुत भूखा था। उसने परांठे की बहुत तारीफ की और 5 परांठे खा गया। उसके बाद वो अपने कमरे में सोने चला गया। मैं भी अपने कमरे में चली गई और बिस्तर पर लेट गई। फिर मेरा दिल करने लगा उसको देखने का, तो मैं उसके कमरे की तरफ चली गई।

ऊपर जाके मैंने देखा उसके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। मैंने देखा वो अन्दर नहीं था। मैं नीचे से ही आयी थी। वो नीचे भी नहीं था, तो मैंने सोचा वो बाथरूम में होता है। फिर मैं उसके कमरे के अंदर चली गई। अंदर जाके मैंने देखा उसके बाथरूम का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था।

पहले तो मैंने सोचा कि वापस चली जाऊं। लेकिन फिर मैंने सोचा कि बाथरूम में है तो लंड देखने का मौका मिल सकता है। ये सोच कर मैं आगे बढ़ी, और बाथरूम में झांकने लगी। अन्दर का सीन देख कर मैं हैरान रह गयी। अंकुश बाथरूम में पूरा नंगा खड़ा था। उसके एक हाथ में उसका लंड था, और दूसरे हाथ में फोन था। फ़ोन पर कोई लड़की थी, जिसके साथ वो वीडियो कॉल पर था।

इसके आगे इस कहानी में क्या हुआ, आपको अगला भाग पढ़ने को मिलेगा। यहां तक कहानी की प्रतिक्रिया [email protected] पर दे।

अगला भाग पढ़े:- आंटी की प्यास और जवान किरायेदार-2

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